शिक्षा

BPSC denies paper leak, SIT probe underway

BPSC AEDO परीक्षा विवाद: पेपर लीक से आयोग का इनकार, SIT जांच तेज–ब्लूटूथ कदाचार का दावा भी खारिज

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
BPSC AEDO exam candidates outside center amid paper leak controversy and SIT investigation in Bihar
BPSC AEDO Exam Controversy SIT Probe Bihar

बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक के आरोपों पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने साफ तौर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी Economic Offences Unit (EOU) को सौंप दी गई है, जिसने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर जांच तेज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

राज्य में AEDO के कुल 935 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से शुरू होकर 15, 16 और 18 अप्रैल तक किया गया। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे थे, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई।

मुंगेर से पुलिस ने परीक्षा से पहले 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 अभ्यर्थी और एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक भी शामिल थे। इसके अलावा नालंदा में एक महिला अभ्यर्थी को सॉल्व्ड आंसरशीट के साथ पकड़ा गया, साथ ही दो बायोमेट्रिक कर्मियों की भी गिरफ्तारी हुई।

EOU की SIT कर रही गहन जांच

EOU के ADG नैय्यर हसनैन के निर्देश पर एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में 8 सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम में एक DSP और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

BPSC का स्पष्ट बयान: ‘पेपर लीक नहीं हुआ’

Bihar Public Service Commission ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। आयोग के अनुसार, राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है।

ब्लूटूथ कदाचार की खबर भी निकली गलत

परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के कान में ब्लूटूथ डिवाइस मिलने की खबर सामने आई थी। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल कदाचार की कोशिश थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने विफल कर दिया। इसे पेपर लीक से जोड़ना गलत है।

तीसरे चरण की परीक्षा तय समय पर

BPSC ने यह भी साफ किया है कि AEDO भर्ती परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। आयोग और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है।

साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक Grievance Portal का उपयोग करें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Bihar DElEd Result 2026
बिहार DElEd रिजल्ट 2026 जारी, 1.65 लाख अभ्यर्थी सफल; स्कोरकार्ड उपलब्ध

पटना, एजेंसियां। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने बिहार DElEd संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी अब अपना परिणाम और स्कोरकार्ड ऑनलाइन देख सकते हैं। इस परीक्षा में कुल 2,23,835 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 1,65,609 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं।   73.99 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए सफल   बिहार DElEd प्रवेश परीक्षा 2026 में कुल 73.99 प्रतिशत अभ्यर्थी सफल हुए हैं। परीक्षा का आयोजन राज्य में DElEd पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए किया गया था। परिणाम जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों को आगे की प्रवेश प्रक्रिया के लिए निर्धारित कार्यक्रम का इंतजार करना होगा। BSEB की ओर से प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी अलग से जारी की जाएगी।   स्कोरकार्ड कैसे डाउनलोड करें   अभ्यर्थी अपना स्कोरकार्ड बिहार DElEd की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने लॉगिन विवरण दर्ज करने होंगे। स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के बाद अभ्यर्थियों को अपना नाम, आवेदन संख्या, प्राप्त अंक और अन्य विवरण ध्यान से जांच लेना चाहिए। किसी तरह की गलती होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत बोर्ड से संपर्क किया जा सकता है।   10 अगस्त से स्क्रूटिनी का मौका   रिजल्ट से असंतुष्ट अभ्यर्थियों के लिए BSEB ने स्क्रूटिनी की सुविधा भी उपलब्ध कराने की जानकारी दी है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 10 अगस्त 2026 से शुरू होने की बात सामने आई है। अभ्यर्थियों को सलाह है कि स्क्रूटिनी के लिए आवेदन करने से पहले बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देश और शुल्क संबंधी जानकारी जरूर देख लें।   आगे की प्रवेश प्रक्रिया पर नजर   DElEd प्रवेश परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए अब अगला चरण प्रवेश प्रक्रिया है। रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थियों की नजर कॉलेज आवंटन और प्रवेश से संबंधित कार्यक्रम पर रहेगी।   BSEB की ओर से आगे की प्रक्रिया के संबंध में आधिकारिक सूचना जारी किए जाने के बाद अभ्यर्थी अपनी पसंद के संस्थानों और पाठ्यक्रम से संबंधित विकल्पों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

anjali kumari अगस्त 6, 2026 0
Prahlad Joshi

भारत में आज से BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भुवनेश्वर में जुटेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि

Delhi Government Decision

दिल्ली सरकार की बड़ी पहल, 12वीं के छात्रों को मिलेगी मुफ्त JEE-NEET कोचिंग, रहने-खाने की सुविधा भी

NEET UG 2026 Counselling

NEET UG 2026 काउंसलिंग का पहला राउंड आज से शुरू, MCC ने जारी किया पूरा शेड्यूल

Odisha government announces monthly stipends for eligible PG and PhD agriculture students at OUAT
PG और PhD छात्रों के लिए बड़ी राहत, हर महीने मिलेगा 15 हजार रुपये तक स्टाइपेंड; जानें किसे मिलेगा लाभ

