अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए गए। यह फैसला मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच लिया गया है। अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन का पहला बयान कार्यभार संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि उन्हें नए महासचिव की नियुक्ति तक अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हुआ है, उससे हम सभी बेहद दुखी हैं। इससे केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।" कृष्ण मोहन ने स्वीकार किया कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कुछ कमियां थीं, जिनका कुछ लोगों ने कथित तौर पर फायदा उठाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन खामियों को दूर कर व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ट्रस्ट की छवि बहाल करना पहली प्राथमिकता अंतरिम महासचिव ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की साख प्रभावित हुई है और लोगों के मन में सवाल पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। महंत कमल नयन दास ने दी जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व महासचिव चंपत राय बैठक में उपस्थित नहीं थे, जबकि गोपाल राव को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। चंपत राय ने जांच पूरी होने तक पद छोड़ना उचित समझा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। उनके अनुसार, मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है, जिसने ऐसी स्थिति पैदा होने दी। उन्होंने बताया कि चंपत राय का मानना था कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक उनके लिए महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने इस्तीफा दिया। स्वामी गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पारासरन ने ट्रस्ट के संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी पदाधिकारी का इस्तीफा सौंपते ही प्रभावी माना जाता है। समय से पहले बुलाई गई थी बैठक ट्रस्ट की यह बैठक निर्धारित कार्यक्रम से पहले बुलाई गई थी। बैठक में वरिष्ठ संतों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया। इस दौरान ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे, पारदर्शिता और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ऐसे समय स्वीकार किए गए हैं, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच जारी है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी तथा तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। CCTV फुटेज में सामने आईं 70 संदिग्ध घटनाएं एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं चिन्हित की गईं, जिनमें गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मौकों पर कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आई प्रमुख कमियां इस प्रकार हैं— गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों को निजी सामान अंदर ले जाने से रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। कई दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। मूल्यवान चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। छह मुख्य आरोपी चिन्हित, आठ गिरफ्तार प्रारंभिक जांच में एसआईटी ने छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके नाम उजागर किए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने लगभग 78.94 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये और बरामद हुए थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी वित्तीय जांच जारी है। ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित एसआईटी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज किया है, जिनमें चांदी की ईंटें और मंदिर के आभूषण गायब होने की बात कही जा रही थी। जांच में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आभूषणों का प्रदर्शन भी किया और स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अवधि बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को गठित एसआईटी के कार्यकाल को 1 जुलाई को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। अब विस्तृत जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गाजियाबाद, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दोस्ती को शर्मसार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के न्यू शांति नगर में एक युवक की उसके ही दोस्तों ने जन्मदिन की पार्टी के बहाने बुलाकर चाकू से गोदकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान मोहित शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले मे आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों के अनुसार मृतक के परिजनों के अनुसार, मोहित का कुछ समय पहले अपने दोस्तों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था, लेकिन आरोपी मन ही मन रंजिश पाल बैठे थे। परिवार का आरोप है कि मोहित की हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। पहले उसे खाटू श्याम और फिर हरिद्वार घुमाने ले जाया गया। लौटने के दो दिन बाद जन्मदिन मनाने के बहाने उसे एक दोस्त के घर बुलाया गया, जहां पहले शराब पिलाई गई और फिर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। मोहित के भाई का आरोप मोहित के भाई का आरोप है कि छह दोस्तों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। उनका