झारखंड

हाथियों का आतंक या जंगलों का दर्द? 5 साल में 474 मौतों ने खड़े किए सवाल

anjali kumari जून 23, 2026 0
elephant attack deaths
elephant attack deaths

रांची। झारखंड में मानव और हाथियों के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ताजा मामला कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के गोलगो गांव का है, जहां जंगली हाथियों के झुंड ने आधा दर्जन घरों में तोड़फोड़ कर भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।

 

पांच साल में 474 लोगों की गई जान


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच झारखंड में हाथियों के हमलों में 474 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 150 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। रांची, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गुमला, लातेहार, बोकारो, धनबाद और कोडरमा जैसे जिले इस संघर्ष से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।

 

हाथियों की भी हो रही मौत


इस संघर्ष का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि हाथियों पर भी पड़ रहा है। बिजली के करंट, ट्रेन दुर्घटनाओं और जंगलों में लगाए गए विस्फोटकों की चपेट में आकर कई हाथियों की मौत हुई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड में हाथियों के प्राकृतिक आवागमन मार्ग यानी एलीफेंट कॉरिडोर के बाधित होने से यह समस्या और बढ़ी है।

 

फसल और संपत्ति को भारी नुकसान


हाथियों के झुंड हर साल हजारों एकड़ फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। धान, गन्ना और महुआ जैसी फसलें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों घरों को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

 

सरकार की पहल और चुनौतियां


वर्तमान में हाथी हमले में मौत होने पर 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। राज्य सरकार इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर विचार कर रही है। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्देश दिया है कि मुआवजा 10 दिनों के भीतर दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन, जंगलों की कटाई और एलीफेंट कॉरिडोर के संरक्षण पर ध्यान दिए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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जमशेदपुर में ₹1 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोपी गिरफ्तार, जमीन दिलाने के नाम पर भी धोखाधड़ी का आरोप

जमशेदपुर। जमशेदपुर पुलिस ने एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के मामले में आरोपी मनीष सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कारोबारी, पुलिसकर्मी और एक घरेलू सहायिका समेत कई लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। पुलिस गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ कर मामले की पूरी कड़ियों की जांच कर रही है।   जमीन और कारोबार के नाम पर ठगी का आरोप   प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने लोगों को जमीन और अन्य कारोबारी मामलों में फायदा दिलाने का भरोसा देकर कथित तौर पर पैसे लिए। बाद में रकम वापस नहीं करने और वादे पूरे नहीं करने के आरोप सामने आए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों से पैसे लिए और ठगी की कुल रकम कितनी है।   एक करोड़ से ज्यादा की रकम का मामला   पुलिस के सामने आए मामलों को मिलाकर ठगी की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पीड़ितों की शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।   पुलिस कर रही पूछताछ   गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह शामिल था या नहीं। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

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रांची। झारखंड में 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव 2026 का आयोजन रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने ओपेन सफारी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और पर्यावरण संरक्षण के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास बचाने पर जोर दिया।   जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पौधारोपण जरूरी     मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज केवल झारखंड या किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण और पौधों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपने घरों के आसपास कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।     'हम हाथियों के घरों में चले गए'     सीएम ने कहा कि प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ का असर झारखंड में भी दिखाई दे रहा है। जंगल और पेड़ों को काटकर नए शहर बसाए जा रहे हैं, जिससे इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हम हाथियों के घरों में चले गए हैं, इसलिए हाथी हमारे घरों में आ जा रहे हैं।'     केवल पौधे लगाना नहीं, उनका संरक्षण भी जरूरी     मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ पौधारोपण के ठेके देने से पर्यावरण की स्थिति नहीं बदलेगी। इसके लिए समाज को खुद संवेदनशील होना होगा। उन्होंने ऐसे पौधों के चयन पर भी जोर दिया जो स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि झारखंड में केवल उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा।     करीब दो हजार लोगों से पौधे लगाने की अपील     वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की। कार्यक्रम में वन विभाग के साथ उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने करीब दो हजार उपस्थित लोगों से अपने-अपने घरों के आसपास कम से कम एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।     पौधा लगाने पर बिजली में छूट का ऐलान     मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने विशेष पहल की है। उन्होंने बताया कि शहरों में एक पौधा लगाने पर पांच यूनिट बिजली मुफ्त देने की योजना का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण से सीधे जोड़ना है।  

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धनबाद के कतरास में भीषण भू-धंसान, आधा दर्जन से ज्यादा घर जमींदोज; दहशत में लोग

धनबाद: कतरास के छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास शुक्रवार शाम अचानक हुए भीषण भू-धंसान से इलाके में हड़कंप मच गया. तेज आवाज के साथ जमीन धंसने लगी और देखते ही देखते आधा दर्जन से अधिक आवास इसकी चपेट में आ गये. कई घर पूरी तरह जमीन में समा गये, जबकि एक स्थानीय सड़क भी धंस गयी. घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. अचानक धंसी जमीन, करीब 150 मीटर का इलाका प्रभावित जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब चार बजे छाताबाद फुटबॉल मैदान के पास अचानक भू-धंसान शुरू हुई. जमीन धंसने का दायरा करीब 150 मीटर बताया जा रहा है. देखते ही देखते आसपास के कई घर इसकी चपेट में आ गये. स्थानीय सड़क का एक हिस्सा भी धंस गया, जिससे इलाके में आवाजाही प्रभावित हो गयी. जोरदार आवाज के साथ जमीन में समा गया मकान भू-धंसान इतनी तेजी से हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. एक दोमंजिला मकान जमीन धंसने के कारण एक मंजिल का रह गया. वहीं आसपास के कई मकानों की दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ गयी हैं. सामने का मैदान भी करीब 20 फीट नीचे धंस गया है. स्थानीय महिला हुस्ना बानो के अनुसार, परिवार के लोग खाना खाने के बाद घर में आराम कर रहे थे. इसी दौरान अचानक जोरदार आवाज हुई और जमीन धंसने लगी. देखते ही देखते घर का हिस्सा भी इसकी चपेट में आ गया. घर में फंसे आठ लोगों को ग्रामीणों ने निकाला भू-धंसान के दौरान एक घर में करीब आठ लोग फंस गये. दीवार गिरने से कुछ लोगों को चोट भी लगी. घटना के बाद आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया. स्थानीय लोगों ने एक-एक कर सभी आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गयी है. कई परिवारों को अपना घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे रहना पड़ रहा है. पुलिस ने प्रभावित क्षेत्र में लगायी बैरिकेडिंग घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रभावित इलाके की बैरिकेडिंग कर दी है. सुरक्षा के मद्देनजर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गयी है. प्रशासन और पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गयी है कि वे धंसे हुए क्षेत्र के आसपास न जाएं. कतरास क्षेत्र में लगातार सामने आ रही भू-धंसान की घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में पहले से ही चिंता और आक्रोश है. इस घटना के बाद लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गये हैं.  

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