Ram Mandir

राम मंदिर चढ़ावा
राम मंदिर में फिर बढ़ा सोने-चांदी का चढ़ावा, 10 दिनों में मिला करीब 1 किलो सोना

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में एक बार फिर सोने-चांदी के चढ़ावे में तेजी देखने को मिल रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में श्रद्धालुओं ने करीब एक किलोग्राम सोना और लगभग तीन किलोग्राम चांदी दान स्वरूप अर्पित की है। सावन माह में दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ नकद दान के अलावा आभूषण, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का चढ़ावा भी लगातार बढ़ रहा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, प्राप्त सभी दान का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों के तहत उन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जा रहा है। इसके बाद ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार धातुओं की शुद्धता की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।   चोरी की घटना के बाद लौटा श्रद्धालुओं का भरोसा, झूलनोत्सव की तैयारियां तेज   राम मंदिर में कुछ समय पहले हुई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सोने-चांदी के दान में कमी आई थी, लेकिन अब सावन के दौरान श्रद्धालुओं का भरोसा फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को करीब 75 हजार, गुरुवार को सवा लाख और शुक्रवार को लगभग 80 हजार श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इसी दौरान कर्नाटक के एक श्रद्धालु ने 600 ग्राम चांदी का हार भेंट किया, जबकि अन्य श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के दान किए।   17 अगस्त को स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला   राम मंदिर ट्रस्ट ने सावन उत्सव और झूलनोत्सव की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। सावन शुक्ल पंचमी यानी 17 अगस्त को रामलला को स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इसके लिए धर्म समिति विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर रही है, जिसमें प्रतिदिन झूला दर्शन, भजन, कजरी और अन्य धार्मिक आयोजन शामिल होंगे। 15 अगस्त से मणि पर्वत पर पारंपरिक झूलनोत्सव की शुरुआत होगी, जबकि मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है। ट्रस्ट के पदाधिकारी और संत आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।    

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
Opposition MPs stage a symbolic protest over the Ram Mandir donation controversy in Parliament premises.
'मंदिर दान' प्रदर्शन पर घिरे पप्पू यादव, संसद परिसर में एक्टिंग के बाद थाने में दर्ज हुई शिकायत

Ram Mandir Donation Row: संसद परिसर में राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करना पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भारी पड़ता नजर आ रहा है। शुक्रवार (31 जुलाई) को संसद परिसर में किए गए उनके सांकेतिक प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। नुक्कड़ नाटक के जरिए किया था विरोध संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के लिए नुक्कड़ नाटक (स्ट्रीट थिएटर) का सहारा लिया गया। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधु के वेश में नजर आए। उनके सामने एक दानपात्र रखा गया था, जिसमें विपक्षी सांसदों ने सांकेतिक रूप से चढ़ावा डाला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई सांसद भी शामिल हुए। जहांगीरपुरी थाने में दर्ज हुई शिकायत रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य मैथिल नाम के व्यक्ति ने दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। शिकायतकर्ता ने लगाए ये आरोप समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने भगवा रंग का अपमान किया। उनका आरोप है कि भगवान रामलला विराजमान की तस्वीर को पैरों के नीचे रखा गया, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन प्राप्त था। संसद परिसर में प्रदर्शन से मचा था सियासी घमासान शुक्रवार को संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी। विपक्ष ने राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने प्रदर्शन के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। फिलहाल पुलिस को शिकायत सौंप दी गई है। मामले में अब तक पप्पू यादव या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई और तथ्यों की जांच करेगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Pappu Yadav dressed as a priest during Opposition protest over alleged Ram Mandir donation irregularities in Parliament
संसद परिसर में 'चढ़ावा चोरी' मामले पर अनोखा प्रदर्शन, पुजारी बने पप्पू यादव; राहुल गांधी ने दानपात्र में डाला चढ़ावा