भुवनेश्वर: उच्च शिक्षा और कृषि क्षेत्र में रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए ओडिशा सरकार ने अहम पहल की है। ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) में कृषि और इससे जुड़े विषयों में नियमित पोस्ट-ग्रेजुएशन और PhD कर रहे छात्रों के लिए मासिक स्टाइपेंड देने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत योग्य PhD स्कॉलर्स को तीन साल तक हर महीने 15,000 रुपये, जबकि योग्य PG छात्रों को दो साल तक हर महीने 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद छात्रों पर आर्थिक दबाव कम करना और उन्हें पढ़ाई, रिसर्च तथा नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना है। PhD छात्रों को तीन साल तक मिलेंगे 15 हजार रुपये नई स्टाइपेंड व्यवस्था के तहत कृषि में PhD कर रहे योग्य छात्रों को तीन साल तक हर महीने 15,000 रुपये दिए जाएंगे। इससे रिसर्च के दौरान छात्रों को अपनी पढ़ाई और शोध से जुड़े खर्चों को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह आर्थिक सहायता खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो उच्च शिक्षा के साथ-साथ लंबे समय तक रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। PG छात्रों को दो साल तक 10 हजार रुपये कृषि और इससे जुड़े विषयों में नियमित PG प्रोग्राम कर रहे योग्य छात्रों के लिए भी सरकार ने सहायता का ऐलान किया है। इन छात्रों को दो साल तक हर महीने 10,000 रुपये स्टाइपेंड दिया जाएगा। योजना OUAT में कृषि और संबंधित विषयों में पढ़ाई कर रहे नियमित PG छात्रों के लिए लागू होगी। इससे छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान होने वाले व्यक्तिगत और अकादमिक खर्चों में कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है। किस यूनिवर्सिटी के छात्रों को मिलेगा लाभ? यह स्टाइपेंड योजना ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) से जुड़ी है। योजना के दायरे में कृषि और इससे संबंधित विषयों में नियमित PG और PhD प्रोग्राम कर रहे पात्र छात्र शामिल होंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि ओडिशा के सभी PG और PhD छात्रों को अपने आप स्टाइपेंड मिलेगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक योजना का दायरा OUAT में कृषि और संबंधित विषयों के नियमित छात्रों तक है। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? ओडिशा सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को बढ़ावा देना और प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करना है। सरकार के मुताबिक, आर्थिक सहायता मिलने से रिसर्च स्कॉलर्स को अपने खर्चों को लेकर कम चिंता करनी पड़ेगी और वे नए प्रयोग, तकनीकी नवाचार तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े शोध पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन प्रणाली और किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शोध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि स्टाइपेंड जैसी आर्थिक मदद से छात्रों की रिसर्च में भागीदारी बढ़ेगी। ओडिशा के कृषि क्षेत्र को भी फायदा मिलने की उम्मीद राज्य सरकार के अनुसार, रिसर्च छात्रों को आर्थिक सहायता देने का असर केवल यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे राज्य में कृषि से जुड़े शोध और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का मानना है कि मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम से उन्नत कृषि तकनीक, बेहतर कृषि पद्धतियों और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर काम करने में मदद मिलेगी। यानी इस पहल को छात्रों के लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ ओडिशा के कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। स्टाइपेंड का सार एक नजर में श्रेणी स्टाइपेंड अवधि कृषि एवं संबंधित विषयों के पात्र PhD छात्र ₹15,000 प्रति माह 3 साल कृषि एवं संबंधित विषयों के पात्र PG छात्र ₹10,000 प्रति माह 2 साल छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? PG और PhD की पढ़ाई के दौरान फीस, किताबों, रिसर्च सामग्री, यात्रा और अन्य शैक्षणिक खर्चों का दबाव छात्रों पर रहता है। खासकर PhD रिसर्च लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है। ऐसे में नियमित मासिक आर्थिक सहायता छात्रों को अपनी पढ़ाई और शोध जारी रखने में मदद कर सकती है। सरकार की उम्मीद है कि इस पहल से आर्थिक कारणों से रिसर्च पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सकेगा। हालांकि, छात्रों को स्टाइपेंड की पात्रता, भुगतान की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन से जुड़े आधिकारिक नियमों की जानकारी OUAT या संबंधित सरकारी अधिसूचना से जरूर जांचनी चाहिए।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
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IIT Jodhpur
IIT जोधपुर ने लॉन्च किया 4 साल का BS प्रोग्राम, JEE के बिना मिलेगा दाखिला

जोधपुर, एजेंसियां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर ने BS in Management and Technology नाम से नया चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें दाखिले के लिए JEE की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उम्मीदवारों को संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया के तहत क्वालिफायर टेस्ट देना होगा।   मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी की होगी पढ़ाई   यह कार्यक्रम मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और सामाजिक विज्ञान को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया है। चार साल के दौरान छात्रों को अर्थशास्त्र, मार्केटिंग, कंप्यूटिंग, अकाउंटिंग, सांख्यिकी और उद्यमिता जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। कार्यक्रम में कुल 141 क्रेडिट और 47 पाठ्यक्रम हैं, जिन्हें आठ सेमेस्टर में पूरा करना होगा।   12वीं पास उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन   इस पाठ्यक्रम के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। उम्मीदवार किसी भी स्ट्रीम से आवेदन कर सकते हैं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं।   JEE की जरूरत नहीं, क्वालिफायर टेस्ट जरूरी   IIT जोधपुर के इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए JEE अनिवार्य नहीं है। उम्मीदवारों को आवेदन के बाद संस्थान की ओर से आयोजित क्वालिफायर टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना होगा। चयनित उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग के बाद प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी।   चार साल में मिलेगी BS डिग्री   कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से भी पूरा किया जा सकता है। पहले साल के बाद बिजनेस फंडामेंटल्स में प्रमाणपत्र, दूसरे साल के बाद मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और तीसरे साल के बाद तीन वर्षीय BS डिग्री का विकल्प है। चार साल पूरा करने पर BS in Management and Technology की डिग्री मिलेगी। कार्यक्रम की कुल चार वर्षीय फीस ₹5.60 लाख है, जबकि आवेदन के लिए ₹999 का प्रवेश परीक्षा शुल्क अलग से निर्धारित है।

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