exam fraud

CBI investigates NEET-UG 2026 paper leak case after fresh arrests and nationwide raids
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला: CBI ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार, अब तक 13 अरेस्ट

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक डॉक्टर और एक कोचिंग संस्थान का शिक्षक शामिल है। पहले आरोपी की पहचान लातूर निवासी डॉक्टर मनोज शिरूरे के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने एक कोचिंग सेंटर संचालक के बेटे समेत तीन छात्रों को आरोपी पीवी कुलकर्णी के जरिए केमिस्ट्री का लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था। दूसरा आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह है, जो पुणे स्थित डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी (APMA) में फिजिक्स फैकल्टी के तौर पर कार्यरत था। CBI के अनुसार, उसे फिजिक्स का लीक प्रश्नपत्र पहले से गिरफ्तार आरोपी मनीषा हवलदार से मिला था। अब तक 13 गिरफ्तारियां, 49 जगहों पर छापेमारी CBI ने बताया कि मामले की जांच लगातार जारी है और पेपर लीक की पूरी साजिश का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसी अब तक देशभर में 49 स्थानों पर तलाशी अभियान चला चुकी है। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में बड़ा खुलासा, 5 राज्यों में बिका पेपर CBI जांच में सामने आया है कि NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र कम से कम पांच राज्यों में बेचा गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, सबसे ज्यादा पेपर महाराष्ट्र में बेचे गए, जबकि राजस्थान दूसरे स्थान पर रहा। अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक का नेटवर्क पहले की आशंका से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। फिलहाल एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने छात्रों ने पैसे देकर प्रश्नपत्र खरीदे थे। महाराष्ट्र बना पेपर लीक का बड़ा केंद्र जांच में यह भी सामने आया है कि महाराष्ट्र इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र था। यहीं से प्रश्नपत्रों की कॉपी निकालकर राजस्थान और अन्य राज्यों के छात्रों तक पहुंचाई गई। CBI को महाराष्ट्र और राजस्थान में प्रिंटेड प्रश्नपत्र बेचने के सबूत मिले हैं। एजेंसी का मानना है कि इस रैकेट में कई राज्यों के कोचिंग नेटवर्क और बिचौलिए शामिल हो सकते हैं। पैसों के लेनदेन की जांच तेज CBI अब उन अभिभावकों और छात्रों की सूची तैयार कर रही है, जिनके बैंक खातों से आरोपी शिवराज मोटेगांवकर, पीवी कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को अभी भी कुछ बाहरी किरदारों पर शक है और जल्द ही दूसरे राज्यों में भी छापेमारी की जा सकती है। फीस रिफंड के लिए NTA ने खोला पोर्टल इस बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों के लिए फीस रिफंड पोर्टल शुरू किया है। उम्मीदवार 22 मई से 27 मई रात 11:50 बजे तक अपने बैंक खाते की जानकारी जमा कर सकते हैं। NTA ने कहा है कि रिफंड प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इसमें करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। NTA के मुताबिक, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।  

surbhi मई 27, 2026 0
CBI officials escort NEET-UG paper leak accused Manisha Mandhare after court hearing in Delhi.
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा एक्शन, ‘मास्टरमाइंड’ मनीषा मंधारे 14 दिन की हिरासत में

