रांची। झारखंड के रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 17 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। 19 जून को बुंडू थाना क्षेत्र के तेतरटांड़ जंगल से मिली सिरकटी और आंशिक रूप से जली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी से शादी करने की चाह में पत्नी ने अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। पहचान मिटाने के लिए सिर काटकर जलाया शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान तमाड़ थाना क्षेत्र के मांझीडीह निवासी संजय लोहरा के रूप में हुई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने के लिए पहले सिर धड़ से अलग किया, फिर धड़ को जलाकर जंगल में फेंक दिया। सिर को अलग स्थान पर जमीन में दफना दिया गया, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बिना सिर के शव मिलने के कारण यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मिला कटा हुआ सिर गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर तमाड़ थाना क्षेत्र के सुंदरडीह स्थित रानी वन में जमीन के भीतर दबाकर रखा गया मृतक का सिर बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए। चार आरोपी शामिल, दो अब भी फरार डीएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक जांच और लगातार छानबीन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे में अनुसंधान टीम, तकनीकी सेल और एफएसएल की संयुक्त भूमिका रही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ 30 मीटर रिजॉल्यूशन पर बाढ़ के पानी की गहराई का भी अनुमान लगा सकता है। यह तकनीक दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में विकसित की गई है और भविष्य में देश के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 93% से ज्यादा सटीकता के साथ करता है बाढ़ का अनुमान शोधकर्ताओं के अनुसार, यह AI सिस्टम 93 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में सक्षम है। यह मॉडल लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तदरी से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तकनीक का उद्देश्य भारी बारिश के कारण आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते प्रशासन को सतर्क करना है। सिर्फ बारिश नहीं, कई कारकों का करता है विश्लेषण IIT बॉम्बे की रिसर्च टीम ने इस मॉडल में केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य कारकों को भी शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: सतही जल प्रवाह (Surface Runoff) मिट्टी की नमी भूमि उपयोग (Land Use) जल अवशोषण क्षमता ड्रेनेज सिस्टम शोधकर्ताओं का कहना है कि सतही जल प्रवाह, केवल बारिश की मात्रा की तुलना में बाढ़ का अधिक विश्वसनीय संकेतक साबित हुआ। सैटेलाइट और AI का अनोखा संयोजन इस सिस्टम को तैयार करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-1 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया। यह रडार तकनीक घने मानसूनी बादलों के बीच भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। AI मॉडल ने बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर पानी से भरे क्षेत्रों की पहचान करना सीखा और उसी आधार पर संभावित बाढ़ की गहराई का अनुमान लगाया। दो चरणों में करता है काम यह AI सिस्टम दो स्तरों पर कार्य करता है: पहले चरण में यह पहचानता है कि कौन-सा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखता है। दूसरे चरण में यह अनुमान लगाता है कि उस स्थान पर पानी कितनी गहराई तक भर सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल, सड़क और