नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने अदालत से CBI की चुनौती को खारिज करने की मांग की है। CBI की याचिका को बताया जल्दबाजी में उठाया गया कदम केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से दाखिल याचिका में CBI की पुनरीक्षण याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए गए हैं। सिसोदिया ने अपनी अर्जी में कहा है कि CBI ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका असाधारण जल्दबाजी में दाखिल की। उनकी ओर से अदालत से Criminal Revision Petition No. 134 of 2026 को गैर-स्वीकार्य घोषित करने या न्यायहित में उचित आदेश पारित करने का आग्रह किया गया है। आबकारी नीति मामले में क्या है विवाद यह मामला दिल्ली की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा है। मामले में CBI ने जांच के बाद आरोप लगाए थे, जबकि केजरीवाल और सिसोदिया समेत आरोपियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद CBI ने उस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अब केजरीवाल और सिसोदिया की नई याचिकाओं से मामले में कानूनी लड़ाई का एक और चरण शुरू हो गया है। हाईकोर्ट में आगे क्या होगा अब दिल्ली हाईकोर्ट यह देखेगा कि CBI की पुनरीक्षण याचिका कानूनी रूप से सुनवाई योग्य है या नहीं। इसके साथ ही केजरीवाल और सिसोदिया की ओर से उठाए गए आपत्तियों पर भी सुनवाई होगी।
केजरीवाल बोले- ग्राहकों की चिंताओं का जवाब दें वाहन निर्माता, E20 ईंधन को लेकर स्पष्टता जरूरी नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने E20 ईंधन को लेकर ऑटोमोबाइल कंपनियों की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए कंपनियों को सामने आकर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। वाहन चालकों की चिंताओं पर उठे सवाल E20 पेट्रोल को लेकर कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज, इंजन की क्षमता और लंबे समय में वाहन पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि नए वाहन E20 ईंधन के लिए तैयार किए गए हैं और इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। केजरीवाल ने सरकार से मांगा जवाब केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 लागू करने से पहले आम उपभोक्ताओं को इसके फायदे और संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने सरकार से मांग की कि वाहन मालिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाए और किसी भी नुकसान की स्थिति में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकार का तर्क- प्रदूषण कम करने और आयात घटाने में मदद केंद्र सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इथेनॉल मिश्रण को भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ऑटो कंपनियों ने दी सफाई कई वाहन निर्माता कंपनियों ने कहा है कि उनके नए मॉडल E20 ईंधन के अनुरूप बनाए गए हैं। कंपनियों का दावा है कि E20 से वाहनों की सामान्य कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, पुराने वाहनों को लेकर उपभोक्ताओं में अभी भी सवाल बने हुए हैं।
CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, सरकार और CJP के बीच शुक्रवार को बातचीत होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के प्रतिनिधि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। CJP का दावा- सरकार पर बढ़ा दबाव CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी करना इस बात का संकेत है कि सरकार पर आंदोलन का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए। रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोपहर में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत प्रस्तावित है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हो सकती है बातचीत सूत्रों के मुताबिक, CJP की मांग पर सरकार न्यूट्रल स्थान पर बातचीत के लिए तैयार हुई है और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में आंदोलन से जुड़ी मांगों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित नीट पेपर लीक मामले और आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। CJP का कहना है कि वह केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्रवाई चाहता है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर केजरीवाल का सवाल इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को जमानत मिल चुकी है और सीबीआई ने अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि असली दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तो केवल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार पर पेपर लीक माफिया को बचाने का भी आरोप लगाया। बातचीत पर टिकी निगाहें जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। ऐसे में सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित बैठक को आंदोलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या प्रदर्शन आगे भी जारी रहता है। विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर है और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। जंतर-मंतर पहुंचे केजरीवाल ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई गलत है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। केजरीवाल ने कहा, "मोदी जी के अपने बच्चे नहीं हैं, इसलिए वह बच्चों का दर्द नहीं समझते। ये सभी हमारे बच्चे हैं। बच्चों को पीटना सही नहीं है।" छात्रों से बोले- डटे रहो, जीत आपकी होगी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि वे डटे रहें। दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह को भी जनता के सामने झुकना पड़ता है।" शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की तीन प्रमुख मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। देश में पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली लागू हो। पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। हिरासत में