Tej Pratap Yadav

JJD Tej Pratap Yadav
वृंदावन से तेज प्रताप की भविष्यवाणी: 'बिहार में बहुत जल्द बदल जाएगी सरकार

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव ने मौजूदा राज्य सरकार के जल्द गिरने की भविष्यवाणी कर दी। वृंदावन प्रवास के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि बिहार में बहुत जल्द सरकार बदलने वाली है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।   तेज प्रताप यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, "बिहार में बहुत जल्दी सरकार गिरने वाली है। यह मैंने पहले भी कहा था। मैं वृंदावन में हूं और भविष्यवाणी कर रहा हूं कि बहुत जल्द बिहार की सरकार बदल जाएगी।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और एनडीए नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हाल ही में संपन्न हुई है।   एनडीए में मतभेद का किया दावा तेज प्रताप यादव ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि एनडीए के घटक दलों के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है और गठबंधन के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं। हालांकि, उनके इस दावे पर एनडीए के किसी भी प्रमुख नेता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर भी देखा जा रहा है।   एनडीए ने विकास और समन्वय पर दिया जोर उधर, पटना में आयोजित एनडीए की बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियमित संवाद और बैठकों की परंपरा स्थापित कर गठबंधन को मजबूती दी है। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनडीए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। तेज प्रताप के बयान के बीच अब राज्य की राजनीति में सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Tej Pratap Yadav House Theft
तेज प्रताप यादव के घर से 20 लाख कैश गायब, अपने ही पीए पर लगाया चोरी का आरोप

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जेडीडी सुप्रीमो Tej Pratap Yadav ने अपने आवास पर चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। सोमवार देर रात वे खुद सचिवालय थाना पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनके घर से करीब 20 लाख रुपये नकद और कई कीमती सामान चोरी हो गए हैं।   निजी सहायक पर लगाया गंभीर आरोप तेज प्रताप यादव ने अपने निजी सहायक मोतीलाल राय पर चोरी का आरोप लगाया है। एफआईआर में उन्होंने कहा है कि अलमारी में रखी पार्टी फंड की लगभग 20 लाख रुपये की राशि, दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार आईफोन 17 प्रो मैक्स, एक मैकबुक, एक आईपैड, एक लेनोवो लैपटॉप, चार पेन ड्राइव और दो हार्ड डिस्क गायब हैं।   ड्राइवर और सहयोगी बने प्रत्यक्षदर्शी एफआईआर के अनुसार, 22 जून की रात करीब 11:30 बजे उनके ड्राइवर अनिल यादव और सहयोगी विशाल ने मोतीलाल राय को एक बैग लेकर आवास की बाउंड्री फांदकर भागते हुए देखा। तेज प्रताप का दावा है कि दोनों इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं और चोरी में मोतीलाल राय की संलिप्तता की पुष्टि कर सकते हैं।   पुलिस ने शुरू की जांच शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। आवास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं तथा आरोपी के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।   राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि उन्हें आरोपी पर पूरा भरोसा था, लेकिन उसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित तौर पर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

abhishek singh जून 23, 2026 0
Tej Pratap Yadav Anushka Yadav
तेज प्रताप यादव ने अनुष्का यादव के भाई समेत आठ लोगों पर दर्ज कराई शिकायत

पटना, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव शुक्रवार देर रात सचिवालय थाना पहुंचे और अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव समेत आठ लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। तीन पन्नों के आवेदन में तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोग उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे, पैसे की मांग कर रहे थे और उनकी सार्वजनिक छवि खराब करने की साजिश रच रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।   सचिवालय थानाध्यक्ष गौतम कुमार ने बताया कि तेज प्रताप यादव का आवेदन प्राप्त हो गया है और उसमें लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।   पहले आकाश यादव ने दर्ज कराया था मामला यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब छात्र नेता Akash Yadav ने कुछ दिन पहले ही तेज प्रताप यादव और उनके सहयोगी मोतीलाल यादव के खिलाफ पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आकाश यादव का आरोप था कि 6 जून को जब वह खाटूश्याम की यात्रा पर गए हुए थे, तब तेज प्रताप यादव अपने सहयोगी के साथ उनके पाटलिपुत्र स्थित घर पहुंचे और जबरन घर में प्रवेश करने की कोशिश की।   धमकी देने का भी लगाया गया था आरोप आकाश यादव ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया था कि उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई। उनके अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। इस मामले की भी पुलिस जांच कर रही है। अब तेज प्रताप यादव की ओर से दर्ज कराई गई नई शिकायत के बाद मामला और उलझ गया है। दोनों पक्षों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Prince Yadav death case
प्रिंस यादव की मौत मामले में तेज प्रताप यादव ने खान सर पर लगाए गंभीर आरोप

पटना, एजेंसियां। ज्ञान बिंदु कोचिंग एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में हुई मौत का मामला अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस घटना को लेकर जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षक खान सर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अब तक किसी जांच एजेंसी या पुलिस ने पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी है।   तेज प्रताप ने क्या कहा मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यदि किसी पर आरोप लगाया जाना है तो वह खान सर हैं। उन्होंने दावा किया कि हत्या उनके इशारे पर कराई गई है और इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। फिलहाल पुलिस की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   एक्स पर भी की न्याय की मांग इससे पहले तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रिंस यादव की मौत पर शोक व्यक्त किया था। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस मामले में शामिल सभी दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जेल में बंद रौशन आनंद को मानवीय आधार पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पेरोल या अस्थायी रिहाई दी जाए।   तेजस्वी यादव ने मांगी उच्चस्तरीय जांच वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े विवाद शिक्षा जगत के लिए चिंता का विषय हैं और पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई पारदर्शी होनी चाहिए।   फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रिंस यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। तब तक मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच के अधीन हैं।

