टेक दिग्गज Apple अपने अगले ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट iOS 27 और iPadOS 27 को जल्द पेश कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार कंपनी बड़े विज़ुअल रीडिज़ाइन की जगह मौजूदा इंटरफेस को और बेहतर बनाने पर ध्यान दे सकती है।
जानकारी के अनुसार, इन अपडेट्स का ऐलान जून में होने वाले कंपनी के वार्षिक डेवलपर इवेंट Apple Worldwide Developers Conference 2026 (WWDC 2026) में किया जा सकता है।
ब्लूमबर्ग के पत्रकार Mark Gurman की रिपोर्ट के मुताबिक, Apple अपने मौजूदा Liquid Glass interface डिज़ाइन को फिलहाल बनाए रखेगा। पिछले साल पेश किए गए इस डिज़ाइन में सिस्टम के कई हिस्सों-जैसे नेविगेशन बार, विजेट्स, आइकन्स और बटन-में ग्लास जैसा ट्रांसलूसेंट इफेक्ट दिया गया था।
हालांकि कुछ यूज़र्स ने शिकायत की थी कि पारदर्शी लेयर के कारण टेक्स्ट या आइकन्स पढ़ना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में Apple छोटे-छोटे अपडेट्स के जरिए इंटरफेस को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, iOS 27 के अंदर कई ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं जो कंपनी के संभावित फोल्डेबल फोन-यानी iPhone Fold-को सपोर्ट करेंगे।
फोल्डेबल डिवाइस खुलने पर ऐप्स का लेआउट अपने-आप बदल सकता है, जिससे वे iPad की तरह बड़े स्क्रीन के हिसाब से काम करेंगे। उदाहरण के तौर पर, ऐप्स में नेविगेशन बार स्क्रीन के बाईं तरफ दिखाई दे सकता है ताकि बड़ी डिस्प्ले का बेहतर उपयोग किया जा सके।
नई रिपोर्ट्स के अनुसार Apple फोल्डेबल iPhone के साथ iPhone में पहली बार स्प्लिट-स्क्रीन मल्टीटास्किंग फीचर भी ला सकता है। इससे यूज़र बड़ी स्क्रीन पर एक साथ दो ऐप्स चला सकेंगे, जो अब तक iPad में उपलब्ध था।
Apple ने Apple Worldwide Developers Conference 2025 में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए ‘लिक्विड ग्लास’ इंटरफेस पेश किया था। यह डिज़ाइन काफी हद तक visionOS से प्रेरित बताया गया था, जो Apple Vision Pro को संचालित करता है।
इस इंटरफेस के जरिए Apple ने अपने सभी डिवाइसों में एक जैसा विज़ुअल अनुभव देने की कोशिश की थी।
कुल मिलाकर, माना जा रहा है कि iOS 27 और iPadOS 27 में बड़े विज़ुअल बदलाव नहीं होंगे, लेकिन नए हार्डवेयर-खासकर फोल्डेबल iPhone-को ध्यान में रखते हुए कई अहम फीचर्स जोड़े जा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
देश के सरकारी स्कूलों को लेकर लंबे समय से गुणवत्ता और परिणाम को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब एक नई तकनीकी पहल इन धारणाओं को तेजी से बदलती दिख रही है। झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मेघालय और राजस्थान जैसे राज्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षा मॉडल ने छात्रों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज कराया है। क्या है ‘संपूर्ण शिक्षा कवच’ (SSK)? सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए शुरू किया गया यह मॉडल Filo के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इस पहल को ‘संपूर्ण शिक्षा कवच (SSK)’ नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ मेधावी छात्रों को आगे लाना नहीं, बल्कि कमजोर छात्रों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और उनकी समझ को मजबूत बनाना है। इस सिस्टम में AI तकनीक और लाइव टीचर सपोर्ट का संयोजन किया गया है, जिससे छात्रों को किसी भी समय-दिन हो या रात-अपने सवालों का समाधान मिल सकता है। 24×7 पर्सनल टीचर सपोर्ट इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों को 24×7 लाइव सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यानी यदि कोई छात्र रात में पढ़ाई के दौरान किसी सवाल में अटकता है, तो वह तुरंत ऑनलाइन शिक्षक या AI सिस्टम की मदद ले सकता है। सरकारी स्कूलों के छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। रिजल्ट में दिखा बड़ा बदलाव इस पहल का असर अब परीक्षा परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कई स्कूलों में फेलियर रेट में 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई झारखंड के गुमला जिले का पास प्रतिशत 87% से बढ़कर 99.3% तक पहुंच गया लातेहार जिला साइंस स्ट्रीम में राज्य में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता बन गया दुमका और रामगढ़ जैसे जिलों में भी परीक्षा परिणामों में 20% तक सुधार दर्ज हुआ अन्य राज्यों में भी असर महाराष्ट्र के सांगली जिले में AI ट्यूटरिंग का उपयोग करने वाले स्कूलों के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान हजारों लाइव सेशंस आयोजित किए गए, जहां कई छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। हिमाचल प्रदेश, मेघालय और राजस्थान में भी इस मॉडल का विस्तार तेजी से किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान इस शिक्षा मॉडल को भारत सरकार द्वारा भी सराहा गया है। इसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार में गोल्ड अवॉर्ड मिल चुका है। इसके साथ ही नीति आयोग ने भी इसे शिक्षा क्षेत्र में एक प्रभावी और नवाचार आधारित पहल के रूप में मान्यता दी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Acer ने भारतीय बाजार में अपना नया एआई लैपटॉप Acer Aspire 5 AI लॉन्च कर दिया है। यह लैपटॉप Intel Core Ultra प्रोसेसर और Copilot+ फीचर्स के साथ पेश किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह डिवाइस काम, कंटेंट स्ट्रीमिंग और हल्की गेमिंग के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। पतले और हल्के डिजाइन के साथ आने वाला यह लैपटॉप 32GB तक रैम और 1TB SSD स्टोरेज जैसे दमदार फीचर्स से लैस है। इतनी है कीमत और उपलब्धता Acer Aspire 5 AI की शुरुआती कीमत 79,999 रुपये रखी गई है। यह सिल्वर कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। ग्राहक इसे एसर स्टोर, Amazon India, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales जैसे प्लेटफॉर्म्स से खरीद सकेंगे। डिस्प्ले और डिजाइन की खासियत लैपटॉप में 14 इंच का WUXGA IPS डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 1920×1200 पिक्सल है। 16:10 आस्पेक्ट रेशियो की वजह से स्क्रीन पर ज्यादा कंटेंट देखा जा सकता है। कंपनी ने इसमें Acer ComfyView टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, जो स्क्रीन ग्लेयर कम करने और आंखों पर दबाव घटाने में मदद करती है। डिजाइन की बात करें तो इसका वजन करीब 1.2 किलोग्राम है और इसमें 180 डिग्री हिंज दिया गया है, जिससे स्क्रीन को फ्लैट मोड में आसानी से खोला जा सकता है। दमदार प्रोसेसर और बैटरी Acer Aspire 5 AI में Intel Core Ultra 5 और Intel Core Ultra 7 H-सीरीज प्रोसेसर का विकल्प मिलता है। यह Windows 11 Home पर चलता है और Copilot+ पीसी के तौर पर पेश किया गया है। इसमें 32GB तक LPDDR5 रैम और 1TB PCIe Gen 4 NVMe SSD स्टोरेज दी गई है। लैपटॉप में 53.8Wh बैटरी, 65W USB Type-C फास्ट चार्जिंग, Wi-Fi 6 और Bluetooth 5.1 सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा USB Type-C, HDMI, SD कार्ड रीडर और बैकलिट कीबोर्ड में खास Copilot बटन भी दिया गया है।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चित डेवलपर कॉन्फ्रेंस में से एक Apple WWDC 2026 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। Apple ने इस साल होने वाले अपने वार्षिक इवेंट की तारीखों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है, जिसके बाद टेक इंडस्ट्री में उत्साह तेज हो गया है। यह इवेंट 8 जून से 12 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य कीनोट 8 जून को Apple Park में होगा, जो भारतीय समयानुसार रात 10:30 बजे लाइव प्रसारित किया जाएगा। AI पर रहेगा Apple का सबसे बड़ा फोकस इस बार WWDC 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नए AI अवतार में पेश कर सकता है, जिसे कई लोग “AI Siri 2.0” के रूप में देख रहे हैं। नया Siri पहले से ज्यादा स्मार्ट, इंटरैक्टिव और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर होगा। यह यूजर्स की स्क्रीन पर मौजूद जानकारी को समझकर अलग-अलग ऐप्स के बीच टास्क पूरा करने में सक्षम हो सकता है। iOS 27 और नए सॉफ्टवेयर अपडेट्स की झलक Apple इस इवेंट में अपने प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम का अगला वर्जन iOS 27 पेश कर सकता है। इसमें AI बेस्ड कई नए फीचर्स जोड़े जाने की उम्मीद है, खासकर कैमरा और पर्सनल असिस्टेंस से जुड़े अनुभवों में। इसके साथ ही macOS 27 में डिजाइन और यूजर इंटरफेस में बदलाव की संभावना है। Safari ब्राउज़र में टैब मैनेजमेंट और ऑटो ऑर्गनाइजेशन जैसे फीचर्स भी शामिल किए जा सकते हैं। Camera और AI फीचर्स में बड़ा अपग्रेड लीक्स के मुताबिक, Apple अपने Camera ऐप को AI-संचालित फीचर्स से लैस कर सकता है। इसमें ऑब्जेक्ट रिकग्निशन, लाइव ट्रांसलेशन और रियल-टाइम इंटरैक्शन जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं, जो यूजर एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल सकते हैं। Apple Watch और Vision Pro पर भी नजर इस इवेंट में watchOS 27 और visionOS 3 को लेकर भी अहम घोषणाएं संभव हैं। Apple Watch में नए वॉच फेस और बेहतर डिवाइस इंटीग्रेशन देखने को मिल सकता है, जबकि Vision Pro के लिए सॉफ्टवेयर अपग्रेड्स पर खास फोकस रहेगा। Apple Park में होगा ग्लोबल टेक शो पूरा इवेंट कैलिफोर्निया स्थित Apple Park में आयोजित किया जाएगा। हालांकि दुनियाभर के डेवलपर्स और यूजर्स इसे Apple की वेबसाइट, YouTube चैनल और डेवलपर ऐप के जरिए लाइव देख सकेंगे।