लिए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद की मांग केजरीवाल ने मंदिर मार्ग और संसद मार्ग थाने का दौरा करने के बाद कहा कि हिरासत में लिए गए छात्रों को लंबे समय से बैठाकर रखा गया है। उन्होंने नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को पत्र लिखकर मांग की कि प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर की प्रतियां और हिरासत में लिए गए लोगों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए, ताकि छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके। AAP ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों को लेकर चिंता जताते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश के भविष्य के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बीच आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिए लापता छात्रों का पता लगाने और घायलों तक चिकित्सीय सहायता पहुंचाने में मदद की जाएगी। छात्रों के मुद्दे पर तेज हुई सियासत छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
CJP Protest Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान सोमवार को हुए हंगामे के बाद कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की मानवीय तस्वीर को उजागर किया। कहीं सड़क पर बिखरी चप्पलें दिखीं, कहीं घायल और रोते हुए छात्र-छात्राएं नजर आए, तो कहीं भीड़ के बीच एक प्रदर्शनकारी बेहोश पड़ा दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा किए और लाठीचार्ज के आरोप लगाए। 'सबसे आगे था, अचानक लाठीचार्ज शुरू हो गया' सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में 16 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी दावा करता है कि वह मार्च के दौरान सबसे आगे चल रहा था, तभी अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। छात्र का कहना है कि उसे बुरी तरह पीटा गया और वह समझ नहीं पा रहा कि उसकी गलती क्या थी। एक अन्य वीडियो में एक युवक अचेत अवस्था में दिखाई देता है, जिसके आसपास मौजूद लोग उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश करते नजर आते हैं। रोती छात्रा ने सुनाई आपबीती एक अन्य वीडियो में एक छात्रा भावुक होकर बताती है कि वह सुबह से प्रदर्शन में शामिल थी। उसके अनुसार, पुलिस कार्रवाई शुरू होने के बाद वह वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इसी दौरान लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को चोटें आईं। वीडियो में छात्रा रोते हुए पूरे घटनाक्रम का जिक्र करती दिखाई देती है। बिखरी चप्पलें बनीं अफरातफरी की गवाह प्रदर्शन के बाद सड़क पर बड़ी संख्या में चप्पलें और अन्य सामान बिखरा दिखाई दिया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे किन लोगों की थीं, लेकिन ये तस्वीरें प्रदर्शन के दौरान मची भगदड़ और अव्यवस्था की कहानी बयां करती नजर आईं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इन तस्वीरों को आंदोलन की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक बताया। पुलिसकर्मी की पत्नी भी पहुंची प्रदर्शन में वायरल वीडियो में एक महिला ने बताया कि उनके पति दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं, लेकिन वह अपने बेटे के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। इसी वजह से वह प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं। उनका बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए कई दावे सोमवार की घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो और पोस्ट साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने चोट लगने, पुलिस कार्रवाई और आंदोलन के दौरान हुई अफरातफरी के अपने-अपने अनुभव बताए। इन वीडियो में छात्रों की चिंता, अभिभावकों की भावनाएं और आंदोलन के दौरान की अव्यवस्था साफ दिखाई देती है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई थी झड़प सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे। संसद मार्ग के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
CJP Protest Updates: दिल्ली में CJP के संसद मार्च के बाद जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई। CJP प्रमुख अभिजीत दीपके सुबह-सुबह धरना स्थल पहुंचे और सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों, खासकर घायल छात्राओं से माफी मांगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने घायल छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाने और सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का ऐलान किया। इस बीच सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को देखते हुए वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे। अभिजीत दीपके ने समर्थकों से मांगी माफी CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह उन सभी समर्थकों से माफी मांगते हैं, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए, विशेषकर उन छात्राओं से जिनके साथ कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट की। उन्होंने लिखा कि, "हम और बेहतर कर सकते थे। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से आपको बचाने के लिए मैं और अधिक प्रयास कर सकता था।" उन्होंने घायल प्रदर्शनकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने की भी अपील की। केजरीवाल करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, फिर जाएंगे RML अस्पताल आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखेंगे। इसके बाद वह संसद मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाएंगे। मनीष तिवारी ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक शेर साझा किया। उन्होंने लिखा— "संघर्षों के साए में, असली आज़ादी पलती है, इतिहास उधर मुड़ जाता है, जिस ओर जवानी चलती है।" इसके साथ उन्होंने लिखा कि आंदोलित छात्र ही मजबूत राष्ट्र की पहचान हैं। संजय राउत बोले- 20 जुलाई लोकतंत्र के लिए काला दिन शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है और 20 जुलाई को भारतीय लोकतंत्र के लिए "काला दिवस" के रूप में याद रखा जाएगा। कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? डॉक्टरों के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन वह अभी भी मेडिकल निगरानी में हैं। उनका ब्लड शुगर सामान्य से कम है और शरीर में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है। जांच में एनीमिया और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या भी कम पाई गई है। डॉक्टरों ने IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन वांगचुक ने इसे लेने से इनकार कर दिया है। फिलहाल वह ORS और पोटैशियम की दवा ले रहे हैं। CJP का दावा- गीतांजलि के साथ हुई बदसलूकी CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ पुलिस ने बदसलूकी की। उनका दावा है कि उन्हें बाल पकड़कर वाहन से बाहर खींचा गया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस पहले ही ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने किसी महिला प्रदर्शनकारी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया और लोगों से भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील की है। अनशन जारी रखने पर अड़े सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त नहीं करेंगे। इससे जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह कदम उठाया गया। लंबे समय से उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी। सफदरजंग अस्पताल के अनुसार सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे भर्ती किया गया। अस्पताल ने बताया कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। शरीर में पानी की कमी और लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक का पोटेशियम स्तर 17 जुलाई की शाम 4.3 से घटकर 18 जुलाई की सुबह 2.9 हो गया है। गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं, बल्कि "जेल" जैसा माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे आंदोलन का संचालन प्रभावित हो रहा है। गीतांजलि ने यह भी घोषणा की गीतांजलि ने यह भी घोषणा की कि अब यह आंदोलन पूरे देश में यात्रा के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं उनका प्रतिनिधित्व करेंगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उधर, जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे तीन अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की भी तबीयत बिगड़ने की खबर है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी और सांसद चंद्रशेखर आजाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के बजाय सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। विपक्ष ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की भावना के लिए चिंताजनक बताया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में पहुंचे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। साथ ही, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सराहना करते हुए उन्हें देश का शिक्षा मंत्री बनाए जाने की वकालत की। "सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव ला सकते हैं" प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक अपने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री और देश के 140 करोड़ नागरिकों से अपील करता हूं कि सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सरकार ऐसा करेगी, क्योंकि उन्हें डर है कि वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकते हैं। पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल अरविंद केजरीवाल ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट समेत कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, लेकिन सरकार युवाओं का भरोसा बहाल करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा सकी। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। 2011 के आंदोलन की दिलाई याद अपने संबोधन में केजरीवाल ने वर्ष 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर आकर उन्हें वह समय याद आ गया, जब वे अन्ना हजारे के साथ इसी स्थान पर आंदोलन कर रहे थे। केजरीवाल ने कहा कि उस समय की सरकार ने जनता की आवाज को नजरअंदाज किया था, जिसका राजनीतिक परिणाम उसे कुछ वर्षों बाद भुगतना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि यदि मौजूदा सरकार भी छात्रों और युवाओं की मांगों को अनसुना करती रही, तो वर्ष 2029 के आम चुनाव में उसे इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार से संवाद की अपील अपने भाषण के अंत में केजरीवाल ने केंद्र सरकार से छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
पणजी: दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब गोवा में उसी कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी है। गठबंधन पर अंतिम फैसला गोवा इकाई ही करेगी। केजरीवाल ने राज्य नेतृत्व को दी जिम्मेदारी गोवा दौरे पर पहुंचे AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि इस संबंध में राज्य नेतृत्व निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक और उनकी टीम जो फैसला करेगी, पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। केजरीवाल ने कहा कि गठबंधन से जुड़े सभी सवालों का जवाब गोवा इकाई ही देगी, क्योंकि स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को वही बेहतर तरीके से समझती है। गठबंधन वार्ता के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति AAP ने संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक, कार्यकारी अध्यक्ष गर्सन गोम्स और संगठन सचिव प्रशांत नाइक शामिल हैं। यह समिति कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ प्री-पोल गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा करेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी लड़ाई किसी एक दल से नहीं, बल्कि भाजपा की नीतियों और विचारधारा के खिलाफ है। AAP ने विपक्षी दलों से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील भी की है। कांग्रेस ने भी छोड़े बातचीत के दरवाजे खुले गोवा प्रदेश कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी वोटों का बिखराव रोकना जरूरी है और इस दिशा में बातचीत की जा सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर दिल्ली, पंजाब और गुजरात में कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक राजनीति करने वाली AAP का गोवा में बदला हुआ रुख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस और AAP के बीच चुनावी समझौता होता है, तो 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव में विपक्ष भाजपा के सामने अधिक मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।
नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हुई, तो राज्य सरकार तक संकट में पड़ सकती है। 'राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा गायब' अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा, कीमती गहने और हीरे-जवाहरात कथित रूप से गायब हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और आभूषणों से भरे कई बक्सों के गायब होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। केजरीवाल ने कहा, "न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, न प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोई कार्रवाई की और न ही सीबीआई ने जांच शुरू की।" एसआईटी कर रही है मामले की जांच राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी रोजाना पूछताछ और जांच से जुड़ी रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित कर रही है और उसकी दैनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है। आभूषण और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट पदाधिकारी आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक दान, जांच के दायरे में कई पहलू जानकारी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा कुंभ मेले के दौरान सामने आया, जब प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जा रही थीं। एसआईटी की जांच केवल दान राशि के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 71 एकड़ भूमि बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। शेखर सुमन ने शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए। अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।" शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।" शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।
चंडीगढ़: पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में व्यापारियों को निशाना बना रही है। उन्होंने छोटे व्यापारियों से घबराने की बजाय एकजुट रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब और राज्य सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है और सभी मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे। GST घोटाले की जांच में ED का एक्शन इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच के सिलसिले में पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मोबाइल फोन की बिक्री से जुड़े कथित जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच कर रही है और कई व्यक्तियों तथा कारोबारी संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। मोबाइल फोन कारोबार से जुड़ा है मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला मोबाइल फोन के व्यापार और उससे संबंधित कर लेनदेन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। ईडी अब वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे व्यापारियों और विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर की जा रही है। ईडी की ओर से अभी तक छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई इस कार्रवाई को राज्य की हालिया बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और क्या एजेंसी इस मामले में किसी बड़े खुलासे तक पहुंच पाती है।
पंजाब नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। चुनाव नतीजों में AAP ने 900 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन उम्मीदों से काफी कमजोर रहा। इन चुनावों को राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था। नतीजों ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी का प्रभाव बरकरार है। AAP ने जीते सबसे ज्यादा वार्ड रात 11 बजे तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार, कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 957 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस 397 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्ड जीते। शिरोमणि अकाली दल (SAD) को 191 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी केवल 167 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी। प्रमुख दलों का प्रदर्शन पार्टी जीती सीटें (वार्ड) आम आदमी पार्टी (AAP) 957 कांग्रेस (INC) 397 निर्दलीय (IND) 251 शिरोमणि अकाली दल (SAD) 191 भारतीय जनता पार्टी (BJP) 167 बहुजन समाज पार्टी (BSP) 7 बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे? नगर निकाय चुनावों में बीजेपी का पांचवें स्थान पर रहना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पार्टी न केवल कांग्रेस और AAP से पीछे रही, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से भी कम सीटें हासिल कर सकी। विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में संगठन विस्तार और जनाधार बढ़ाने के लिए बीजेपी को नई रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन राज्य में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर पा रही है। जीत के बाद AAP में जश्न का माहौल नतीजों के बाद पंजाब भर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। पार्टी कार्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई और समर्थकों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। पार्टी नेताओं ने इसे राज्य सरकार के कामकाज और विकास नीतियों पर जनता की मुहर बताया। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर साधा निशाना जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता का आभार जताया। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन ताकतों को जवाब दिया है जो लगातार लोगों और छोटे कारोबारियों को परेशान करने का काम कर रही थीं। केजरीवाल ने बीजेपी को "ईडी पार्टी" बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने नकारात्मक राजनीति को खारिज कर दिया है। भगवंत मान बोले- जनता ने विकास की राजनीति को चुना भगवंत मान ने चुनाव परिणामों का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने विकास, काम और जनहित की राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे यह दिखाते हैं कि लोग नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजाब की राजनीति के लिए क्या संकेत? नगर निकाय चुनावों के नतीजे यह संकेत देते हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस ने दूसरे स्थान पर रहकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन सत्तारूढ़ दल से उसका अंतर काफी बड़ा है। वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के सामने आने वाले समय में अपने जनाधार को मजबूत करने की चुनौती बनी रहेगी। इन नतीजों को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाले संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।
NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।
राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने पर दिल्ली CM ने साधा निशाना आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके कई राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। "आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार" रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि AAP, जिसने कभी क्रांति का नारा दिया था, अब अविश्वास और अलगाव के कारण बिखर रही है। उन्होंने लिखा, "आपकी पार्टी में अब आम आदमी नहीं, सिर्फ भ्रष्ट लोग बचे हैं। राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों का जाना आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार है। दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी है।" राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने थामा BJP का हाथ AAP के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे बड़े नेताओं ने भाजपा जॉइन कर ली। इन नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का ऐलान किया। बाद में भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका स्वागत किया। AAP में मचा सियासी भूचाल इन नेताओं के जाने से AAP के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के लिए यह सिर्फ संख्या का नुकसान नहीं, बल्कि संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषकर राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेताओं की विदाई ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। BJP ने बताया स्वाभाविक फैसला दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस घटनाक्रम को स्वाभाविक करार दिया। उन्होंने कहा कि AAP में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जिसका नतीजा अब सामने आया है। पंजाब की राजनीति पर भी पड़ेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि इस टूट का असर पंजाब की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, जहां AAP की सरकार है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
नई दिल्ली में AAP को बड़ा झटका, राज्यसभा में संख्या घटकर रह गई सिर्फ 3 आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने संगठन से नाता तोड़ लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी के पास अब सिर्फ 3 राज्यसभा सांसद बचे हैं। कौन-कौन से सांसद पार्टी में रह गए? बड़े पैमाने पर हुए इस बदलाव के बाद जो तीन सांसद AAP के साथ बने हुए हैं, वे हैं: Balbir Singh Seechewal Sanjay Singh ND Gupta इन नेताओं के साथ पार्टी अब उच्च सदन में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। 7 सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ सूत्रों के मुताबिक, सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाने का फैसला किया है। यह फैसला AAP के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इनमें कई वरिष्ठ नाम शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। राघव चड्ढा का दावा: दो-तिहाई समर्थन मिला इस पूरे घटनाक्रम के बीच Raghav Chadha ने दावा किया कि उनके पास AAP के राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक समर्थन है, जो कानून के अनुसार किसी भी पार्टी में विलय के लिए जरूरी माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक मजबूरी नहीं बल्कि सिद्धांतों के आधार पर लिया गया है। “AAP अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गई” चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मजबूत किया, वह अब अपने मूल आदर्शों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी की दिशा और कार्यशैली बदल गई है। केजरीवाल की प्रतिक्रिया पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal ने इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों के साथ “धोखा” है और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। राजनीतिक तनाव और बढ़ा इस घटनाक्रम के बाद AAP के भीतर तनाव और बढ़ गया है। पार्टी में नेतृत्व, नीतियों और अंदरूनी मतभेदों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव AAP के लिए राज्यसभा में बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।
