टेक्नोलॉजी

iQOO Z11 की भारत में जल्द एंट्री, चाइनीज मॉडल से अलग मिलेगा नया प्रोसेसर

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
iQOO Z11 स्मार्टफोन के भारत में लॉन्च, 3D कर्व्ड डिस्प्ले और प्रोसेसर से जुड़ी डिटेल्स
iQOO Z11 India Launch Expected Price Specifications

नई दिल्ली। iQOO भारत में अपनी Z11 सीरीज का विस्तार करने की तैयारी में है। Z11x 5G और Z11 Lite के बाद अब कंपनी जल्द ही iQOO Z11 को भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्मार्टफोन अगस्त 2026 में दस्तक दे सकता है और इसका भारतीय वर्जन चीन में लॉन्च किए गए मॉडल से कुछ मामलों में अलग होगा।

 

भारतीय मॉडल में मिलेगा नया प्रोसेसर

 

जानकारी के मुताबिक, चीन में लॉन्च iQOO Z11 में MediaTek Dimensity 8500 प्रोसेसर दिया गया है, जबकि भारत में आने वाले मॉडल में MediaTek Dimensity 7500 Turbo चिपसेट मिलने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो यह इस चिपसेट के साथ भारत में लॉन्च होने वाला पहला स्मार्टफोन होगा।

 

3D कर्व्ड डिस्प्ले की भी उम्मीद

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय वेरिएंट में 3D कर्व्ड डिस्प्ले दिया जा सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसके फीचर्स और लॉन्च डेट की पुष्टि नहीं की है।

 

चाइनीज मॉडल में मिलते हैं दमदार फीचर्स

 

चीन में लॉन्च iQOO Z11 में 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले, 165Hz रिफ्रेश रेट और 300Hz टच सैंपलिंग रेट मिलता है। स्मार्टफोन में 16GB तक रैम, 512GB तक स्टोरेज, 9,020mAh की बड़ी बैटरी और 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है। कैमरे की बात करें तो इसमें OIS के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा और 16MP का फ्रंट कैमरा मिलता है।

 

कीमत पर रहेगी नजर

 

चीन में iQOO Z11 की शुरुआती कीमत CNY 2,299 (करीब ₹31,200) रखी गई है। अब भारतीय बाजार में यह स्मार्टफोन किस कीमत और किन बदलावों के साथ लॉन्च होगा, इस पर टेक यूजर्स की नजर बनी हुई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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नई दिल्ली, एजेंसियां। Skoda Auto India अपनी पॉपुलर प्रीमियम सेडान Skoda Slavia Facelift 2026 को भारतीय बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने इसके लॉन्च की तारीख का ऐलान कर दिया है। नई अपडेटेड स्लाविया को 18 अगस्त 2026 को लॉन्च किया जा सकता है। इस फेसलिफ्ट मॉडल में डिजाइन बदलाव, नए फीचर्स और कुछ मैकेनिकल अपडेट मिलने की उम्मीद है।   एक्सटीरियर में मिलेगा नया लुक   2026 Skoda Slavia Facelift में कंपनी कई कॉस्मेटिक बदलाव कर सकती है। इसमें नई डिजाइन वाली फ्रंट ग्रिल, अपडेटेड LED हेडलैंप और नए फ्रंट-रियर बंपर दिए जा सकते हैं। इसके अलावा नए अलॉय व्हील डिजाइन और रिफ्रेश्ड टेल लैंप्स के जरिए कार को ज्यादा मॉडर्न लुक मिलने की संभावना है।   केबिन में जुड़ सकते हैं नए फीचर्स   नई स्लाविया के इंटीरियर में बड़े बदलाव की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, अपडेटेड सीट अपहोल्स्ट्री और फ्रंट पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स जोड़े जा सकते हैं। इसके अलावा पिछली सीट पर मसाज फंक्शन भी मिलने की संभावना है, जो कंपनी ने हाल ही में Kushaq फेसलिफ्ट में पेश किया था।   ADAS फीचर को लेकर सस्पेंस   Skoda Slavia Facelift में लेवल-2 ADAS (Advanced Driver Assistance System) मिलने की चर्चा है। हालांकि इसकी संभावना कम बताई जा रही है, क्योंकि Skoda Kushaq Facelift में भी कंपनी ने अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग और लेन कीप असिस्ट जैसे फीचर्स शामिल नहीं किए थे।   इंजन और गियरबॉक्स में हो सकता है बदलाव   नई स्लाविया में मौजूदा 1.5-लीटर TSI टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ 7-स्पीड DSG गियरबॉक्स जारी रह सकता है। वहीं 1.0-लीटर TSI इंजन में मौजूदा 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक की जगह नया 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन मिलने की संभावना जताई जा रही है। मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प भी जारी रह सकता है।   इन कारों से होगा मुकाबला   भारतीय बाजार में लॉन्च होने के बाद नई Skoda Slavia Facelift का मुकाबला Hyundai Verna, Honda City, Volkswagen Virtus और Maruti Suzuki Ciaz जैसी सेडान कारों से होगा। कंपनी का लक्ष्य नए फीचर्स और अपडेटेड डिजाइन के साथ सेडान सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करना है।