Ram Mandir Donation Row: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन के मुद्दे पर विपक्ष ने अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु-पुजारी के वेश में संसद परिसर पहुंचे और उनके सामने एक दानपात्र रखा गया। विपक्षी सांसदों ने इसमें सांकेतिक रूप से चढ़ावा डालकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इस प्रदर्शन की सबसे अधिक चर्चा तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पहुंचे और दानपात्र में पैसे डालकर प्रदर्शन का समर्थन किया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने "चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। दानपात्र से पैसे जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने व्यंग्यात्मक अंदाज में दानपात्र में रखे पैसों को अपनी जेब में रखने की सांकेतिक एक्टिंग भी की। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने कथित चढ़ावा गबन के आरोपों को मुद्दा बनाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान विपक्षी सांसदों के बीच हल्का हंसी-मजाक भी देखने को मिला, लेकिन उनका मुख्य संदेश मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित आरोप करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Anil Mishra
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच तेज, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में

लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है और अब इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ पूरी कर ली है। उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की घटनाओं में प्रशासनिक लापरवाही या अन्य स्तर पर किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं। सूत्रों के अनुसार, विवेचना पूरी होने के बाद डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।   जांच के दौरान जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. अनिल मिश्रा के पास मंदिर के गणना कक्ष की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे चोरी की घटनाओं को रोकने में विफलता रही। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।   इस मामले में पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एक पत्र भी चर्चा में आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चढ़ावे की गणना के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में बिना अनुमति बदलाव किया गया और आवश्यक हस्ताक्षर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।   पुलिस पूछताछ में क्या निकला ? पुलिस पूछताछ में छह आरोपियों ने कथित तौर पर चढ़ावा चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, जबकि दो आरोपी स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। जांच के दौरान कुछ सोना-चांदी और नकदी भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही, मुख्य आरोपी बताए जा रहे राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू की संपत्तियों और उसके प्रभाव क्षेत्र की भी जांच की जा रही है।   जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली अधिक प्रभावी होती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में एसआईटी अपनी रिपोर्ट संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत कर चुकी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
Stock Market
Stock Market: गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी 24,239 पर बंद

मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 443 अंक फिसलकर 77,709 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंक टूटकर 24,239 पर आ गया। पूरे दिन के कारोबार में निवेशकों ने खासकर प्राइवेट बैंक, ऑटोमोबाइल और आईटी शेयरों में बिकवाली की, जबकि सरकारी बैंक और फार्मा सेक्टर के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली।   बाजार पर सबसे अधिक दबाव निजी बैंकिंग शेयरों से आया। पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही। इसके साथ ही ऑटो और आईटी सेक्टर में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।   वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी दर्ज की गई। वहीं, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ।   विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इन परिस्थितियों में निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।   गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 964 अंक चढ़कर 78,151 पर और निफ्टी 261 अंक की बढ़त के साथ 24,334 पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को वैश्विक और घरेलू कारकों के दबाव ने बाजार की दिशा बदल दी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
British Government IRGC
ब्रिटेन ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के समर्थन पर लगाया प्रतिबंध, उल्लंघन पर 14 साल तक की जेल

लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत IRGC को पहली बार "स्टेट थ्रेट" (राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा) घोषित किया है। अब ब्रिटेन में IRGC के लिए समर्थन जुटाना, उसकी मदद करना या उसके हित में गतिविधियां चलाना अपराध माना जाएगा।   14 साल तक की जेल का प्रावधान   ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के अनुसार, नए कानून के तहत IRGC का समर्थन करने, उसके लिए काम करने या उसे किसी भी प्रकार की सहायता पहुंचाने पर अधिकतम 14 साल की जेल हो सकती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति IRGC की ओर से जासूसी, तोड़फोड़ या हिंसक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।   यह फैसला क्यों लिया गया?   ब्रिटिश सरकार का आरोप है कि IRGC की कुद्स फोर्स ने ब्रिटेन में यहूदी और इजरायली समुदाय से जुड़े कई ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई। सरकार का कहना है कि ईरान समर्थित संगठन Islamic Movement of Companions of the Right (IMCR) ने लंदन समेत कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी। इन्हीं घटनाओं के बाद यह कार्रवाई की गई।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Ayodhya skyline with Ram Mandir and luxury real estate projects attracting celebrity investments and property buyers.
Ayodhya Real Estate: अमिताभ बच्चन ने किया करीब ₹90 करोड़ का निवेश, रणबीर कपूर ने भी खरीदा प्रीमियम प्लॉट; राम मंदिर के बाद बढ़ा रियल एस्टेट का आकर्षण

