तेहरान

ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर इनाम की कथित घोषणा
ईरान का बड़ा एलान: अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम, महिलाओं के लिए दोगुनी रकम

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से एक विवादित इनाम योजना का दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सेना प्रमुख अमीर हातिमी ने अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने वाले व्यक्ति को 30 हजार डॉलर (करीब 28.6 लाख रुपये) इनाम देने की बात कही है। वहीं, अगर यह कार्रवाई कोई ईरानी महिला करती है तो इनाम की राशि दोगुनी यानी 60 हजार डॉलर (करीब 57.2 लाख रुपये) होगी।   महिलाओं के लिए दोगुना इनाम     रिपोर्ट के अनुसार, अमीर हातिमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों से मिले अनुरोध और समर्थन के बाद यह घोषणा की गई है। हालांकि, इस कथित इनाम योजना को कब और कहां लागू किया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।   रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की कोई बड़ी तैनाती नहीं है। ऐसे में इस घोषणा के व्यावहारिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।   अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आया बयान     यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव का असर पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है।   ईरानी सैन्य नेतृत्व की ओर से अमेरिका की मध्य पूर्व में मौजूदगी को लेकर पहले भी कड़े बयान दिए जाते रहे हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई है।   युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार     रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद अस्थायी युद्धविराम और आगे बातचीत की कोशिशें हुई थीं। हालांकि, तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और दोनों पक्षों के बीच समय-समय पर हमले जारी रहने की बात सामने आई है।   अमेरिकी सैन्यकर्मियों के हताहत होने और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान की यह कथित इनाम घोषणा दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है। नोट: अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाने या पकड़ने के लिए इनाम की यह जानकारी आपके दिए गए स्रोत के अनुसार है; ऐसी संवेदनशील युद्ध-संबंधी घोषणाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे निश्चित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का जारी किया गया वीडियो
मोजतबा खामेनेई की सेहत पर अटकलों के बीच ईरानी एजेंसी ने जारी किया वीडियो, अच्छे स्वास्थ्य में दिखे

तेहरान/तेल अवीव। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चल रही अटकलों के बीच ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में मोजतबा खामेनेई कथित तौर पर स्वस्थ नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है।   इजराइली मीडिया के दावे के बाद जारी हुआ वीडियो     यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब इजराइली मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन रिपोर्टों में ईरान के अंदर के सूत्रों का हवाला देते हुए उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई थी।   मेहर न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी कर इन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की है। मोजतबा खामेनेई ने सर्वोच्च नेता का पद संभालने के बाद से सार्वजनिक रूप से बेहद कम उपस्थिति दर्ज कराई है और उनका संवाद मुख्य रूप से लिखित बयानों के जरिए सामने आया है।   स्वास्थ्य को लेकर लगातार उठ रहे सवाल     मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति के कारण उनकी सेहत और नेतृत्व क्षमता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्हें पहले हुए सैन्य हमलों में चोट लगी थी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए उनकी चोटों को मामूली बताया है।   ईरानी अधिकारियों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई देश के रणनीतिक मामलों की निगरानी और आवश्यक निर्देश देने में सक्षम हैं।   ईरानी सरकार ने दावों को बताया था भ्रामक     ईरानी पक्ष की ओर से पहले भी मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई गंभीर खबरों का खंडन किया गया है। वहीं, उनकी लाइव सार्वजनिक उपस्थिति नहीं होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके स्वास्थ्य और स्थान को लेकर अटकलें बनी हुई हैं।   फिलहाल जारी वीडियो को ईरानी पक्ष की ओर से उनकी स्थिति सामान्य होने के संकेत के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन वीडियो की तारीख और स्वतंत्र रूप से इसकी सत्यता की पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
ईरान के मिनाब स्कूल हमले के बाद मलबे और मृत बच्चों की यादें
ईरान के मिनाब स्कूल पर हमले की भयावह यादें, 120 बच्चों समेत 156 लोगों की मौत

