राष्ट्रीय

CBI Probe Demand in Ayodhya Ram Temple Donation Case

राम मंदिर डोनेशन विवाद पर बढ़ा बवाल, हाईकोर्ट में CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

Deepshikha जून 23, 2026 0
Devotees visit Ayodhya Ram Temple as legal scrutiny intensifies over donation box theft and financial audit demands.
Ram Temple Donation Controversy Reaches Allahabad High Court

 

प्रयागराज/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के जरिए पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता और कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में SIT जांच के नाम पर केवल "लीपापोती" की जा रही है।

विजिलेंस विभाग को सौंपा गया था ज्ञापन

एएनआई के अनुसार, अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि उन्होंने 8 जून को उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन सौंपकर राम मंदिर ट्रस्ट और दान पेटी में कथित चोरी की CBI जांच कराने की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि इसके बाद 9 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की जा सकती है। इसी बीच उन्होंने 12 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी।

SIT जांच की वैधता पर सवाल

मोहित अशोक ने आरोप लगाया कि याचिका दाखिल होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने जल्दबाजी में राज्य सरकार से संपर्क कर SIT जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि SIT के गठन का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है।

उनके अनुसार, आम नागरिकों के लिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि उनके पास कोई दस्तावेजी साक्ष्य हैं, तो उन्हें SIT के समक्ष कैसे प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने कहा,
"SIT के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।"

जांच रिपोर्ट में देरी पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि SIT की रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि:

  • राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से अब तक हुए सभी वित्तीय लेन-देन का CAG द्वारा विशेष ऑडिट कराया जाए।
  • दान पेटी में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए।
  • जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

बढ़ सकता है राजनीतिक और कानूनी विवाद

राम मंदिर देश की आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने मामले को राजनीतिक और कानूनी रूप से और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राष्ट्रीय

View more
भारत-श्रीलंका बिजली सहयोग और HVDC परियोजना पर चर्चा
भारत-श्रीलंका के बीच बिजली क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा, HVDC और सौर परियोजना पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका ने बिजली क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की है। नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने बिजली ग्रिड कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा-पार बिजली व्यापार को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक में भारत की ओर से केंद्रीय विद्युत एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और श्रीलंका की ओर से ऊर्जा एवं बंदरगाह और नागरिक उड्डयन मंत्री अनुरा करुणातिलके शामिल हुए।   HVDC इंटरकनेक्शन परियोजना पर आगे बढ़ा सहयोग   बैठक में प्रस्तावित भारत-श्रीलंका हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) इंटरकनेक्शन परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस परियोजना का उद्देश्य दोनों देशों के बिजली तंत्र को जोड़ना और भविष्य में बिजली के आदान-प्रदान की संभावनाओं को मजबूत करना है।   संपूर सोलर पावर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा   दोनों पक्षों ने संपूर सोलर पावर प्रोजेक्ट की प्रगति पर भी चर्चा की। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा क्षेत्र में क्षमता निर्माण के अवसरों पर विचार किया गया। भारत और श्रीलंका ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।   ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने पर जोर   बैठक को दोनों पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बिजली व्यापार और साझा ऊर्जा बुनियादी ढांचे में सहयोग से दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
कर्नाटक में कांग्रेस नेता डेविड डी'सूजा की गोली मारकर हत्या

कर्नाटक में कांग्रेस नेता डेविड डी'सूजा की गोली मारकर हत्या, बाइक सवार हमलावरों ने कार के पास किया हमला

भारत और भूटान के बीच जल संसाधन और पनबिजली सहयोग की बैठक

भारत और भूटान के बीच सीमा-पार नदियों पर उच्चस्तरीय बैठक, जल संसाधन और पनबिजली सहयोग पर जोर

मणिपुर हिंसा मामले में बीरेन सिंह ऑडियो टेप की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मणिपुर हिंसा मामले में N. बीरेन सिंह के ऑडियो टेप पर सरकार का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा, फोरेंसिक रिपोर्ट में छेड़छाड़ का जिक्र

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में फोरेंसिक रिपोर्ट की गलती से हत्या मामले की सुनवाई
फोरेंसिक रिपोर्ट की गलती से 14 साल जेल में रहे दो लोगों को राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पलटा हत्या का फैसला

