राष्ट्रीय

Noida Phase-2 Protest Turns Violent

नोएडा फेज-2 में श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन, कई सेक्टरों में पथराव और तोड़फोड़; 300 से अधिक गिरफ्तार

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
Workers protest in Noida Phase-2 turning violent with police deployment, vandalized vehicles and chaos on city streets
Noida Phase-2 Worker Protest Violence

नोएडा: Noida के फेज-2 क्षेत्र में सोमवार को वेतन संबंधी विवाद को लेकर शुरू हुआ श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी अलग-अलग समूहों में बंटकर आसपास के क्षेत्रों में फैल गए। सेक्टर 80 और 121 में भी इसी तरह की घटनाएं देखने को मिलीं, जहां गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

नया गांव और आसपास के इलाकों में तनाव

फेज-2 के नया गांव इलाके के पास भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ दोबारा जमा होती देखी गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाया, लेकिन रुक-रुक कर विरोध जारी रहा। हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है।

सैलरी को लेकर नाराजगी

प्रदर्शन कर रहे कई श्रमिकों का कहना है कि उन्हें उनकी सैलरी और उसमें हुए बदलावों की सही जानकारी नहीं दी गई थी। कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन वृद्धि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण असंतोष बढ़ा।

मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रमिकों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने वेतन से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करते हुए संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की।

पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था

  • पथराव और हिंसा के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई
  • कई स्थानों पर लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया
  • 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया
  • संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
  • प्रमुख सड़कों और औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।

सरकार का रुख

औद्योगिक विकास मंत्री Nand Gopal Gupta Nandi ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के अराजक तत्वों ने अफवाह फैलाकर श्रमिकों को भड़काने का काम किया है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सेक्टर 121 में भी हंगामा

सेक्टर 121 स्थित क्लियो काउंटी के बाहर भी लोगों ने जमकर हंगामा किया। यहां कुछ वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई लोगों को हिरासत में लेना पड़ा।

आगे की स्थिति

प्रशासन ने श्रमिक संगठनों, उद्योग समूहों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

फिलहाल पूरे फेज-2 इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा दोबारा न हो सके।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राष्ट्रीय

View more
Har Ghar Tiranga
बंगाल सरकार 9 अगस्त से चलाएगी सप्ताह भर का तिरंगा अभियान, स्कूलों और संस्थानों में होंगे कार्यक्रम

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले राज्यभर में 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाने का फैसला किया है। यह अभियान 9 अगस्त से शुरू होकर 17 अगस्त तक चलेगा, जिसमें लोगों को अपने घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा।   राज्यभर में आयोजित होंगे देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम   राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए अभियान में भाग लेने की अपील की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन, नगर निकाय और शैक्षणिक संस्थान मिलकर अभियान को सफल बनाने के लिए काम करेंगे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।   वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से भी जुड़ा अभियान   इस बार तिरंगा अभियान को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से भी जोड़ा गया है। अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम को विशेष महत्व दिया जाएगा। सरकार की योजना के अनुसार डिजिटल और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज के साथ देशभक्ति से जुड़े आयोजनों को बढ़ावा दिया जाएगा।   सोशल मीडिया पर भी बढ़ेगा अभियान का प्रचार   अभियान के दौरान लोगों को तिरंगे के साथ अपनी तस्वीरें साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। 'हर घर तिरंगा' पोर्टल पर फोटो अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सरकार का उद्देश्य है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें और राष्ट्रीय एकता का संदेश मजबूत हो।   प्रशासन को दिए गए दिशा-निर्देश   पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलों को अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला प्रशासन, कोलकाता नगर निगम, नगरपालिकाओं और पंचायत स्तर के अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। 'हर घर तिरंगा' अभियान के जरिए सरकार लोगों की भागीदारी बढ़ाने और स्वतंत्रता दिवस समारोह को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रही है।

abhishek singh जुलाई 28, 2026 0
Etawah Suicide Case

इश्क, धोखा और मौत: शादी के 20 दिन बाद युवक ने की आत्महत्या, पत्नी ने भी निगली नींद की गोलियां

Lok Sabha set to debate the Anti-Paper Leak Bill 2026 during the Monsoon Session as NDA leaders attend the Mangal Milan meeting

Parliament Session: लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा, सरकार-विपक्ष आमने-सामने; संसद में NDA की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू

Teacher Recruitment Case

शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, सरकार ने समायोजन का दिया प्रस्ताव

Assam government announces withdrawal of cases against student protesters and plans to release detained students
बिहार के बाद असम सरकार का बड़ा फैसला, छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस; रिहाई की भी तैयारी