स्कूलों की सुरक्षा में होगी मदद 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाले हाई-प्रिसिजन मैप्स की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ के दौरान कौन-कौन से अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में मुंबई और पूर्वी तट तक होगा विस्तार फिलहाल यह मॉडल पश्चिमी घाट के कम ढलान (7% से कम) वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त डेटा जोड़कर इसे मुंबई और भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों जैसे जटिल इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
Apple ने Siri को पूरी तरह बदला, AI चैटबॉट्स को देगी टक्कर Apple ने iOS 27 के साथ अपनी वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नया रूप दिया है। अब "Siri AI" पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, समझदार और उपयोगी हो गई है। कंपनी का दावा है कि नई Siri न सिर्फ सवालों के जवाब देगी, बल्कि आपकी ईमेल, मैसेज, फोटो, फाइल्स और अन्य ऐप्स की जानकारी समझकर व्यक्तिगत सहायता भी प्रदान करेगी। Apple के अनुसार, Siri AI अब ChatGPT और Claude जैसे लोकप्रिय AI चैटबॉट्स को टक्कर देने में सक्षम होगी। आपकी निजी जानकारी को समझेगी Siri नई Siri की सबसे बड़ी खासियत "पर्सनल कॉन्टेक्स्ट अंडरस्टैंडिंग" है। अब Siri आपकी अनुमति के साथ: ईमेल खोज सकेगी मैसेज पढ़कर जानकारी निकाल सकेगी फोटो और वीडियो ढूंढ सकेगी नोट्स और दस्तावेज़ खोज सकेगी कैलेंडर और रिमाइंडर से जानकारी ले सकेगी उदाहरण के लिए आप पूछ सकते हैं: पिछले सप्ताह भाई ने कौन-सी फिल्म देखने को कहा था? मेरी फ्लाइट का कन्फर्मेशन नंबर क्या है? कल मुझे कौन-कौन से काम करने हैं? पिछले महीने मकान मालिक ने जो लीज भेजी थी, उसे ढूंढो। इंटरनेट से भी देगी जवाब Siri अब केवल फोन के डेटा तक सीमित नहीं रहेगी। यह वेब सर्च करके ताजा जानकारी भी उपलब्ध करा सकेगी। इससे उपयोगकर्ता: यात्रा की योजना बना सकेंगे रेसिपी खोज सकेंगे खेल स्कोर जान सकेंगे होमवर्क और रिसर्च में मदद ले सकेंगे DIY और गार्डनिंग टिप्स प्राप्त कर सकेंगे स्क्रीन पर क्या है, यह भी समझेगी Siri नई "ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस" सुविधा Siri को स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट समझने की क्षमता देती है। अब आप किसी फोटो, चार्ट, डॉक्यूमेंट या वेबसाइट को देखते हुए पूछ सकते हैं: यह फोटो कहां की है? इस दस्तावेज़ का सारांश बताओ। यह ग्राफ क्या दिखा रहा है? इस मेन्यू का अनुवाद करो। Siri स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पढ़कर उसी संदर्भ में जवाब दे सकेगी। ऐप्स में आपके लिए काम भी करेगी नई "App Actions" तकनीक Siri को ऐप्स के भीतर कार्य करने की क्षमता देती है। अब Siri से कहा जा सकता है: इस ईमेल का जवाब लिखो। आज की सभी तस्वीरें किसी दोस्त को भेज दो। मंगलवार शाम 3 बजे की मीटिंग कैलेंडर में जोड़ो। दोपहर 2 बजे की मीटिंग गुरुवार पर शिफ्ट कर दो। यह सुविधा Apple और थर्ड-पार्टी ऐप्स दोनों में काम करेगी। नया इंटरफेस और अलग Siri ऐप iOS 27 में Siri का नया इंटरफेस दिया गया है। Dynamic Island से एक्सेस टाइप और वॉइस दोनों विकल्प फोटो और डॉक्यूमेंट अपलोड करने की सुविधा बातचीत का इतिहास देखने के लिए अलग Siri ऐप पुराने चैट सर्च और पिन करने का विकल्प अब उपयोगकर्ता Siri के साथ लंबी बातचीत भी जारी रख सकेंगे। अब हर जगह कर सकेंगे AI लेखन iOS 27 में "Write with Siri" फीचर भी शामिल किया गया है। इसकी मदद से Siri: ईमेल ड्राफ्ट कर सकती है टेक्स्ट को प्रोफेशनल बना सकती है पैराग्राफ तैयार कर सकती