SIT Investigation

Badrinath Temple and Kedarnath Temple Committee office as authorities investigate alleged financial irregularities and donation theft linked to the BKTC.
बद्रीनाथ दान चोरी मामला: वीआईपी खर्चों में गड़बड़ी पर सरकार सख्त, कार्रवाई के निर्देश; SIT ने 5 गवाहों के बयान दर्ज किए

देहरादून: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और दान चोरी के मामलों में जांच तेज हो गई है। वीआईपी मेहमानों के आवास, भोजन और अन्य खर्चों के भुगतान में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वीआईपी खर्चों के भुगतान में मिली अनियमितता प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि केदारनाथ आने वाले वीआईपी मेहमानों के ठहरने और भोजन से जुड़े खर्चों के भुगतान में वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति के बिना मंदिर समिति के कोष से अग्रिम राशि (एडवांस) जारी की गई और उसका भुगतान किया गया। इस मामले में तत्कालीन केदारनाथ मैनेजर, मुख्य प्रभारी अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पर्यटन एवं धार्मिक कार्य विभाग (अनुभाग-1) के उप सचिव अनिल कुमार पांडे ने 25 जून को जारी पत्र में इन अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। दान चोरी मामले में SIT की जांच तेज उधर, बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की कथित चोरी के मामले में चमोली पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने जांच तेज कर दी है। अब तक पांच प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि मंदिर समिति की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्य गवाहों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और 2 जुलाई का सीसीटीवी फुटेज भी कब्जे में ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब BKTC की आंतरिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में निलंबित BKTC कर्मचारी प्रमोद नौटियाल दान गिनती कक्ष से नकदी, सोने-चांदी के सिक्के, शालिग्राम पत्थर और चढ़ावे के लिफाफे कथित रूप से छिपाते या बाहर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यही फुटेज जांच का अहम आधार बना हुआ है। हाईकोर्ट पहुंचा मामला मामले में मंदिर के प्रभारी अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की शिकायत पर बद्रीनाथ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। SIT ने पुष्पवान, सीसीटीवी कंट्रोल अधिकारी पंवार और दान गिनती के दौरान मौजूद हरेंद्र कोठारी सहित अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए हैं। वहीं, निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने अपने निलंबन और एफआईआर को उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस आलोक मेहरा की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए BKTC से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है। चार स्तरों पर चल रही जांच फिलहाल इस पूरे मामले की जांच चार स्तरों पर जारी है। एक ओर सरकार वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है, दूसरी ओर SIT दान चोरी के मामले की जांच में जुटी है। इसके अलावा BKTC की आंतरिक जांच और हाईकोर्ट में चल रही न्यायिक प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्टों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय होगी।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Staff members count donations at the Shri Ram Janmabhoomi Temple in Ayodhya as the trust faces a manpower shortage following multiple resignations amid an ongoing investigation.
राम मंदिर ट्रस्ट के सामने नई चुनौती, दान गिनने वाले 20 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दान की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। कर्मचारियों ने बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को इस्तीफे की वजह बताया है। जांच के बाद आधे से ज्यादा कर्मचारी हुए अलग पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले मंदिर में दान की राशि गिनने के लिए करीब 40 कर्मचारी तैनात थे। कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई कर्मचारियों ने नियमित रूप से ड्यूटी पर आना बंद कर दिया। शुरुआत में रोजाना केवल 15 से 20 कर्मचारी ही काम कर रहे थे। अब 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद यह संख्या घटकर लगभग एक दर्जन रह गई है। बढ़ते काम और सख्त प्रक्रिया से बढ़ा दबाव इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों ने अपने पत्र में लिखा है कि जांच के बाद दान गिनने की पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त हो गई है। हर चरण में अतिरिक्त जांच, सत्यापन और निगरानी के कारण काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव के चलते जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो गया था। चढ़ावा चोरी मामले के बाद बदली व्यवस्था राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। इसके बाद ट्रस्ट ने दान की गिनती की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। अब हर चरण की निगरानी की जा रही है, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक समय लेने लगी है। ट्रस्ट के सामने नई चुनौती कर्मचारियों के लगातार इस्तीफों से ट्रस्ट के सामने दान गिनने की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। अब ट्रस्ट को नई टीम तैयार करने के साथ-साथ पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को सामान्य करना होगा। जांच जारी कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, ट्रस्ट प्रशासन का फोकस अब दान गिनने की व्यवस्था को बिना किसी बाधा के जारी रखने और नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Police escort two close associates of Bidhannagar Mayor Debaraj Chakraborty after their arrest in an alleged extortion and land-grab case.
देबराज चक्रवर्ती केस में कार्रवाई तेज, दो करीबी गिरफ्तार; जबरन वसूली और जमीन कब्जे के आरोपों की जांच गहराई

