पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जेडीडी सुप्रीमो Tej Pratap Yadav ने अपने आवास पर चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। सोमवार देर रात वे खुद सचिवालय थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनके घर से करीब 20 लाख रुपये नकद और कई कीमती सामान चोरी हो गए हैं।
तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक मोतीलाल राय पर चोरी का आरोप लगाया है। एफआईआर में उन्होंने कहा है कि अलमारी में रखी पार्टी फंड की लगभग 20 लाख रुपये की राशि, दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार आईफोन 17 प्रो मैक्स, एक मैकबुक, एक आईपैड, एक लेनोवो लैपटॉप, चार पेन ड्राइव और दो हार्ड डिस्क गायब हैं।
एफआईआर के अनुसार, 22 जून की रात करीब 11:30 बजे उनके ड्राइवर अनिल यादव और सहयोगी विशाल ने मोतीलाल राय को एक बैग लेकर आवास की बाउंड्री फांदकर भागते हुए देखा। तेज प्रताप का दावा है कि दोनों इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं और चोरी में मोतीलाल राय की संलिप्तता की पुष्टि कर सकते हैं।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। आवास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं तथा आरोपी के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।
इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें आरोपी पर पूरा भरोसा था, लेकिन उसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित तौर पर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
समस्तीपुर, एजेंसियां। समस्तीपुर के कोर्ट परिसर में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की घटना सामने आई है। आग की चपेट में आने से कार्यालय में रखे कई उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के प्रभावित होने की खबर है। घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। आग लगने की सूचना मिलने के बाद परिसर में मौजूद लोगों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। उपकरण और दस्तावेज प्रभावित आग की वजह से कार्यालय में रखे कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के जलने की जानकारी सामने आई है। कितने दस्तावेज प्रभावित हुए और उनमें किस तरह के रिकॉर्ड शामिल थे, इसका आकलन किया जा रहा है। जांच में जुटे अधिकारी घटना के बाद संबंधित अधिकारी नुकसान का जायजा लेने में जुट गए हैं। आग लगने की घटना की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि शॉर्ट सर्किट किन परिस्थितियों में हुआ। कोर्ट रिकॉर्ड और दस्तावेजों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें। सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार करना है। सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि सरकारी विद्यालय आम लोगों के साथ-साथ उच्च पदों पर बैठे लोगों के परिवारों के लिए भी भरोसेमंद विकल्प बनें। इसके लिए स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक व्यवस्था, आधारभूत संरचना और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल मुख्यमंत्री के बयान के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था मजबूत होगी तो अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। बयान पर राजनीतिक चर्चा तेज मंत्री, विधायक और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की बात सामने आने के बाद इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की जा सकती है कि सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए कौन-कौन से ठोस कदम और समयसीमा तय की गई है। वहीं, सरकार की ओर से इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक बड़े लक्ष्य के रूप में पेश किया जा रहा है।
पटना: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार को राज्य के 19 जिलों में बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है, जबकि हवा की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच नेपाल में हो रही लगातार बारिश ने बिहार की नदियों की चिंता भी बढ़ा दी है। मुजफ्फरपुर में बागमती और पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। इन 19 जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र ने पटना, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, बांका और भागलपुर में मौसम खराब होने की चेतावनी दी है। इन जिलों में बारिश के साथ वज्रपात की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तर बिहार में हल्की, मध्य और दक्षिण बिहार में ज्यादा बारिश मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को उत्तर बिहार के अधिकांश हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं मध्य और दक्षिण बिहार के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। राजधानी पटना में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। दिनभर बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में तेज बारिश होने की संभावना है। नेपाल की बारिश से बढ़ी नदियों की चिंता नेपाल में लगातार हो रही बारिश का असर बिहार की नदियों के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। मुजफ्फरपुर में बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बकुची गांव में 12 से अधिक घरों के प्रभावित होने की खबर है। नदी का पानी बढ़ने से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन और स्थानीय स्तर पर जारी सूचनाओं पर नजर रखने की जरूरत है। बगहा में करीब 300 घरों तक पहुंचा गंडक का पानी पश्चिम चंपारण के बगहा में भी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, दो पंचायतों के करीब 300 घरों में नदी का पानी घुस गया है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहेंगे। 11 अगस्त तक पटना में बादलों का डेरा पटना में 8 से 11 अगस्त के बीच आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान बारिश भी हो सकती है। राजधानी में अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में पटना और बेगूसराय समेत राज्य के पांच जिलों में बारिश दर्ज की गई। पटना में दिनभर बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हुई। बिहार में अभी भी 35 फीसदी बारिश की कमी मानसून के सक्रिय होने के बावजूद बिहार में बारिश की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक करीब 362.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 560.4 मिलीमीटर है। इस तरह बिहार में अब भी सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बक्सर और गया जैसे कुछ जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हुई है। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो इससे किसानों और जलस्रोतों को राहत मिल सकती है। वज्रपात के दौरान इन बातों का रखें ध्यान बारिश और वज्रपात के अलर्ट को देखते हुए लोगों को खुले मैदान या अन्य खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होना भी सुरक्षित नहीं है। अगर मौसम अचानक खराब होता है तो घर या किसी सुरक्षित पक्के स्थान पर रहना बेहतर है। किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। अगले कुछ दिन बिहार के लिए अहम बिहार में मानसून फिलहाल सक्रिय है और आने वाले दिनों में कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। एक ओर यह बारिश राज्य में बनी बारिश की कमी को कम करने में मदद कर सकती है, वहीं दूसरी ओर नेपाल से आने वाले पानी और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित इलाकों में चुनौती बढ़ सकती है।