है व्याकरण और स्पेलिंग सुधार सकती है टोन बदल सकती है यह सुविधा लगभग हर उस जगह उपलब्ध होगी जहां उपयोगकर्ता टाइपिंग करते हैं। Apple और Google की साझेदारी से तैयार हुए AI मॉडल Apple ने बताया है कि iOS 27 में इस्तेमाल किए जा रहे नए AI मॉडल उसके अपने Foundation Models हैं, जिन्हें विकसित करने में Google की Gemini तकनीक से भी मदद ली गई है। यह AI सिस्टम Spotlight Index और App Toolbox के साथ मिलकर काम करता है, जिससे Siri को अलग-अलग ऐप्स और डेटा स्रोतों तक पहुंच मिलती है। नई Siri आवाज को भी कर सकेंगे कस्टमाइज iPhone 17 Pro और iPhone Air जैसे नए डिवाइसों पर Siri की आवाज को कस्टमाइज करने का विकल्प मिलेगा। यूजर: बोलने की गति बदल सकेंगे आवाज की अभिव्यक्ति नियंत्रित कर सकेंगे बेहतर डिक्टेशन और वॉइस रिकग्निशन का लाभ उठा सकेंगे प्राइवेसी पर Apple का बड़ा दावा Apple का कहना है कि Siri AI का अधिकांश काम डिवाइस पर ही होगा। जहां क्लाउड प्रोसेसिंग की जरूरत होगी, वहां Private Cloud Compute तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार उपयोगकर्ताओं का डेटा Apple या किसी तीसरे पक्ष के लिए उपलब्ध नहीं होगा। किन डिवाइसों में मिलेगी Siri AI? नई Siri AI केवल उन डिवाइसों में उपलब्ध होगी जो Apple Intelligence को सपोर्ट करते हैं। इनमें शामिल हैं: iPhone 15 Pro और उसके बाद के मॉडल iPadOS 27 सपोर्टेड iPad macOS Golden Gate वाले Mac visionOS 27 डिवाइस watchOS 27 समर्थित Apple Watch किन देशों में नहीं मिलेगी सुविधा? Apple ने स्पष्ट किया है कि लॉन्च के समय Siri AI: यूरोपीय संघ (EU) में iPhone और iPad पर उपलब्ध नहीं होगी चीन में उपलब्ध नहीं होगी हालांकि Mac उपयोगकर्ताओं को EU में यह सुविधा मिलेगी। निष्कर्ष iOS 27 के साथ Apple ने Siri को केवल वॉइस असिस्टेंट से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण AI सहायक में बदल दिया है। व्यक्तिगत जानकारी समझने, ऐप्स में काम करने, वेब सर्च करने और कंटेंट लिखने जैसी क्षमताओं के साथ Siri अब Apple इकोसिस्टम का सबसे बड़ा AI अपग्रेड मानी जा रही है।
2027 तक AGI आने का दावा, बड़े बदलाव की चेतावनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पूर्व Google X बिजनेस प्रमुख Mo Gawdat ने दुनिया को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका मानना है कि आने वाले तीन वर्षों के भीतर AI इतना शक्तिशाली हो सकता है कि यह रोजगार, अर्थव्यवस्था और समाज की मौजूदा संरचना को पूरी तरह बदल दे। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में गॉडेट ने कहा कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) या तो व्यावहारिक रूप से आ चुकी है या फिर 2027 तक इसका आगमन हो सकता है। उनके अनुसार, यह बदलाव मानव इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी परिवर्तनों में से एक साबित हो सकता है। आज के AI टूल्स सिर्फ शुरुआत हैं ChatGPT, Gemini, Claude और Grok जैसे AI टूल्स आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ये ईमेल लिखने, दस्तावेजों का विश्लेषण करने, यात्रा की योजना बनाने और कई अन्य कार्यों में मदद कर रहे हैं। लेकिन गॉडेट का कहना है कि आम लोग AI की जो क्षमताएं देख रहे हैं, वह उसकी वास्तविक शक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा है। उनका दावा है कि रिसर्च लैब्स में विकसित हो रहे सिस्टम कहीं अधिक उन्नत हैं और वे खुद अपने कोड को बेहतर बनाने की क्षमता हासिल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आम जनता AI को चैटबॉट और वायरल वीडियो के रूप में देख रही है, जबकि पर्दे के