कहना है कि कुछ आरोपियों ने मोहित को पकड़ रखा था, जबकि अन्य ने उसकी छाती पर कई बार चाकू से हमला किया। शरीर पर मिले गहरे घाव इस बात की ओर इशारा करते हैं कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल मोहित को एमएमजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि पार्टी के दौरान नशे की हालत में फिर से विवाद और गाली-गलौज हुई, जिसके बाद चाकू से हमला किया गया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। सभी संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ग्रेटर नोएडा के थाना बादलपुर क्षेत्र स्थित कचेड़ा गांव के एक लेबर कैंप में एलपीजी गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में टीनशेड की कई झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं और गाजियाबाद से भी धुएं का गुबार नजर आया। घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है। सिलेंडर ब्लास्ट के बाद तेजी से फैली आग फायर विभाग के अनुसार, रात करीब 10:50 बजे एक निजी निर्माण कंपनी के लेबर कैंप में आग लगने की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक टीनशेड झोपड़ी में रखे छोटे घरेलू एलपीजी सिलेंडर में गैस रिसाव हुआ, जिसके बाद सिलेंडर फट गया। विस्फोट के बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते आसपास की अन्य झोपड़ियों तक फैल गई। छह दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए नोएडा और गाजियाबाद से कुल छह दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। दमकल कर्मियों ने करीब 45 मिनट की लगातार मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और आसपास के क्षेत्रों में आग फैलने से रोक दिया। समय रहते टला बड़ा हादसा अधिकारियों के अनुसार, समय पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू होने से सभी मजदूर सुरक्षित बाहर निकल गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। आग लगने के कारण टीनशेड झोपड़ियों और उनमें रखे सामान को नुकसान पहुंचा है। फायर विभाग ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने लेबर कैंपों में गैस सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये की 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और डबल इंजन की सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ अब सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। 'अब क्लर्क और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को क्लर्कों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार की सबसे बड़ी पहचान पारदर्शिता है। किसानों, महिलाओं और गरीबों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। अब किसी को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।" पीएम किसान सम्मान निधि का किया जिक्र सीएम योगी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 'नीयत साफ हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं' मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नीतियां और फैसले स्वतः जनता के हित में परिणाम देने लगते हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकास योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं और समाज के हर वर्ग को उनका लाभ मिल रहा है।" विकास परियोजनाओं से क्षेत्र को मिलेगी नई गति सीएम योगी ने कहा कि फिरोजाबाद में शुरू की गई नई विकास परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देंगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 'एक जिला, एक उत्पाद' से यूपी को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं, तो उन्हें उत्तर प्रदेश के उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। यह प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान का प्रमाण है।" विकास और सुशासन के मॉडल को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास साथ-साथ चल रहे हैं। डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और जनता तक योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है।
प्रयागराज/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के जरिए पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता और कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में SIT जांच के नाम पर केवल "लीपापोती" की जा रही है। विजिलेंस विभाग को सौंपा गया था ज्ञापन एएनआई के अनुसार, अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि उन्होंने 8 जून को उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन सौंपकर राम मंदिर ट्रस्ट और दान पेटी में कथित चोरी की CBI जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद 9 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की जा सकती है। इसी बीच उन्होंने 12 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। SIT जांच की वैधता पर सवाल मोहित अशोक ने आरोप लगाया कि याचिका दाखिल होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने जल्दबाजी में राज्य सरकार से संपर्क कर SIT जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि SIT के गठन का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, आम नागरिकों के लिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि उनके पास कोई दस्तावेजी साक्ष्य हैं, तो उन्हें SIT के समक्ष कैसे प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा, "SIT