रांची। रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन किसानों और धान खरीद के मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी खूब हुई। अनंत प्रताप देव ने उठाए धान खरीद के मुद्दे विधायक अनंत प्रताप देव ने गढ़वा क्षेत्र में धान खरीद की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब तक किसानों से 50 प्रतिशत धान की भी खरीद नहीं हो पाई है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धान खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रणाली के तहत अंगूठा लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। इरफान अंसारी का जवाब और तंज इस पर जवाब देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि गढ़वा में धान खरीद की स्थिति बेहतर है। उन्होंने बताया कि 2 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 2.5 लाख क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है।इसी दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आपके क्षेत्र में किसान कम और नेता ज्यादा हैं।” उनका यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया। मंत्री ने यह भी बताया कि पूरे राज्य में 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 80 प्रतिशत धान की खरीद पूरी हो चुकी है और किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। नए विधायकों की ट्रेनिंग पर सुझाव इरफान अंसारी ने सदन में नए विधायकों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नए सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, क्योंकि कई बार वे यह नहीं समझ पाते कि कब और कहां बोलना है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित होती है। पीडीएस व्यवस्था में सुधार की बात विधायक अमित यादव के सवाल पर मंत्री ने पीडीएस व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीडीएस दुकानदारों को प्रति किलो डेढ़ रुपये का कमीशन मिलता है, जबकि अन्य वस्तुओं पर एक रुपये का कमीशन दिया जाता है।साथ ही, बटखरा सत्यापन हर दो साल में किया जाता है और अब इलेक्ट्रॉनिक वेटिंग मशीन लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। मुआवजा विवाद पर जांच के निर्देश विधायक मथुरा महतो ने भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री दीपक बिरूआ ने आश्वासन दिया कि मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि अगर जांच में गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सदन में बहस के बीच राजनीतिक नोकझोंक कुल मिलाकर, बजट सत्र के अंतिम दिन विधानसभा में जहां किसानों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई, वहीं नेताओं के बीच तंज और आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले, जिसने माहौल को और गर्म कर दिया।
सदन शुरू होने से पहले गरमाया सियासी माहौल झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्य की Hemant Soren सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक हाथों में भगवा रंग की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उनका आरोप था कि राज्य में जल प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब है और सरकार लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने में विफल रही है। नल-जल योजना पर लगाए गंभीर आरोप भाजपा विधायकों ने सरकार की नल-जल योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य में “घर-घर नल” लगाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। विधायकों का दावा है कि योजना कागजों पर तो बड़ी दिखती है, लेकिन हकीकत में कई जगहों पर नल लगे होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा है। पोस्टरों के जरिए सरकार पर साधा निशाना प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने पोस्टरों और नारों के माध्यम से भी सरकार पर निशाना साधा। पोस्टरों पर लिखे नारों में शामिल थे- “हेमंत सरकार पानी दो, पानी दो!” “नल-जल योजना हुई फेल, जिम्मेदार को भेजो जेल।” “नल में जल नहीं, जल में है घोटाला। पानी के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला।” इन नारों के जरिए विपक्ष ने सरकार पर पानी की समस्या को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। सदन के भीतर भी मुद्दा उठाने की तैयारी भाजपा विधायकों ने कहा कि नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। विपक्षी दल ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर जोर-शोर से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा। पानी की समस्या को लेकर बढ़ा सियासी दबाव राज्य में कई इलाकों में पेयजल की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में नल-जल योजना को लेकर उठे सवालों ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और विधानसभा के अंदर इस मुद्दे पर क्या बहस होती है।
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने बुधवार को सदन में कहा कि अब राज्य में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड मुफ्त कराया जाएगा, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी मंत्री ने बताया कि राज्य की 42 हजार सहियाओं को काम को बेहतर बनाने के लिए टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस 237 हाईटेक एंबुलेंस खरीदी जाएंगी। इन एंबुलेंस के संचालन के लिए Dumka और Jamtara में कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए ANM और GNM के 7500 पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए अतिरिक्त 10,500 मैनपावर की बहाली भी की जाएगी। प्रमुख अस्पतालों में कैथलैब की स्थापना सरकार ने राज्य के बड़े अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने का भी फैसला किया है। इसके तहत MGM Hospital, Shaheed Nirmal Mahto Medical College and Hospital और Sadar Hospital में कैथलैब स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा हर पंचायत में उपस्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना भी सरकार ने बनाई है। राज्य सरकार ने वर्ष 2029 तक झारखंड को थैलेसिमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए सभी जिलों में थैलेसिमिया की जांच कराई जाएगी। साथ ही नर्सिंग निदेशालय के गठन की भी घोषणा की गई है। डीजे प्रतिबंध को लेकर विधानसभा में हंगामा बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में Hazaribagh में Ram Navami जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा उठने पर सदन में ज़ोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष Rabindra Nath Mahato ने सदन की कार्यवाही 25 मिनट के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान दोपहर 12:25 बजे से 12:50 बजे तक सदन की कार्यवाही बाधित रही। भाजपा विधायक ने उठाया मुद्दा भाजपा विधायक Naveen Jaiswal ने हजारीबाग में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर रोक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में अन्य धर्मों के त्योहारों पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जाते, जबकि हिंदू त्योहारों के दौरान प्रशासन कई तरह की पाबंदियां लगा देता है। मंत्री का जवाब इस पर संसदीय कार्य मंत्री Radhakrishna Kishore ने कहा कि डीजे का किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है। रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर रोक अदालत के आदेश के तहत है और इसमें सरकार या प्रशासन की मनमानी नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल हिंदू ही नहीं बल्कि पूरा हिंदुस्तान कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
झारखंड में विधायकों और पूर्व विधायकों को ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की योजना अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने इस लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द जमीन की रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगले तीन दिनों के भीतर रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा, जिससे संबंधित विधायक और पूर्व विधायक अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे। विधानसभा में उठा मुद्दा मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक मथुरा महतो ने सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों और पूर्व विधायकों से जमीन आवंटन के लिए राशि पहले ही जमा कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में जल्द कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि संबंधित लोगों को राहत मिल सके। भाजपा विधायक ने प्रशासन पर लगाए आरोप इस पर भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने रांची जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जमीन के लिए ली गई राशि सहकारी लिमिटेड के खाते में जमा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सी.पी. सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर रांची के उपायुक्त से भी बातचीत की थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान एक सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं होने से विधायकों और पूर्व विधायकों में नाराजगी बढ़ रही है। मंत्री ने सदन में दिया भरोसा मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में स्पष्ट किया कि अब इस प्रक्रिया में और देरी नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले तीन दिनों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर ली है। पोर्टल शुरू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी, जिससे लंबे समय से लंबित मांग का समाधान हो सकेगा।
होली अवकाश के बाद फिर शुरू होगी सदन की कार्यवाही होली की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार, 9 मार्च से झारखंड विधानसभा का बजट सत्र एक बार फिर शुरू हो रहा है। सत्र के शेष दिनों की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस बार सदन में सबसे ज्यादा नजर विपक्ष के रुख पर टिकी हुई है कि वह सरकार को घेरने के लिए कितना आक्रामक तेवर अपनाता है। भाजपा विधायक की डिग्री का मुद्दा चर्चा में विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक गलियारों में भाजपा विधायक नवीन जायसवाल की डिग्री को लेकर विवाद सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। इसके जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे सदन में बहस तेज होने की संभावना है। पहले चरण में शांत रहा था विपक्ष बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष का रवैया अपेक्षाकृत शांत रहा था। सदन के अंदर सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया या जोरदार विरोध देखने को नहीं मिला था। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। विपक्ष के पास मुद्दों की कमी की चर्चा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दों की कमी नजर आ रही है। यही कारण है कि सदन में उसकी सक्रियता सीमित दिखाई दे रही है। सत्ता पक्ष ने साधा विपक्ष पर निशाना वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के कुछ विधायकों का कहना है कि विपक्ष पूरी तरह सुस्त पड़ गया है। उनका दावा है कि सरकार सदन में उठने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए पहले से तैयार रहती है। ऐसे में विपक्ष को नए मुद्दे खोजने और सरकार को घेरने का ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा है। सत्र के दौरान तेज हो सकती है राजनीतिक बहस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के बाकी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। खासकर डिग्री विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन में माहौल गर्म रहने की संभावना जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।