पीछे इसकी प्रगति कहीं ज्यादा तेज और गंभीर है। सबसे पहले सफेदपोश नौकरियों पर असर गॉडेट का मानना है कि AI का पहला बड़ा प्रभाव व्हाइट-कॉलर यानी दफ्तर आधारित नौकरियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर एजेंट, प्रशासनिक सहायक, ट्रैवल एजेंट और अन्य नियमित कंप्यूटर आधारित भूमिकाएं सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा पैरालीगल, वित्तीय विश्लेषक, ग्राफिक डिजाइनर, संगीतकार, मिडिल मैनेजर और कुछ मेडिकल डायग्नोस्टिक भूमिकाओं में भी AI कार्यभार को काफी हद तक कम कर सकता है। उनका तर्क है कि AI की मदद से एक कर्मचारी वह काम कर सकेगा जिसके लिए पहले कई लोगों की जरूरत पड़ती थी। अचानक नहीं, धीरे-धीरे आएगा बदलाव हालांकि गॉडेट का मानना है कि नौकरियों पर असर एकदम से नहीं दिखेगा। शुरुआत में कंपनियां नए कर्मचारियों की भर्ती कम कर सकती हैं, खासकर एंट्री-लेवल पदों पर। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई कंपनियों ने शुरुआती स्तर की नियुक्तियों को सीमित करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह नहीं कि बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है, लेकिन कार्यबल की वृद्धि की रफ्तार जरूर धीमी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें समय रहते तैयारी नहीं करतीं, तो बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। मैन्युअल काम भी नहीं बचेंगे गॉडेट का मानना है कि फिलहाल शारीरिक श्रम से जुड़े कई कार्य AI और रोबोट्स से सुरक्षित दिखाई देते हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। उन्होंने स्वचालित वाहनों का उदाहरण देते हुए कहा कि रोबोटिक्स का विस्तार भविष्य में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सैन्य क्षेत्र और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। विशेष प्रकार की मशीनें धीरे-धीरे कई मैन्युअल कार्यों को संभाल सकती हैं। AI खतरा नहीं, अवसर भी बन सकता है हालांकि उनकी भविष्यवाणी पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। गॉडेट का मानना है कि यदि AI का जिम्मेदारी से उपयोग किया गया, तो यह मानवता की कई बड़ी समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है। उनके अनुसार, अत्यधिक बुद्धिमान AI सिस्टम वैज्ञानिक खोजों को तेज कर सकते हैं, चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति ला सकते हैं और वैश्विक उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। युवाओं के लिए क्या है सलाह? AI युग में करियर बनाने को लेकर गॉडेट की सलाह स्पष्ट है—AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसके साथ काम करना सीखें। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे कौशल विकसित करने चाहिए जिन्हें मशीनें आसानी से नहीं दोहरा सकतीं। सहानुभूति, प्रभावी संवाद, रचनात्मकता, नेतृत्व और मजबूत मानवीय रिश्ते भविष्य में सबसे मूल्यवान गुण साबित हो सकते हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे AI कई तकनीकी कार्यों में इंसानों से बेहतर होता जाएगा, वैसे-वैसे मानवता से जुड़े गुण लोगों की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। विशेषज्ञों में मतभेद भी मौजूद हालांकि AI के भविष्य को लेकर सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। कई तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि AGI के आने का समय अभी अनिश्चित है और AI के प्रभाव का वास्तविक स्वरूप कई आर्थिक, सामाजिक और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा। फिर भी, गॉडेट की चेतावनी इस बात की ओर संकेत करती है कि AI केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति बन सकती है।
Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।
AI इमेज बनाने का नया दौर शुरू तकनीकी दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। OpenAI ने अपने इमेज जनरेशन टूल का नया वर्जन ChatGPT Images 2.0 लॉन्च किया है, जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा स्मार्ट और सटीक माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि अब AI सिर्फ तस्वीरें नहीं बनाएगा, बल्कि उन्हें “समझकर” तैयार करेगा। जटिल निर्देशों को समझने में ज्यादा सक्षम इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतर समझ (reasoning) क्षमता है। पहले जहां AI इमेज बनाते समय कई बार टेक्स्ट या डिजाइन गड़बड़ा जाते थे, वहीं अब यह सिस्टम जटिल निर्देशों को भी बेहतर तरीके से समझकर सटीक और साफ विजुअल तैयार करता है। पोस्टर, मेन्यू या स्लाइड जैसी चीजों में अब टेक्स्ट भी साफ और पढ़ने योग्य दिखाई देता है। इमेज बनाने से पहले ‘सोचने’ की प्रक्रिया ChatGPT Images 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इमेज बनाने से पहले एक “सोचने की प्रक्रिया” अपनाता है। यानी यह पहले दिए गए निर्देशों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर समझता है, फिर तय करता है कि तस्वीर कैसी होनी चाहिए। इस वजह से इमेज बनने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन रिजल्ट ज्यादा सटीक और बेहतर मिलता है। एक जैसी स्टाइल और बेहतर स्ट्रक्चर नया मॉडल एक ही तरह की कई इमेज में एक जैसा स्टाइल बनाए रखने में भी सक्षम है। अगर किसी कैरेक्टर या डिजाइन को बार-बार बनाना हो, तो उसकी पहचान और लुक में निरंतरता बनी रहती है। साथ ही, अगर यूज़र किसी खास लेआउट या डिजाइन की मांग करता है, तो AI उसे ज्यादा सही तरीके से फॉलो करता है। Google Gemini को टक्कर AI की दुनिया में अब मुकाबला और तेज हो गया है। Google Gemini पहले से ही मल्टीमॉडल AI में मजबूत माना जाता था, लेकिन ChatGPT Images 2.0 के आने से यह अंतर काफी कम हो गया है। अब OpenAI का यह नया मॉडल टेक्स्ट और इमेज दोनों को समझने में ज्यादा सक्षम बनता जा रहा है। भविष्य की दिशा: एकीकृत AI अनुभव विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपडेट AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां टेक्स्ट और इमेज दोनों एक ही समझ के आधार पर काम करेंगे। इससे यूज़र्स को बार-बार कोशिश करने की जरूरत कम होगी और बेहतर रिजल्ट जल्दी मिलेंगे।
टेक दिग्गज Apple अपने टैबलेट लाइनअप में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2027 तक iPad Air में OLED डिस्प्ले देने की योजना बना रही है। अगर यह योजना साकार होती है, तो यह Apple के मिड-रेंज टैबलेट सेगमेंट में एक बड़ा अपग्रेड साबित होगा। Samsung Display निभाएगा अहम रोल रिपोर्ट्स के अनुसार, Samsung Display इस OLED ट्रांजिशन में प्रमुख सप्लायर के रूप में उभर सकता है। कंपनी 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक OLED पैनल का उत्पादन शुरू कर सकती है, ताकि 2027 की पहली छमाही में iPad Air लॉन्च के लिए पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित हो सके। OLED की ओर Apple का बड़ा कदम Apple पहले ही 2024 में iPad Pro में OLED डिस्प्ले पेश कर चुका है। अब: iPad Mini भी जल्द OLED पर शिफ्ट हो सकता है iPad Air के जुड़ने के बाद केवल स्टैंडर्ड iPad ही LCD पर बचेगा यह रणनीति दिखाती है कि Apple धीरे-धीरे अपने पूरे टैबलेट पोर्टफोलियो में OLED तकनीक लागू करना चाहता है। कीमत और क्वालिटी के