के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।" जांच रिपोर्ट में देरी पर उठे सवाल याचिकाकर्ता ने दावा किया कि SIT की रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि: राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से अब तक हुए सभी वित्तीय लेन-देन का CAG द्वारा विशेष ऑडिट कराया जाए। दान पेटी में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। बढ़ सकता है राजनीतिक और कानूनी विवाद राम मंदिर देश की आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने मामले को राजनीतिक और कानूनी रूप से और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरानिया इलाके में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में कई छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हृदयविदारक घटना पर अभिनेता सोनू सूद ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि क्लासरूम सपनों को संवारने की जगह होते हैं, न कि बच्चों की जिंदगी का अंतिम पड़ाव। लखनऊ अग्निकांड पर टूटा सोनू सूद का दिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए सोनू सूद ने लिखा कि यह हादसा बेहद दर्दनाक है और इससे उनका दिल टूट गया है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के सपने अभी उड़ान भरने वाले थे, उनकी यात्रा शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई। सोनू सूद ने लिखा कि ये बच्चे भविष्य के अधिकारी, कलाकार, नेता और समाज में बदलाव लाने वाले लोग बन सकते थे, लेकिन एक दुखद हादसे ने उनसे उनका भविष्य छीन लिया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता और उनकी प्रार्थनाएं सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल अभिनेता ने अपने संदेश में यह भी कहा कि समाज केवल आंसू बहाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं होनी चाहिए। आग लगने के बाद मची अफरातफरी सोमवार दोपहर अलीगंज के पुरानिया क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला इमारत में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं और कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं के बीच अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। फायर कर्मियों ने इमारत की दीवार तोड़कर 20 से अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे छात्र प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई छात्र धुएं और आग से बचने के लिए ऊंची मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए। एक युवक नीचे लगी लोहे की रेलिंग पर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान कई परिवार अपने बच्चों की तलाश में मौके पर रोते-बिलखते दिखाई दिए। इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और अन्य शैक्षणिक भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद अब इमारत से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्रशासनिक कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोप में ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का आदेश जारी किया गया था। दो महीने से भी कम समय के भीतर यह आदेश वापस ले लिया गया, जिसके बाद प्रस्तावित कार्रवाई रोक दी गई। 1980 में हुआ था भवन का आवंटन अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत रामेश्वर सहाय के पुत्र विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा उन्हें सौंप दिया गया। बाद में वर्ष 2005 में विक्रय विलेख के माध्यम से यह भवन विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह संपत्ति वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दी। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने दोनों खरीदारों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। लगभग 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। अवैध निर्माण पर दर्ज हुआ था मुकदमा दस्तावेजों के अनुसार, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायत सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेंद्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज दो महीने के भीतर, 5 जुलाई 2016 को यह आदेश निरस्त कर दिया गया और इमारत के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई रोक दी गई। अब उठ रहे बड़े सवाल अलीगंज अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था, तो आखिर किन परिस्थितियों में उसे वापस लिया गया? क्या उस समय नियमों की अनदेखी हुई? क्या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती गई? इन सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों और प्रशासनिक रिपोर्ट पर निर्भर करेंगे। इस बीच, हादसे में 15 लोगों की मौत ने भवन सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। घटना के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बुलाई हाईलेवल बैठक, SIT के गठन के निर्देश किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास, 5 कालीदास मार्ग पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार के नेतृत्व में दो सदस्यीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। एसआईटी पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। चार आरोपी गिरफ्तार अग्निकांड मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं— रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज) वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड, लखनऊ) तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव, लखनऊ) पुलिस