Central Bureau of Investigation ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए NTA पैनलिस्ट और वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ Manisha Mandhare को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की Rouse Avenue Court ने रविवार को उन्हें 14 दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। अदालत ने आरोपी को 30 मई 2026 को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया है। पेपर लीक साजिश में शामिल होने का आरोप सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंधारे ने आरोपी मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद विट्ठल राव कुलकर्णी समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री छात्रों तक पहुंचाने की साजिश रची। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में भारी रकम का लेन-देन हुआ। मंधारे NTA के विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा थीं और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थीं। इसी दौरान उन्हें अंतिम प्रश्न सेट तक पहुंच मिली, जिसे कथित तौर पर बाद में लीक किया गया। मथुरा के होटल से हुई गिरफ्तारी सीबीआई ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद डिप्टी एसपी पवन कुमार कौशिक ने उन्हें अदालत में पेश किया। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक दर्शन लाल ने अदालत में दलील दी कि यह मामला एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा है और कई आरोपी अभी भी फरार हैं। एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने के लिए 14 दिनों की हिरासत जरूरी है। अदालत ने माना गंभीर साजिश का मामला विशेष न्यायाधीश कोलेट रश्मी कुजूर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच से यह एक बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा प्रतीत होता है। अदालत ने माना कि कई अन्य सदस्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने आदेश में कहा कि “तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को चिकित्सा परीक्षण के अधीन 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा जाता है।” डिजिटल सबूत और पैसों के लेन-देन की जांच सीबीआई ने अदालत को बताया कि अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी होगी ताकि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। बचाव पक्ष ने हिरासत का किया विरोध मनीषा मंधारे की ओर से अधिवक्ता करण मान, आकाश चौहान और निखिल सरोहा अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष ने 14 दिन की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी 57 वर्ष की हैं, पेशे से लेक्चरर हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं। वकीलों ने कहा कि आरोपी पहले ही दो बार जांच में शामिल हो चुकी हैं और उनके घर से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल पुणे ले जाकर पूछताछ करनी है तो इतनी लंबी हिरासत की जरूरत नहीं है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग बचाव पक्ष ने अदालत में मामले से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है। अदालत ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा है। देशभर में जारी है जांच NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहल्यानगर से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई इस पूरे संगठित नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।  

surbhi मई 18, 2026 0
CBI officials investigate NEET-UG 2026 paper leak case after mastermind lecturer PV Kulkarni arrest
NEET-UG 2026 पेपर लीक केस में बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी गिरफ्तार

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड और रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले ही छात्रों को असली प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल और उनके जवाब याद करवाए थे। सीबीआई के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित अपने घर पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए। छात्रों को नोटबुक में लिखवाए गए थे प्रश्न और उत्तर जांच एजेंसी के अनुसार, इन गुप्त क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर हाथ से नोटबुक में लिखवाए गए थे। बाद में जब 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र सामने आया, तो वह इन नोट्स से हूबहू मेल खाता पाया गया। सीबीआई का कहना है कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। कई शहरों में छापेमारी, अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में सीबीआई अब तक जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक और अहिल्यानगर समेत कई शहरों में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच आरोपियों को पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है, जहां उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। वहीं दो अन्य आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है। धनंजय लोखंडे की भूमिका भी आई सामने दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी छह दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, लोखंडे ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र सह-आरोपी शुभम खैरनार को उपलब्ध कराया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि लोखंडे को यह प्रश्नपत्र पुणे निवासी मनीषा वाघमारे से मिला था। जांच में दोनों आरोपियों के बीच करीब छह लाख रुपये के बैंकिंग लेनदेन का भी खुलासा हुआ है। टेलीग्राम के जरिए भेजे गए थे पेपर की PDF जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम निवासी आरोपी यश यादव को 29 अप्रैल को टेलीग्राम ऐप के जरिए प्रश्नपत्रों की PDF फाइलें भेजी गई थीं। इन फाइलों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र शामिल थे। सीबीआई ने इन डिजिटल फाइलों को बरामद कर लिया है और उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को हुई थी। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने मामले की व्यापक जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी है। एजेंसी अब इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मई 16, 2026 0
NEET paper leak
नीट पेपर लीक में बड़ा खुलासा, मेडिकल कॉलेज का छात्र निकला मास्टरमाइंड

