अयोध्या

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर बयान देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का बयान, बोले- SIT जांच में साधु-संतों की संलिप्तता नहीं मिली

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर CM योगी का बड़ा बयान, बोले- साधु-संतों की संलिप्तता नहीं मिली लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच में किसी साधु या संत की संलिप्तता नहीं पाई गई है।   SIT जांच को लेकर योगी ने स्थिति साफ की     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर साधु-संतों को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं है। योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं और यह मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी उठा है।     विपक्ष पर भी साधा निशाना     मुख्यमंत्री ने मामले को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा। विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामे के बीच योगी ने आरोप लगाया कि विपक्ष अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करेंगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।     दोषियों पर होगी कार्रवाई     योगी आदित्यनाथ पहले भी इस मामले में कह चुके हैं कि जन आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जून में उन्होंने जांच के नतीजे सामने आने का इंतजार करने की बात कही थी और कहा था कि दोषी कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।   राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष और दोषियों की पहचान जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
Ram Mandir Offering Case
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में टिन्नू यादव और मनीष 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर

अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी एवं गबन मामले में मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव को 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। शनिवार सुबह 8:40 बजे से शुरू हुई रिमांड के तहत दोनों आरोपियों को जिला कारागार से पुलिस लाइन स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस की संयुक्त पूछताछ के लिए एसओजी कार्यालय पहुंचाया गया। इस दौरान टिन्नू यादव मीडिया और लोगों की नजरों से बचने के लिए पूरे समय गमछे से अपना चेहरा ढके रहा।   जांच एजेंसियों के अनुसार जांच एजेंसियों के अनुसार, इस रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से मंदिर के चढ़ावे की कथित रकम के गबन, उसके बंटवारे और धन के इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन पूछताछ की जाएगी। पुलिस उन्हें उन स्थानों पर भी ले जा सकती है, जहां कथित रूप से चढ़ावे की राशि का वितरण किया जाता था। इसके अलावा रियल एस्टेट, निर्माण कार्य, मकानों, हॉस्टलों और अन्य संपत्तियों में किए गए संभावित निवेश की भी जांच होगी।   नकदी, आभूषण और दस्तावेजों की बरामदगी पर फोकस पुलिस का मुख्य उद्देश्य मामले से जुड़ी नकदी, आभूषण और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी करना है। इससे पहले तीन चरणों की पुलिस कस्टडी के दौरान छह अन्य आरोपियों से पूछताछ में जांच एजेंसियों को कई अहम साक्ष्य मिले थे। इस दौरान दस्तावेज, आभूषण और दो चारपहिया वाहन भी बरामद किए गए थे।   सूत्रों के मुताबिक  सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट में यह उल्लेख है कि टिन्नू यादव के पास मंदिर की दानपेटिका (हुंडी) की चाबी रहती थी। इसी आधार पर जांच एजेंसियां मान रही हैं कि मुख्य आरोपियों से पूछताछ इस मामले का सबसे अहम चरण साबित हो सकती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान चढ़ावे की रकम के गबन, उसके निवेश, पूरे नेटवर्क और मामले में शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस और एसआईटी सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटी हुई हैं।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Ram Mandir Offering Theft
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CBI जांच की मांग पर CJI सूर्यकांत की बेंच करेगी सुनवाई

नई दिल्ली, एजेंसियां। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मामले में दायर याचिकाओं में केंद्रीय जांच ब्यूरो से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश  सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।   CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग   याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। याचिका में CBI के नेतृत्व में जांच कराने और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी की गई है।   मंदिर दान की पारदर्शिता पर उठे सवाल   याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे की व्यवस्था में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी से कराई जानी चाहिए जिसके पास बड़े वित्तीय मामलों की जांच का अनुभव हो।   सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई   मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इसे सूचीबद्ध किया है। रिपोर्टों के अनुसार, 13 जुलाई को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।   अयोध्या पुलिस भी कर रही जांच   इस मामले में अयोध्या पुलिस की ओर से भी जांच जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान कुछ संदिग्धों से पूछताछ की गई है और कथित रूप से चढ़ावे में शामिल आभूषणों से जुड़े मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।   मामले पर देशभर की नजर   राम मंदिर से जुड़ा यह मामला धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है कि अदालत इस मामले में CBI जांच या किसी अन्य जांच व्यवस्था को लेकर क्या दिशा-निर्देश देती है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Baba Baidyanath Dham
बाबाधाम का होगा भव्य कायाकल्प, अयोध्या मॉडल पर 30 एकड़ में बनेगा आधुनिक कॉरिडोर