इन सभी से पूछताछ कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है। चार अधिकारियों पर गिरी गाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं— गौरव कुमार, एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम कमलेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी FSSO, फायर विभाग, इंदिरा नगर अनिल कुमार, सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रमोद पांडे, जूनियर इंजीनियर (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण सरकार का कहना है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही के संकेत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। अलीगढ़ में थे मुख्यमंत्री, तुरंत रद्द किए कार्यक्रम हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ दौरे पर थे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने मंच से ही अपने शेष कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा की और तत्काल लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। मृतकों के परिजनों को 5 लाख, घायलों को 50 हजार की सहायता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय मदद देने का भी ऐलान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने एक बार फिर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भागीरथी तीर्थ की जमीन से कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई का कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद लिया गया फैसला संभल के जिलाधिकारी सुधीर कुमार सोनी और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मंगलवार शाम कस्बे का निरीक्षण किया था। इस दौरान अधिकारियों ने पाया कि भागीरथी तीर्थ के कुंड में गंदगी जमा थी और उसके ऊपर टीन शेड बनाकर भूसा रखा गया था। स्थिति का जायजा लेने के बाद अधिकारियों ने तत्काल अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए। जेसीबी से हटाया गया अतिक्रमण सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने बताया कि नगर पालिका की टीम को मौके पर बुलाकर जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाया गया। इसके साथ ही कुंड में जमा गंदगी की सफाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह अस्थायी कब्जा आसपास रहने वाले कुछ लोगों द्वारा किया गया था। पहले भी दी गई थी चेतावनी प्रशासन के मुताबिक, अतिक्रमणकारियों को पहले भी कई बार नोटिस देकर कब्जा हटाने के लिए कहा गया था। शुरुआत में उन्होंने स्वयं निर्माण हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रक्रिया काफी धीमी होने के कारण प्रशासन को बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी। दुकानों के निर्माण की होगी जांच सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि तीर्थ स्थल की जमीन पर कुछ दुकानों के निर्माण की भी जानकारी मिली है। इस मामले की जांच तहसीलदार को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बार-बार हो रहे कब्जों से प्रशासन सख्त प्रशासन का कहना है कि भागीरथी तीर्थ की जमीन पर पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कुछ लोग दोबारा कब्जा कर लेते हैं। इसी कारण इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई की है।
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में गुरुवार शाम लखनऊ-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव की घटना सामने आई। उस समय ट्रेन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख Mohan Bhagwat भी यात्रा कर रहे थे। घटना में ट्रेन के एक कोच की खिड़की का शीशा टूट गया, किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। फिरोजाबाद के पास हुई घटना पुलिस के अनुसार, यह घटना गुरुवार शाम करीब 7:45 बजे इटावा-टुंडला रेलखंड पर पेमेश्वर गेट पुल के पास हुई। इसी दौरान 12003 अप लखनऊ-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने पत्थर फेंक दिया, जिससे एक कोच की खिड़की क्षतिग्रस्त हो गई। मोहन भागवत को कोई नुकसान नहीं पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ट्रेन के ई-1 कोच में यात्रा कर रहे थे। वह कानपुर से दिल्ली जा रहे थे। घटना के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की चोट नहीं पहुंची और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। रेलवे और पुलिस ने शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास जांच शुरू कर दी है और पथराव करने वाले व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा संघ प्रमुख की यात्रा के दौरान हुई इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं तथा यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पथराव जानबूझकर किया गया था या कोई अन्य कारण था। आरोपियों की तलाश जारी पुलिस का कहना है कि आसपास के क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है।
