दिल्ली हाई कोर्ट

Janhvi Kapoor
जान्हवी कपूर की पर्सनालिटी राइट्स याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, अश्लील AI कंटेंट हटाने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेत्री जान्हवी कपूर की पर्सनालिटी राइट्स याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अहम सुनवाई की। अदालत ने इंटरनेट पर जान्हवी से जुड़ी अश्लील और कथित AI-जनरेटेड सामग्री हटाने का निर्देश दिया, लेकिन उनकी ओर से मांगी गई सभी वेबसाइटों और फैन पेजों पर व्यापक रोक लगाने से इनकार कर दिया।   करीब 5,000 वेब पेजों से हटेगा आपत्तिजनक कंटेंट   अदालत के निर्देश के बाद जान्हवी कपूर से संबंधित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री वाले करीब 5,000 वेब पेजों को हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है। याचिका में कथित तौर पर फर्जी और AI से तैयार की गई सामग्री को भी चुनौती दी गई थी। जान्हवी की ओर से अदालत से उनकी छवि, नाम, समानता और व्यक्तिगत पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से सुरक्षा की मांग की गई थी।   फैन पेजों पर पूरी तरह रोक लगाने से अदालत का इनकार   हालांकि, अदालत ने सभी फैन पेजों या जान्हवी से संबंधित हर ऑनलाइन सामग्री पर blanket ban लगाने से इनकार किया। अदालत ने यह स्पष्ट करने की जरूरत बताई कि पर्सनालिटी राइट्स की सीमा कहां तक होनी चाहिए। अदालत की टिप्पणी खास तौर पर महत्वपूर्ण रही क्योंकि सोशल मीडिया और AI के दौर में कलाकारों की तस्वीर, आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं।   ‘पर्सनालिटी राइट्स’ को लेकर कोर्ट ने जताई चिंता   सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि पर्सनालिटी राइट्स से जुड़े मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह मुद्दा ‘हद से बाहर’ जाता दिखाई दे रहा है। अदालत ने कहा कि इस अधिकार की अवधारणा और उसके इस्तेमाल में कुछ स्पष्टता और संतुलन की जरूरत है।   इस मामले को AI और डीपफेक के दौर में सेलिब्रिटीज की डिजिटल पहचान की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में अर्जुन कपूर, सोनाक्षी सिन्हा और जुबिन नौटियाल समेत कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालतों का रुख किया है।

abhishek singh अगस्त 12, 2026 0
Sonam Wangchuk
19वें दिन भी अनशन पर डटे सोनम वांगचुक, खराब तबीयत के बावजूद बोले- 'अभी अनशन नहीं तोड़ूंगा'

नई दिल्ली, एजेंसियां। शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल गुरुवार को 19वें दिन भी जारी रही। बिगड़ती सेहत के बीच जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने साफ कहा कि वह अभी अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि उनसे अनशन तोड़ने की मांग करने के बजाय 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होकर आंदोलन का समर्थन करें।   'अभी अनशन नहीं तोड़ूंगा'   वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, "मैं अच्छी स्थिति में नहीं हूं, लेकिन इतनी भी खराब हालत में नहीं हूं। मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए, बल्कि 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन को मजबूत कीजिए।" उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।   स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता   डॉक्टरों के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का वजन करीब 8.9 किलोग्राम तक घट चुका है। वह बेहद कमजोर हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। हालांकि उनकी जीवन रक्षक जांचों पर लगातार नजर रखी जा रही है।   दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला   वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में उनकी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने और सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।   20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान   वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं और नागरिकों से 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल उनकी भूख हड़ताल नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की लड़ाई है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
CJP Delhi High Court
दिल्ली हाई कोर्ट से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राहत, X अकाउंट बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ी राहत देते हुए उसके X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अकाउंट को ब्लॉक किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध कानून द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है और उसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।   NEET परीक्षा के संदर्भ में ब्लॉक किया गया था अकाउंट सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या अशांति फैलने से रोकने के उद्देश्य से अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि दोबारा परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना जरूरी था।   हालांकि अदालत ने माना कि NEET परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और जिस आधार पर अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉक आदेश निरस्त कर अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया।   जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मांग है कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी की जाए। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।   राजनीतिक दल बनने की अटकलें तेज सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच संगठन के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि CJP के संस्थापक ने फिलहाल इसे युवाओं का एक दबाव समूह बताया है और कहा है कि अभी राजनीतिक दल बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, यदि भविष्य में संगठन चुनाव आयोग में पंजीकरण कराता है, तो चुनाव चिह्न का फैसला आयोग के नियमों और उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद संगठन का X अकाउंट फिर से सक्रिय होगा, जबकि उसका आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Telegram app logo displayed on a smartphone as Delhi High Court hears challenge to temporary ban ahead of NEET-UG 2026 re-exam.
टेलीग्राम प्रतिबंध मामले में केंद्र सरकार से दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, नीट-यूजी 2026 को लेकर विवाद तेज

  नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। यह प्रतिबंध नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले लागू किया गया है। हाई कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई को गुरुवार तक के लिए स्थगित करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान टेलीग्राम की ओर से दलील दी गई कि यह प्रतिबंध अवैध है और इससे भारत के करीब 15 करोड़ उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। सरकार ने टेलीग्राम के दुरुपयोग का दिया तर्क सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने अदालत में कहा कि एक चैनल बंद होने पर दूसरा तुरंत शुरू हो जाता है और QR कोड के जरिए अवैध भुगतान किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस समस्या से मई महीने से निपटने का प्रयास कर रही है और यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी रोक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत आदेश जारी कर टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। इसमें नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा की तारीख और उसके आसपास की अवधि शामिल है। एडिट फीचर पर भी रोक सरकारी आदेश के तहत टेलीग्राम को 30 जून 2026 तक भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के एडिट फीचर को निष्क्रिय करने का निर्देश भी दिया गया है। एनटीए का कहना है कि इस फीचर का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा के बाद फर्जी पेपर लीक के सबूत गढ़ने में किया जा रहा था। नीट-यूजी परीक्षा को लेकर सुरक्षा कड़ी एनटीए के अनुसार, ये कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा को सुरक्षित एवं निष्पक्ष तरीके से कराने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को ठगने वाले संगठित गिरोहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मामले पर अगली सुनवाई गुरुवार को होगी दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को तय की है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Sridhar Vembu reacts to Delhi High Court ruling against Google in Hindware trademark advertising dispute
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर श्रीधर वेम्बु का बड़ा बयान, बोले- “गूगल का तरीका पूरी तरह अनैतिक था”