जबलपुर, एजेंसियां। मध्य प्रदेश में फोरेंसिक जांच में हुई गंभीर गलती का खामियाजा दो लोगों को भुगतना पड़ा। करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोनों की दोषसिद्धि पलट दी। अदालत के सामने यह मामला आने के बाद फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और जांच में हुई लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।   गलत फोरेंसिक रिपोर्ट बनी सजा की वजह     मामले में दो लोगों को हत्या के अपराध में दोषी ठहराया गया था और उन्होंने लंबे समय तक जेल में सजा काटी। बाद में सामने आया कि जिस फोरेंसिक रिपोर्ट को मामले में महत्वपूर्ण सबूत माना गया था, उसमें दूसरे मामले से जुड़ी जानकारी/गलत विवरण शामिल हो गया था।   हाईकोर्ट ने मामले की सामग्री और रिकॉर्ड की दोबारा जांच के बाद पाया कि अभियोजन के महत्वपूर्ण साक्ष्य पर भरोसा करने में गंभीर खामी थी। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को मिली दोषसिद्धि को पलट दिया।   अदालत ने फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर उठाए सवाल     यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मध्य प्रदेश में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। एक अन्य मामले की सुनवाई में भोपाल फोरेंसिक साइंस लैब के कार्यवाहक निदेशक ने अदालत को बताया था कि DNA रिपोर्ट में नाम ‘कट एंड पेस्ट’ जैसी क्लेरिकल गलती के कारण बदल सकते हैं।   हाईकोर्ट ने इस तरह की गलती को गंभीर माना और सवाल उठाया कि अगर रिपोर्ट में नाम जैसी बुनियादी जानकारी गलत दर्ज हो सकती है, तो महत्वपूर्ण DNA या क्रोमोसोम मिलान से जुड़ी जानकारी में भी गलती की संभावना से इनकार कैसे किया जा सकता है।   14 साल जेल के बाद मिली बड़ी राहत     मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने इस मामले में दोनों लोगों के लिए बड़ी राहत का रास्ता खोल दिया है। करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद उनकी हत्या की दोषसिद्धि रद्द कर दी गई। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में फोरेंसिक साक्ष्यों की सटीकता और उनकी जांच-पड़ताल की अहमियत को भी सामने लाता है।   फोरेंसिक रिपोर्ट किसी आपराधिक मुकदमे में महत्वपूर्ण सबूत हो सकती है, लेकिन इस मामले ने यह सवाल भी उठाया है कि ऐसी रिपोर्ट तैयार करने और अदालत में पेश करने से पहले उनकी गुणवत्ता और सटीकता की कितनी कड़ाई से जांच की जाती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल और नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन

ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल को कैबिनेट की मंजूरी, बनेगा नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन

Foreign Contribution Bill पर भारत और अमेरिका के बीच बयान

Foreign Contribution Bill पर अमेरिका को भारत का करारा जवाब, कहा- यह हमारा आंतरिक मामला

LPG सिलेंडर के लिए आधार आधारित e-KYC प्रक्रिया

LPG e-KYC: 15 अगस्त के बाद प्रभावित हो सकती है सिलेंडर की बुकिंग, समय रहते कराएं KYC

West Bengal Weather
पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, गंगीय पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से दक्षिण बंगाल समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ताजा मौसम पूर्वानुमान में पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में 13 अगस्त तक भारी बारिश का जोखिम बताया गया है।   तटीय इलाकों में तेज हवाओं का खतरा   कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में मौसम खराब रह सकता है। समुद्र में तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ऐसे मौसम में समुद्र में जाने से बचना सुरक्षित रहेगा।   दक्षिण बंगाल के इन जिलों में भारी बारिश   बारिश का सबसे ज्यादा असर दक्षिण बंगाल के कई जिलों में देखने को मिल सकता है। पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कोलकाता, झारग्राम, उत्तर 24 परगना, हावड़ा, हुगली और बांकुड़ा में भी भारी बारिश हो सकती है। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलजमाव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।   उत्तर बंगाल में भी बढ़ेगी बारिश   दक्षिण बंगाल के साथ-साथ उत्तर बंगाल के पहाड़ी और आसपास के जिलों में भी बारिश बढ़ने का अनुमान है। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार में भारी बारिश की संभावना है।   कोलकाता में भी बारिश का असर   कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के कारण कोलकाता तथा आसपास के दक्षिण बंगाल के इलाकों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है।   क्यों बढ़ेगी बारिश?   बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी पश्चिम बंगाल की ओर आने के कारण बादल बनने और बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। कम दबाव का क्षेत्र मानसूनी हवाओं को और सक्रिय कर सकता है, जिससे कई इलाकों में बारिश का दौर बढ़ सकता है।   प्रशासन और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत   भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जलभराव वाले रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। बिजली चमकने और गरज के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए।   मछुआरों के लिए खास चेतावनी: समुद्र में मौसम खराब होने की आशंका को देखते हुए तटीय क्षेत्रों के मछुआरों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने और चेतावनी जारी होने पर समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
Ramashish Rai Resigns

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका, प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी भी छोड़ी

Mithun Chakraborty Hospitalized

मिथुन चक्रवर्ती अस्पताल में भर्ती, हाथ की सर्जरी हुई; शुभेंदु अधिकारी ने पहुंचकर जाना हाल

रक्षाबंधन पर राखी भेजने के लिए डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सुविधा

रक्षाबंधन पर डाक विभाग की खास सौगात, स्पीड पोस्ट से राखी भेजने पर मिलेगी 10% छूट

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?