बिधाननगर नगर परिषद के मेयर देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में पुलिस ने दो करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को आज अदालत में पेश किया जाएगा। देबराज चक्रवर्ती मामले में जांच ने पकड़ी रफ्तार पश्चिम बंगाल में बिधाननगर नगर परिषद के मेयर और पूर्व विधायक अदिति मुंशी के पति देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब उनके दो करीबी सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ में मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। दो करीबी सहयोगी गिरफ्तार बागुइआटी थाना पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े अमर नस्कर और कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार किया है। दोनों को लंबे समय से देबराज चक्रवर्ती और पार्षद समरेश चक्रवर्ती का करीबी माना जाता है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जमीन कब्जाने, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। जमीन कब्जाने और धमकी देने का आरोप शिकायतकर्ता शुभोजीत नस्कर ने आरोप लगाया है कि रघुनाथपुर इलाके में उनकी 33 कट्ठा जमीन है, जिसके विकास के लिए उन्होंने वर्ष 2022 में एक प्रमोटर के साथ समझौता किया था। आरोप है कि इसके बाद अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी वहां पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने के साथ उन्हें धमकाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप शुभोजीत नस्कर का आरोप है कि घटना के बाद जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे तो उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इलाके में निर्माण कार्य करने के लिए एक खास समूह से ही निर्माण सामग्री खरीदने का दबाव बनाया गया। नई शिकायत के बाद हुई कार्रवाई शुभोजीत नस्कर ने हाल ही में बागुइआटी थाने में देबराज चक्रवर्ती, समरेश चक्रवर्ती, अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी के खिलाफ नई लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और देर रात अमर नस्कर तथा कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया। SIT की जांच पर नजर देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित जबरन वसूली, जमीन कब्जाने और अन्य आरोपों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Former Ram Temple Trust General Secretary Champat Rai speaks on the alleged donation irregularities and questions SBI's cash room security procedures.
राम मंदिर चंदा विवाद: चंपत राय का पहला बयान, बोले- SBI ने अपने ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया

अयोध्या: राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। विशेष जांच दल (SIT) को दिए गए लिखित बयान में उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक ने कैश रूम से जुड़े अपने ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया, जिससे लापरवाही की स्थिति बनी। SBI की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय ने अपने बयान में कहा कि बैंक के कैश रूम (चेस्ट रूम) में प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की तलाशी लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होनी चाहिए, ताकि नकदी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। शुरुआत में कर्मचारियों को जेब वाली यूनिफॉर्म दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। राय का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन होता, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। 'बैंक ने अपने ही नियमों की अनदेखी की' चंपत राय ने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश पहले से तय थे, तो उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों की सतर्कता से संभावित गड़बड़ियों को समय रहते रोका जा सकता था। ट्रस्ट में हुए बड़े बदलाव चंदा विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है, जबकि प्रशासक गोपाल राव को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही ट्रस्ट ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति जल्द ही नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। आठ गिरफ्तारियां, लाखों रुपये बरामद जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 79.85 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। मामले की जांच अभी भी एसआईटी की निगरानी में जारी है। '45 साल का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी' चंपत राय ने कहा कि उन्होंने ट्रस्ट की इच्छा का सम्मान करते हुए अब तक इस मामले पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा, "मैं 1991 से अयोध्या में सेवा कर रहा हूं। मेरा 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। मुझे विश्वास है कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।" जांच जारी राम मंदिर चंदा विवाद की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस पर तय होती है। तब तक मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Congress leader Digvijaya Singh addressing the media over the Ayodhya Ram Mandir Trust meeting and alleged donation irregularities.
राम मंदिर ट्रस्ट बैठक के बाद कांग्रेस का हमला, दिग्विजय सिंह ने VHP-RSS और SIT जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठाए और विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया। ट्रस्ट की बैठक पर उठाए सवाल पीटीआई के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की बैठक का परिणाम पहले से तय था। उनके मुताबिक, बैठक में केवल कुछ इस्तीफे स्वीकार किए गए, जबकि पूरे मामले की गंभीरता के अनुरूप कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे। चंपत राय की भूमिका पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के करीबी रहे हैं और उन्हें VHP से RSS की भूमिका में लाया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान चंपत राय की क्या भूमिका थी। दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोली लगने वाले कार्यकर्ता संतोष दुबे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके योगदान को भुला दिया गया, जबकि कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने वालों की बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। VHP और RSS पर साधा निशाना दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह वैचारिक रूप से VHP और RSS से असहमत हैं। उनका आरोप है कि ये संगठन लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना में विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत सभी नागरिकों का देश है और किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है। SIT जांच की निष्पक्षता पर सवाल कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन का मामला कई वर्षों से सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए SIT का गठन किया गया है, लेकिन इसमें शामिल अधिकारियों को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो, ताकि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जांच जारी राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले की जांच फिलहाल SIT कर रही है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
SIT officials investigating the alleged donation theft case at Ayodhya Ram Temple, with CCTV footage under review during the probe.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, कपड़ों-जूतों में छिपाए जाते थे नोट; चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। CCTV फुटेज में सामने आईं 70 संदिग्ध घटनाएं एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं चिन्हित की गईं, जिनमें गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मौकों पर कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आई प्रमुख कमियां इस प्रकार हैं— गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों को निजी सामान अंदर ले जाने से रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। कई दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। मूल्यवान चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। छह मुख्य आरोपी चिन्हित, आठ गिरफ्तार प्रारंभिक जांच में एसआईटी ने छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके नाम उजागर किए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने लगभग 78.94 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये और बरामद हुए थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी वित्तीय जांच जारी है। ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित एसआईटी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज किया है, जिनमें चांदी की ईंटें और मंदिर के आभूषण गायब होने की बात कही जा रही थी। जांच में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आभूषणों का प्रदर्शन भी किया और स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अवधि बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को गठित एसआईटी के कार्यकाल को 1 जुलाई को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। अब विस्तृत जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray addresses the media as political reactions intensify over the alleged Ayodhya Ram Mandir donation fund irregularities.
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर उद्धव ठाकरे का बीजेपी पर हमला, बोले- "अयोध्या तो झांकी थी, अब काशी-मथुरा की चिंता"

मुंबई: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने इस प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग उठाई है। उद्धव ठाकरे का बीजेपी पर तंज महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग नारा देते हैं, "अयोध्या तो बस एक झांकी थी, अभी काशी और मथुरा बाकी है", लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए अब उन्हें इन धार्मिक स्थलों की भी चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज किसी भी व्यक्ति को मंदिरों के नाम पर भ्रष्टाचार या गड़बड़ी करने की अनुमति नहीं देगा। उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम निडर, मासूम और देश से प्रेम करने वाले हिंदू हैं, लेकिन बेवकूफ नहीं। अगर कोई हिंदुत्व के नाम पर मंदिरों को लूटने की कोशिश करेगा तो हिंदू समाज उसे माफ नहीं करेगा।" उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन पर हिंदुओं के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं। 'चोरी का मामला सुलझने तक शांत नहीं बैठेंगे' उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (UBT) इस मामले को गंभीरता से उठा रही है और जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती तथा दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी पार्टी शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुओं को जागरूक करने का काम किया था और मंदिरों से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने भी साधा निशाना कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति तीन बातों पर आधारित है— वोट चोरी, सीट चोरी, और चंदा चोरी। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले पर सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया आनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच की मांग कांग्रेस ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। जयराम रमेश ने कहा कि यदि चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सही हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई। अब तक पुलिस इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार, छह आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। मामले की जांच फिलहाल जारी है और ट्रस्ट तथा जांच एजेंसियों की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है। राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर लगातार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Meeting of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust in Ayodhya amid discussions over alleged donation fund irregularities and key administrative decisions.
चंदा चोरी मामला: राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर हो सकता है फैसला

अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार (6 जुलाई) को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले की जांच के बीच आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफों के साथ-साथ विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के मठ मणिराम छावनी में आयोजित होगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी नियमित और पदेन सदस्यों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वर्चुअली शामिल हो सकते हैं अध्यक्ष सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन भी स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग ले सकते हैं। बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विचार किया जा सकता है— महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के सौंपे गए इस्तीफे। दान राशि के कथित गबन मामले में SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट। ट्रस्ट के प्रशासनिक और भविष्य के निर्णयों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे। ट्रस्ट के नियम क्या कहते हैं? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार— कोई भी ट्रस्टी कम से कम एक महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। ट्रस्ट अगली बैठक में उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय लेता है। यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप हो, तो उसे हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। वर्तमान में ट्रस्ट के 12 सदस्य निर्णय प्रक्रिया में शामिल हैं। किसी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए कम से कम 8 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होगा। VHP ने क्या कहा? इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कथित दान गबन विवाद से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रशासनिक फैसलों के लिए वीएचपी जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। सभी की नजर बैठक के फैसले पर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर जांच जारी है। ऐसे में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट क्या फैसला लेता है और SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Monsoon weakens in Jharkhand
झारखंड में कमजोर पड़ा मानसून, 50% कम बारिश से खेती प्रभावित

रांची। अलनीनो के प्रभाव से झारखंड में इस वर्ष मानसून कमजोर पड़ गया है, जिसका सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर दिखाई देने लगा है। राज्य में अब तक केवल 129 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों, खासकर धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है और कृषि विभाग हर 15 दिन में खरीफ खेती की तैयारियों का आकलन कर रहा है।   बारिश के आकड़े क्या कहते है? बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक राज्य में 417 मिमी वर्षा हो चुकी थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा महज 129 मिमी तक सिमट गया है। राजधानी रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 600 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। पश्चिम सिंहभूम में इस बार केवल 136 मिमी और गढ़वा जिले में महज 18 मिमी बारिश हुई है। राज्य का कोई भी जिला सामान्य वर्षा के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।   कम बारिश का सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक लगभग 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हो चुकी थी, जबकि इस बार अब तक केवल तीन हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। यह रोपाई भी मुख्य रूप से संताल परगना के कुछ जिलों तक सीमित है। दक्षिणी छोटानागपुर और कोल्हान जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में भी रोपाई की रफ्तार बेहद धीमी है।   कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अलनीनो के कारण सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम वर्षा चिंता का विषय है। हालांकि सरकार ने संभावित सुखाड़ की आशंका को देखते हुए पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अपना कंटिन्जेंसी प्लान समय रहते केंद्र सरकार को भेज दिया है। सरकार का दावा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Ram Temple theft case
चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन! आरोपियों के अवैध मकानों पर बुलडोजर की तैयारी

अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर जहां विशेष जांच दल (SIT) मामले की गहन पड़ताल में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी गोपाल राव की है और वे राम परंपरा का पालन नहीं करते तथा अनावश्यक विवाद खड़े करते हैं।   सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, सरकार अब आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की जांच शुरू कर दी है, जिन्हें आरोपियों ने मंदिर में नौकरी के दौरान बनवाया और जिनमें निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है। बताया जा रहा है कि लवकुश मिश्रा के शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा के कौशलपुरी स्थित मकान पर कार्रवाई हो सकती है। इन मामलों में नोटिस जारी करने की तैयारी भी चल रही है।   जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का नोटों की गड्डियों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी सत्यता की पुलिस जांच कर रही है। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपियों की नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही।   अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी  हो चुकी है  इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की राशि कहां-कहां पहुंची।   इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आगामी 6 जुलाई को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
VHP International President Alok Kumar addresses the media, saying action against Champat Rai will be considered only after the SIT completes its investigation into the Ayodhya Ram Temple donation embezzlement allegations.
राम मंदिर दान विवाद: चंपत राय पर जांच पूरी होने के बाद होगा फैसला, बोले VHP प्रमुख आलोक कुमार

