टेक्नोलॉजी

बिना इंटरनेट भी चलेगा AI! Google का Gemma 4 बना गेमचेंजर

Anjali Kumari अप्रैल 20, 2026 0
Gemma 4 ai model
Gemma 4 ai model

नई दिल्ली, एजेंसियां। गूगल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक बड़ा बदलाव करते हुए अपना नया AI मॉडल Gemma 4 पेश किया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी स्मार्टफोन पर काम कर सकता है। यानी अब यूजर्स को AI फीचर्स के लिए क्लाउड सर्वर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

 

क्या है Gemma 4 और कैसे करता है काम?


Gemma 4 दरअसल हल्के और एडवांस AI मॉडल्स की एक सीरीज है, जिसे मोबाइल डिवाइस पर सीधे चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग पर आधारित है, जिससे डेटा फोन से बाहर नहीं जाता और प्राइवेसी बेहतर बनी रहती है। यह मॉडल अलग-अलग वेरिएंट्स में आता है, जैसे E2B (तेज) और E4B (ज्यादा स्मार्ट), ताकि यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सके।

 

Google AI Edge ऐप से मिलेगा सपोर्ट


इन मॉडल्स को इस्तेमाल करने के लिए गूगल ने Google AI Edge नाम का एक ऐप भी लॉन्च किया है। यह ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और यूजर्स को AI फीचर्स ऑफलाइन इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।

 

क्या-क्या कर पाएंगे यूजर्स?


Gemma 4 के जरिए यूजर्स AI चैट, इमेज एनालिसिस, टेक्स्ट समरी, ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना (ट्रांसक्रिप्शन) और ट्रांसलेशन जैसे काम बिना इंटरनेट के कर सकते हैं। इसके अलावा ‘थिंकिंग मोड’ जैसे फीचर्स AI को ज्यादा स्मार्ट और सटीक जवाब देने में मदद करते हैं।

 

कैसे करें सेटअप?


यूजर्स को सबसे पहले Google AI Edge ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद अपनी जरूरत के अनुसार AI मॉडल चुनकर डाउनलोड करें। एक बार सेटअप पूरा होने के बाद आप बिना इंटरनेट के भी AI का इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

क्यों है यह खास?


Gemma 4 डेटा प्राइवेसी, तेज स्पीड और ऑफलाइन एक्सेस के कारण AI टेक्नोलॉजी को नए स्तर पर ले जाता है। यह खासकर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है या डेटा सुरक्षा प्राथमिकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

टेक्नोलॉजी

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AI स्मार्ट चार्जर का कमाल: 100% चार्ज होते ही खुद निकल जाएगा प्लग, ओवरचार्जिंग की टेंशन खत्म

स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक अनोखा और इनोवेटिव समाधान सामने आया है। Kuwajia ने एक ऐसा AI-पावर्ड स्मार्ट चार्जर तैयार किया है, जो फोन के 100% चार्ज होते ही खुद-ब-खुद डिवाइस से अलग हो जाता है। यह तकनीक न केवल ओवरचार्जिंग की समस्या को खत्म करने का दावा करती है, बल्कि बैटरी की लाइफ बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है। कैसे काम करता है यह स्मार्ट चार्जर? यह चार्जर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है, जो लगातार फोन की बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है। जैसे ही बैटरी 100% चार्ज होती है, चार्जर के अंदर मौजूद इलेक्ट्रोमैग्नेट और स्प्रिंग मैकेनिज्म एक्टिव हो जाता है और प्लग को फोन के पोर्ट से बाहर धकेल देता है। इस प्रक्रिया में एक सेकंड से भी कम समय लगता है, जिससे यूजर को किसी मैनुअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती। Android और iPhone–दोनों के लिए उपयोगी Android और iPhone–दोनों प्रकार के स्मार्टफोन्स के साथ यह चार्जर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, यह 140W तक की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे यूजर्स को तेजी से चार्जिंग का भी फायदा मिलता है। बैटरी हेल्थ के लिए क्यों है अहम? आज के स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियां ओवरचार्जिंग से प्रभावित होती हैं। 100% चार्ज होने के बाद भी अगर फोन प्लग में लगा रहता है, तो “ट्रिकल चार्जिंग” जारी रहती है, जिससे बैटरी में गर्मी बढ़ती है और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह स्मार्ट चार्जर फुल चार्ज होते ही कनेक्शन तोड़ देता है, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और उसकी उम्र लंबी हो सकती है। सॉफ्टवेयर नहीं, हार्डवेयर लेवल पर समाधान जहां कई कंपनियां बैटरी सुरक्षा के लिए सॉफ्टवेयर आधारित फीचर्स देती हैं–जैसे 80% या 85% तक चार्जिंग लिमिट–वहीं Kuwajia का यह चार्जर एक कदम आगे बढ़कर हार्डवेयर स्तर पर समाधान देता है। यह न केवल चार्जिंग रोकता है, बल्कि फिजिकल कनेक्शन भी खत्म कर देता है, जिससे ओवरहीटिंग और बैटरी डैमेज का जोखिम काफी कम हो जाता है। क्या यह गेम-चेंजर साबित होगा? अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर बाजार में आती है, तो यह स्मार्टफोन चार्जिंग के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। खासकर उन यूजर्स के लिए, जो रातभर फोन चार्ज पर छोड़ देते हैं, यह एक सुरक्षित और स्मार्ट विकल्प बन सकता है।  

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ब्रह्मांड का सबसे बड़ा 3D मैप तैयार: डार्क एनर्जी के रहस्य खोलने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

