अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि एक विशेष सैन्य अभियान में वेनेजुएला के कुख्यात अपराधी और गैंग Tren de Aragua के प्रमुख Hector Rusthenford Guerrero Flores को मार गिराया गया है। ट्रंप ने इस कार्रवाई को "तेज और घातक" बताते हुए कहा कि अब इस संगठन के आतंकियों के लिए दुनिया में कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि "निनो गुरेरो" के नाम से कुख्यात हेक्टर गुरेरो फ्लोरेस अमेरिकी कार्रवाई में मारा गया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अपराधियों, ड्रग तस्करों और हिंसक गिरोहों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रखेगी। ट्रंप ने लिखा कि ट्रेन डे अरागुआ के आतंकियों को अब न तो वेनेजुएला में और न ही दुनिया के किसी अन्य हिस्से में शरण मिलेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे अपराधियों का पीछा कर उन्हें न्याय के कटघरे तक पहुंचाएगा। कौन था निनो गुरेरो? हेक्टर गुरेरो फ्लोरेस को ट्रेन डे अरागुआ गिरोह का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उस पर हत्या, उगाही, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने जैसे कई गंभीर आरोप थे। अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी के लिए करोड़ों डॉलर के इनाम की भी घोषणा की थी। न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में उसके खिलाफ रैकेटियरिंग साजिश समेत कई मामलों में आरोप तय किए गए थे। क्या है ट्रेन डे अरागुआ? Tren de Aragua की शुरुआत एक दशक से अधिक समय पहले वेनेजुएला की एक बदनाम जेल से हुई थी। समय के साथ यह गिरोह लैटिन अमेरिका के कई देशों तक फैल गया। इस पर हिंसा, अपहरण, अवैध खनन, उगाही और ड्रग नेटवर्क चलाने के आरोप लगते रहे हैं। हाल के वर्षों में लाखों वेनेजुएलावासियों के पलायन के साथ इस गिरोह की गतिविधियां कई देशों में फैलने की बात भी सामने आई है। अमेरिकी अभियान और बढ़ी सख्ती ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस गिरोह को अमेरिका में अपराध और अवैध गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराता रहा है। इसी रणनीति के तहत अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और सेना ने कथित तौर पर गिरोह से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं। हालांकि, इस ताजा हमले को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग ने ट्रंप के बयान से आगे कोई अतिरिक्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। वहीं वेनेजुएला सरकार की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनावी मुद्दा भी बना अपराध और आव्रजन अमेरिका में अपराध और अवैध आव्रजन ट्रंप के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहे हैं। ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि विदेशी आपराधिक गिरोह अमेरिकी शहरों में हिंसा और ड्रग तस्करी को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में ट्रेन डे अरागुआ के प्रमुख की मौत को उनकी सरकार एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति Donald Trump ने संघर्षविराम की नई व्याख्या पेश की है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में सीजफायर का मतलब हमेशा पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता, बल्कि कई बार इसका अर्थ केवल कम तीव्रता वाली सैन्य कार्रवाई भी हो सकता है। व्हाइट हाउस में ट्रंप का संकेत- अमेरिकी सैनिक मरे तो खत्म हो सकता है संघर्षविराम ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसके पीछे ईरान की भूमिका साबित होती है, तो मौजूदा संघर्षविराम जारी रखना मुश्किल होगा। वॉशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट: सहयोगियों को ट्रंप ने दिया सख्त संदेश रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों से कहा है कि छोटे स्तर की झड़पों को कुछ समय तक सहन किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी सैनिकों पर घातक हमले की स्थिति में अमेरिका की रणनीति बदल सकती है। होर्मुज के पास अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा नया तनाव ताजा तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप के निकट एक सैन्य नियंत्रण केंद्र और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक लक्ष्य पर कार्रवाई की। इसके बाद क्षेत्र में हालात और संवेदनशील हो गए। कुवैत और बहरीन में ईरानी हमले, भारतीय नागरिक की मौत ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। ट्रंप का दावा- ईरानी हमले हालिया अमेरिकी कार्रवाई का जवाब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हर सैन्य कार्रवाई के पीछे कोई न कोई कारण होता है। उनके अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी और स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है। वॉशिंगटन-तेहरान संपर्क अब भी जारी, ट्रंप ने खारिज की बातचीत रुकने की खबरें ईरानी