उत्तर प्रदेश में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था समाप्त होने के बाद अब उपभोक्ताओं को पोस्टपेड सिस्टम के तहत बिजली बिल भेजा जा रहा है। जून 2026 से प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं को भी सामान्य उपभोक्ताओं की तरह मासिक बिजली बिल प्राप्त होगा। हालांकि बिल प्राप्त करने और भुगतान करने की प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं। यदि आपका प्रीपेड मीटर भी पोस्टपेड सिस्टम में परिवर्तित हो चुका है, तो आप SMS, WhatsApp, UPPCL ऐप या अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपना बिजली बिल आसानी से चेक और जमा कर सकते हैं। ऐसे चेक करें अपना बिजली बिल 1. SMS के जरिए बिजली बिल देखने का सबसे आसान तरीका SMS है। अपने मोबाइल का मैसेज बॉक्स खोलें। UPPCL या अपने डिस्कॉम (PVVNL, MVVNL, DVVNL, PuVVNL आदि) के नाम से आए संदेश को खोजें। उसी मैसेज में आपका बिल विवरण उपलब्ध होगा। 2. UPPCL ऐप के जरिए अपने मोबाइल में UPPCL ऐप डाउनलोड करें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। होम स्क्रीन पर आपका बिजली बिल दिखाई देगा। यहां से बिल की राशि, देय तिथि और अन्य जानकारी देख सकते हैं। 3. WhatsApp के जरिए अपने संबंधित डिस्कॉम के व्हाट्सएप नंबर पर Hello भेजें। इसके बाद दिखाई देने वाले मेन्यू में बिजली बिल विकल्प चुनकर बिल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। व्हाट्सएप नंबर: DVVNL : 8010957826 MVVNL : 8010924203 PuVVNL : 8010968292 PVVNL : 7859804803 KESCO : 8287835233 बिजली बिल का भुगतान कैसे करें? UPPCL ऐप से भुगतान UPPCL ऐप खोलें। होम स्क्रीन पर दिखाई दे रहे बिल के नीचे Pay Now पर क्लिक करें। कैप्चा भरकर लॉगिन करें। बिल राशि की पुष्टि करें। Proceed पर क्लिक करें। BillDesk विकल्प चुनें। UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य भुगतान विकल्प का चयन करें। भुगतान पूरा करें। अन्य ऐप्स से भी कर सकते हैं भुगतान यदि UPPCL ऐप का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं तो— Google Pay PhonePe Paytm BHIM UPI Amazon Pay जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी कस्टमर आईडी और संबंधित डिस्कॉम चुनकर बिजली बिल का भुगतान कर सकते हैं। भुगतान के बाद इन बातों का रखें ध्यान भुगतान की रसीद अवश्य डाउनलोड या सेव करें। UPPCL ऐप में भुगतान इतिहास (Payment History) देखकर पुरानी रसीदें भी डाउनलोड की जा सकती हैं। किसी भी विवाद की स्थिति में डिजिटल रसीद आपके भुगतान का प्रमाण होगी। उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला? पहले प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज कराना पड़ता था। अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ता पहले बिजली का उपयोग करेंगे और बाद में मासिक बिल का भुगतान करेंगे। इससे रिचार्ज की झंझट खत्म हो गई है और भुगतान प्रक्रिया भी पहले से अधिक सरल हो गई है।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक हनुमान मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है। मजदूरी के दौरान मंदिर परिसर में पहुंचे थे लोग पुलिस के अनुसार, 31 मई को असर मोहम्मद अपने साथी नजर मोहम्मद और अन्य लोगों के साथ औरंगाबाद थाना क्षेत्र के औलीना गांव में राजमिस्त्री का काम करने पहुंचे थे। वे राजकुमार नामक व्यक्ति के घर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। काम के दौरान दोपहर में भोजन और आराम के लिए विराम लिया गया। इसी दौरान कथित तौर पर असर मोहम्मद ने हल्की बारिश से बचने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश किया और वहां नमाज अदा की। उस समय नजर मोहम्मद भी मौके पर मौजूद था। वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया मामला घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गांव में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने मामले पर आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस ने वीडियो और अन्य तथ्यों की जांच शुरू की। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का क्या कहना है? औरंगाबाद थाना प्रभारी मोहम्मद असलम ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रांची। गर्मी का मौसम आते ही भारत में जिस चीज का सबसे ज्यादा इंतजार होता है, वह है आम। यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वाद और भावनाओं से जुड़ा एक अहम हिस्सा है। आम की मिठास हर घर की यादों में बसी होती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में आम की कई किस्में मिलती हैं। आज के एपिसोड में देश के एक ऐसे जगह की बात करेंगे , जिसे लोग दुनिया का “Mango Capital” कहते हैं। जब 'आमों के शहर' की बात आती है, तो दिमाग में सबसे पहले पश्चिम बंगाल के 'मालदा' का नाम आता है। मालदा बेशक अपनी 'फजली' किस्म के लिए मशहूर है और इसे भारत में मैंगो सिटी कहा जाता है, लेकिन जब बात "दुनिया की आम की राजधानी" की आती है, जो जवाब पूरी तरह बदल जाता है। और वो जगह 'आम की राजधानी' पश्चिम बंगाल का मालदा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के राजधानी लखनऊ के पास स्थित छोटा सा कस्बा मलिहाबाद है। हालांकि, इस जगह के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। क्यों मलिहाबाद को दुनिया का Mango Capital कहा जाता है? मलिहाबाद में आम की खेती का इतिहास कई सौ साल पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि नवाबों के समय से ही यहां बड़े पैमाने पर आम के बाग लगाए जाते थे। आज भी यह परंपरा जीवित है और हजारों एकड़ में फैले आम के बाग इस क्षेत्र की पहचान बानी हुई है। मलिहाबाद के आमों की सबसे बड़ी खासियत उनका स्वाद और खुशबू है। यहां की उपजाऊ मिट्टी और मौसम आम की खेती के लिए बेहद अच्छा माना जाता है। यहां के आमों में गजब की मिठास, रसदार गूदा और कम रेशे पाए जाते हैं। खासकर दशहरी आम अपनी मीठी खुशबू और मुलायम गूदे के लिए दुनियाभर में मशहूर है।