गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में कई लोग बिजली बचाने के लिए AC को हर 10–15 मिनट में ऑन-ऑफ करते रहते हैं। लेकिन क्या यह तरीका सही है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह आदत फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या बार-बार AC ऑन-ऑफ करना सही है?
टेक्निकल तौर पर AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना गलत माना जाता है। जब भी AC चालू किया जाता है, उसका कंप्रेसर (compressor) शुरुआत में ज्यादा बिजली खपत करता है। ऐसे में अगर आप इसे बार-बार बंद करके फिर चालू करते हैं, तो हर बार स्टार्टिंग लोड बढ़ता है, जिससे कुल बिजली खपत ज्यादा हो जाती है।
क्यों बढ़ जाता है बिजली बिल?
AC को नुकसान कैसे होता है?
सही तरीका क्या है?
AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना बिजली बचाने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे बिजली बिल बढ़ सकता है और मशीन पर भी बुरा असर पड़ता है। सही उपयोग और सेटिंग्स अपनाकर ही आप बेहतर कूलिंग के साथ
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अगर आप ऐसा मोबाइल रिचार्ज प्लान तलाश रहे हैं जिसमें डेटा, कॉलिंग और OTT मनोरंजन का पूरा पैकेज एक साथ मिले, तो Airtel का ₹1,729 वाला प्रीपेड प्लान आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यह प्लान लंबी वैलिडिटी के साथ आता है और इसमें Netflix समेत कई लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस भी शामिल है। ऐसे यूजर्स जो अलग-अलग सब्सक्रिप्शन पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते, उनके लिए यह प्लान ऑल-इन-वन पैकेज की तरह काम कर सकता है। 84 दिनों तक मिलेगा रोजाना 2GB डेटा Airtel के ₹1,729 वाले प्रीपेड प्लान में 84 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इस दौरान यूजर्स को प्रतिदिन 2GB हाई-स्पीड डेटा दिया जाता है। कुल वैलिडिटी: 84 दिन प्रतिदिन डेटा: 2GB कुल डेटा: 168GB यह प्लान वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन काम करने वाले यूजर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS प्रतिदिन इस प्लान में सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा मिलती है। साथ ही रोमिंग के दौरान भी कॉलिंग का लाभ जारी रहता है। इसके अलावा यूजर्स को रोजाना 100 SMS भी मिलते हैं, जो बैंकिंग, OTP और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए उपयोगी हैं। मुफ्त मिलेगा Netflix सब्सक्रिप्शन इस प्लान का सबसे बड़ा आकर्षण Netflix Basic सब्सक्रिप्शन है। इसके जरिए यूजर्स बिना अलग से भुगतान किए Netflix की वेब सीरीज, फिल्में और ओरिजिनल कंटेंट का आनंद ले सकते हैं। OTT सब्सक्रिप्शन की बढ़ती कीमतों के बीच यह सुविधा यूजर्स के लिए अतिरिक्त बचत का मौका देती है। सिर्फ Netflix ही नहीं, कई और OTT प्लेटफॉर्म्स का फायदा Airtel ने इस प्लान में कई अन्य मनोरंजन सुविधाएं भी शामिल की हैं। यूजर्स को मिलता है: Netflix Basic JioHotstar Super ZEE5 Premium Airtel Xstream Play Premium यानी एक ही रिचार्ज में कई OTT प्लेटफॉर्म्स का कंटेंट देखने का विकल्प मिलता है। किन यूजर्स के लिए है सबसे फायदेमंद? यह प्लान खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो: रोजाना ज्यादा डेटा इस्तेमाल करते हैं। वेब सीरीज और फिल्में देखना पसंद करते हैं। अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शन पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते। लंबी वैलिडिटी वाला रिचार्ज चाहते हैं। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां समय-समय पर अपने प्लान और बेनेफिट्स में बदलाव करती रहती हैं। इसलिए रिचार्ज करने से पहले Airtel की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर उपलब्ध जानकारी जरूर जांच लें।
आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन कई मोबाइल ऐप्स ऐसे भी हैं जो आपकी जानकारी के बिना बैकग्राउंड में लगातार आपकी लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं। इससे न केवल आपकी निजी जानकारी कंपनियों तक पहुंचती है, बल्कि फोन की बैटरी और मोबाइल डेटा की खपत भी बढ़ जाती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सेटिंग्स की मदद से आप अपनी प्राइवेसी पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं। ऐप्स को लोकेशन की जरूरत क्यों पड़ती है? कुछ ऐप्स के लिए लोकेशन एक्सेस वास्तव में जरूरी होती है। उदाहरण के लिए— मैप्स ऐप्स को रास्ता बताने के लिए कैब बुकिंग ऐप्स को पिकअप लोकेशन जानने के लिए मौसम से जुड़े ऐप्स को स्थानीय जानकारी देने के लिए लेकिन कई सोशल मीडिया, शॉपिंग और विज्ञापन आधारित