बीच संतुलन रिपोर्ट के मुताबिक, iPad Air में इस्तेमाल होने वाला OLED पैनल: iPad Pro से सस्ता होगा सिंगल-स्टैक एमिसिव लेयर LTPS TFT टेक्नोलॉजी हाइब्रिड सब्सट्रेट जैसे फीचर्स के साथ आएगा। इसका मकसद बेहतर डिस्प्ले क्वालिटी देना है, लेकिन कीमत को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकना भी है। क्यों अहम है यह बदलाव? iPad Air आमतौर पर iPad Pro से ज्यादा बिकता है। ऐसे में Apple के लिए यह जरूरी है कि: प्रीमियम फीचर्स भी मिले और कीमत आम यूजर्स के लिए किफायती बनी रहे यह कदम ऐसे समय पर आ रहा है जब OLED iPad Pro की बिक्री उम्मीद से कम रही, जिसकी एक वजह इसकी ऊंची कीमत मानी जा रही है। आगे क्या संकेत मिलते हैं? रिपोर्ट्स के मुताबिक: OLED टैबलेट की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी 2027 तक शिपमेंट में लगातार इजाफा होगा और इसमें Apple की हिस्सेदारी बड़ी हो सकती है हालांकि, कंपनी ने अभी तक इन योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा कदम उठाते हुए Anthropic ने अपना अब तक का सबसे एडवांस मॉडल Claude Mythos Preview पेश किया है। लेकिन इसकी ताकत ही इसकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है-इसी वजह से कंपनी ने इसे आम यूजर्स के लिए फिलहाल लॉन्च नहीं करने का फैसला लिया है। इतना ताकतवर कि खुद कंपनी भी सतर्क Anthropic के CEO Dario Amodei के मुताबिक, Claude Mythos इतनी क्षमता रखता है कि यह हजारों “zero-day vulnerabilities” यानी ऐसी सुरक्षा खामियां ढूंढ सकता है, जिन्हें अब तक इंसान नहीं पकड़ पाए थे। यह मॉडल वेब ब्राउज़र, ऑपरेटिंग सिस्टम और सर्वर सॉफ्टवेयर में गंभीर कमजोरियां पहचान सकता है, जिससे हैकिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। OpenBSD और Linux में मिली बड़ी खामियां Claude Mythos ने एक 27 साल पुरानी कमजोरी OpenBSD में खोजी, जो अपनी सुरक्षा के लिए जानी जाती है। इसके अलावा Linux kernel में भी कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिनसे किसी सिस्टम पर पूरा नियंत्रण हासिल किया जा सकता था। 40+ कंपनियों के साथ मिलकर होगा इस्तेमाल इस AI को सीधे जनता के लिए जारी करने की बजाय Anthropic ने इसे एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। Project Glasswing के जरिए कंपनी Apple, Google, Microsoft और Amazon Web Services समेत 40 से ज्यादा टेक कंपनियों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करेगी। $100 मिलियन का बड़ा निवेश Anthropic ने इस प्रोजेक्ट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक के मॉडल यूसेज क्रेडिट देने की घोषणा की है, ताकि कंपनियां बड़े स्तर पर सुरक्षा सुधार कर सकें। क्यों नहीं किया जा रहा पब्लिक रिलीज? कंपनी का मानना है कि इतनी शक्तिशाली AI को बिना सुरक्षा उपायों के सार्वजनिक करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर गलत हाथों में पहुंचा, तो यह साइबर हमलों को और खतरनाक बना सकता है। AI का नया दौर, नई चुनौतियां Claude Mythos यह दिखाता है कि AI अब सिर्फ टेक्स्ट या कोड तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, Anthropic का कहना है कि अगर इस तकनीक का सही इस्तेमाल किया गया, तो यह इंटरनेट को पहले से ज्यादा सुरक्षित बना सकता है। Claude Mythos AI के भविष्य की झलक है-जहां तकनीक बेहद शक्तिशाली है, लेकिन उसके इस्तेमाल के लिए उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि AI दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाएगा या जोखिम बढ़ाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।