  नई खोज से वैज्ञानिकों को मिली ब्रह्मांड की गहराई समझने की नई ताकत खगोल विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। वैज्ञानिकों ने अब तक का सबसे विशाल तीन-आयामी (3D) ब्रह्मांडीय नक्शा तैयार कर लिया है, जो डार्क एनर्जी के रहस्यों को समझने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह मैप करीब 11 अरब वर्षों के ब्रह्मांडीय इतिहास को समेटे हुए है और इसमें करोड़ों आकाशगंगाओं और क्वासार्स का डेटा शामिल है। DESI प्रोजेक्ट: 5 साल की मेहनत का नतीजा यह ऐतिहासिक मैप Dark Energy Spectroscopic Instrument (DESI) प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों ने इस परियोजना के लिए अमेरिका के एरिजोना स्थित Mayall Telescope का इस्तेमाल किया। DESI में उन्नत रोबोटिक फाइबर-ऑप्टिक तकनीक का उपयोग कर ब्रह्मांड में मौजूद आकाशगंगाओं की दूरी और गति को मापा गया। पांच वर्षों में वैज्ञानिकों ने: 4.7 करोड़ से अधिक आकाशगंगाओं और क्वासार्स का डेटा इकट्ठा किया करीब 2 करोड़ सितारों का विश्लेषण किया पहले के सभी 3D सर्वे से कई गुना बड़ा डेटासेट तैयार किया यह अब तक का सबसे बड़ा और हाई-रेजोल्यूशन 3D मैप माना जा रहा है। डार्क एनर्जी को लेकर नई सोच DESI के शुरुआती निष्कर्षों ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। अब तक माना जाता था कि Dark Energy एक स्थिर (constant) शक्ति है, जो ब्रह्मांड के विस्तार को तेज कर रही है। लेकिन नए डेटा के अनुसार, यह ऊर्जा समय के साथ बदल भी सकती है। अगर यह बात पूरी तरह साबित हो जाती है, तो यह भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों को चुनौती दे सकती है। भविष्य के लिए क्या मायने हैं? इस विशाल मैप की मदद से वैज्ञानिक अब: ब्रह्मांड के विस्तार की गति को बेहतर समझ सकेंगे Dark Matter और डार्क एनर्जी के संबंध का अध्ययन कर सकेंगे ब्रह्मांड के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में नए निष्कर्ष निकाल पाएंगे DESI से जुड़े शोधों के विस्तृत परिणाम 2027 तक प्रकाशित होने की संभावना है। यह 3D ब्रह्मांडीय मैप सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व और ब्रह्मांड की संरचना को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में यह शोध कई पुराने सिद्धांतों को बदल सकता है और हमें ब्रह्मांड के रहस्यों के और करीब ले जाएगा।  

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  जर्मन कार निर्माता Volkswagen ने अपनी लोकप्रिय मिड-साइज SUV टाइगुन का फेसलिफ्ट मॉडल भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। नए अवतार में कार को कॉस्मेटिक बदलावों के साथ कई नए फीचर्स और अपडेटेड टेक्नोलॉजी दी गई है। कीमत और ऑफर नई टाइगुन फेसलिफ्ट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹11 लाख रखी गई है, जो टॉप वेरिएंट में ₹19.3 लाख तक जाती है। कंपनी ने ग्राहकों के लिए Assured Buyback Scheme भी पेश की है: 31 मई 2026 तक बुकिंग पर लागू 3 साल या 30,000 किमी बाद 75% तक वैल्यू वापस मिलने का दावा एक्सटीरियर में क्या नया? नई टाइगुन को ज्यादा प्रीमियम और मॉडर्न लुक दिया गया है: नए डिजाइन की LED हेडलाइट्स और बंपर फ्रंट और रियर में इल्युमिनेटेड लोगो पीछे LED लाइट बार के साथ सीक्वेंशियल इंडिकेटर्स नए अलॉय व्हील्स और नए कलर ऑप्शन इंटीरियर और फीचर्स केबिन में टेक्नोलॉजी और कम्फर्ट दोनों को अपग्रेड किया गया है: 10.25-इंच डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले 10.1-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम पहली बार पैनोरमिक सनरूफ वेंटिलेटेड सीट्स, एम्बिएंट लाइटिंग वायरलेस Apple CarPlay और Android Auto वायरलेस चार्जिंग और 6-स्पीकर साउंड सिस्टम इंजन और परफॉर्मेंस इंजन ऑप्शन वही हैं, लेकिन गियरबॉक्स में बड़ा बदलाव हुआ है: 1.0-लीटर टर्बो पेट्रोल (115hp) 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल (150hp) नया अपडेट: 1.0L इंजन के साथ अब 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स 1.5L इंजन के साथ 7-स्पीड DCT माइलेज: 1.0L मैन्युअल: 19.98 kmpl 1.0L ऑटोमैटिक: 19.54 kmpl 1.5L DCT: 18.85 kmpl सेफ्टी फीचर्स सुरक्षा के मामले में भी कार को मजबूत बनाया गया है: 6 एयरबैग (स्टैंडर्ड) ABS + EBD इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम हायर वेरिएंट में रियर डिस्क ब्रेक्स किनसे होगा मुकाबला? नई टाइगुन फेसलिफ्ट का मुकाबला भारतीय बाजार में इन SUVs से रहेगा: Hyundai Creta Kia Seltos Skoda Kushaq Renault Duster Volkswagen Taigun फेसलिफ्ट अब पहले से ज्यादा फीचर-लोडेड, स्टाइलिश और टेक्नोलॉजी से लैस हो गई है। खासकर पैनोरमिक सनरूफ और नया ऑटोमैटिक गियरबॉक्स इसे सेगमेंट में और मजबूत बनाते हैं। अगर आप 10–20 लाख के बजट में प्रीमियम SUV देख रहे हैं, तो यह नया मॉडल एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है।  

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शिक्षा

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Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0

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