पटना, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। महाराष्ट्र के नासिक के बाद अब बिहार से भी गिरफ्तारी होने के बाद जांच और तेज हो गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बिहार में पकड़े गए आरोपी सीधे तौर पर पेपर लीक में शामिल थे या सॉल्वर गैंग के सदस्य थे। लेकिन पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।   नालंदा में वाहन जांच से खुला राज इस पूरे मामले का खुलासा बिहार के नालंदा जिले में पुलिस की गाड़ी चेकिंग के दौरान हुआ। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के मुताबिक, पावापुरी मोड़ के पास दो संदिग्ध गाड़ियों को रोका गया। काले रंग की स्कॉर्पियो में बैठे युवक खुद को एमबीबीएस सेकंड ईयर का छात्र बता रहे थे। तलाशी के दौरान पुलिस को नकदी, कई संदिग्ध दस्तावेज और मोबाइल फोन मिले। मोबाइल की जांच में NEET समेत अन्य परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, पैसों के लेन-देन के रिकॉर्ड और कई संदिग्ध चैट सामने आए। पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने से कथित सॉल्वर गैंग परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाया।   कौन है ‘राजा बाबू’? जांच के दौरान सबसे बड़ा नाम उज्जवल राज उर्फ ‘राजा बाबू’ का सामने आया। पुलिस के मुताबिक वह मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और Bhagwan Mahavir Institute of Medical Sciences (BMIMS) का 2022 बैच का छात्र है। पुलिस का कहना है कि राजा बाबू पिछले चार वर्षों से मेडिकल परीक्षाओं में लगातार फेल हो रहा था, लेकिन कॉलेज में बना हुआ था। जांच एजेंसियों को शक है कि वही पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी और कथित मास्टरमाइंड हो सकता है। उसके खिलाफ पहले से केस दर्ज है और CBI उसकी तलाश में जुटी हुई है।   इस गैंग में और कौन-कौन? राजगीर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार युवकों में अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, पंकज कुमार भी मेडिकल छात्र है और उसे इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी माना जा रहा है. वहीं राजा बाबू को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि मोबाइल कॉल डिटेल्स से कई अहम सुराग मिले हैं. अभिभावकों, छात्रों और कथित सॉल्वरों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी. अब इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है.   राजस्थान से शुरू हुआ था मामला इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले राजस्थान से हुआ था। वहां पुलिस ने दावा किया कि परीक्षा से पहले छात्रों को 410 सवालों वाला कथित ‘गेस पेपर’ दिया गया था, जिनमें से लगभग 120 सवाल असली परीक्षा में आ गए। 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। बिहार कनेक्शन सामने आने के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जांच का विषय बन गया है।

Unknown मई 13, 2026 0
BPSC AEDO exam candidates outside center amid paper leak controversy and SIT investigation in Bihar
BPSC AEDO परीक्षा विवाद: पेपर लीक से आयोग का इनकार, SIT जांच तेज–ब्लूटूथ कदाचार का दावा भी खारिज

बिहार में सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा को लेकर उठे पेपर लीक के आरोपों पर अब बड़ा अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने साफ तौर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी Economic Offences Unit (EOU) को सौंप दी गई है, जिसने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर जांच तेज कर दी है। क्या है पूरा मामला? राज्य में AEDO के कुल 935 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परीक्षा का आयोजन 14 अप्रैल से शुरू होकर 15, 16 और 18 अप्रैल तक किया गया। परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने लगे थे, जिससे अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई। मुंगेर से पुलिस ने परीक्षा से पहले 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 अभ्यर्थी और एक परीक्षा केंद्र अधीक्षक भी शामिल थे। इसके अलावा नालंदा में एक महिला अभ्यर्थी को सॉल्व्ड आंसरशीट के साथ पकड़ा गया, साथ ही दो बायोमेट्रिक कर्मियों की भी गिरफ्तारी हुई। EOU की SIT कर रही गहन जांच EOU के ADG नैय्यर हसनैन के निर्देश पर एसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में 8 सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम में एक DSP और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। BPSC का स्पष्ट बयान: ‘पेपर लीक नहीं हुआ’ Bihar Public Service Commission ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं। आयोग के अनुसार, राज्य के किसी भी परीक्षा केंद्र से पेपर लीक की कोई शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है। ब्लूटूथ कदाचार की खबर भी निकली गलत परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी के कान में ब्लूटूथ डिवाइस मिलने की खबर सामने आई थी। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल कदाचार की कोशिश थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने विफल कर दिया। इसे पेपर लीक से जोड़ना गलत है। तीसरे चरण की परीक्षा तय समय पर BPSC ने यह भी साफ किया है कि AEDO भर्ती परीक्षा का तीसरा चरण 20 और 21 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर ही आयोजित किया जाएगा। आयोग और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने का भरोसा दिलाया है। साथ ही अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी समस्या के लिए आधिकारिक Grievance Portal का उपयोग करें।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 5, 2026 0