नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है।
केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है।
मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है।
उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?”
AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है।
केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।”
AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया।
केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया।
उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।”
केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है।
राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल जहां लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है, वहीं साइबर अपराधी भी इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। हाल के दिनों में AI की मदद से बनाए गए फर्जी वीडियो और नकली आवाज के जरिए लोगों को ठगने के मामले में तेजी आई हैं। एक ताजा मामले में कोलकाता के 81 वर्षीय बुजुर्ग को AI से तैयार किए गए फर्जी वीडियो के जरिए 17.8 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया है। फर्जी वीडियो देखकर लगाया पैसा जानकारी के अनुसार, ठगों ने एक वीडियो में केंद्रीय वित्त मंत्री की AI से बनाई गई नकली छवि का इस्तेमाल किया और लोगों को निवेश का लालच दिया। वीडियो पर भरोसा कर बुजुर्ग ने लाखों रुपये निवेश कर दिए, लेकिन बाद में यह पूरा मामला धोखाधड़ी का निकला। AI Fraud क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? विशेषज्ञों का कहना है कि अब AI की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरा हूबहू तैयार किया जा सकता है। ऐसे में आम लोगों के लिए असली और नकली कंटेंट में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे करें अपनी सुरक्षा किसी भी निवेश योजना पर तुरंत भरोसा न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले वीडियो की सत्यता को जांचें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें। OTP, बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। किसी बड़े निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। सरकार और एजेंसियां भी सतर्क देश में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियां डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने पर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्यों से साइबर अपराध मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को तेजी से लागू करने का आग्रह किया है। डिजिटल युग में सतर्क रहना जरूरी तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराध के तरीके भी उतनी ही तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में किसी भी वीडियो, कॉल या निवेश प्रस्ताव पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बुधवार शाम एक बड़ा विमान हादसा टल गया, जब एअर इंडिया और इंडिगो के दो यात्री विमान एक ही टैक्सीवे पर आमने-सामने आ गए। स्थिति गंभीर होने से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और पायलटों की सतर्कता से दोनों विमानों को रोक लिया गया, जिससे संभावित दुर्घटना टल गई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच लगभग 200 मीटर की दूरी रह गई थी। घटना के बाद विमानन सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कैसे हुई चूक? जानकारी के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद पहुंची एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2493 लैंडिंग के बाद पार्किंग बे की ओर जा रही थी। इसी दौरान विमान निर्धारित मार्ग से हटकर गलत दिशा में मुड़ गया और उस टैक्सीवे पर पहुंच गया, जहां से मुंबई रवाना होने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E-5160 रनवे की ओर बढ़ रही थी। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक-दूसरे के सामने आ गए। स्थिति को भांपते हुए दोनों विमानों की आवाजाही तत्काल रोक दी गई। समय रहते टला संभावित हादसा एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, यदि दोनों विमानों को समय पर नहीं रोका जाता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी और पायलटों की तत्परता के कारण दोनों विमान सुरक्षित दूरी पर रुक गए। बाद में एअर इंडिया के विमान को विशेष टोइंग वाहन की मदद से खींचकर सही पार्किंग बे तक पहुंचाया गया। इसके बाद इंडिगो की उड़ान को रनवे की ओर बढ़ने की अनुमति दी गई। एअर इंडिया ने स्वीकार की गलती घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि मुंबई से अहमदाबाद पहुंची फ्लाइट AI-2493 लैंडिंग के बाद टैक्सी करते समय अनजाने में गलत दिशा में मुड़ गई थी। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि इस घटना के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रही तथा किसी भी प्रकार का जोखिम उत्पन्न नहीं हुआ। कंपनी ने कहा कि मामले की जानकारी संबंधित विमानन नियामक अधिकारियों को दे दी गई है और आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है। इंडिगो ने क्या कहा? इंडिगो ने अपने बयान में बताया कि उसकी फ्लाइट 6E-5160 अहमदाबाद से मुंबई के लिए रवाना होने की तैयारी कर रही थी और टैक्सीवे पर आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान दूसरी एयरलाइन का विमान गलत दिशा में आ गया। एयरलाइन के अनुसार, दोनों विमानों को सुरक्षित दूरी पर रोक दिया गया। एअर इंडिया के विमान को हटाए जाने के बाद इंडिगो की उड़ान निर्धारित प्रक्रिया के तहत रवाना हुई और सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गई। विमानन नियामक एजेंसियों ने शुरू की जांच घटना के बाद विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि टैक्सींग के दौरान एअर इंडिया का विमान निर्धारित मार्ग से कैसे भटक गया और क्या इसमें मानवीय त्रुटि, संचार की समस्या या किसी अन्य तकनीकी कारण की भूमिका थी। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट संचालन में टैक्सीवे पर होने वाली ऐसी घटनाएं अत्यंत गंभीर मानी जाती हैं और इन्हें "रनवे या टैक्सीवे इन्कर्शन" श्रेणी में रखा जाता है। दोनों विमान एयरबस A320 श्रेणी के थे जानकारी के अनुसार, घटना में शामिल दोनों विमान एयरबस A320 श्रेणी के नैरो-बॉडी यात्री विमान थे। यह विमान घरेलू और छोटी से मध्यम दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। इन विमानों में सामान्यतः 150 से 180 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। घटना के समय दोनों विमानों में कितने यात्री सवार थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। एयरबस A320 क्यों है खास? नैरो-बॉडी डिजाइन: विमान में एक सिंगल गलियारा होता है। 150-180 यात्रियों की क्षमता: घरेलू और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए उपयुक्त। कम ईंधन खपत: एयरलाइंस के लिए किफायती संचालन। 3,000 से 6,000 किमी तक की उड़ान क्षमता। दुनिया के सबसे लोकप्रिय यात्री विमानों में शामिल।
गोवा में मानसून के दौरान समुद्र का रौद्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में कई हादसों के बाद प्रशासन और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि खराब मौसम और उफनती लहरों के कारण समुद्र तटों पर जोखिम काफी बढ़ गया है। दृष्टि मरीन सहित सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को चेतावनी दे रही हैं कि वे समुद्र में प्रवेश करने या खतरनाक चट्टानी इलाकों में जाने से बचें। इसके बावजूद कई पर्यटक निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। समुद्र तटों पर जारी की गई विशेष चेतावनी गोवा सरकार की समुद्र तट सुरक्षा एजेंसी दृष्टि मरीन ने मानसून सीजन को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र में उतरने से बचें और बीचों पर लगाए गए सुरक्षा संकेतों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों में समुद्र की धाराएं सामान्य दिनों की तुलना में अधिक खतरनाक हो गई हैं। फिसलन भरी चट्टानें बढ़ा रही हैं जोखिम बारिश के कारण समुद्र किनारे मौजूद चट्टानें बेहद फिसलन भरी हो गई हैं। ऐसे में फोटो खिंचवाने या वीडियो बनाने के लिए इन चट्टानों पर जाना गंभीर खतरे को न्योता देने जैसा हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। तेज लहरें अचानक खींच सकती हैं समुद्र की ओर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मानसून के दौरान समुद्र की ऊंची और तेज लहरें कुछ ही सेकंड में किसी व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती हैं। यही वजह है कि पर्यटकों को समुद्र के किनारे मौजूद संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। वाटर स्पोर्ट्स और तैराकी पर प्रतिबंध प्रशासन ने खराब मौसम को देखते हुए समुद्र में तैराकी, तटीय जल क्रीड़ा गतिविधियों और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे रोमांच या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। अधिकारियों का कहना है कि चेतावनियों की अनदेखी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून के दौरान समुद्र तटों पर सतर्कता बरतना और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।