नई दिल्ली में AAP के भीतर भारी उथल-पुथल आम आदमी पार्टी (AAP) एक बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal की अपने सांसदों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश पूरी तरह विफल हो गई। सूत्रों के मुताबिक, तय बैठक से पहले ही कई सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया था। मीटिंग से पहले ही बन चुका था इस्तीफे का मन सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल ने शुक्रवार शाम अपने निवास पर कुछ असंतुष्ट सांसदों के साथ बैठक बुलाने की योजना बनाई थी, ताकि स्थिति को संभाला जा सके। लेकिन इससे पहले ही सांसदों ने सामूहिक रूप से AAP छोड़ने का निर्णय ले लिया। हालांकि उन्होंने एक साथ औपचारिक योजना नहीं बनाई थी, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सभी ने पार्टी से अलग होने का मन पहले ही बना लिया था। 7 सांसदों का BJP में शामिल होने का दावा इसी बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब AAP के सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया। इनमें प्रमुख नाम Raghav Chadha और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने दावा किया कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। केजरीवाल का प्रस्ताव भी नहीं रोक सका टूट बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने नाराज सांसदों को मनाने के लिए उन्हें भविष्य में टिकट देने और पार्टी में बेहतर अवसर देने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन यह प्रयास भी नाकाम रहा। सूत्रों का कहना है कि कई सांसद पहले से ही पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे, इसलिए बातचीत का मौका ही नहीं बन सका। AAP में अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व पर सवाल पार्टी में यह संकट तब और बढ़ गया जब राज्यसभा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर विवाद सामने आया। इसके बाद असंतोष और बढ़ता गया, जिससे कई सांसदों ने दूरी बना ली। BJP ने किया स्वागत, AAP ने लगाया ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप BJP की ओर से इन सांसदों का स्वागत किया गया और पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें पारंपरिक तरीके से शामिल किया। वहीं AAP ने BJP पर “ऑपरेशन लोटस” चलाकर सांसदों को तोड़ने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है। AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका लगभग 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी AAP के लिए यह घटनाक्रम अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से संगठन की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
नई दिल्ली में राजनीति का बड़ा उलटफेर देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal को गहरा राजनीतिक झटका दिया है। सूत्रों के अनुसार, AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने BJP के साथ जाने का फैसला किया है। यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है। 7 सांसदों का एक साथ पाला बदला राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि AAP के कई सांसद अब BJP के साथ जुड़ रहे हैं। इनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने कभी ईमानदार राजनीति का वादा किया था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, AAP में अब पारदर्शिता और नैतिकता की कमी देखी जा रही है। “AAP अब अपनी राह से भटक चुकी है” – चड्ढा का बयान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को कई साल दिए, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास राजनीति छोड़ने या सही रास्ता चुनने का विकल्प था, और उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। उनका कहना है कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों के साथ मिलकर BJP में शामिल होने का निर्णय लिया गया है। AAP का पलटवार, BJP पर गंभीर आरोप AAP ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “धोखा” करार देते हुए कहा कि जिन नेताओं को AAP ने पहचान दी, वही अब विरोधी खेमे में चले गए हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी दावा किया कि यह कदम राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया घटना के बाद Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर हमला बोला और इसे पंजाब के लोगों के साथ “विश्वासघात” बताया। राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में AAP और BJP की रणनीति क्या होगी और संसद में इसका क्या असर पड़ेगा।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सुनने में आ रहा है कि पश्चिम बंगाल में जमकर SIR के खिलाफ वोट पड़ रहा है, और यह पीएम मोदी के खिलाफ जा रहा है।” रिकॉर्ड वोटिंग ने तोड़ा पुराना आंकड़ा पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर करीब 92.88% मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल 81.56% मतदान हुआ था। इस बार कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में 94% से अधिक वोटिंग दर्ज की गई। जिलों में दिखा भारी उत्साह उत्तरी और दक्षिणी बंगाल के कई जिलों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कूचबिहार में लगभग 96%, दक्षिण दिनाजपुर में 95% और जलपाईगुड़ी में 94% से अधिक मतदान हुआ। वहीं दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसे क्षेत्रों में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। सियासी मायने और दावे विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में मतदान को अक्सर सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) का संकेत माना जाता है। हालांकि, सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) दोनों ही इसे अपने पक्ष में बता रहे हैं। आगे के चरणों पर नजर बंगाल चुनाव का अगला चरण 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। रिकॉर्ड मतदान के बाद अब सभी की नजर अगले चरण और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।