तेहरान/मिनाब, एजेंसियां। ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में करीब पांच महीने पहले हुए स्कूल हमले की भयावह यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध के शुरुआती दौर में शजरेह तय्यबेह प्राथमिक स्कूल को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 120 बच्चों समेत 156 लोगों की मौत हुई थी।   स्कूल की जगह अब सिर्फ मलबा     हमले के बाद स्कूल की इमारत पूरी तरह तबाह हो गई। वहां पढ़ाने वाली शिक्षिका अमाइनेह नदीमी ने उस भयावह दिन को याद करते हुए बताया कि अब उस जगह को स्कूल कहना भी मुश्किल है। कभी बच्चों की आवाजों से गूंजने वाली जगह आज मलबे और तबाही की निशानी बन चुकी है।   अमाइनेह छह वर्षों तक इसी स्कूल में पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाती थीं। उन्होंने बताया कि हमले के बाद उन्होंने बच्चों के माता-पिता को नंगे पैर स्कूल की ओर भागते देखा। उन्हें शुरुआती तौर पर लगा कि शायद सभी बच्चे बाहर निकल गए होंगे, लेकिन बाद में पता चला कि कई लोग मलबे के नीचे दबे थे।   मलबे में मिली आठ साल की बच्ची की कॉपी     राहत और बचाव कर्मियों को मलबा हटाने के दौरान आठ वर्षीय माह्या सलारी की कॉपी मिली। हमले के वक्त माह्या अपने छोटे भाई अली के साथ स्कूल में थी। हमले से कुछ समय पहले उनकी मां उन्हें लेने स्कूल पहुंची थीं। हमले में तीनों की मौत हो गई।   माह्या की सुरक्षित बची कॉपी अब उस त्रासदी की एक मार्मिक निशानी बन गई है। मिनाब की दीवारों और दुकानों पर हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें लगाई गई हैं।   कब्रिस्तान में दिखता है युद्ध का दर्द     मिनाब के कब्रिस्तान में हमले में मारे गए बच्चों की छोटी-छोटी कब्रें इस त्रासदी की भयावहता को बयां करती हैं। मृत बच्चों के परिजन आज भी उन्हें याद कर कब्रिस्तान पहुंचते हैं।   मासूमेह मेहरान शेखबादी की नौ वर्षीय बेटी सतायेश भी हमले में मारी गई थी। उन्होंने उस दिन का जिक्र करते हुए बताया कि घटनास्थल पर धुआं और तबाही का भयावह मंजर था।   आज भी नहीं भूल पा रहे हैं उस दिन की त्रासदी     मिनाब में स्कूल हमले के कई महीने बाद भी परिवार अपने बच्चों को खोने के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं। शहर में जगह-जगह बच्चों की तस्वीरें लगाकर उन्हें याद किया जा रहा है। शिक्षकों और परिजनों के लिए स्कूल अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि युद्ध में खोई एक पूरी पीढ़ी की दर्दनाक याद बन चुका है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Trumph Ultimatum
ईरान को ट्रंप का अल्टीमेटम, बोले- 'बात नहीं मानी तो पावर प्लांट और पुल होंगे निशाने पर'

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जल्द बातचीत की मेज पर नहीं लौटता, तो अमेरिका अगले चरण में ईरान के पावर प्लांट, पुल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हो जाता।   'समझौता करो, नहीं तो हालात और खराब होंगे'   एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अगले हफ्ते हालात उनके लिए और खराब होंगे। हम उनके सभी पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाएंगे, अगर वे बातचीत के लिए नहीं आते।" उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधि अभी भी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अब फैसला तेहरान को करना होगा।   होर्मुज संकट के बीच बढ़ा तनाव   ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू की है, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।   अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता   ट्रंप के इस बयान के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि यदि ऊर्जा ढांचे और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले होते हैं, तो पश्चिम एशिया का संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Ali Khamenei Funeral
ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़, कई देशों के प्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

तेहरान, एजेंसियां। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को राजधानी तेहरान में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। छह दिनों तक चलने वाले राजकीय अंतिम संस्कार की शुरुआत के साथ देशभर में शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ईरानी सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता और श्रद्धांजलि का प्रतीक बताया है।   विदेशी प्रतिनिधियों ने भी दी श्रद्धांजलि   अंतिम संस्कार समारोह में रूस, चीन, पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारी भी समारोह में मौजूद रहे। अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है।   छह दिनों तक चलेगा राजकीय अंतिम संस्कार   सरकारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम दर्शन और शोक सभाओं के बाद अंतिम यात्रा तेहरान, क़ोम और अन्य प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी। इसके बाद 9 जुलाई को अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सरकार का दावा है कि अंतिम संस्कार में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Salman Ali Khurshid
खामेनेई के अंतिम संस्कार में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करेंगे सलमान खुर्शीद, तेहरान जाएंगे वरिष्ठ नेता

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ईरान में आयोजित अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। गुरुवार को उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह कांग्रेस की ओर से तेहरान जाकर अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके बयान के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए अपना आधिकारिक प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है।   कई भारतीय नेताओं को मिला निमंत्रण मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह, इमरान अंसारी सहित कई प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को भी आमंत्रित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं को भी निमंत्रण भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।   4 जुलाई से शुरू होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होंगे। श्रद्धांजलि समारोह राजधानी तेहरान के अलावा कोम और मशहद जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में भी आयोजित किए जाएंगे। 7 जुलाई को कोम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जबकि 9 जुलाई को मशहद में अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासन ने इन कार्यक्रमों के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।   भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से अहम आयोजन सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से भारत के शीर्ष नेतृत्व को भी इस राजकीय समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया था। इसे दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयातुल्ला अली खामेनेई ने करीब 36 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया। उनके निधन के बाद आयोजित होने वाला यह राजकीय अंतिम संस्कार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है, जिसमें विभिन्न देशों के राजनीतिक और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0