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान गबन मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar ने स्पष्ट किया कि संगठन अपने अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष Champat Rai के खिलाफ किसी कार्रवाई पर तभी विचार करेगा, जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल संगठन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। 'घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं' आलोक कुमार ने कहा कि दान से जुड़े कथित घोटाले की खबरें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले में किसी तरह का बचाव या बहाना बनाने का सवाल नहीं है। पुलिस और SIT को निष्पक्ष तरीके से हर पहलू की जांच करनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 'राम मंदिर ट्रस्ट के लिए VHP जिम्मेदार नहीं' VHP प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि राम मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी VHP की नहीं है। उन्होंने कहा कि चंपत राय भले ही VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति VHP ने नहीं की थी। इसलिए ट्रस्ट में उनकी भूमिका को संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। 'चुनावी वजहों से मुद्दे को बढ़ाया जा रहा' आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि VHP, Rashtriya Swayamsevak Sangh और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मामले से जोड़ने की कोशिशें राजनीतिक कारणों से की जा रही हैं। उनके अनुसार, अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। VHP ने रखीं चार प्रमुख मांगें आलोक कुमार ने बताया कि VHP ने इस मामले में चार प्रमुख मांगें रखी हैं— तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन की जाए। दोषी पाए जाने वालों को चार से पांच महीने के भीतर सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और किसी व्यक्ति पर औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं होते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। फिलहाल SIT को अपनी जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करनी है, जिसके बाद ट्रस्ट और संबंधित संगठनों द्वारा आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra addresses the media while raising questions over transparency in Ayodhya Ram Temple donation records.
राम मंदिर दान विवाद पर महुआ मोइत्रा का हमला, पूछा- 1250 किलो सोना, 70 किलो चांदी और हजारों करोड़ का चंदा कहां गया?

  नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस विवाद में अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और नकद दान के हिसाब को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि मंदिर में आए हजारों करोड़ रुपये के दान और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी के संबंध में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। '3500 करोड़ रुपये के कच्चे दान का हिसाब कहां है?' महुआ मोइत्रा ने कहा कि वर्ष 2020 में ऑडिट के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि मंदिर में आने वाले "रॉ डोनेशन" (बिना रसीद वाले दान) का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का ऐसा दान आया, जिसका पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया दान किस प्रकार सुरक्षित रखा गया और उसका उपयोग कैसे किया गया। 1250 किलो सोना और 70 किलो चांदी को लेकर उठाए सवाल टीएमसी सांसद ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए 1,250 किलो सोने, 70 किलो चांदी और लगभग 200 करोड़ रुपये नकद दान के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने पूछा कि इन बहुमूल्य दानों का वर्तमान विवरण क्या है। 'सिर्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से जवाबदेही खत्म नहीं होती' महुआ मोइत्रा ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्रवाई और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो पूरे प्रशासनिक ढांचे की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। योगी सरकार और केंद्र पर भी साधा निशाना महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और ऐसे में दान की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना राजनीतिक नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का विषय है। जांच जारी, ट्रस्ट ने आरोपों से किया इनकार इस बीच, कथित अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले भी कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनके रखरखाव और रिकॉर्ड की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में दान में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Uttar Pradesh Police arrest eight accused in Ayodhya Ram Temple donation mismanagement case following an SIT investigation.
राम मंदिर दान चोरी मामला: FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर 8 आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच के बाद बड़ी कार्रवाई

  अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच के आधार पर FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत से पहले एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में दान राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। सभी 8 नामजद आरोपी गिरफ्तार सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और गिरफ्तारी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। FIR में इन लोगों के नाम शामिल FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी मामले में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला? पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की भी विस्तार से जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका भी होगी स्पष्ट पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और अन्य सबूतों की पड़ताल कर रही हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Arvind Kejriwal questions the legal authority of the SIT probing alleged irregularities in Ayodhya Ram Temple donation funds.
राम मंदिर चंदा मामला: SIT पर केजरीवाल के सवाल, बोले- ‘चोरों को बचाने के लिए बनाई गई जांच समिति’

  नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Rescue teams work at the collapsed construction site in Kolkata’s Taratala area after a deadly roof collapse.
तारातला हादसे के बाद सरकार का बड़ा फैसला, SIT गठित; कोलकाता में सभी निर्माण कार्यों पर रोक

