झारखंड

देवघर में शुरू हुई 'नमो एंबुलेंस' सेवा, श्रावणी मेले से पहले श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत

anjali kumari जून 22, 2026 0
Namo Ambulance service Deoghar
Namo Ambulance service Deoghar

देवघर। श्रावणी मेले से पहले देवघर में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पहल पर सोमवार से 'नमो एंबुलेंस' सेवा की शुरुआत कर दी गई। फिलहाल चार आधुनिक एंबुलेंस सेवा में शामिल की गई हैं, जिनका उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

 

सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान श्रावणी मेले में स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने कई चुनौतियां देखने को मिलीं। कई बार समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पहले चरण में चार एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत के अनुसार इस सेवा का और विस्तार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

 

श्रावणी मेले में मिलेगी त्वरित चिकित्सा सुविधा


श्रावणी मेले के दौरान देवघर में देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में दुर्घटना, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति या अन्य मेडिकल जरूरतों के दौरान त्वरित एंबुलेंस सेवा काफी अहम मानी जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलेगी और आपात चिकित्सा व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी होगी।

 

कांग्रेस पर साधा निशाना


एंबुलेंस सेवा के शुभारंभ के दौरान सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि यदि पार्टी में नैतिकता बची है तो उसे सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कांग्रेस सत्ता और राजनीतिक हितों तक सीमित हो गई है।

 

सरयू राय के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया


जदयू विधायक सरयू राय द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाने की सलाह दिए जाने संबंधी बयान पर निशिकांत दुबे ने कहा कि सरयू राय अनुभवी नेता हैं और उनके बयान के पीछे निश्चित रूप से कोई राजनीतिक सोच होगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर उनकी सरयू राय से कोई व्यक्तिगत चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः सरयू राय को लग रहा है कि कांग्रेस की वर्तमान राजनीति झारखंड के हित में नहीं है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड में मोहर्रम को लेकर हाई अलर्ट, 16 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात, ड्रोन से होगी निगरानी

रांची: मोहर्रम के अवसर पर झारखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यभर में 16 हजार से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सात कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई जाएंगी। संवेदनशील इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरों और वीडियो सर्विलांस के माध्यम से की जाएगी।   संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर   पुलिस मुख्यालय के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले तनाव या विवाद की घटनाएं सामने आई हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों के जरिए जुलूसों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर लगातार नजर रखी जाएगी।   अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई   प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साइबर सेल को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी भड़काऊ पोस्ट या फर्जी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।   शांति समिति की बैठकें पूरी   राज्य के सभी जिलों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रशासन ने सभी समुदायों के लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।   पुलिस की अपील   पुलिस ने कहा है कि मोहर्रम के सभी जुलूस तय मार्ग और निर्धारित समय के अनुसार ही निकाले जाएंगे। लोगों से सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है।

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गोड्डा में विकास को मिली नई रफ्तार, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने 7 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यास

गोड्डा। गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह  ने 7 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचलाधिकारी आवास, कर्मचारी आवास, प्रखंड परिसर विकास और अन्य निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया गया। वहीं 25.73 लाख रुपये की लागत से बनने वाले पार्किंग स्थल तथा 65.62 लाख रुपये की लागत वाले ईटहरी पंचायत के विवाह भवन का शिलान्यास भी किया गया।   बेहतर प्रशासन और सेवा वितरण पर जोर मंत्री ने कहा कि मजबूत आधारभूत संरचना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा वितरण की आधारशिला है। उन्होंने अधिकारियों से ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की अपील की।   भुस्का पहाड़ बनेगा नया पर्यटन केंद्र दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि मेहरमा के भुस्का पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगैया पार्क को विकसित किया गया है, उसी तरह मेहरमा में भी नया पर्यटन केंद्र तैयार किया जाएगा।   पंचायतों को सशक्त बनाने की पहल मंत्री ने कहा कि पंचायतों को वर्षों से लंबित 15वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध कराई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिली है। साथ ही मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, राशन और पेंशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।   डिजिटल सेवाओं का होगा विस्तार उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं के विस्तार से ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, पेंशन, आवास और अन्य सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। भविष्य में ड्राइविंग लाइसेंस और स्वास्थ्य बीमा जैसी सेवाओं के लिए भी पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में भी प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

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पीएम जन–मन योजना से झारखंड के 291 टोलों में पहुंचेगा पानी, 4603 आदिवासी परिवार होंगे लाभान्वित

रांची। पीएम जन-मन योजना के तहत झारखंड को टोलो-गांवों में साफ पानी पहुंचाया जायेगा। खासतौर पर कमजोर जनजातीय समूह PVTG के लिए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य के 11 जिलों में स्थित 291 आदिवासी टोलों तक साफ पानी पहुंचाया जायेगा। सरकार ने 'पीएम-जन मन' योजना के तहत 320 नई सौर आधारित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को मंजूरी दे दी है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई अपेक्ट कमेटी की बैठक में इस 20.98 करोड़ रुपये की योजना पर मुहर लगी,  जिससे राज्य के 4,603 आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।  सौर ऊर्जा से रोशन होंगी जलापूर्ति योजनाए इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चिन्हित किए गए आदिवासी टोलों में कुल 320 नई सौर ऊर्जा आधारित लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं चलाई जाएंगी। ये योजनाएं पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल होंगी, जिससे सुदूर क्षेत्रों में बिजली कटौती के बावजूद निर्बाध रूप से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।  इन 11 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा कल्याण और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जिला स्तर पर कराए गए संयुक्त सर्वेक्षण के बाद राज्य के 11 जिलों को इस योजना के लिए चुना गया है। संताल परगना के तीन जिले दुमका, गोड्डा और पाकुड़ को शामिल किया गया है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ मेदिनीनगर क्षेत्र को मिलने जा रहा है। कुल स्वीकृत योजनाओं में से सर्वाधिक 129 योजनाएं अकेले मेदिनीनगर जिले में लागू की जाएंगी। इसके माध्यम से क्षेत्र की 2,040 पीवीटीजी बस्तियों तक सीधे पीने का पानी पहुंचेगा।  केंद्र और राज्य सरकार उठाएगी आधा-आधा खर्च इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन पर करीब 20.98 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। वित्तीय व्यवस्था के तहत इसमें केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी। दोनों सरकारें क्रमशः 10.49 करोड़ - 10.49 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराएंगी। इस राशि में ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस यानी ओएंडएम की लागत शामिल नहीं है। सर्वे में खुली थी वंचित टोलों की पोल केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के निर्देश पर 19 जून 2025 को उपायुक्तों  के निर्देशन में एक व्यापक संयुक्त सर्वेक्षण चलाया गया था। इस सर्वे में यह बात सामने आई थी कि राज्य में चल रही 320 मौजूदा जलापूर्ति योजनाओं के बावजूद, 11 जिलों के 291 पीवीटीजी टोले अब भी पानी की बुनियादी सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं। उपायुक्तों से मिले इसी संयुक्त प्रमाण पत्र के आधार पर इस नई कार्ययोजना को तैयार कर मंजूरी दी गई है।

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