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Kejriwal Targets UP Govt Over Ram Temple Donations

राम मंदिर दान विवाद पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- निष्पक्ष जांच हुई तो योगी सरकार गिर जाएगी

Deepshikha जून 22, 2026 0
Arvind Kejriwal addresses media while raising allegations over Ayodhya Ram Temple donation and financial management irregularities.
Kejriwal Raises Questions on Ayodhya Ram Temple Donations

 

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हुई, तो राज्य सरकार तक संकट में पड़ सकती है।

'राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा गायब'

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा, कीमती गहने और हीरे-जवाहरात कथित रूप से गायब हो गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और आभूषणों से भरे कई बक्सों के गायब होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।

केजरीवाल ने कहा,
"न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, न प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोई कार्रवाई की और न ही सीबीआई ने जांच शुरू की।"

एसआईटी कर रही है मामले की जांच

राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी रोजाना पूछताछ और जांच से जुड़ी रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित कर रही है और उसकी दैनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है।

आभूषण और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप

प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है।

सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट पदाधिकारी आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।

कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक दान, जांच के दायरे में कई पहलू

जानकारी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा कुंभ मेले के दौरान सामने आया, जब प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जा रही थीं।

एसआईटी की जांच केवल दान राशि के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है।

सूत्रों के अनुसार, लगभग 71 एकड़ भूमि बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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तमिलनाडु में बड़ा हादसा: सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया गैस लीक, सात महिला कर्मियों की मौत, 67 कर्मचारी प्रभावित

  चेन्नई/तिरुवल्लूर: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार (21 जून) को एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई (सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट) में अमोनिया गैस रिसाव की बड़ी घटना सामने आई है। हादसे में सात महिला कर्मियों की मौत हो गई, जबकि 67 अन्य कर्मचारी गैस की चपेट में आकर बीमार पड़ गए। कई प्रभावित कर्मचारियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह घटना पेरियापालयम के पास मंजंगरनई स्थित एक निजी फूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुई। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे और प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। 67 कर्मचारी अस्पताल में भर्ती तिरुवल्लूर की जिलाधिकारी एस. कविता ने बताया कि गैस रिसाव से प्रभावित कुल 67 कर्मचारियों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 46 कर्मचारियों का इलाज वेल्स अस्पताल में चल रहा है। 21 लोगों को वेंकटेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, गंभीर रूप से प्रभावित नौ कर्मचारियों को चेन्नई के सरकारी स्टैनली मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका विशेष उपचार जारी है। सात महिला कर्मियों की मौत से शोक हादसे में सात महिला कर्मचारियों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पुलिस मृतकों की पहचान और उनके परिवारों को सूचना देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। अमोनिया गैस रिसाव बना हादसे की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में अमोनिया गैस के रिसाव के कारण यह दुर्घटना हुई। अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में किया जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। अधिक मात्रा में इसके संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, फेफड़ों को नुकसान और गंभीर मामलों में मौत तक हो सकती है। प्रशासन ने दिए जांच के आदेश प्रशासन और पुलिस ने घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों के पालन, गैस रिसाव की वजह और संभावित लापरवाही की जांच के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन या किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इलाके में पुलिस बल तैनात घटना के बाद एहतियात के तौर पर फैक्ट्री परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित कर्मचारियों को हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। तमिलनाडु के इस औद्योगिक हादसे ने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा मानकों और खतरनाक रसायनों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

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अब चोरी का स्मार्टफोन नहीं बिकेगा! लॉन्च हुई 'किल स्विच' तकनीक

