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बंगाल बजट: पश्चिम बंगाल में बनेंगे चार नए  एयरपोर्ट

anjali kumari जून 23, 2026 0
Bengal Budget update
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कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सड़कों, पुलों और बंदरगाहों के विकास के साथ-साथ राज्य में हवाई संपर्क बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री Swapan Dasgupta ने बजट पेश करते हुए चार नए एयरपोर्ट परियोजनाओं की घोषणा की, जिससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को हवाई सेवा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

अभी केवल दो प्रमुख एयरपोर्ट पर निर्भर है राज्य


वर्तमान में पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से Netaji Subhas Chandra Bose International Airport और Bagdogra Airport ही प्रमुख हवाई अड्डे हैं। राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन कई जिलों में अब भी सीधी हवाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए नई परियोजनाओं की घोषणा की गई है।

 

मालदा, पुरुलिया और बलूरघाट में बनेंगे नए एयरपोर्ट


बजट के अनुसार,मालदा,पुरुलिया और बालुरघाट  में नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे। वहीं Cooch Behar के मौजूदा एयरपोर्ट का विस्तार किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत विकसित किए जाने की संभावना है।

 

कल्याणी में बनेगा कोलकाता का दूसरा एयरपोर्ट


राज्य सरकार ने कल्याणी में दूसरा बड़ा एयरपोर्ट बनाने की भी घोषणा की है। कोलकाता एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसके लिए 10,000 से 15,000 एकड़ भूमि चिन्हित करने की योजना है।

 

पर्यटन और विकास को मिलेगा बढ़ावा


सरकार का मानना है कि नए एयरपोर्ट बनने से क्षेत्रीय पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही दूरदराज के जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। यह परियोजना पश्चिम बंगाल के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत और भूटान के बीच जल संसाधन और पनबिजली सहयोग की बैठक
भारत और भूटान के बीच सीमा-पार नदियों पर उच्चस्तरीय बैठक, जल संसाधन और पनबिजली सहयोग पर जोर

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और भूटान ने सीमा-पार नदियों के प्रबंधन, जल संसाधन और पनबिजली परियोजनाओं में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की है। शुक्रवार को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य के सहयोग के रास्तों पर विचार किया गया।   ट्रांस-बॉर्डर नदियों के प्रबंधन पर चर्चा   बैठक में सीमा-पार नदियों से जुड़े सहयोग को मजबूत करने, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने नदी प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। भूटान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योनपो गेम त्शेरिंग ने किया, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने किया।   पनबिजली परियोजनाओं की भी समीक्षा   दोनों देशों ने चल रही प्रमुख पनबिजली परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही जल और ऊर्जा क्षेत्र में नए सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। भारत और भूटान के बीच पनबिजली क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है। भूटान की जलविद्युत क्षमता दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।   जल और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति   बैठक में दोनों देशों ने जल संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सीमा-पार नदियों के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ हाइड्रोपावर, नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली व्यापार में सहयोग बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण माना गया।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अमेरिकी सांसदों की आलोचना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तावित कानून से जुड़े फैसले भारत की विधायी प्रक्रिया के तहत लिए जाएंगे और यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।   अमेरिकी सांसदों की टिप्पणी पर भारत ने जताई आपत्ति     अमेरिकी सांसद रिले मूर समेत कुछ अमेरिकी नेताओं ने FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई थी। उनकी ओर से दावा किया गया कि नए प्रावधानों का असर भारत में ईसाई संस्थानों और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है। अमेरिकी पक्ष की इन टिप्पणियों के बाद भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।     विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?     विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि FCRA संशोधन विधेयक से जुड़े फैसले भारत की संसद और देश की विधायी प्रक्रिया के माध्यम से लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका समेत कई देश विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए अपने-अपने कानून लागू करते हैं।   भारत का कहना है कि FCRA का उद्देश्य विदेशी योगदान में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी सुनिश्चित करना है। सरकार के मुताबिक विदेशी धन का इस्तेमाल भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तरीके से न हो, इसके लिए नियमन जरूरी है।   FCRA संशोधन विधेयक में क्या प्रस्तावित है?     2026 का प्रस्तावित संशोधन FCRA, 2010 में बदलाव करता है। इसमें विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियमों को और सख्त करने तथा कुछ परिस्थितियों में विदेशी फंड से बने परिसंपत्तियों पर सरकारी कार्रवाई की व्यवस्था प्रस्तावित है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं।   सरकार का पक्ष है कि यह कानून विदेशी चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के लिए है। वहीं आलोचकों का कहना है कि प्रस्तावित शक्तियों का इस्तेमाल गैर-सरकारी और धार्मिक संगठनों के खिलाफ किया जा सकता है। फिलहाल इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि FCRA कानून में बदलाव का अंतिम फैसला देश की संसद और भारतीय विधायी प्रक्रिया के तहत ही होगा।

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मिथुन चक्रवर्ती अस्पताल में भर्ती, हाथ की सर्जरी हुई; शुभेंदु अधिकारी ने पहुंचकर जाना हाल

कोलकाता, एजेंसियां। दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अभिनेता के दाहिने हाथ की सर्जरी की गई है। सर्जरी के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।   दाहिने हाथ में लगी थी चोट   रिपोर्टों के अनुसार, मिथुन चक्रवर्ती के दाहिने हाथ में पुरानी चोट से जुड़ी समस्या के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 6 अगस्त को उनके हाथ की छोटी सर्जरी की गई, जिसमें शरीर में लगी एक मेटल प्लेट को निकालने की प्रक्रिया भी शामिल थी।   सर्जरी के बाद उनकी हालत को लेकर सामने आई जानकारी में फिलहाल किसी गंभीर स्थिति का संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि, अभिनेता की मेडिकल स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक बुलेटिन सामने आने का इंतजार है।   अस्पताल पहुंचे शुभेंदु अधिकारी   मिथुन चक्रवर्ती के अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने अभिनेता का हाल जाना और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।   मिथुन चक्रवर्ती लंबे समय से फिल्म और राजनीति दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद प्रशंसक उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं।   प्रशंसकों को स्वास्थ्य अपडेट का इंतजार   सर्जरी के बाद मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर उनके प्रशंसक लगातार अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हाथ की सर्जरी सफल रही है और अस्पताल में उनकी देखभाल की जा रही है।   मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर आगे अस्पताल या परिवार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है तो उनकी स्थिति की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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