आज के समय में Smartphone और मोबाइल इंटरनेट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन कई यूजर्स की शिकायत रहती है कि उनका रोज का डेटा बहुत जल्दी खत्म हो जाता है, जबकि वे ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करते। असल में स्मार्टफोन में कई ऐसी सेटिंग्स और ऐप्स होती हैं, जो बैकग्राउंड में लगातार इंटरनेट खर्च करती रहती हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान बदलाव करके आप बिना महंगा नया प्लान लिए अपने मोबाइल डेटा की काफी बचत कर सकते हैं। बैकग्राउंड ऐप्स चुपचाप खत्म करती हैं डेटा फोन में कई ऐप्स लगातार इंटरनेट इस्तेमाल करती रहती हैं, चाहे आप उन्हें इस्तेमाल कर रहे हों या नहीं। इसमें सोशल मीडिया ऐप्स, क्लाउड बैकअप, लोकेशन सर्विस और सिंकिंग फीचर्स शामिल हैं। अगर डेटा बचाना चाहते हैं, तो: जरूरत न होने पर मोबाइल डेटा बंद रखें बैकग्राउंड डेटा लिमिट करें रात में सोते समय इंटरनेट ऑफ करने की आदत डालें यह छोटी आदतें रोज के डेटा खर्च को काफी कम कर सकती हैं। Data Saver मोड जरूर करें ऑन Android और iOS दोनों में डेटा बचाने के लिए खास फीचर दिया जाता है। एंड्रॉयड यूजर्स सेटिंग्स में जाकर “Data Saver” मोड ऑन कर सकते हैं। इससे ऐप्स का बैकग्राउंड इंटरनेट इस्तेमाल सीमित हो जाता है और डेटा की बचत होती है। इसके अलावा यह भी जांच लें कि फोन का हॉटस्पॉट गलती से ऑन तो नहीं है। कई बार यही वजह डेटा तेजी से खत्म होने की होती है। WhatsApp और ऐप अपडेट्स पर रखें नजर WhatsApp जैसे ऐप्स फोटो और वीडियो ऑटोमैटिक डाउनलोड करते रहते हैं। इससे काफी डेटा खर्च होता है। WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर: Media Auto Download को सिर्फ Wi-Fi पर सेट करें HD फोटो/वीडियो डाउनलोड सीमित रखें साथ ही Google Google Play Store और Apple App Store में ऑटो अपडेट को भी Wi-Fi तक सीमित करना बेहतर रहता है। Wi-Fi इस्तेमाल करें, लेकिन सावधानी जरूरी जहां भरोसेमंद Wi-Fi उपलब्ध हो, वहां मोबाइल डेटा की बजाय Wi-Fi इस्तेमाल करना समझदारी हो सकती है। इससे डेटा की अच्छी बचत होती है। हालांकि साइबर एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सार्वजनिक और असुरक्षित Wi-Fi नेटवर्क इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि इससे डेटा चोरी और डिजिटल फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। छोटी आदतें करेंगी बड़ा फर्क कुछ छोटी चीजें भी डेटा बचाने में काफी मदद कर सकती हैं: वीडियो ऑटो-प्ले बंद रखें जरूरत के वीडियो Wi-Fi पर डाउनलोड करें इस्तेमाल के बाद ब्राउजर टैब बंद करें हाई क्वालिटी स्ट्रीमिंग कम करें क्लाउड बैकअप का समय तय करें विशेषज्ञों का कहना है कि नया महंगा प्लान लेने से पहले फोन की सेटिंग्स जरूर चेक करनी चाहिए। कई बार समाधान आपके स्मार्टफोन में ही छिपा होता है।
नई दिल्ली: Vivo ने अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन Vivo T5 Pro 5G की भारत में पहली सेल शुरू कर दी है। कंपनी के T-सीरीज के इस नए डिवाइस को बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और पावरफुल परफॉर्मेंस के साथ पेश किया गया है। पहली सेल में ग्राहकों को ₹3000 तक का डिस्काउंट भी मिल रहा है। कीमत और ऑफर्स Vivo T5 Pro 5G तीन वेरिएंट में उपलब्ध है: 8GB + 128GB: ₹29,999 8GB + 256GB: ₹33,999 12GB + 256GB: ₹39,999 HDFC, SBI और Axis बैंक कार्ड्स के साथ: बेस वेरिएंट पर ₹2000 तक की छूट अन्य वेरिएंट्स पर ₹3000 तक का डिस्काउंट फोन की बिक्री Flipkart, Vivo की आधिकारिक वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू हो चुकी है। डिस्प्ले और डिजाइन 6.8-इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस स्लिम डिजाइन, वजन 213 ग्राम यह सेटअप गेमिंग और वीडियो देखने के अनुभव को स्मूद बनाता है। कैमरा फीचर्स 50MP प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट) 2MP पोर्ट्रेट सेंसर 32MP फ्रंट कैमरा फ्रंट और रियर दोनों से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग परफॉर्मेंस Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर 12GB तक RAM और 256GB स्टोरेज वेपर कूलिंग सिस्टम यह फोन मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बैटरी और चार्जिंग इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9020mAh बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। 90W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट बेहतर बैटरी हेल्थ मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर Android 16 पर आधारित सिस्टम लंबे समय तक सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा
स्मार्टफोन बाजार में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि Oppo का नया फोन Oppo F33 Pro भारत में लॉन्च से ठीक पहले Google Play Console पर लिस्ट हो गया है। इस लिस्टिंग से फोन के कई अहम फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस सामने आ गए हैं। लॉन्च से पहले सामने आए बड़े खुलासे रिपोर्ट के अनुसार, Oppo F33 Pro (मॉडल नंबर CPH2835) Google Play Console पर दिखाई दिया है, जिससे इसके हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी कन्फर्म हो गई है। प्रोसेसर: MediaTek Dimensity 6100+ RAM: कम से कम 8GB OS: Android 16 आधारित ColorOS 16 डिस्प्ले: Full-HD+ (480ppi पिक्सल डेंसिटी) दमदार बैटरी और फास्ट चार्जिंग Oppo F33 Pro की सबसे बड़ी खासियत इसकी बैटरी मानी जा रही है: 7000mAh बैटरी 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट यह बैटरी सेगमेंट में इसे लंबी बैकअप देने वाला स्मार्टफोन बना सकती है। कैमरा और डिजाइन फोन में ड्यूल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा: 50MP प्राइमरी सेंसर 2MP डेप्थ सेंसर वहीं, सेल्फी के लिए 50MP फ्रंट कैमरा दिया जाएगा फोन को Misty Forest, Starry Blue और Passion Red जैसे आकर्षक कलर ऑप्शंस में लॉन्च किया जाएगा। मजबूती और कूलिंग सिस्टम Oppo F33 Pro में IP69K और IPX9K रेटिंग दी जाएगी, जिससे यह: धूल और पानी से बेहतर सुरक्षा देगा इसके अलावा: 4,289 sq mm का Vapour Chamber कूलिंग सिस्टम लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद करेगा। लॉन्च और उपलब्धता Oppo F33 Pro भारत में 15 अप्रैल दोपहर 12 बजे लॉन्च होगा। लॉन्च के बाद यह: Amazon Oppo India वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। Oppo F33 Pro अपनी बड़ी बैटरी, मजबूत बिल्ड और दमदार कैमरा फीचर्स के साथ मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में बड़ा मुकाबला देने के लिए तैयार है। लॉन्च के बाद इसकी कीमत और परफॉर्मेंस ही तय करेगी कि यह यूजर्स के बीच कितना लोकप्रिय होता है।
स्मार्टफोन बाजार में बढ़ती कीमतों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच Nothing Phone 4a Pro ने एक प्रीमियम डिवाइस के रूप में एंट्री ली है। इस बार कंपनी ने अपना फ्लैगशिप लॉन्च नहीं किया, बल्कि ‘a Pro’ सीरीज को ही अपग्रेड करके एक नई रणनीति अपनाई है। करीब 39,999 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ यह फोन मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। डिजाइन: प्रीमियम लुक और यूनिक पहचान Nothing Phone 4a Pro का डिजाइन इस बार पूरी तरह बदला हुआ नजर आता है। प्लास्टिक फ्रेम की जगह अब एयरक्राफ्ट-ग्रेड एल्युमिनियम का मेटल यूनिबॉडी दिया गया है, जो इसे प्रीमियम फील देता है। इसका ट्रांसपेरेंट कैमरा मॉड्यूल और Glyph Matrix डिजाइन इसे भीड़ से अलग बनाते हैं। IP65 रेटिंग के साथ यह फोन मजबूती के मामले में भी बेहतर साबित होता है। डिस्प्ले: ब्राइट और शार्प, लेकिन कुछ सीमाएं फोन में 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1.5K रिजॉल्यूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। कंपनी ने 144Hz का दावा किया है, लेकिन वास्तविक इस्तेमाल में यह 120Hz तक ही सीमित रहता है। HDR सपोर्ट होने के बावजूद OTT ऐप्स पर इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। सॉफ्टवेयर: यूनिक एक्सपीरियंस Android 16 आधारित Nothing OS 4.1 इस फोन को अलग पहचान देता है। Glyph Matrix फीचर, AI Eraser और नए विजेट्स इसे फन और उपयोगी बनाते हैं। हालांकि, अब इसमें कुछ प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स भी मिलते हैं, जो पहले की तरह पूरी तरह क्लीन अनुभव नहीं देते। परफॉर्मेंस: ठीक-ठाक लेकिन टॉप नहीं फोन में Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है, जो रोजमर्रा के काम और गेमिंग के लिए ठीक है। Call of Duty जैसे गेम्स स्मूद चलते हैं Genshin Impact जैसे भारी गेम्स मीडियम सेटिंग पर बेहतर चलते हैं हालांकि, इस कीमत पर कुछ प्रतियोगी फोन बेहतर परफॉर्मेंस ऑफर करते हैं। कैमरा: सबसे बड़ा अपग्रेड Nothing Phone 4a Pro का कैमरा इस बार सबसे बड़ा आकर्षण है। 50MP प्राइमरी कैमरा शानदार डिटेल और नैचुरल कलर देता है 50MP टेलीफोटो (3.5x zoom) इस सेगमेंट में खास बनाता है लो-लाइट फोटोग्राफी में भी अच्छा प्रदर्शन हालांकि, सेल्फी कैमरा औसत है और वीडियो रिकॉर्डिंग में कुछ कमियां नजर आती हैं। बैटरी: दमदार और भरोसेमंद भारत में 5,400mAh बैटरी के साथ यह फोन पूरे दिन आराम से चल जाता है। हेवी यूज में भी दिनभर का बैकअप 50W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट खरीदना चाहिए या नहीं? Nothing Phone 4a Pro एक ऐसा स्मार्टफोन है जो डिजाइन, कैमरा और सॉफ्टवेयर के दम पर खुद को अलग साबित करता है। अगर आप यूनिक डिजाइन और शानदार कैमरा चाहते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प है। लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ परफॉर्मेंस है, तो बाजार में बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।