भारत में ऑनलाइन विज्ञापन और ट्रेडमार्क अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले के बाद टेक जगत में नई बहस छिड़ गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सैनिटरीवेयर ब्रांड Hindware से जुड़े मामले में Google को ट्रेडमार्क उल्लंघन का दोषी माना है। इस फैसले के बाद Sridhar Vembu ने खुलकर प्रतिक्रिया दी और Nikhil Kamath के पुराने रुख का समर्थन किया। “मैं निखिल के साथ हूं” – श्रीधर वेम्बु Sridhar Vembu ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गूगल का विज्ञापन मॉडल नैतिक रूप से गलत था। उन्होंने लिखा कि इस मामले में वह निखिल कामथ के पक्ष में हैं और गूगल जिस तरीके से दूसरे ब्रांडों के नामों का इस्तेमाल अपने विज्ञापन कारोबार में कर रहा था, वह पूरी तरह अनैतिक था। वेम्बु ने कहा कि ऐसे व्यावसायिक व्यवहार के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। क्या था पूरा विवाद? मामला गूगल के उस विज्ञापन सिस्टम से जुड़ा है, जिसमें कंपनियां किसी अन्य ब्रांड या ट्रेडमार्क वाले नाम को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में खरीद सकती थीं। आरोप था कि जब कोई यूजर “HINDWARE” सर्च करता था, तो उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विज्ञापन भी दिखाए जा सकते थे, क्योंकि उन्होंने उस ट्रेडमार्क शब्द पर विज्ञापन बोली (bidding) लगाई हुई थी। Hindware ने इसे अपने ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन बताया और अदालत का दरवाजा खटखटाया। दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा? दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि “HINDWARE” कोई सामान्य शब्द नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट और विशिष्ट पहचान वाला पंजीकृत ट्रेडमार्क है। अदालत ने कहा कि: इस ट्रेडमार्क को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में उपयोग करने की अनुमति देना गलत था। गूगल इस ट्रेडमार्क की व्यावसायिक पहचान से अप्रत्यक्ष रूप से लाभ कमा रहा था। इससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की संभावना बढ़ती है। कोर्ट ने गूगल को “HINDWARE” और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया। इसके अलावा अदालत ने गूगल को 30 लाख रुपये का हर्जाना देने का भी निर्देश दिया। क्यों अहम है यह फैसला? यह फैसला सिर्फ एक कंपनी और गूगल के बीच का विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। यदि भविष्य में अन्य ब्रांड भी इसी तरह के मामलों में अदालत का रुख करते हैं, तो सर्च इंजन विज्ञापन मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ट्रेडमार्क अधिकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। टेक इंडस्ट्री में बढ़ सकती है बहस Sridhar Vembu की टिप्पणी ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। लंबे समय से कुछ भारतीय उद्यमी बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स की विज्ञापन और डेटा नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब अदालत के फैसले के बाद यह बहस और तेज हो सकती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ब्रांड नामों और ट्रेडमार्क के उपयोग को लेकर कितनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।  

surbhi मई 30, 2026 0
Delhi High Court delivers key ruling on corporate tax and shareholder income
टैक्स पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कंपनी की कमाई को शेयरधारकों की आय नहीं माना जा सकता

टैक्स व्यवस्था को लेकर एक अहम कानूनी स्पष्टता देते हुए Delhi High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी कंपनी की कमाई को उसके शेयरधारकों की व्यक्तिगत आय नहीं माना जा सकता। यह निर्णय कॉर्पोरेट टैक्सेशन के सिद्धांतों को और मजबूत करता है और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। कंपनी और शेयरधारक अलग-अलग इकाइयां Delhi High Court ने अपने फैसले में कहा कि कानून की नजर में कंपनी एक स्वतंत्र कानूनी इकाई होती है, जो अपने शेयरधारकों से अलग होती है। भले ही किसी व्यक्ति के पास कंपनी के 100% शेयर क्यों न हों, वह कंपनी की संपत्तियों का मालिक नहीं माना जाएगा, बल्कि केवल शेयरों का मालिक होगा। कंपनी की आय पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कंपनी कोई मुनाफा कमाती है या अपनी संपत्ति बेचकर आय अर्जित करती है, तो उस पर सीधे तौर पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं वसूला जा सकता। यह आय कंपनी की मानी जाएगी, न कि उसके निवेशकों की। डिविडेंड पर लगेगा टैक्स हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि शेयरधारकों को कंपनी से डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस आय पर लागू कानून के तहत टैक्स लगाया जा सकता है। यानी निवेशकों की टैक्स देनदारी केवल उस लाभ तक सीमित होगी, जो उन्हें कंपनी से प्रत्यक्ष रूप से मिलता है। इनकम टैक्स विभाग की अपील खारिज मामले में Income Tax Department की ओर से शेयरधारकों पर टैक्स लगाने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने ट्रिब्यूनल के पहले के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि टैक्स केवल शेयरों से मिलने वाली आय पर ही लगाया जा सकता है, न कि कंपनी की कुल कमाई पर। यह फैसला कॉर्पोरेट सेक्टर और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे टैक्स से जुड़ी कई जटिलताओं पर स्पष्टता मिलती है और कानूनी विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0