आपको जानकर हैरानी होगी कि मलिहाबाद की शान माने जाने वाले 'दशहरी' आम का 200 साल पुराना 'मातृ वृक्ष' आज भी यहां शान से खड़ा है। मलिहाबाद की खासियत मलिहाबाद की पहचान सिर्फ दशहरी तक सीमित नहीं है। यहां के बागों में आम की कई ऐसी किस्में उगती हैं, जो देश-विदेश में पसंद की जाती हैं: • लंगड़ा आम: यह अपने हल्के खट्टे-मीठे स्वाद और हरे रंग के कारण जाना जाता है। • चौसा आम: यह बेहद रसदार और मीठा होता है, जिसे चूसकर खाने में अलग ही आनंद आता है। • सफेदा आम: इसका गूदा मलाईदार और स्वाद हल्का मीठा होता है। • आम्रपाली आम: यह एक हाइब्रिड किस्म है, जो अपने गहरे रंग और खास स्वाद के लिए मशहूर है। मलिहाबाद में बड़ी संख्या में परिवार पीढ़ियों से आम की खेती करते आ रहे हैं। यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा आम के कारोबार पर निर्भर करता है। खेती से लेकर पैकिंग, व्यापार और एक्सपोर्ट तक हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। यही कारण है कि आम यहां सिर्फ फल नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। दुनिया में क्यों अलग पहचान रखता है मलिहाबाद? भारत, पाकिस्तान, थाईलैंड और मेक्सिको जैसे कई देश आम उत्पादन के लिए मशहूर हैं। लेकिन मलिहाबाद अपनी पुरानी परंपरा, बड़े स्तर पर खेती और दशहरी आम की वजह से खास पहचान रखता है। भले ही यह कोई आधिकारिक खिताब नहीं है, लेकिन अपनी लोकप्रियता और विरासत की वजह से मलिहाबाद को दुनिया का ‘Mango Capital’ माना जाता है।
Uttar Pradesh में पंचायत चुनाव टलने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधान ही पंचायतों का कामकाज संभालेंगे। प्रदेश की मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो गया। इसके बाद सरकार ने तय किया है कि नई पंचायतों के गठन या अधिकतम 6 महीने तक मौजूदा प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे। 27 मई से प्रशासक बनेंगे ग्राम प्रधान मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। 27 मई से ग्राम प्रधान पंचायतों में प्रशासकीय जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें केवल सामान्य और रोजमर्रा के काम करने की अनुमति होगी। वे कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। अगर किसी जरूरी मामले में बड़ा निर्णय लेना पड़ा तो प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही फैसला लागू होगा। क्यों टले पंचायत चुनाव? सरकार ने हाल ही में पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने हेतु पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। माना जा रहा है कि आयोग नवंबर तक रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद आरक्षण पर आपत्तियां और उनकी सुनवाई की प्रक्रिया भी होगी। इसी बीच फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव अब अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। वोटर लिस्ट भी नहीं हुई तैयार पंचायत चुनाव में देरी की एक वजह अंतिम मतदाता सूची का तैयार न होना भी है। जानकारी के मुताबिक, फाइनल वोटर लिस्ट 10 जून को जारी की जाएगी। प्रदेश में पंचायत चुनाव के साथ जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत यानी बीडीसी चुनाव भी होने हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया में अभी और समय लग सकता है।
उत्तर प्रदेश के Unnao में मंगलवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हो गया। दिल्ली से बिहार जा रही एक डबल डेकर बस आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 से ज्यादा यात्री घायल बताए जा रहे हैं। यह हादसा मंगलवार (26 मई) सुबह करीब 5 बजे Agra-Lucknow Expressway पर औरास थाना क्षेत्र के किलोमीटर 262 के पास हुआ। पुलिस के मुताबिक, तेज रफ्तार बस अचानक रेलिंग से टकराई और पलट गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। सब-इंस्पेक्टर और कैदी की भी मौत हादसे में मरने वालों में बिहार पुलिस के सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र और कैदी छत्रपाल भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र बिहार के सिवान से कैदी को लेकर दिल्ली गए थे और वापस लौट रहे थे। इसी दौरान बस हादसे का शिकार हो गई। 30 यात्री थे सवार Unnao Fire & Emergency Services ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बस में करीब 30 यात्री सवार थे। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को इलाज के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। राहत और बचाव कार्य जारी हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने क्रेन की मदद से बस को हटवाया और रास्ता साफ कराया। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। शुरुआती आशंका चालक को झपकी आने या तेज रफ्तार को हादसे की वजह मान रही है।
लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।