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में हुए भीषण हादसे के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे सभी निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन औद्योगिक परिसर की छत गिरने से कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में कई लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायल मजदूरों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। राहत एवं बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा। डीसी डीडी के नेतृत्व में बनी 5 सदस्यीय SIT सरकार ने हादसे की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर, डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (DC-DD) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। टीम में एक सहायक सब-इंस्पेक्टर, तीन इंस्पेक्टर और दो सब-इंस्पेक्टर शामिल किए गए हैं। पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैर-इरादतन हत्या, गैर-इरादतन हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं शामिल हैं। 31 जुलाई तक निर्माण कार्यों पर रोक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हादसे के बाद कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत परियोजनाओं सहित सभी निर्माण कार्यों का पुनर्मूल्यांकन कराया जाएगा। सरकार ने 31 जुलाई तक निर्माण गतिविधियों को स्थगित रखने का निर्देश दिया है। इस दौरान विशेषज्ञों की एक टीम सभी परियोजनाओं का सुरक्षा ऑडिट करेगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी ऑडिट कमेटी मुख्यमंत्री ने बताया कि निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसमें कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन विभाग, पुलिस और केएमडीए के अधिकारी शामिल होंगे। जहां आवश्यकता होगी, वहां कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी और मेट्रो रेलवे के विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। अस्पतालों और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को इस रोक से छूट दी जाएगी। प्रारंभिक जांच में सामने आईं योजना संबंधी खामियां मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक मिली शुरुआती रिपोर्टों में निर्माण योजना और संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और जिम्मेदारी तय होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेना और NDRF भी बचाव कार्य में जुटी तारातला हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पुलिस, दमकल विभाग, नागरिक सुरक्षा बल, सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं। घायलों को तेजी से अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों तक पानी और ऑक्सीजन पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। विधानसभा में बयान देंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी गुरुवार को विधानसभा में तारातला हादसे पर विस्तृत बयान देंगे। सरकार की ओर से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और निर्माण सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Arvind Kejriwal addresses media while raising allegations over Ayodhya Ram Temple donation and financial management irregularities.
राम मंदिर दान विवाद पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- निष्पक्ष जांच हुई तो योगी सरकार गिर जाएगी

  नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हुई, तो राज्य सरकार तक संकट में पड़ सकती है। 'राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा गायब' अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा, कीमती गहने और हीरे-जवाहरात कथित रूप से गायब हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और आभूषणों से भरे कई बक्सों के गायब होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। केजरीवाल ने कहा, "न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, न प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोई कार्रवाई की और न ही सीबीआई ने जांच शुरू की।" एसआईटी कर रही है मामले की जांच राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी रोजाना पूछताछ और जांच से जुड़ी रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित कर रही है और उसकी दैनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है। आभूषण और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट पदाधिकारी आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक दान, जांच के दायरे में कई पहलू जानकारी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा कुंभ मेले के दौरान सामने आया, जब प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जा रही थीं। एसआईटी की जांच केवल दान राशि के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 71 एकड़ भूमि बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
TCS office building linked to investigation into alleged harassment and forced conversion case in Nashik.
नासिक: TCS धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा, महिला बोली- पाकिस्तानी मौलानाओं के वीडियो दिखाकर किया गया ब्रेनवॉश

  टीसीएस के नासिक कार्यालय में महिला कर्मचारी के कथित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रयास मामले में दाखिल चार्जशीट में कई गंभीर खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता को मानसिक रूप से प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से धार्मिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। पीड़िता ने बयान में लगाए गंभीर आरोप चार्जशीट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसे पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील और विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, उसे इस्लामिक धार्मिक व्याख्यानों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि इस्लाम अपनाने से उसका मानसिक तनाव कम हो जाएगा। मंदिर जाने और धार्मिक गतिविधियों से रोका गया बयान के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़िता से मंदिर जाना और धार्मिक भजन सुनना बंद करने के लिए कहा। उसे बार-बार यह समझाने की कोशिश की गई कि धार्मिक परिवर्तन से उसकी मानसिक स्थिति में सुधार होगा। शादी का झांसा और निजी जानकारी के दुरुपयोग का आरोप चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि मुख्य आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर कथित रूप से उसका शोषण किया। इसके साथ ही पीड़िता के बैंक खाते और यूपीआई पिन से जुड़ी जानकारी लेने का भी आरोप लगाया गया है। साजिश और नेटवर्क का दावा जांच में यह दावा किया गया है कि तौसीफ अत्तार और निदा खान ने पीड़िता को इस्लामिक धार्मिक सामग्री और वीडियो दिखाने में मदद की। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित मानसिक और धार्मिक प्रभाव बनाने की रणनीति का हिस्सा थी। AIMIM पार्षद का नाम भी चार्जशीट में चार्जशीट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर से AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने एक आरोपी को गिरफ्तारी से बचाने के लिए शरण दी थी। 106 गवाहों के बयान शामिल पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। टीसीएस की प्रतिक्रिया टीसीएस ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है। कंपनी ने कथित रूप से शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। जांच जारी फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और जांच एजेंसियां सभी आरोपों की विस्तृत जांच कर रही हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
BPSC AEDO exam candidates outside center amid paper leak controversy and SIT investigation in Bihar
BPSC AEDO परीक्षा विवाद: पेपर लीक से आयोग का इनकार, SIT जांच तेज–ब्लूटूथ कदाचार का दावा भी खारिज

बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक के आरोपों पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने साफ तौर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी Economic Offences Unit (EOU) को सौंप दी गई है, जिसने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर जांच तेज कर दी है। क्या है पूरा मामला? राज्य में AEDO के कुल 935 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से शुरू होकर 15, 16 और 18 अप्रैल तक किया गया। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे थे, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई। मुंगेर से पुलिस ने परीक्षा से पहले 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 अभ्यर्थी और एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक भी शामिल थे। इसके अलावा नालंदा में एक महिला अभ्यर्थी को सॉल्व्ड आंसरशीट के साथ पकड़ा गया, साथ ही दो बायोमेट्रिक कर्मियों की भी गिरफ्तारी हुई। EOU की SIT कर रही गहन जांच EOU के ADG नैय्यर हसनैन के निर्देश पर एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में 8 सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम में एक DSP और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। BPSC का स्पष्ट बयान: ‘पेपर लीक नहीं हुआ’ Bihar Public Service Commission ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। आयोग के अनुसार, राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है। ब्लूटूथ कदाचार की खबर भी निकली गलत परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के कान में ब्लूटूथ डिवाइस मिलने की खबर सामने आई थी। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल कदाचार की कोशिश थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने विफल कर दिया। इसे पेपर लीक से जोड़ना गलत है। तीसरे चरण की परीक्षा तय समय पर BPSC ने यह भी साफ किया है कि AEDO भर्ती परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। आयोग और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है। साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक Grievance Portal का उपयोग करें।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Vishnugarh murder case crime scene, highlighting superstition-related child sacrifice in Jharkhand.
विष्णुगढ़ हत्याकांड का खुलासा: अंधविश्वास के नाम पर मासूम की बलि, मां समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से सामने आया एक दिल दहला देने वाला मामला पूरे समाज को झकझोर कर रख देता है। कुसुम्भा गांव में एक नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या के पीछे अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की भयावह सच्चाई सामने आई है। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए मृतका की मां समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह वारदात 24 मार्च की रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान हुई, जब बच्ची अचानक लापता हो गई थी। अगले दिन सुबह उसका शव गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में बरामद हुआ। परिजनों के बयान के आधार पर अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। जांच के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद भयावह थी। पुलिस के अनुसार, गांव की एक कथित भगताइन शांति देवी ने तंत्र-मंत्र के जरिए समस्या दूर करने के नाम पर बच्ची की बलि देने की सलाह दी थी। मृतका की मां रेशमी देवी अपने बेटे की परेशानी को लेकर पिछले एक वर्ष से इस भगताइन के संपर्क में थी। धीरे-धीरे अंधविश्वास इतना गहरा हो गया कि मां अपनी ही बेटी की बलि देने के लिए तैयार हो गई। घटना वाली रात, मां अपनी तीनों संतानों के साथ जुलूस में शामिल हुई और बाद में छोटी बेटी को लेकर भगताइन के घर पहुंची। वहां पहले से मौजूद भीम राम को भी इस कृत्य में शामिल किया गया। कथित पूजा के दौरान बच्ची को बांसबाड़ी ले जाया गया, जहां तंत्र-मंत्र के नाम पर क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। पुलिस के मुताबिक, भीम राम ने बच्ची का गला घोंटा, जबकि उसकी मां ने उसके पैर पकड़े हुए थे ताकि वह बच न सके। मौत के बाद भी हैवानियत जारी रही, बच्ची के सिर पर पत्थर से वार किया गया और उसके खून का इस्तेमाल कथित पूजा में किया गया। डीआईजी, एसपी और डीसी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस मामले का खुलासा किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सख्त से सख्त सजा दिलाने की बात कही है। यह घटना एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है, जहां इंसानियत और रिश्तों तक को बलि चढ़ा दिया जाता है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0