मीडिया में वार्ता रुकने की खबरों के बावजूद ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और बातचीत की प्रक्रिया जारी है। तीन महीने से खाड़ी क्षेत्र में जारी है टकराव 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी छिटपुट सैन्य कार्रवाइयां जारी रहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अटका विवाद, वैश्विक ऊर्जा बाजार की बढ़ी चिंता Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए क्षेत्र में अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अब भी आमने-सामने हैं अमेरिका-ईरान वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि तेहरान प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। युद्ध और कूटनीति साथ-साथ, पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बरकरार ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि संघर्षविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी बड़े हमले से हालात फिर तेजी से बदल सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर नए विवाद की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमत हो गया है। ईरान का कहना है कि मौजूदा वार्ता के मसौदे में ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है। ईरान बोला- ट्रंप के बयान में सच कम, दावे ज्यादा ईरान की सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े मीडिया संस्थान Fars News Agency ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के हालिया बयान वास्तविक बातचीत से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसे दावे कर रहे हैं जो अभी तक किसी अंतिम समझौते का हिस्सा नहीं हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वार्ता अभी जारी है और किसी भी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। किस मसौदे पर चल रही है चर्चा? रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच "कमिटमेंट के बदले कमिटमेंट" के सिद्धांत पर आधारित एक प्रस्तावित समझौते पर चर्चा हो रही है। तेहरान ने अभी तक इस मसौदे को अंतिम स्वीकृति नहीं दी है। ईरानी पक्ष का दावा है कि ट्रंप जिन शर्तों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख कर रहे हैं, वे वर्तमान ड्राफ्ट डील का हिस्सा नहीं हैं। ट्रंप ने क्या कहा था? व्हाइट हाउस में पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात सामान्य होने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा था कि ईरान जल्द ही समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जहाजों की आवाजाही पर लगी बाधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और क्षेत्र में फंसे जहाज अब सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक लौट सकेंगे। होर्मुज स्ट्रेट क्यों है अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तनाव या समझौते का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। अभी भी जारी है वार्ता दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ईरान और अमेरिका के बयानों में अंतर यह संकेत देता है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। ऐसे में संभावित शांति समझौते को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष आधिकारिक रूप से समझौते की पुष्टि नहीं करते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी गतिविधियों और हालिया राजनीतिक बयानों के बाद यह चर्चा बढ़ गई है कि वॉशिंगटन क्यूबा पर दबाव बढ़ा सकता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर सकता है। अमेरिका की ओर से किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। राउल कास्त्रो पर हत्या का मामला अमेरिका में राउल कास्त्रो के खिलाफ हत्या से जुड़ा मामला दर्ज किए जाने की खबरों ने तनाव बढ़ा दिया है। उन पर 1996 में दो नागरिक विमानों को गिराने के मामले में आरोप लगाए गए हैं। इन विमानों को कथित तौर पर कास्त्रो विरोधी पायलट उड़ा रहे थे। राउल कास्त्रो, क्यूबा की 1959 की कम्युनिस्ट क्रांति के नेता फिदेल कास्त्रो के छोटे भाई हैं और आज भी क्यूबा की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं। ट्रंप का बयान बना चर्चा का केंद्र डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका “क्यूबा को आजाद करा रहा है” और वहां के लोगों की मदद करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को क्यूबा के हालात की पूरी जानकारी है और वहां अमेरिकी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयान को साझा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान क्यूबा सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। कैरेबियन सागर में पहुंचा USS Nimitz अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक युद्धपोत USS Nimitz और उसका स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समूह में F/A-18E सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान, EA-18G ग्रोलर विमान और अन्य सैन्य जहाज शामिल हैं। अमेरिकी साउदर्न कमांड ने इसकी पुष्टि की है। अमेरिका ने इसे नियमित सैन्य तैनाती बताया है, लेकिन समय को देखते हुए इसे क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्यूबा के आसपास जासूसी विमानों की उड़ान रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी नौसेना के P-8A Poseidon निगरानी विमान लगातार क्यूबा के आसपास उड़ान भर रहे हैं। कुछ विमान क्यूबा से करीब 80 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए। Flightradar24 और BBC Verify की रिपोर्टों में कहा गया है कि इन विमानों की गतिविधियां समुद्री और सैन्य मूवमेंट पर नजर रखने से जुड़ी हो सकती हैं। अमेरिकी ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी इसके अलावा MQ-4C Triton निगरानी ड्रोन भी क्यूबा के आसपास सक्रिय देखे गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोन और निगरानी विमानों की उड़ानें क्षेत्रीय समुद्री गतिविधियों की गहन निगरानी का संकेत देती हैं। Center for Strategic and International Studies से जुड़े रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंशियन ने कहा कि अमेरिका संभवतः क्यूबा के आसपास आने-जाने वाले जहाजों और सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहा है। क्या वाकई सैन्य कार्रवाई संभव है? विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक किसी संभावित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव और प्रतिबंध जारी हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई जैसा कदम बेहद गंभीर माना जाएगा। फिलहाल इन घटनाक्रमों को बढ़ते रणनीतिक दबाव, निगरानी और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कैरेबियन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच तीन दिन के युद्धविराम का ऐलान किया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी पहल और मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, यह युद्धविराम 9, 10 और 11 मई तक लागू रहेगा. इस दौरान दोनों देशों के बीच सभी सैन्य गतिविधियां रोकी जाएंगी और युद्धबंदियों की अदला-बदली भी की जाएगी. ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन का सीजफायर होगा.” उन्होंने कहा कि रूस में यह अवधि “विक्ट्री डे” समारोह के कारण महत्वपूर्ण है, जबकि यूक्रेन भी द्वितीय विश्व युद्ध का अहम हिस्सा रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि युद्धविराम के लिए अनुरोध उन्होंने सीधे किया था और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने इस पर सहमति जताई. 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली सीजफायर के तहत दोनों देशों के बीच 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली भी होगी. ट्रंप ने कहा कि इस दौरान सभी “काइनेटिक एक्टिविटी” यानी सैन्य हमलों और लड़ाई को पूरी तरह रोका जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है. जेलेंस्की ने भी की पुष्टि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस अस्थायी युद्धविराम की पुष्टि की है. उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही बातचीत के तहत रूस ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति दी है. जेलेंस्की ने कहा, “हमें 1,000 के बदले 1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए रूस की मंजूरी मिल गई है.” उन्होंने इसे शांति वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष है और इसे खत्म करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है. उन्होंने लिखा, “हम हर दिन युद्ध खत्म होने के और करीब पहुंच रहे हैं.” हालांकि यह सीजफायर फिलहाल केवल तीन दिनों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे संभावित व्यापक शांति समझौते की शुरुआत के रूप में देख रहा है.
Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो उस पर पहले से ज्यादा तीव्र और ताकतवर बमबारी की जाएगी. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि ईरान तय शर्तों को स्वीकार कर लेता है, तो अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को समाप्त कर दिया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट को ईरान सहित सभी देशों के लिए फिर से खोल दिया जाएगा. ट्रंप बोले- नहीं माने तो बरसेंगे बम ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि अगर ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ज्यादा आक्रामक होगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देगा. उन्होंने लिखा कि “अगर ईरान सहमत नहीं होता, तो बमबारी पहले से कहीं अधिक ताकतवर होगी.” ट्रंप के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने भी दी चेतावनी ट्रंप का यह बयान ईरानी संसद अध्यक्ष एमबी गालिबफ की टिप्पणी के बाद आया है. गालिबफ ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर “नया समीकरण” तैयार हो रहा है और अमेरिका की नाकाबंदी नीति उसके लिए भारी साबित होगी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने युद्धविराम का उल्लंघन कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है. ईरान ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी की वजह से जहाजों, तेल और गैस आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हुई है. प्रोजेक्ट फ्रीडम अस्थायी रूप से रोका गया इस बीच ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए शुरू किये गये “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण और अंतिम समझौते” को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समेत कई देशों के अनुरोध और कूटनीतिक प्रयासों को देखते हुए यह फैसला लिया गया. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री नाकाबंदी अभी भी जारी रहेगी. पाकिस्तान ने ट्रंप को कहा धन्यवाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रंप का यह कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कूटनीति और संवाद के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा. होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत में प्रगति का हवाला देते हुए ‘Project Freedom’ को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए अमेरिका की रणनीति में कोई ढील नहीं दी जाएगी। बातचीत में प्रगति, ऑपरेशन पर ब्रेक ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता में “अच्छी प्रोग्रेस” देखने को मिल रही है, जिसके चलते इस सैन्य परियोजना को फिलहाल रोक दिया गया है। ‘Project Freedom’ का उद्देश्य समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करना और रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना था, लेकिन संभावित समझौते को ध्यान में रखते हुए इसे अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और सहमति का संकेत ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बताया कि यह फैसला पाकिस्तान समेत कई देशों के सुझाव के बाद लिया गया है। उन्होंने इसे “बड़ी सैन्य सफलता” के बाद उठाया गया संतुलित कदम बताया, जिससे कूटनीतिक रास्ता खुल सके। ‘हालात पहले से बेहतर’ अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद अब हालात पहले से बेहतर हो गए हैं और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है और यह सही समय है जब कूटनीति को मौका दिया जाए। नाकेबंदी जारी, दबाव कायम ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘Project Freedom’ को भले ही रोका गया हो, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी और दबाव पूरी तरह जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह रणनीति इसलिए जरूरी है ताकि ईरान समझौते के लिए गंभीर बना रहे और बातचीत का परिणाम सकारात्मक दिशा में जाए। क्यों लगाई गई अस्थायी रोक? ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि यह परखा जा सके कि कूटनीतिक प्रयास कितने प्रभावी साबित होते हैं। अब यह देखा जाएगा कि क्या बातचीत सफल होकर अंतिम समझौते तक पहुंचती है या नहीं। कूटनीति बनाम सैन्य दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस समय “डुअल स्ट्रेटेजी” अपना रहा है–एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना और दूसरी ओर बातचीत के जरिए समाधान निकालना। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति ईरान के साथ समझौते तक पहुंचती है या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ता है।
ईरान मुद्दे पर अमेरिका-जर्मनी में बढ़ी तल्खी ईरान को लेकर अमेरिका और जर्मनी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर तीखा हमला करते हुए कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया को बंधक बना सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मर्ज के बयान की कड़ी आलोचना की। "मर्ज को नहीं पता वह क्या कह रहे हैं" ट्रंप ने लिखा, "फ्रेडरिक मर्ज सोचते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। उन्हें पता ही नहीं कि वह क्या कह रहे हैं।" हालांकि, जर्मन चांसलर ने कभी भी ईरान के परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं किया है। उनका रुख हमेशा यही रहा है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए। परमाणु ईरान से पूरी दुनिया को खतरा ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु शक्ति बन गया, तो पूरी दुनिया उसकी धमकियों के साये में जीने को मजबूर होगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार वह कदम उठा रही है, जिसे पिछली अमेरिकी सरकारें उठाने से बचती रही थीं। मर्ज ने अमेरिकी रणनीति पर उठाए थे सवाल दरअसल, फ्रेडरिक मर्ज ने एक दिन पहले ईरान संकट से निपटने में अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन के पास इस संघर्ष से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आ रही। मर्ज ने यह भी कहा कि ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को असहज स्थिति में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता जर्मन चांसलर ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह अहम समुद्री मार्ग आंशिक रूप से खनन किया जा चुका है। यदि यहां कोई बड़ा व्यवधान होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में बढ़ सकता है तनाव ईरान को लेकर यह सार्वजनिक टकराव ऐसे समय सामने आया है, जब यूक्रेन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच पहले से मतभेद मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा समुद्री सैन्य कदम उठाया है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, अरब सागर में ईरान के तटों और बंदरगाहों की घेराबंदी की गई है, जिसकी कमान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln (CVN-72) संभाल रहा है। 100 से ज्यादा विमान और 10 हजार सैनिक तैनात CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत झोंकी है। 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 12 से ज्यादा जंगी जहाज 100+ लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और सर्विलांस सिस्टम तैनात हैं, जिनमें F-35C स्टील्थ फाइटर, F/A-18 जेट्स और E-2D कमांड कंट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black (DDG-119) को भी संदिग्ध जहाजों पर नजर रखने और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। क्या है अमेरिका की रणनीति? CENTCOM के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जहाज ईरानी सीमा में प्रवेश न करे और न ही वहां से बाहर निकले। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर उठाया गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने साफ किया है कि यह नाकाबंदी केवल ईरान के तटों और बंदरगाहों तक सीमित है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है रोक अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को ब्लॉक नहीं किया गया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम मार्ग है, इसलिए इसे खुला रखा गया है। ट्रंप का बयान: ‘यह रूटीन ऑपरेशन’ Donald Trump ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘रूटीन ऑपरेशन’ बताया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना पूरी तरह नियंत्रण में है और कोई भी जहाज इस क्षेत्र में बिना अनुमति के आवाजाही नहीं कर पा रहा है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के चलते पूरे अरब सागर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी बल हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे हालात और संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह समुद्री घेराबंदी मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका इसे ‘रूटीन’ बता रहा है, लेकिन इतने बड़े सैन्य जमावड़े ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
वॉशिंगटन: अमेरिका और Iran के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब अपने अंत के करीब है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता। “परमाणु हथियार होता तो ‘सर’ कहना पड़ता” Donald Trump ने तीखे अंदाज में कहा: “अगर ईरान के पास परमाणु बम होता, तो आज सबको उन्हें ‘सर’ कहना पड़ता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है। “ईरान को उबरने में लगेंगे 20 साल” ट्रंप के मुताबिक: अमेरिका और Israel के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं सीजफायर के बावजूद जारी दबाव दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि: अमेरिका का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा बातचीत के संकेत Donald Trump ने यह भी कहा कि: ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है जल्द ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है सूत्रों के मुताबिक, Islamabad में बैक-चैनल वार्ता जारी है। अमेरिका का फोकस ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक भविष्य में किसी भी परमाणु खतरे को खत्म करना ट्रंप के बयान से संकेत मिलते हैं कि एक ओर अमेरिका युद्ध खत्म होने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर कड़ा दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात पूरी तरह शांत होते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: ईरान संकट के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ रुकी हुई बातचीत इस हफ्ते फिर से शुरू हो सकती है, और इसके लिए अमेरिका दोबारा Islamabad जाने पर विचार कर रहा है। इस्लामाबाद वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “आपको वहीं (इस्लामाबाद) रुकना चाहिए, क्योंकि अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है… हमारा झुकाव भी वहीं जाने का है।” गौरतलब है कि पिछले शनिवार को