नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत किया है। हालिया कदमों में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिक NCR शहरों को प्रवर्तन व्यवस्था के दायरे में लाना और स्थानीय अधिकारियों को कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी भूमिका देना शामिल है।
CAQM ने सड़क, निर्माण और अन्य गतिविधियों से पैदा होने वाले धूल प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया है। नए विस्तार के तहत NCR के अधिक क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को धूल नियंत्रण संबंधी नियमों के पालन की निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जा रहा है।
निर्माण स्थलों, सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को NCR में PM10 प्रदूषण का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसलिए धूल नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।
CAQM ने औद्योगिक इकाइयों के लिए संशोधित Particulate Matter (PM) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की समयसीमा भी आगे बढ़ाई है। नई व्यवस्था अब 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।
इसका उद्देश्य उद्योगों से होने वाले कणीय प्रदूषण को कम करना और NCR की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। संशोधित मानकों के तहत संबंधित औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित उत्सर्जन सीमा का पालन करना होगा।
CAQM की व्यापक रणनीति में केवल उद्योग और धूल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि वाहन उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे स्रोतों पर भी नियंत्रण शामिल है। आयोग ने 2026 में पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने के लिए राज्यों को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा, CAQM ने NCR में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों को बढ़ावा देने और 1 अक्टूबर 2026 से वैध PUCC के बिना ईंधन नहीं देने की व्यवस्था प्रस्तावित की है।
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या गंभीर होने को देखते हुए CAQM की ओर से पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में नियंत्रण उपायों को मजबूत किया जा रहा है। धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और पराली जलाने पर एक साथ कार्रवाई करके प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
CAQM की हालिया पहलों का लक्ष्य NCR में प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी रखना और नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण को मंजूरी लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रयागराज और चित्रकूट क्षेत्र के समन्वित विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी गई। इसके दायरे में प्रयागराज समेत कुल छह जिले आएंगे। छह जिलों को प्राधिकरण में किया गया शामिल नए क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण में प्रयागराज, चित्रकूट, फतेहपुर, बांदा, कौशांबी और हमीरपुर को शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन जिलों में अलग-अलग योजनाओं के बजाय एकीकृत और सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना है। इस व्यवस्था से क्षेत्र में शहरीकरण, बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं की बेहतर योजना तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। नियोजित शहरी विकास पर रहेगा जोर सरकार के मुताबिक, प्राधिकरण के गठन से चित्रकूट, फतेहपुर, बांदा, कौशांबी और हमीरपुर समेत पूरे क्षेत्र में सामंजस्यपूर्ण शहरीकरण और तेज, एकीकृत विकास को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्रीय स्तर पर सड़क, परिवहन, आवास और अन्य आधारभूत सुविधाओं की योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। पर्यटन और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा प्रयागराज और चित्रकूट धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। क्षेत्र को एक साझा विकास ढांचे के तहत विकसित करने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. योगी सरकार ने इससे पहले भी प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र को राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) की तर्ज पर विकसित करने की योजना पर जोर दिया था। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस दिशा में संस्थागत ढांचा तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार के क्षेत्रीय विकास मॉडल का विस्तार प्रयागराज-चित्रकूट प्राधिकरण का गठन उत्तर प्रदेश में बड़े क्षेत्रों को एकीकृत विकास योजनाओं से जोड़ने की सरकार की रणनीति का हिस्सा है। इससे संबंधित जिलों में भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए एक साझा योजना और बेहतर समन्वय तैयार किया जा सकेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब प्राधिकरण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और आधिकारिक अधिसूचना पर नजर रहेगी।
PM मोदी से मिले Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस, भारत की कहानी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस से मुलाकात की। इस दौरान भारत के तेजी से बढ़ते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, भारतीय कहानियों की वैश्विक पहुंच और देश की रचनात्मक प्रतिभाओं की क्षमता पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। भारतीय कहानियों को वैश्विक मंच देने पर चर्चा बैठक में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और रचनात्मक विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के अवसरों पर जोर दिया गया। भारतीय फिल्म, वेब सीरीज, एनीमेशन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। Netflix पहले से ही भारत में स्थानीय भाषाओं और भारतीय कहानियों पर आधारित कंटेंट का विस्तार कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सारंडोस की बैठक को भारत के मनोरंजन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Netflix ने की नई पहल की घोषणा मुलाकात के बाद Netflix ने Netflix India Storytelling Initiative की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अगली पीढ़ी के कहानीकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, साझेदारी और अवसर उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत भारत के प्रमुख संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की योजना है। इसका दायरा कहानी कहने के साथ-साथ एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। भारत को वैश्विक कंटेंट हब बनाने की दिशा में कदम बैठक में भारत की विशाल प्रतिभा, बढ़ते मनोरंजन बाजार और तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सरकार लंबे समय से भारत को फिल्म, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य रचनात्मक उद्योगों के लिए वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। Netflix की नई पहल से भारतीय रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने और भारतीय कहानियों को दुनिया के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर CAQM सख्त, धूल और औद्योगिक उत्सर्जन पर बढ़ाई निगरानी नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत किया है। हालिया कदमों में धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिक NCR शहरों को प्रवर्तन व्यवस्था के दायरे में लाना और स्थानीय अधिकारियों को कार्रवाई के लिए अधिक प्रभावी भूमिका देना शामिल है। धूल प्रदूषण पर बढ़ेगी कार्रवाई CAQM ने सड़क, निर्माण और अन्य गतिविधियों से पैदा होने वाले धूल प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया है। नए विस्तार के तहत NCR के अधिक क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को धूल नियंत्रण संबंधी नियमों के पालन की निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जा रहा है। निर्माण स्थलों, सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को NCR में PM10 प्रदूषण का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसलिए धूल नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। उद्योगों के PM उत्सर्जन नियमों में बदलाव CAQM ने औद्योगिक इकाइयों के लिए संशोधित Particulate Matter (PM) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की समयसीमा भी आगे बढ़ाई है। नई व्यवस्था अब 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इसका उद्देश्य उद्योगों से होने वाले कणीय प्रदूषण को कम करना और NCR की वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। संशोधित मानकों के तहत संबंधित औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित उत्सर्जन सीमा का पालन करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर योजना CAQM की व्यापक रणनीति में केवल उद्योग और धूल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि वाहन उत्सर्जन और पराली जलाने जैसे स्रोतों पर भी नियंत्रण शामिल है। आयोग ने 2026 में पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने के लिए राज्यों को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, CAQM ने NCR में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों को बढ़ावा देने और 1 अक्टूबर 2026 से वैध PUCC के बिना ईंधन नहीं देने की व्यवस्था प्रस्तावित की है। सर्दियों से पहले तैयारी तेज दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या गंभीर होने को देखते हुए CAQM की ओर से पहले से ही विभिन्न क्षेत्रों में नियंत्रण उपायों को मजबूत किया जा रहा है। धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और पराली जलाने पर एक साथ कार्रवाई करके प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। CAQM की हालिया पहलों का लक्ष्य NCR में प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी रखना और नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।