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन चोरी की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए ब्रिटेन की दो प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों वर्जिन मीडिया O2 और वोडाफोन-थ्री ने नई 'किल स्विच' तकनीक लॉन्च की है। इस तकनीक का उद्देश्य शोरूम से चोरी किए गए नए स्मार्टफोन्स को पूरी तरह बेकार बनाना है, ताकि उन्हें अवैध बाजार में बेचना संभव न हो। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मोबाइल चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।   कैसे काम करती है 'किल स्विच' तकनीक? यह तकनीक केवल उन नए स्मार्टफोन्स पर लागू होती है, जिन्हें अभी तक किसी ग्राहक को बेचा नहीं गया है। यदि कोई चोर शोरूम से फोन चुराकर पहली बार उसे चालू करता है, तो डिवाइस स्वतः निर्माता के विशेष डेटाबेस में दर्ज हो जाता है। इसके बाद सिस्टम दूर से एक कमांड भेजता है, जिससे फोन पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है। ऐसे में चोरी किया गया स्मार्टफोन इस्तेमाल या दोबारा बेचने लायक नहीं रहता।   हालांकि यह तकनीक केवल रिटेल स्टोर से चोरी हुए नए डिवाइस पर ही लागू होगी। कानूनी रूप से खरीदे गए स्मार्टफोन को टेलीकॉम कंपनियां इस प्रक्रिया के जरिए ब्लॉक नहीं कर सकतीं, क्योंकि बिक्री के बाद उसका स्वामित्व ग्राहक के पास होता है।   मोबाइल चोरी रोकने की बड़ी पहल रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले लंदन में पिछले वर्ष 70 हजार से अधिक लोग मोबाइल चोरी का शिकार हुए। इसी वजह से संगठित अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई। नीदरलैंड में भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर पहले से इसी तरह की तकनीक का उपयोग कर अपने स्टॉक की सुरक्षा कर रहे हैं।   टेक कंपनियों से भी की जा रही मांग पुलिस एजेंसियां और उद्योग संगठन लंबे समय से बड़ी टेक कंपनियों से ऐसे यूनिवर्सल एंटी-थेफ्ट सिस्टम की मांग कर रहे हैं, जो चोरी होने पर किसी भी स्मार्टफोन को स्थायी रूप से निष्क्रिय कर सके। बताया जा रहा है कि Apple पहले से अपने स्टोर्स से चोरी हुए डिवाइस के लिए इसी तरह की व्यवस्था इस्तेमाल करता है। अब उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में अन्य कंपनियां भी ऐसी सुरक्षा तकनीक अपनाकर स्मार्टफोन चोरी की घटनाओं को कम करने की दिशा में कदम उठाएंगी।

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Students and activists protest at Jantar Mantar demanding accountability over NEET paper leak allegations and education reforms.
CJP प्रदर्शन का दूसरा दिन: अभिजीत दीपके ने किसानों से मांगा समर्थन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर में डटे प्रदर्शनकारी

  नई दिल्ली: परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। युवाओं के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने किसानों से भी समर्थन की अपील की और कहा कि छात्रों की लड़ाई अब देशव्यापी जनआंदोलन का रूप ले रही है। अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र हमेशा किसानों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहे हैं और अब उन्हें भी किसानों की एकजुटता और समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा में गड़बड़ी का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है। जंतर-मंतर पर रातभर डटे रहे प्रदर्शनकारी शनिवार को सैकड़ों युवा जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। शाम पांच बजे प्रदर्शन की अनुमति समाप्त होने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से स्थल खाली करने को कहा, लेकिन अभिजीत दीपके और कई समर्थक रातभर धरने पर डटे रहे। दीपके ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की और नीट पुनर्परीक्षा देने वाले छात्रों से परीक्षा समाप्त होने के बाद आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। थाली-चम्मच बजाकर किया विरोध प्रदर्शन अभिजीत दीपके के ‘थाली और चम्मच’ लेकर आने के आह्वान पर बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चम्मचों से थालियां बजाकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग दीपके ने पेपर लीक और प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है और सरकार को उनकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। पुलिस से अलग प्रदर्शन स्थल की मांग दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के लिए दी गई अनुमति शनिवार शाम पांच बजे तक ही थी और प्रदर्शनकारियों को स्थल खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। अभिजीत दीपके ने पुलिस से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर लोगों को जंतर-मंतर आने से न रोकने की अपील करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी केवल न्याय की मांग कर रहे हैं और किसी तरह की अव्यवस्था नहीं फैला रहे हैं। 'शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, बातचीत के लिए तैयार हैं' रातभर चले धरने के दौरान अभिजीत दीपके लगातार समर्थकों को संबोधित करते रहे और अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते रहे। उन्होंने कहा, "हमारा विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है। यदि जवाबदेही तय की जाती है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा देते हैं, तो सरकार के साथ बातचीत के रास्ते खुले हैं।" उन्होंने दोहराया कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती।  

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