नोएडा: Noida में वेतन वृद्धि को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का आंदोलन अब सियासी मुद्दा बन गया है। प्रदर्शन के बीच समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मजदूरों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। अखिलेश यादव का सरकार पर हमला Akhilesh Yadav ने कहा कि फैक्ट्री श्रमिकों के बाद अब घरेलू कामगार भी सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई और गलत नीतियों के कारण मजदूर और मध्यम वर्ग दोनों परेशान हैं। राहुल गांधी का समर्थन वहीं Rahul Gandhi ने कहा कि नोएडा की घटना मजदूरों की मजबूरी की आवाज है। उन्होंने कहा कि ₹12,000 की सैलरी में गुजारा मुश्किल है और ₹20,000 वेतन की मांग जायज है। प्रशासन का बड़ा फैसला गौतमबुद्ध नगर की डीएम Medha Roopam ने बताया कि: श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांग मान ली गई है 10 तारीख से पहले वेतन देने के निर्देश समय पर बोनस देने का भी फैसला सरकार ने हाल ही में मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान भी किया है। पुलिस का दावा – हालात काबू में पुलिस अधिकारियों के मुताबिक: छिटपुट घटनाओं को छोड़कर स्थिति नियंत्रण में है कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है हिंसा के मामलों में 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है क्यों भड़का प्रदर्शन? कम वेतन और लंबे काम के घंटे बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन का खर्च बेहतर वेतन (₹18-20 हजार) की मांग हाल के दिनों में हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरे और कुछ जगहों पर हिंसा भी देखने को मिली। नोएडा में श्रमिकों का यह आंदोलन अब सिर्फ वेतन का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर सरकार ने वेतन बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं, वहीं विपक्ष इसे मजदूरों की नाराजगी बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।
नोएडा: Noida के फेज-2 क्षेत्र में सोमवार को वेतन संबंधी विवाद को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में बंटकर आसपास के क्षेत्रों में फैल गए। सेक्टर 80 और 121 में भी इसी तरह की घटनाएं देखने को मिलीं, जहां गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नया गांव और आसपास के इलाकों में तनाव फेज-2 के नया गांव इलाके के पास भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ दोबारा जमा होती देखी गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया, लेकिन रुक-रुक कर विरोध जारी रहा। हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। सैलरी को लेकर नाराजगी प्रदर्शन कर रहे कई श्रमिकों का कहना है कि उन्हें उनकी सैलरी और उसमें हुए बदलावों की सही जानकारी नहीं दी गई थी। कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन वृद्धि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण असंतोष बढ़ा। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रमिकों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने वेतन से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करते हुए संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की। पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पथराव और हिंसा के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई कई स्थानों पर लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात प्रमुख सड़कों और औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है। सरकार का रुख औद्योगिक विकास मंत्री Nand Gopal Gupta Nandi ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के अराजक तत्वों ने अफवाह फैलाकर श्रमिकों को भड़काने का काम किया है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेक्टर 121 में भी हंगामा सेक्टर 121 स्थित क्लियो काउंटी के बाहर भी लोगों ने जमकर हंगामा किया। यहां कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। आगे की स्थिति प्रशासन ने श्रमिक संगठनों, उद्योग समूहों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल पूरे फेज-2 इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा दोबारा न हो सके।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा 403 सीटों के मुकाबले भविष्य में यह संख्या बढ़कर 605 तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव में लागू नहीं होगा। क्यों बढ़ सकती हैं सीटें? यह चर्चा संभावित परिसीमन (Delimitation) और नारी वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित बदलावों के कारण शुरू हुई है। सूत्रों के मुताबिक: लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हो सकती है यूपी में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं विधानसभा सीटें 403 से बढ़कर 605 होने का अनुमान 2027 चुनाव पर क्या असर? 2027 के विधानसभा चुनाव पुरानी 403 सीटों पर ही होंगे सीटों में बढ़ोतरी परिसीमन के बाद लागू होगी संभावना है कि 2032 के बाद नए ढांचे पर चुनाव हो आबादी के हिसाब से क्यों जरूरी? यूपी में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण: एक विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी बढ़ गई है आंकड़ों पर नजर: 1952: 347 सीटें, प्रति सीट ~1.82 लाख आबादी 1973: 425 सीटें, प्रति सीट ~2.8 लाख वर्तमान (403 सीट): प्रति सीट ~4.95 लाख आबादी अगर 605 सीटें होती हैं तो: प्रति सीट आबादी घटकर करीब 3.30 लाख रह जाएगी जिलों में क्या होगा बदलाव? अभी 75 जिलों में औसतन 3-5 विधानसभा सीटें हैं बढ़ोतरी के बाद यह संख्या 6-8 सीट प्रति जिला हो सकती है बड़े और छोटे विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़े क्षेत्र: साहिबाबाद, लोनी, मुरादनगर (7-12 लाख मतदाता) छोटे क्षेत्र: महोबा, सीसामऊ
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।