Ayodhya Real Estate News: राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या देश के सबसे तेजी से उभरते रियल एस्टेट और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है। शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और बढ़ती निवेश संभावनाओं के बीच बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी यहां निवेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में अभिनेता अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर के अयोध्या में किए गए रियल एस्टेट निवेश एक बार फिर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में विभिन्न प्रॉपर्टीज़ के जरिए लगभग ₹90 करोड़ का निवेश किया है, जबकि रणबीर कपूर ने ₹3.31 करोड़ की कीमत वाला एक प्रीमियम प्लॉट खरीदा है। अमिताभ बच्चन का अयोध्या में बड़ा निवेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने डेवलपर The House of Abhinandan Lodha (HoABL) की परियोजनाओं सहित अयोध्या में कई संपत्तियों में निवेश किया है। उनके निवेश का कुल अनुमान लगभग ₹90–100 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। अमिताभ बच्चन की प्रमुख प्रॉपर्टीज़ सरयू प्लॉट: लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी अनुमानित कीमत ₹14.5 करोड़ बताई जाती है। हवेली अवध: करीब 5,372 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत लगभग ₹4.54 करोड़ है। प्रीमियम लग्जरी प्लॉट: सरयू डेवलपमेंट के पास लगभग 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत करीब ₹40 करोड़ बताई गई है। 67 एकड़ भूमि: परिवार की कंपनी AB Corp Ltd के माध्यम से लगभग ₹35 करोड़ में खरीदी गई जमीन। हरिवंश राय बच्चन मेमोरियल ट्रस्ट: दिवंगत कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक के लिए लगभग 54,454 वर्ग फुट भूमि का पंजीकरण कराया गया है। रणबीर कपूर ने भी खरीदा प्रीमियम प्लॉट अभिनेता रणबीर कपूर ने भी अयोध्या के लग्जरी रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सरयू टाउनशिप में लगभग 2,134 वर्ग फुट का प्रीमियम प्लॉट खरीदा है, जिसकी कीमत ₹3.31 करोड़ बताई गई है। बताया जाता है कि यह निवेश उन्होंने अपनी फिल्म 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने से पहले किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस निवेश को परिवार के लिए दीर्घकालिक संपत्ति और विशेष भावनात्मक महत्व वाला निर्णय बताया है। राम मंदिर के बाद अयोध्या बना निवेश का नया केंद्र राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या में रियल एस्टेट, होटल, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से निवेश बढ़ा है। शहर में लग्जरी आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ व्यावसायिक विकास भी तेज़ी से हो रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर सहित विभिन्न परिवहन परियोजनाएं इन परियोजनाओं के कारण अयोध्या का रियल एस्टेट बाजार निवेशकों और डेवलपर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Staff members count donations at the Shri Ram Janmabhoomi Temple in Ayodhya as the trust faces a manpower shortage following multiple resignations amid an ongoing investigation.
राम मंदिर ट्रस्ट के सामने नई चुनौती, दान गिनने वाले 20 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दान की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। कर्मचारियों ने बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को इस्तीफे की वजह बताया है। जांच के बाद आधे से ज्यादा कर्मचारी हुए अलग पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले मंदिर में दान की राशि गिनने के लिए करीब 40 कर्मचारी तैनात थे। कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई कर्मचारियों ने नियमित रूप से ड्यूटी पर आना बंद कर दिया। शुरुआत में रोजाना केवल 15 से 20 कर्मचारी ही काम कर रहे थे। अब 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद यह संख्या घटकर लगभग एक दर्जन रह गई है। बढ़ते काम और सख्त प्रक्रिया से बढ़ा दबाव इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों ने अपने पत्र में लिखा है कि जांच के बाद दान गिनने की पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त हो गई है। हर चरण में अतिरिक्त जांच, सत्यापन और निगरानी के कारण काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव के चलते जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो गया था। चढ़ावा चोरी मामले के बाद बदली व्यवस्था राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। इसके बाद ट्रस्ट ने दान की गिनती की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। अब हर चरण की निगरानी की जा रही है, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक समय लेने लगी है। ट्रस्ट के सामने नई चुनौती कर्मचारियों के लगातार इस्तीफों से ट्रस्ट के सामने दान गिनने की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। अब ट्रस्ट को नई टीम तैयार करने के साथ-साथ पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को सामान्य करना होगा। जांच जारी कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, ट्रस्ट प्रशासन का फोकस अब दान गिनने की व्यवस्था को बिना किसी बाधा के जारी रखने और नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Salman Khurshid
यूपी चुनाव में राम मंदिर को मुद्दा नहीं बनाएगी कांग्रेस, सलमान खुर्शीद बोले- यह आस्था का विषय, राजनीति का नहीं