ऐप्स भी आपकी लोकेशन डेटा एकत्र करते हैं। इस जानकारी का उपयोग आपकी पसंद, यात्रा की आदतों और खरीदारी के व्यवहार को समझने के लिए किया जाता है, ताकि आपको टारगेटेड विज्ञापन दिखाए जा सकें। एंड्रॉयड फोन में ऐसे बंद करें लोकेशन ट्रैकिंग अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें— Settings खोलें। Location सेक्शन में जाएं। App Location Permissions पर टैप करें। देखें कौन-कौन से ऐप्स लोकेशन एक्सेस कर रहे हैं। जिन ऐप्स को हमेशा लोकेशन की जरूरत नहीं है, उन्हें "Only While Using the App" पर सेट करें या परमिशन पूरी तरह बंद कर दें। इसके अलावा Privacy Dashboard के जरिए आप यह भी देख सकते हैं कि हाल ही में किन ऐप्स ने आपकी लोकेशन एक्सेस की है। iPhone यूजर्स इन सेटिंग्स पर दें ध्यान iPhone उपयोगकर्ता इन स्टेप्स को अपनाएं— Settings में जाएं। Privacy & Security विकल्प खोलें। Location Services पर टैप करें। ऐप्स की सूची में जाकर देखें किस ऐप को कौन-सी परमिशन मिली हुई है। "Always" की जगह "While Using the App" या "Never" का विकल्प चुनें। Apple एक अतिरिक्त फीचर "Precise Location" भी देता है। इसे बंद करने पर ऐप्स को आपकी सटीक लोकेशन की बजाय केवल अनुमानित क्षेत्र की जानकारी मिलती है। समय-समय पर परमिशन की जांच करना जरूरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नई ऐप इंस्टॉल करने या फोन अपडेट के बाद लोकेशन परमिशन की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। अगर कोई साधारण गेम, टॉर्च ऐप या शॉपिंग ऐप बार-बार लोकेशन मांग रहा है, तो यह समझना जरूरी है कि उसे वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं। अक्सर यूजर्स जल्दबाजी में सभी परमिशन स्वीकार कर लेते हैं और बाद में उन्हें भूल जाते हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से सेटिंग्स की जांच करना डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सिर्फ प्राइवेसी नहीं, बैटरी भी बचेगी लोकेशन ट्रैकिंग को सीमित करने का फायदा केवल आपकी प्राइवेसी तक सीमित नहीं है। बैकग्राउंड में चलने वाली लोकेशन सर्विसेज कम होंगी। बैटरी की खपत घटेगी। मोबाइल डेटा की बचत होगी। फोन की परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहेगी। अगर आप चाहते हैं कि आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहे और स्मार्टफोन की बैटरी लंबे समय तक चले, तो आज ही अपनी लोकेशन सेटिंग्स की जांच करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल आजकल तेजी से हो रहा है और इसका असर अब लगभग हर सेक्टर में दिखाई देने लगा है। टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एजुकेशन, बैंकिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में AI आधारित टूल्स के बढ़ते उपयोग ने नौकरी के भविष्य को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है। समय और लागत दोनों कम करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि AI सिर्फ काम करने के तरीके को नहीं बदल रहा, बल्कि कई पारंपरिक नौकरियों की प्रकृति को भी प्रभावित कर रहा है। कंपनियां अब ऑटोमेशन और AI टूल्स का इस्तेमाल कर समय और लागत दोनों कम करने की कोशिश कर रही हैं। किन नौकरियों पर पड़ सकता है ज्यादा असर? रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा एंट्री, बेसिक कस्टमर सपोर्ट, रिपिटेटिव ऑफिस वर्क और कुछ प्रशासनिक भूमिकाओं पर AI का असर ज्यादा देखा जा सकता है। वहीं, AI से जुड़े नए रोल्स भी तेजी से उभर रहे हैं। नए अवसर भी बना रहा AI जानकारों का कहना है कि AI सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नए अवसर भी बना रहा है। AI Specialist Data Analyst Prompt Engineer Cyber Security Expert Machine Learning Engineer नई स्किल्स अपनाना जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीकी कौशल, समस्या समाधान क्षमता और डिजिटल स्किल्स ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगी। इसलिए लगातार सीखना और नई स्किल्स अपनाना जरूरी माना जा रहा है। क्या पूरी तरह बदल जाएगी नौकरी की दुनिया? एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI कई कामों को आसान और तेज जरूर बना सकता है, लेकिन पूरी तरह इंसानी भूमिका को खत्म करना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा। AI और इंसानों के साथ मिलकर काम करने का मॉडल ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता इस्तेमाल नौकरी की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसे चुनौती के साथ-साथ अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में वही लोग आगे रह सकते हैं, जो नई तकनीकों के साथ खुद को तेजी से ढाल पाएंगे।