देवघर। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अयोध्या की तर्ज पर मंदिर परिसर के आसपास लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में भव्य कॉरिडोर विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाना और मंदिर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत का संरक्षण करना है।   सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एनआईटी पटना को बाबा बैद्यनाथ धाम के समग्र विकास की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रस्तावित योजना के पहले चरण में 30 एकड़ क्षेत्र में कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में करीब 40.24 एकड़ क्षेत्र में रणनीतिक विकास कार्य होंगे, जबकि तीसरे चरण में 83.70 एकड़ क्षेत्र में फैले ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर काम किया जाएगा।    शिवगंगा, मानसरोवर, सतार पोखरिया और जलसार योजना के तहत शिवगंगा, मानसरोवर, सतार पोखरिया और जलसार जैसे धार्मिक महत्व वाले जल निकायों का संरक्षण किया जाएगा। साथ ही, बाबाधाम को देवघर के चार प्रमुख प्रवेश मार्गों से जोड़ने के लिए अलग-अलग तीर्थयात्री पहुंच मार्ग भी विकसित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुगम हो सके।   मास्टर प्लान में मंदिर के चारों ओर 750 मीटर क्षेत्र को 'कोर हेरिटेज जोन' बनाने का प्रस्ताव है। इस क्षेत्र में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। केवल आपातकालीन सेवाओं, मंदिर प्रशासन और अधिकृत इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। इसके बाहर 750 से 1000 मीटर तक 'मैनेजमेंट जोन' विकसित किया जाएगा, जहां मल्टीलेवल पार्किंग, तीर्थयात्री सुविधा केंद्र, सार्वजनिक परिवहन इंटरचेंज और विश्राम स्थल बनाए जाएंगे।   इमरजेंसी एक्सेस कॉरिडोर भी बनाया जाएगा इसके अलावा 20 मीटर चौड़ा इमरजेंसी एक्सेस कॉरिडोर भी बनाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किया जा सके। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लागू करने से पहले राज्य सरकार, देवघर जिला प्रशासन, नगर निगम, बाबा बैद्यनाथ मंदिर ट्रस्ट और अन्य संबंधित एजेंसियों की मंजूरी आवश्यक होगी। योजना पूरी होने के बाद बाबाधाम न केवल श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगा, बल्कि देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Arvind Kejriwal questions the legal authority of the SIT probing alleged irregularities in Ayodhya Ram Temple donation funds.
राम मंदिर चंदा मामला: SIT पर केजरीवाल के सवाल, बोले- ‘चोरों को बचाने के लिए बनाई गई जांच समिति’

  नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Devotees visit Ayodhya Ram Temple as legal scrutiny intensifies over donation box theft and financial audit demands.
राम मंदिर डोनेशन विवाद पर बढ़ा बवाल, हाईकोर्ट में CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग

  प्रयागराज/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) के जरिए पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोहित अशोक ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता और कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इतने संवेदनशील और गंभीर मामले में SIT जांच के नाम पर केवल "लीपापोती" की जा रही है। विजिलेंस विभाग को सौंपा गया था ज्ञापन एएनआई के अनुसार, अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि उन्होंने 8 जून को उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग के प्रधान सचिव को ज्ञापन सौंपकर राम मंदिर ट्रस्ट और दान पेटी में कथित चोरी की CBI जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद 9 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की जा सकती है। इसी बीच उन्होंने 12 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। SIT जांच की वैधता पर सवाल मोहित अशोक ने आरोप लगाया कि याचिका दाखिल होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने जल्दबाजी में राज्य सरकार से संपर्क कर SIT जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि SIT के गठन का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार, आम नागरिकों के लिए यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि उनके पास कोई दस्तावेजी साक्ष्य हैं, तो उन्हें SIT के समक्ष कैसे प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा, "SIT के गठन, उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।" जांच रिपोर्ट में देरी पर उठे सवाल याचिकाकर्ता ने दावा किया कि SIT की रिपोर्ट सात दिनों के भीतर आने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि: राम मंदिर ट्रस्ट के गठन से अब तक हुए सभी वित्तीय लेन-देन का CAG द्वारा विशेष ऑडिट कराया जाए। दान पेटी में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। बढ़ सकता है राजनीतिक और कानूनी विवाद राम मंदिर देश की आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने मामले को राजनीतिक और कानूनी रूप से और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
CM Yogi Adityanath
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर पहली बार बोले सीएम योगी, कहा- SIT करेगी निष्पक्ष जांच

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और सच सामने लाया जाएगा।   "दूध का दूध, पानी का पानी करेगी SIT" जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर काम करेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। योगी ने कहा, "SIT दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।"   श्रद्धालुओं की भावनाओं का रखें सम्मान   मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और संबंधित पक्षों से अपील की कि वे मामले पर बिना तथ्य के बयानबाजी न करें। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए ऐसी कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए जिससे भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हों।   विपक्ष पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों की चिंता करने का दावा कर रहे हैं, वही अतीत में कारसेवकों पर गोली चलाने के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में विकास कार्यों की अनदेखी हुई, जबकि वर्तमान सरकार धार्मिक स्थलों के विकास, गरीबों के कल्याण और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है।   वीरांगनाओं के सम्मान का भी किया उल्लेख योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं झलकारी बाई, अवंतीबाई और ऊदा देवी पासी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में विशेष पहल की गई है। उन्होंने बताया कि इन वीरांगनाओं के नाम पर पीएसी की तीन महिला बटालियन बनाई गई हैं, जिनमें केवल महिला अभ्यर्थियों की भर्ती की जाती है।   मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच निष्पक्ष होगी और सरकार पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Ram Navami Surya Tilak
रामनवमी पर दिव्य दृश्य, रामलला के ललाट पर सूर्यदेव ने किया तिलक

लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या की पावन रामनगरी में रामनवमी उत्सव इस बार विशेष श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। राम जन्मभूमि मंदिर में शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे, भगवान सूर्यदेव की किरणों ने रामलला के ललाट पर तिलक किया। यह दिव्य क्षण लगभग चार मिनट तक बना रहा। खास बात यह रही कि यह सूर्य तिलक उसी समय हुआ, जिसे भगवान श्रीराम के जन्म का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में अयोध्या पहुंचे।   आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम रामलला के सूर्य तिलक को लेकर मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। यह केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी बेहद खास रहा। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया के लिए विशेष रिफ्लेक्टर, लेंस और मिरर सिस्टम लगाए गए थे। सूर्य की किरणों को एक निश्चित दिशा में मोड़कर करीब 75 मिलीमीटर के आकार में रामलला के ललाट तक पहुंचाया गया, जिससे तिलक का दिव्य दृश्य साकार हुआ।   तीन दिन तक चला सफल ट्रायल इस विशेष आयोजन की तैयारी पहले से ही की जा रही थी। मंदिर प्रशासन ने बताया कि लगातार तीन दिन तक सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया था। बृहस्पतिवार को भी दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ी थीं, जिसके बाद शुक्रवार को रामनवमी के अवसर पर इसे विधिवत रूप से दोहराया गया।   पूरे देश ने देखा राम जन्मोत्सव रामनवमी के इस पावन अवसर पर रामलला का अभिषेक, शृंगार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे देश और विदेश में बैठे करोड़ों श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण के साक्षी बन सके। इस बार रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस उत्सव का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

Unknown मार्च 27, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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