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस आगामी यूपी चुनाव में राम मंदिर को चुनावी मुद्दा नहीं बनाएगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है और इसे राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।   विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर रहेगा फोकस   सलमान खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस का ध्यान रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन चुनाव विकास और जनता की वास्तविक समस्याओं के आधार पर लड़ा जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि मतदाताओं के सामने रोजमर्रा के मुद्दों को प्रमुखता से रखा जाना चाहिए।   राम मंदिर पर सियासत से दूरी का संकेत   कांग्रेस नेता ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा अब न्यायिक प्रक्रिया और निर्माण के बाद एक अलग चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में इसे चुनावी हथियार बनाने के बजाय जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस की बदली हुई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Govind Dev Giri
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सवालों पर भड़के ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष, इंटरव्यू रोकने की हुई कोशिश

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में जांच तेज होने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का एक वीडियो चर्चा में है। एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे जाने पर वह नाराज हो गए। इस दौरान उनके समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार का माइक हटाने और इंटरव्यू रोकने की भी कोशिश की। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर कोषाध्यक्ष ने सवालों का जवाब दिया।   जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन गिनती से किया किनारा संवाददाता ने जब गोविंद देव गिरी से पूछा कि बतौर कोषाध्यक्ष क्या इस पूरे मामले में उनकी भी जिम्मेदारी बनती है, तो उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के हर सदस्य की जिम्मेदारी होती है और उनकी भी जिम्मेदारी है। हालांकि इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि उनका दानपात्र (हुंडी) में होने वाली नकदी की गिनती से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट के खातों में आने वाले धन का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है।   चोरी मामले में अब तक दो इस्तीफे और आठ गिरफ्तारियां राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद अब तक दो लोगों ने इस्तीफा दिया है, जबकि पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप चुका है और जांच आगे बढ़ रही है।   अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद सामने आया था मामला यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बाद में चोरी की पुष्टि होने पर एसआईटी जांच गठित की गई। जांच के दौरान ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
SIT officials investigating the alleged donation theft case at Ayodhya Ram Temple, with CCTV footage under review during the probe.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कपड़ों-जूतों में छिपाए जाते थे नोट; चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। CCTV फुटेज में सामने आईं 70 संदिग्ध घटनाएं एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं चिन्हित की गईं, जिनमें गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मौकों पर कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आई प्रमुख कमियां इस प्रकार हैं— गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों को निजी सामान अंदर ले जाने से रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। कई दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। मूल्यवान चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। छह मुख्य आरोपी चिन्हित, आठ गिरफ्तार प्रारंभिक जांच में एसआईटी ने छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके नाम उजागर किए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने लगभग 78.94 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये और बरामद हुए थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी वित्तीय जांच जारी है। ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित एसआईटी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज किया है, जिनमें चांदी की ईंटें और मंदिर के आभूषण गायब होने की बात कही जा रही थी। जांच में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आभूषणों का प्रदर्शन भी किया और स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अवधि बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को गठित एसआईटी के कार्यकाल को 1 जुलाई को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। अब विस्तृत जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Ram Janmabhoomi Trust
चढ़ावा चोरी मामले के बीच राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर मंथन

