अरविंद केजरीवाल

E20 पेट्रोल विवाद और अरविंद केजरीवाल का ऑटो कंपनियों पर बयान
E20 पेट्रोल विवाद पर राजनीति तेज, अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

केजरीवाल बोले- ग्राहकों की चिंताओं का जवाब दें वाहन निर्माता, E20 ईंधन को लेकर स्पष्टता जरूरी   नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने E20 ईंधन को लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए कंपनियों को सामने आकर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।   वाहन चालकों की चिंताओं पर उठे सवाल   E20 पेट्रोल को लेकर कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन की क्षमता और लंबे समय में वाहन पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि नए वाहन E20 ईंधन के लिए तैयार किए गए हैं और इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।   केजरीवाल ने सरकार से मांगा जवाब   केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 लागू करने से पहले आम उपभोक्ताओं को इसके फायदे और संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि वाहन मालिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए और किसी भी नुकसान की स्थिति में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।   सरकार का तर्क- प्रदूषण कम करने और आयात घटाने में मदद   केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इथेनॉल मिश्रण को भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।   ऑटो कंपनियों ने दी सफाई   कई वाहन निर्माता कंपनियों ने कहा है कि उनके नए मॉडल E20 ईंधन के अनुरूप बनाए गए हैं। कंपनियों का दावा है कि E20 से वाहनों की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, पुराने वाहनों को लेकर उपभोक्ताओं में अभी भी सवाल बने हुए हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
Sonam Wangchuk
भूख हड़ताल के बीच अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक, पत्नी ने उठाए इलाज पर सवाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह कदम उठाया गया। लंबे समय से उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी।   सफदरजंग अस्पताल के अनुसार सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे भर्ती किया गया। अस्पताल ने बताया कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। शरीर में पानी की कमी और लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।   गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा  इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक का पोटेशियम स्तर 17 जुलाई की शाम 4.3 से घटकर 18 जुलाई की सुबह 2.9 हो गया है। गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं, बल्कि "जेल" जैसा माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे आंदोलन का संचालन प्रभावित हो रहा है।   गीतांजलि ने यह भी घोषणा की गीतांजलि ने यह भी घोषणा की कि अब यह आंदोलन पूरे देश में यात्रा के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं उनका प्रतिनिधित्व करेंगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उधर, जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे तीन अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की भी तबीयत बिगड़ने की खबर है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की।   इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी और सांसद चंद्रशेखर आजाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के बजाय सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। विपक्ष ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की भावना के लिए चिंताजनक बताया।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Arvind Kejriwal questions the legal authority of the SIT probing alleged irregularities in Ayodhya Ram Temple donation funds.
राम मंदिर चंदा मामला: SIT पर केजरीवाल के सवाल, बोले- ‘चोरों को बचाने के लिए बनाई गई जांच समिति’

  नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Shekhar Suman
'लू में औंधा हो गया कॉकरोच का मुखिया', शेखर सुमन के व्यंग्य ने बटोरी सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   शेखर सुमन ने शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए।   अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।"   शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।"   शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Arvind Kejriwal reacts to ED raids in Punjab amid GST scam investigation involving businesses.
पंजाब में ED की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी; केजरीवाल बोले- व्यापारियों को घबराने की जरूरत नहीं

  चंडीगढ़: पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में व्यापारियों को निशाना बना रही है। उन्होंने छोटे व्यापारियों से घबराने की बजाय एकजुट रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब और राज्य सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है और सभी मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे। GST घोटाले की जांच में ED का एक्शन इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच के सिलसिले में पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मोबाइल फोन की बिक्री से जुड़े कथित जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच कर रही है और कई व्यक्तियों तथा कारोबारी संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। मोबाइल फोन कारोबार से जुड़ा है मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला मोबाइल फोन के व्यापार और उससे संबंधित कर लेनदेन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। ईडी अब वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे व्यापारियों और विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर की जा रही है। ईडी की ओर से अभी तक छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई इस कार्रवाई को राज्य की हालिया बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और क्या एजेंसी इस मामले में किसी बड़े खुलासे तक पहुंच पाती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 27, 2026 0