Islamabad में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी से बढ़ा दबाव वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने Strait of Hormuz पर नाकाबंदी लागू कर दी। अमेरिकी सेना के मुताबिक, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में इस अहम समुद्री मार्ग से कोई जहाज़ नहीं गुजरा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई। युद्धविराम पर संकट मौजूदा गतिरोध ने अगले सप्ताह समाप्त होने जा रहे दो हफ्ते के युद्धविराम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना ने हालात में कुछ उम्मीद जगाई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने की “काफी ज्यादा संभावना” है। खाड़ी देशों, Pakistan और Iran के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों की टीमें इस हफ्ते के अंत तक फिर से पाकिस्तान लौट सकती हैं, हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। तेल बाजार को राहत वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद से वैश्विक तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।
वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों के बीच बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ। शुरुआती कारोबार में जोरदार उछाल बुधवार सुबह बाजार खुलते ही BSE Sensex 1,300 अंक से अधिक उछलकर 78,166.50 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 400 अंकों की तेजी के साथ 24,224.35 पर कारोबार करता दिखा। पिछले सत्र में आई गिरावट के बाद यह उछाल बाजार में मजबूत रिकवरी का संकेत देता है। निवेशकों को ₹9.25 लाख करोड़ का फायदा इस तेजी का सीधा असर बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹9.25 लाख करोड़ बढ़कर ₹457.73 लाख करोड़ हो गया। यह निवेशकों के लिए एक दिन में बड़ी ‘कमाई’ जैसा साबित हुआ। किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी? आज सेंसेक्स के सभी 30 शेयर हरे निशान में खुले। खासतौर पर: IndiGo में 4% की तेजी UltraTech Cement Asian Paints Larsen & Toubro Infosys State Bank of India इन सभी शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। रुपये में भी मजबूती भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.2% मजबूत होकर 93.17 पर खुला। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी कुछ हद तक लौट रहा है। तेजी की मुख्य वजह क्या? अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान ने बाजार को बड़ा ट्रिगर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के करीब है और समझौते की संभावना बढ़ रही है। इस बयान से निवेशकों में सकारात्मक भावना बनी और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी। सेक्टर और ब्रॉडर मार्केट का हाल निफ्टी मिडकैप: +2.09% निफ्टी स्मॉलकैप: +2.10% निफ्टी PSU बैंक और IT सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी फार्मा सेक्टर में कमजोरी ग्लोबल मार्केट का असर एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। S&P 500 और Nasdaq 100 दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
Islamabad में हुई United States और Iran के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अब अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने इसकी वजहों का खुलासा किया है। क्यों नहीं हो पाया समझौता? वेंस के मुताबिक: ईरानी वार्ताकार अंतिम निर्णय लेने में सक्षम नहीं थे उन्हें Tehran में शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी लेनी थी इसी वजह से बातचीत के बावजूद डील फाइनल नहीं हो सकी ‘कुछ प्रगति जरूर हुई’ Fox News के “Special Report” में वेंस ने बताया: परमाणु सामग्री हटाने पर चर्चा में प्रगति हुई भविष्य में यूरेनियम संवर्धन रोकने के तंत्र पर भी आंशिक सहमति बनी “हम चाहते हैं कि ईरान हमारी दिशा में आगे बढ़े” ‘ट्रंप कब होंगे खुश?’ वेंस ने कहा कि Donald Trump तब खुश होंगे जब: ईरान एक “सामान्य देश” की तरह व्यवहार करे उसकी अर्थव्यवस्था सामान्य रूप से काम करे परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न उठाया जाए हालांकि, उन्होंने इस बयान का विस्तृत अर्थ नहीं बताया। ‘अगला कदम ईरान को उठाना होगा’ वेंस ने दोहराया: बातचीत में “बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है” लेकिन अब आगे बढ़ने की जिम्मेदारी ईरान पर है नाकेबंदी से बढ़ा दबाव वार्ता फेल होने के बाद Donald Trump ने: ईरानी बंदरगाहों और Strait of Hormuz पर नाकेबंदी लागू कर दी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि: इससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है और यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन सकता है आगे क्या? ताजा हालात बताते हैं कि: बातचीत पूरी तरह टूटी नहीं है लेकिन सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ चुका है अब दुनिया की नजर इस पर है