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में आठ लोगों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। अस्वस्थ होने के बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया और घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर भरोसा भी जताया।   बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के त्यागपत्रों पर विचार करना है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक की शुरुआत करते हुए दोनों के इस्तीफों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद रिक्त है।   बैठक में ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य मौजूद हैं  जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष स्वामी परमानंद, कृष्णमोहन और स्वामी गोविंद देव गिरी बैठक में शामिल हुए, जबकि नृपेंद्र मिश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उत्तर प्रदेश सरकार के अपर प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए। संजय प्रसाद को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिस पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है।   क्या है मामला? गौरतलब है कि 5 जून को पहली बार चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और अब तक जांच के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Devotees visit the Shri Ram Janmabhoomi Temple in Ayodhya as authorities investigate alleged irregularities related to temple donations.
राम मंदिर दान विवाद: RSS ने निष्पक्ष जांच की मांग की, विनय कटियार बोले- पीएम मोदी से की बात

अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के मामले ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि बजरंग दल के संस्थापक और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने दावा किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। RSS ने संयम बरतने की अपील की RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से अपील करते हुए कहा कि मामले को लेकर धैर्य बनाए रखें और किसी भी अफवाह या भड़काऊ प्रचार से बचें। उनके अनुसार, कुछ हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें इस विवाद का फायदा उठाकर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर सकती हैं। 'मंदिर प्रबंधन की कमियां दूर हों' होसबाले ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रबंधन और व्यवस्था में यदि कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर किया जाना चाहिए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे। विनय कटियार ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की पूर्व भाजपा सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की है। कटियार ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उनके इस बयान पर अब तक सरकार या जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब तक आठ गिरफ्तार, दो पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत रायऔर अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। SIT कर रही है पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) दान प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों और नेताओं के बयान सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल सभी की नजर SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Ram Temple theft case
चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन! आरोपियों के अवैध मकानों पर बुलडोजर की तैयारी

अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर जहां विशेष जांच दल (SIT) मामले की गहन पड़ताल में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी गोपाल राव की है और वे राम परंपरा का पालन नहीं करते तथा अनावश्यक विवाद खड़े करते हैं।   सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, सरकार अब आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की जांच शुरू कर दी है, जिन्हें आरोपियों ने मंदिर में नौकरी के दौरान बनवाया और जिनमें निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है। बताया जा रहा है कि लवकुश मिश्रा के शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा के कौशलपुरी स्थित मकान पर कार्रवाई हो सकती है। इन मामलों में नोटिस जारी करने की तैयारी भी चल रही है।   जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का नोटों की गड्डियों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी सत्यता की पुलिस जांच कर रही है। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपियों की नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही।   अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी  हो चुकी है  इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की राशि कहां-कहां पहुंची।   इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आगामी 6 जुलाई को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust members during a meeting in Ayodhya amid discussions on organisational changes and future planning.
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने की संभावना, इस्तीफों और भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना है। बैठक ऐसे समय प्रस्तावित है, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्यों के इस्तीफों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार किया जा सकता है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया था कि बैठक 7 जुलाई को होगी, लेकिन अब इसके एक दिन पहले 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर हो सकती है चर्चा सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। यह घटनाक्रम राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद सामने आया है। बैठक में दोनों नेताओं के इस्तीफों पर चर्चा होने की संभावना है। यदि ट्रस्ट इन्हें स्वीकार करता है तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। इनमें एक पद पहले से ही खाली है, क्योंकि ट्रस्ट सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से उस स्थान पर नियुक्ति नहीं की गई है। ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी हो सकता है विचार सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास, वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन सहित कुछ अन्य वरिष्ठ न्यासी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पहले जैसी सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। ऐसे में बैठक में ट्रस्ट के पुनर्गठन और रिक्त पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो सकती है। सीईओ नियुक्ति के लिए नियमों में बदलाव जरूरी बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी विचार-विमर्श संभव है। यदि केंद्र सरकार ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करना चाहती है, तो इसके लिए पहले ट्रस्ट की नियमावली में संशोधन करना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत सीईओ की नियुक्ति संभव नहीं है और इसके लिए औपचारिक संशोधन आवश्यक होगा। इन नामों की चर्चा सूत्रों के अनुसार, संभावित सीईओ के लिए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का नाम पहले से चर्चा में है। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। ट्रस्ट या सरकार की ओर से इन नामों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैठक पर रहेगी सभी की नजर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक संगठनात्मक बदलाव, रिक्त पदों पर नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के एजेंडे और संभावित फैसलों को लेकर अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Bageshwar Dham chief Dhirendra Krishna Shastri reacts to the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement case during an event in Jakarta.
'रावण ने सिर्फ माता सीता का हरण किया था, यहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था लूटी गई'... राम मंदिर दान मामले पर बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

  अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Champat Rai Anil Mishra
राम मंदिर दान विवाद में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों ने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम के बाद देशभर में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।   SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR राम मंदिर दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद 25 जून की रात भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित आठ लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।   7 करोड़ रुपये से अधिक के दुरुपयोग का आरोप यह मामला तब सामने आया जब अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की दान राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप सामने आने के बाद स्वयं ट्रस्ट ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद एसआईटी का गठन किया गया।   सरकार और विपक्ष आमने-सामने मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ नहीं उठाने की अपील करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हैं तथा वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Arvind Kejriwal questions the legal authority of the SIT probing alleged irregularities in Ayodhya Ram Temple donation funds.
राम मंदिर चंदा मामला: SIT पर केजरीवाल के सवाल, बोले- ‘चोरों को बचाने के लिए बनाई गई जांच समिति’

  नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Devotees visit Ayodhya Ram Temple as legal scrutiny intensifies over donation box theft and financial audit demands.
राम मंदिर डोनेशन विवाद पर बढ़ा बवाल, हाईकोर्ट में CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

  प्रयागराज/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के जरिए पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता और कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में SIT जांच के नाम पर केवल "लीपापोती" की जा रही है। विजिलेंस विभाग को सौंपा गया था ज्ञापन एएनआई के अनुसार, अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि उन्होंने 8 जून को उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन सौंपकर राम मंदिर ट्रस्ट और दान पेटी में कथित चोरी की CBI जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद 9 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की जा सकती है। इसी बीच उन्होंने 12 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। SIT जांच की वैधता पर सवाल मोहित अशोक ने आरोप लगाया कि याचिका दाखिल होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने जल्दबाजी में राज्य सरकार से संपर्क कर SIT जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि SIT के गठन का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, आम नागरिकों के लिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि उनके पास कोई दस्तावेजी साक्ष्य हैं, तो उन्हें SIT के समक्ष कैसे प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा, "SIT के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।" जांच रिपोर्ट में देरी पर उठे सवाल याचिकाकर्ता ने दावा किया कि SIT की रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि: राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से अब तक हुए सभी वित्तीय लेन-देन का CAG द्वारा विशेष ऑडिट कराया जाए। दान पेटी में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। बढ़ सकता है राजनीतिक और कानूनी विवाद राम मंदिर देश की आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने मामले को राजनीतिक और कानूनी रूप से और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Samajwadi Party MP Awadhesh Prasad addressing media over BJP claims and demanding transparency on Ram Temple donation issue.
चुनाव से पहले हार के डर से बौखलाई बीजेपी, बेतुकी बातें कर रही है: सपा सांसद अवधेश प्रसाद

  अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का डर अभी से सताने लगा है, इसलिए उसके नेता अनर्गल और बेतुकी बातें कर रहे हैं। 'सपा का कोई सांसद बीजेपी के संपर्क में नहीं' दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी का एक भी सांसद भाजपा में जाने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। 'अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराई बीजेपी' सपा सांसद ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और समाजवादी पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे को देखकर भाजपा घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका से भाजपा के नेता बौखलाहट में बयानबाजी कर रहे हैं। राम मंदिर मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा कथित चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट जनता के सामने लाई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और सरकार को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0