बिहार के बाद अब असम सरकार ने भी छात्र आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को राहत देने का फैसला लिया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों को रिहा किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब CJP (Cockroach Janta Party) ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो देशव्यापी आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा। सरकार ने शुरू की कानूनी प्रक्रिया सूत्रों के मुताबिक, असम सरकार ने आंदोलन से जुड़े मामलों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर केवल विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप हैं, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई भी सुनिश्चित की जाएगी। CJP ने दी थी आंदोलन की चेतावनी CJP ने हाल ही में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं और गिरफ्तार छात्रों को बिना शर्त रिहा किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो जंतर-मंतर से फिर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। बिहार के बाद असम ने उठाया कदम इससे पहले बिहार सरकार ने भी छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का फैसला लिया था। अब असम सरकार के इसी तरह के फैसले को छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम का अहम कदम माना जा रहा है। छात्र संगठनों ने फैसले का किया स्वागत सरकार के इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और आंदोलन से जुड़े कई समूहों ने इसे सकारात्मक पहल बताया है। हालांकि उनका कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष छात्र पर भविष्य में कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सरकार की ओर से मामले वापस लेने और रिहाई की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत आदेश जल्द जारी किए जाने की संभावना है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Delhi Police investigating the July 20 CJP Parliament March violence using facial recognition technology

CJP संसद मार्च हिंसा: दिल्ली पुलिस ने 2,873 संदिग्धों की पहचान की, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा

Ram Mandir Case

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की होगी गहन जांच, SIT में शामिल होगा चार्टर्ड अकाउंटेंट

मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क पर कवच 5.0 ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की तैनाती और रेलवे सुरक्षा प्रणाली

मुंबई लोकल नेटवर्क पर 'कवच 5.0' की तैनाती शुरू, भारतीय रेलवे सुरक्षा प्रणाली को मिलेगा बड़ा तकनीकी अपग्रेड

Supreme Court of India as a PIL seeks a nationwide ban on pellet guns for crowd control
भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर

देशभर में भीड़ नियंत्रण के दौरान मेटैलिक पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पैलेट गन से लोगों को गंभीर और स्थायी चोटें लग सकती हैं, इसलिए इसके इस्तेमाल पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। पूर्व IB अधिकारी समेत कई लोगों ने दायर की याचिका यह याचिका इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल होने का दावा करने वाले दो लोगों की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाल ही में दिल्ली के 'संसद चलो' प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट दागे गए, जिससे 19 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी की एक आंख की रोशनी चली गई। सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई? याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि: भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल पर देशभर में रोक लगाई जाए। कथित घटना की स्वतंत्र जांच कराई जाए। घायल लोगों को उचित मुआवजा और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुरक्षित एवं वैकल्पिक भीड़ नियंत्रण उपायों पर दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार वहीं, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि उसके पास पैलेट गन है ही नहीं और संसद मार्च के दौरान ऐसे हथियार के इस्तेमाल के दावे भ्रामक और तथ्यहीन हैं। पुलिस ने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति अदालत में सुनवाई और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल असंगत' याचिका में कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल न केवल असंगत है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के भी विपरीत है। 'कम नुकसान पहुंचाने वाले विकल्प मौजूद' याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भीड़ नियंत्रण के लिए ऐसे कई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, जिनसे कम नुकसान होता है। उनका कहना है कि पैलेट गन से आंखों सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर और स्थायी चोट का खतरा रहता है, इसलिए इसे भीड़ नियंत्रण के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। 20 जुलाई के प्रदर्शन का भी जिक्र याचिका में 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि उस दौरान कई लोग कथित तौर पर पैलेट लगने से घायल हुए थे। याचिकाकर्ताओं ने सभी पीड़ितों के उपचार और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अदालत के निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी हैं।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Rahul Gandhi meeting Mohammad Irfan, whose videos from the CJP protest went viral on social media

CJP आंदोलन की नई पहचान बने मोहम्मद इरफान, राहुल गांधी ने पहुंचकर की मुलाकात

Low Clouds Climate Study

धरती के लिए खतरे की घंटी! निचले बादलों का 'कूलिंग इफेक्ट' खत्म होने की आशंका, बढ़ सकती है ग्लोबल वार्मिंग

बैंक ऑफ बड़ौदा में साइबर सुरक्षा में सेंध और डेटा लीक की खबर पर आधिकारिक स्पष्टीकरण

बैंक ऑफ बड़ौदा पर बड़ा साइबर हमला, कर्मचारी का ईमेल हैक होने से कथित 1 TB डेटा लीक; बैंक बोला- कोर बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित

0 Comments

Top week

Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?