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Pixel 11 Price Hike
Google Pixel 11 होगा महंगा, RAM की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई स्मार्टफोन कंपनियों की चिंता

हैदराबाद, एजेंसियां। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। गूगल ने पुष्टि कर दी है कि उसकी आने वाली Pixel 11 सीरीज पिछले मॉडल्स के मुकाबले महंगी होगी। कंपनी ने इसकी वजह मेमोरी चिप यानी RAM की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को बताया है।   मेमोरी चिप की बढ़ती लागत बनी कीमत बढ़ने की वजह   गूगल डिवाइसेज एंड सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट शकील बरकत ने बताया कि कंपनी अब तक सप्लाई चेन की चुनौतियों का असर ग्राहकों तक पहुंचने से रोक रही थी, लेकिन मौजूदा हालात में कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसका असर Pixel फोन के साथ-साथ Pixel Watch समेत पूरी Pixel फैमिली पर पड़ सकता है।   RAM की कीमत में छह गुना तक हुआ इजाफा   कंपनी के अनुसार, RAM की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। 2025 में जहां एक गीगाबाइट RAM की कीमत करीब 2.80 डॉलर थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर लगभग 12 डॉलर तक पहुंच गई है। इससे स्मार्टफोन बनाने की लागत काफी बढ़ गई है।   AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से बढ़ा मेमोरी संकट   मेमोरी चिप की कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग बताई जा रही है। हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की ज्यादा जरूरत के चलते चिप निर्माता कंपनियां अपनी क्षमता का बड़ा हिस्सा AI सेक्टर के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे स्मार्टफोन मेमोरी की सप्लाई प्रभावित हुई है।   Pixel 11 की कीमत में हो सकती है 100 डॉलर तक बढ़ोतरी   गूगल 12 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में होने वाले Made by Google इवेंट में Pixel 11 सीरीज लॉन्च करेगा। लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pixel 11 की शुरुआती कीमत 899 डॉलर हो सकती है, जो पिछले Pixel 10 के 799 डॉलर से करीब 100 डॉलर ज्यादा है।   128GB मॉडल हटाकर 256GB को बनाया जा सकता है बेस वेरिएंट   रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल Pixel 11 सीरीज में 128GB स्टोरेज विकल्प को हटाकर 256GB को बेस मॉडल बना सकता है। वहीं Pixel 11 Pro और Pro XL मॉडल्स की कीमतों में भी करीब 100 डॉलर की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।   सैमसंग और एपल भी बढ़ा चुके हैं कीमतें   RAM और स्टोरेज संकट का असर सिर्फ गूगल तक सीमित नहीं है। सैमसंग, एपल, वीवो और ओप्पो जैसी कंपनियां भी बढ़ती लागत के कारण अपने स्मार्टफोन की कीमतों में बदलाव कर रही हैं। सैमसंग ने अपनी नई Galaxy सीरीज में कुछ मॉडल्स की कीमत बढ़ाई है।   क्वालकॉम ने भी चिप कीमत बढ़ाने का दिया संकेत   स्मार्टफोन इंडस्ट्री को चिप सप्लाई करने वाली कंपनी क्वालकॉम ने भी ग्राहकों को कीमतों में बढ़ोतरी की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, 1 सितंबर के बाद भेजी जाने वाली चिप शिपमेंट्स पर दो अंकों की प्रतिशत वृद्धि हो सकती है।   गूगल कम RAM में बेहतर परफॉर्मेंस पर कर रहा काम   गूगल का कहना है कि वह एंड्रॉयड और ऐप इकोसिस्टम में मेमोरी की जरूरत कम करने पर काम कर रहा है। कंपनी Tensor चिप, एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर और ऑन-डिवाइस AI मॉडल्स के जरिए कम RAM में भी बेहतर परफॉर्मेंस देने का दावा कर रही है।   स्मार्टफोन बाजार पर पड़ेगा सीधा असर   RAM की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में स्मार्टफोन बाजार पर दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्लैगशिप फोन के साथ-साथ अन्य प्रीमियम डिवाइस भी महंगे हो सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 27, 2026 0
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