anjali kumari जून 15, 2026 0
Lalu Rabari Tejashwi Security
लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटी, तेज प्रताप को सिर्फ एक बॉडीगार्ड; तेजस्वी का Y+ कवर बरकरार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद जारी आदेश के अनुसार दोनों नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था मिलती रहेगी। नई सुरक्षा व्यवस्था में क्या मिलेगा? सरकार के नए आदेश के मुताबिक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 2 से 8 जवान हाउस गार्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा पटना जिला बल के दो बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ वाहन, एचक्यूआरटी पायलट और पुलिस एस्कॉर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी। राबड़ी देवी की सुरक्षा में महिला अंगरक्षक की तैनाती भी बनी रहेगी। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह बरकरार रखी गई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के चार जवान, पटना जिला बल के छह बॉडीगार्ड, वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब तक उन्हें A श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश के बाद उनकी श्रेणी समाप्त कर दी गई है। अब उनकी सुरक्षा के लिए केवल एक व्यक्तिगत अंगरक्षक तैनात रहेगा। परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा यथावत राज्य सुरक्षा समिति के आदेश के अनुसार लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती को तीन अंगरक्षक और राजश्री यादव को एक अंगरक्षक की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
AI Photo viral
राबड़ी देवी के समर्थन में उतरे तेज प्रताप, सोशल मीडिया पर शेयर की AI फोटो

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में सरकारी आवास आवंटन को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के सरकारी बंले को लेकर जारी बहस के बीच जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव  ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी मां राबड़ी देवी उनके लिए सम्मान का विषय हैं और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा तथा शालीनता बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।   सोशल मीडिया पर साझा की AI जनरेटेड तस्वीर तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी  और राबड़ी देवी की एक AI जनरेटेड तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने संदेश दिया कि लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राजनीतिक संवाद की भाषा हमेशा सम्मानजनक होनी चाहिए। उन्होंने नेताओं से संयमित शब्दों के प्रयोग की अपील भी की।   ‘परिवार और मातृ सम्मान सर्वोपरि’ अपने संदेश में तेज प्रताप ने कहा कि परिवार और विशेष रूप से मां का सम्मान उनके लिए सर्वोच्च है। उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं को व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने की सलाह देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श गरिमा और शिष्टाचार के दायरे में होना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।   मुख्यमंत्री ने आवास आवंटन पर दी थी सफाई इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में आवास आवंटन को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया है, जबकि वे वर्तमान में 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास में रह रही हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव  को एक पोलो रोड स्थित आवास आवंटित बताया गया है।   राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज सरकारी आवासों के उपयोग और आवंटन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का रूप ले चुका है। विभिन्न दल अपने-अपने तर्क पेश कर रहे हैं और मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

Unknown जून 3, 2026 0
Udit Raj reacting to Tej Pratap Yadav statement on Rahul Gandhi during political debate in Delhi
राहुल गांधी पर बयान से बढ़ा विवाद, उदित राज का तेज प्रताप यादव पर तीखा पलटवार

New Delhi में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासत तेज हो गई है। Tej Pratap Yadav द्वारा Rahul Gandhi पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस नेता Udit Raj ने कड़ा पलटवार किया है। क्या कहा उदित राज ने? कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि: “यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन तेज प्रताप यादव अपरिपक्व हैं। उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।” उन्होंने यह भी कहा कि तेज प्रताप को पहले खुद पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। तेज प्रताप यादव ने क्या कहा था? इससे पहले तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें: सत्ता का लालची बताया कहा कि कांग्रेस पार्टी को संभालना उनके बस की बात नहीं साथ ही उन्होंने Priyanka Gandhi को कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के लिए बेहतर विकल्प बताया। प्रियंका गांधी पर जताया भरोसा तेज प्रताप यादव ने कहा कि: प्रियंका गांधी ही कांग्रेस को बेहतर तरीके से चला सकती हैं उनके नेतृत्व में पार्टी मजबूत हो सकती है इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Tej Pratap Yadav speaking to media, criticizing Congress leadership and backing Priyanka Gandhi
कांग्रेस नेतृत्व पर सियासी घमासान: तेज प्रताप यादव बोले–‘राहुल गांधी से नहीं चल पाएगी पार्टी, प्रियंका गांधी को मिले कमान’

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस को बेहतर तरीके से सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। ‘प्रियंका गांधी ही संभाल सकती हैं पार्टी’ तेज प्रताप यादव ने कहा, “कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जैसी हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है।” उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यात्रा करने से या बुलेट पर बैठने से कुछ नहीं होता, असली सवाल यह है कि उनका मकसद क्या है?” राहुल के बयान पर पलटवार तेज प्रताप का यह बयान राहुल गांधी द्वारा नीतीश कुमार को “समझौता किया हुआ नेता” कहे जाने के बाद आया है। बिहार की राजनीति में हालिया बदलाव–जहां नीतीश कुमार के अलग होने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने–को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। पहले भी उठ चुके हैं सवाल राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद ने भी पार्टी के अंदर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में फैसले सीमित दायरे में लिए जाते हैं और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका कम हो गई है। बढ़ती राजनीतिक बहस तेज प्रताप यादव और अन्य नेताओं के बयानों से यह साफ है कि कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बहस अब पार्टी के बाहर भी तेज हो गई है। प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग अब विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से भी उठने लगी है, जिससे कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियां और गहरी होती दिख रही हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0