कि Iran क्या रुख अपनाता है–समझौते की ओर बढ़ता है या टकराव और गहराता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States और Iran के बीच दूसरी शांति वार्ता (Peace Talk-2) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पहले दौर की बातचीत भले ही बेनतीजा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं फिर से मजबूत होती दिख रही हैं। ट्रंप का बड़ा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा: “ईरान समझौते के लिए उत्सुक है” “हमें उनकी तरफ से संदेश मिला है” “नाकेबंदी जारी रहेगी, अभी कोई ढील नहीं” उन्होंने दोहराया कि: ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं होगी शर्तें नहीं मानी गईं तो कोई समझौता नहीं होगा वेंस बोले–‘प्रगति हुई है’ अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance ने Fox News को बताया: परमाणु मुद्दे पर बातचीत में “कुछ प्रगति” हुई है अमेरिका इस प्रक्रिया को एक बड़े समझौते के साथ खत्म करना चाहता है “अब आगे बढ़ने के लिए कदम ईरान को उठाना होगा” क्या झुका ईरान? रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान यूरेनियम संवर्धन पर कुछ नरमी दिखाने को तैयार हुआ है पहले जहां पूरी तरह इनकार था, अब सीमित और नियंत्रित कमी पर सहमति के संकेत हैं यही वजह है कि बातचीत का रास्ता फिर से खुलता दिख रहा है। कब और कहां हो सकती है अगली बैठक? रिपोर्ट्स के अनुसार: अगला दौर 16 अप्रैल के आसपास हो सकता है संभावित जगहें: Geneva Islamabad हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर तारीख और स्थान तय नहीं हुए हैं। कौन कर रहा है मध्यस्थता? खबरों के मुताबिक: Turkey दोनों देशों के बीच दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है क्षेत्रीय मध्यस्थ भी लगातार बातचीत में लगे हैं क्यों फेल हुई थी पहली वार्ता? पहले दौर में मुख्य विवाद: अमेरिका की मांग: 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद उच्च स्तर का भंडार देश से बाहर हटाना ईरान का प्रस्ताव: सीमित अवधि में नियंत्रित कमी इसी मतभेद के चलते समझौता नहीं हो पाया था। क्या आगे बन सकता है समझौता? ताजा संकेत बताते हैं कि: दोनों पक्ष अब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन नाकेबंदी और सैन्य दबाव अभी भी जारी है अगर ईरान अपनी शर्तों में और नरमी दिखाता है, तो आने वाले दिनों में एक बड़ा समझौता संभव हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस संभावित Peace Talk-2 पर टिकी है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei मारे जा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी मीडिया में उनके नाम से लगातार नए संदेश सामने आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस और अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप का बड़ा दावा, लेकिन सवाल बरकरार रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने 27 मार्च को कहा था कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व खत्म हो चुका है और देश में कोई सक्रिय सुप्रीम लीडर नहीं है। उन्होंने यहां तक संकेत दिया कि मोजतबा खामेनेई या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हैं। हालांकि, इस दावे की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ जारी हो रहे संदेश ट्रंप के दावे के विपरीत, ईरान की तरफ से मोजतबा खामेनेई के नाम से लिखित संदेश जारी किए जा रहे हैं। एक हालिया संदेश में उन्होंने: अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संघर्ष में समर्थन के लिए इराक की जनता का धन्यवाद किया खास तौर पर Ali al-Sistani का उल्लेख किया यह संदेश बगदाद में हुई एक बैठक के बाद सामने आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरानी नेतृत्व सक्रिय है। सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। केवल लिखित बयान जारी किए जा रहे हैं उनके बयान टीवी पर दूसरे लोग पढ़कर सुनाते हैं उनकी ताजा तस्वीरों को लेकर भी संशय बना हुआ है इससे उनकी स्थिति और लोकेशन को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। पृष्ठभूमि: युद्ध और सत्ता का संकट ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब एक महीने से ज्यादा समय से चल रहा है। पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की युद्ध की शुरुआत में ही मौत हो चुकी है इसके बाद मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी और विरोधाभासी खबरें सत्ता को लेकर असमंजस पैदा कर रही हैं क्या है इसका वैश्विक असर? यह घटनाक्रम कई बड़े सवाल खड़े करता है: क्या ट्रंप का दावा सही है या यह रणनीतिक बयान है? क्या ईरान में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है? क्या इससे युद्ध और भड़क सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की विरोधाभासी सूचनाएं वैश्विक बाजार, कूटनीति और सुरक्षा स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।