बिहार

तेज प्रताप यादव के घर से 20 लाख कैश गायब, अपने ही पीए पर लगाया चोरी का आरोप

abhishek singh जून 23, 2026 0
Tej Pratap Yadav House Theft
Tej Pratap Yadav House Theft

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जेडीडी सुप्रीमो Tej Pratap Yadav ने अपने आवास पर चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। सोमवार देर रात वे खुद सचिवालय थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनके घर से करीब 20 लाख रुपये नकद और कई कीमती सामान चोरी हो गए हैं।

 

निजी सहायक पर लगाया गंभीर आरोप


तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक मोतीलाल राय पर चोरी का आरोप लगाया है। एफआईआर में उन्होंने कहा है कि अलमारी में रखी पार्टी फंड की लगभग 20 लाख रुपये की राशि, दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार आईफोन 17 प्रो मैक्स, एक मैकबुक, एक आईपैड, एक लेनोवो लैपटॉप, चार पेन ड्राइव और दो हार्ड डिस्क गायब हैं।

 

ड्राइवर और सहयोगी बने प्रत्यक्षदर्शी


एफआईआर के अनुसार, 22 जून की रात करीब 11:30 बजे उनके ड्राइवर अनिल यादव और सहयोगी विशाल ने मोतीलाल राय को एक बैग लेकर आवास की बाउंड्री फांदकर भागते हुए देखा। तेज प्रताप का दावा है कि दोनों इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं और चोरी में मोतीलाल राय की संलिप्तता की पुष्टि कर सकते हैं।

 

पुलिस ने शुरू की जांच


शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। आवास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं तथा आरोपी के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज


इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें आरोपी पर पूरा भरोसा था, लेकिन उसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित तौर पर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहारः तेज प्रताप के आवास से 20 लाख नगद समेत कई सामान हुए चोरी

पटना, एजेंसियां। जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव के घर में चोरी हो गई है। चोरी के बाद तेज प्रताप रात में ही सचिवालय थाना जाकर एफआईआर दर्ज करवाया। उन्होंने अपने ही PA मोतीलाल राय पर 20 लाख कैश समेत कीमती सामान चोरी करने के आरोप लगाए हैं।  पीए पर लगाया चोरी का आरोप एफआईआर दर्ज करवाते समय तेज प्रताप ने पीए पर चोरी का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, 20 लाख कैश के अलावा 4 आईफोन, मैकबुक, आईपैड, सोने की चेन-अंगूठी चोरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि मेरे ड्राइवर अनिल यादव और उनके साथ रहने वाले विशाल ने पीए मोतीलाल राय को एक बैग के साथ आवास की बाउंड्री फांदकर भागते हुए देखा है। इसलिए उनके मुताबिक, दोनों व्यक्ति इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी गवाह हैं कि चोरी मोतीलाल ने ही चोरी की है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।  क्या-क्या हुआ चोरी तेज प्रताप ने बताया कि अलमारी से लगभग 20 लाख रुपये रखे हुए थे जो पार्टी फंड की राशि थी। 2 तोला सोने की चेन, 1 सोने की अंगूठी, Sony की 4 पेन ड्राइव, 2 हार्ड डिस्क, 1 iPad, 1 MacBook लैपटॉप, 1 Lenovo लैपटॉप, 4 iPhone और 17 Pro Max मोबाइल फोन चोरी हो गए हैं। तेज प्रताप ने तुरंत जांच की मांग की तेज प्रताप ने इस मामले में तत्काल प्रभाव से विधि सम्मत जांच की मांग की है। साथ ही पीए मोतीलाल की गिरफ्तारी के साथ चोरी गये सामान की बरामदगी की भी मांग की है। एफआईआर के बाद पुलिस ने आवास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी है। इस घटना के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। वहीं आरजेडी नेता भी इस विश्वासघात करार दिया है।

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भरत तिवारी एनकाउंटर: बहन ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

भोजपुर, एजेंसियां। चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ तब आया, जब भरत तिवारी की बहन ने मीडिया के सामने पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। परिजनों ने दावा किया कि एनकाउंटर के दौरान भरत को बेहद करीब से कई गोलियां मारी गईं और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।   बहन ने लगाए गंभीर आरोप मीडिया से बातचीत में भरत तिवारी की बहन ने आरोप लगाया कि भरत को प्राइवेट पार्ट सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गोलियां मारी गईं। उनका दावा है कि कुल पांच गोलियां चलाई गईं, जिनमें से चार शरीर के अंदर रह गईं, जबकि एक गोली आर-पार हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोली लगने से पहले भरत के साथ मारपीट की गई और परिवार के किसी सदस्य को उसके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।   अस्पताल में लापरवाही का भी आरोप भरत की बहन ने यह भी दावा किया कि पहले उन्हें बताया गया कि आरा में इलाज चल रहा है, लेकिन बाद में पता चला कि भरत को पटना रेफर कर दिया गया। उनका आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर पुलिस भरत को छोड़कर चली गई थी और उसे शवों के पास लिटाया गया था। उन्होंने कहा कि काफी खोजबीन के बाद डॉक्टरों से भरत के बारे में जानकारी मिल सकी।   परिजनों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग भरत तिवारी की मां और बहन दोनों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बहन का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं होगा और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे परिवार को न्याय मिलेगा।   जांच पर टिकी सबकी नजर एनकाउंटर को लेकर परिजनों के आरोपों के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल पुलिस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Bihar: खान सर की गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

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बिहार में बदलेगी पोशाक योजना, अब छात्रों को बैंक खाते में पैसे नहीं, मिलेगी सिली हुई स्कूल ड्रेस

पटना, एजेंसियां।  बिहार के सरकारी स्कूलों में संचालित मुख्यमंत्री पोशाक योजना के स्वरूप में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से राशि भेजने की मौजूदा व्यवस्था की जगह सीधे दो-दो सेट सिली हुई स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) से सहमति मांगी है।   प्रस्ताव के अनुसार प्रस्ताव के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पात्र छात्र-छात्राओं को निर्धारित गुणवत्ता वाली तैयार पोशाक उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में मुख्यमंत्री बालक/बालिका पोशाक योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक तथा बिहार शताब्दी मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म खरीदने के लिए राशि भेजी जाती है।   लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में 82.47 लाख और वर्ष 2025-26 में 96.12 लाख छात्र-छात्राओं को पोशाक योजना का लाभ मिला है। यदि नया प्रस्ताव लागू होता है तो इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधे सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी।   गुणवत्ता और पारदर्शिता पर रहेगा जोर शिक्षा विभाग का मानना है कि केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने से सभी विद्यार्थियों को समय पर एक समान गुणवत्ता की पोशाक उपलब्ध कराना आसान होगा। साथ ही डीबीटी के तहत भेजी गई राशि के उपयोग और निगरानी से जुड़ी समस्याओं में भी कमी आएगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों का सही माप लेना, समय पर सिलाई कराना, आपूर्ति सुनिश्चित करना और सभी स्कूलों तक निर्धारित समय में यूनिफॉर्म पहुंचाना बड़ी चुनौती होगी। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि यह मॉडल सफल होने पर स्कूल शिक्षा से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों को मजबूती मिलेगी।

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