धार्मिक समाचार

Rescue teams search through landslide debris at a Rohingya refugee camp in Cox's Bazar after heavy rainfall triggered a deadly slope collapse.
बांग्लादेश के रोहिंग्या कैंप में भूस्खलन का कहर, 8 बच्चों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

कॉक्स बाजार: बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा हो गया। उखिया उपजिले के शरणार्थी कैंप में पहाड़ी ढलान खिसकने से हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) में आठ बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भारी बारिश बनी हादसे की वजह लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई, जिसके चलते रोहिंग्या कैंप के पास पहाड़ी ढह गई। भूस्खलन की चपेट में कई अस्थायी झोपड़ियां आ गईं, जिससे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने परिजनों की तलाश में घटनास्थल पर जुट गए। मलबे से लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान रिफ्यूजी रिलीफ एंड रिपैट्रिएशन कमिश्नर (RRRC) मिजाननुर रहमान ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और राहत टीमों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है। हादसे में घायल हुए पांच बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अभी भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन ने जारी की चेतावनी पुलिस और प्रशासन ने बताया कि लगातार बारिश के कारण रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। बड़ी संख्या में शरणार्थी पहाड़ी ढलानों पर बनी अस्थायी झोपड़ियों में रह रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है और निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत एजेंसियां सक्रिय हादसे के बाद सरकारी एजेंसियों, संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्थाओं और अन्य राहत संगठनों ने प्रभावित इलाके में राहत कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित परिवारों को भोजन, दवाइयां, तिरपाल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मौसम सामान्य होने तक राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा और जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम तेज किया जाएगा.  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu on Yogini Ekadashi while reading the sacred vrat katha with devotion.
योगिनी एकादशी 2026: व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक करें पाठ, भगवान विष्णु की कृपा से दूर होंगे कष्ट और मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और योगिनी एकादशी व्रत कथा का श्रद्धा के साथ पाठ करने से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि इस एकादशी की महिमा का वर्णन स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को किया था। योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, भजन-कीर्तन और व्रत कथा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत अनजाने में हुए पापों के प्रायश्चित का अवसर प्रदान करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। योगिनी एकादशी व्रत कथा हेम माली की भूल बनी संकट का कारण पौराणिक कथा के अनुसार, अलकापुरी के राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी दैनिक पूजा के लिए हेम माली नामक सेवक मानसरोवर से ताजे फूल लाया करता था। हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी से अत्यधिक प्रेम करता था। एक दिन वह फूल लेकर लौट तो आया, लेकिन पूजा स्थल पहुंचने के बजाय अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल नहीं पहुंचा सका। कुबेर के श्राप से बदल गई किस्मत जब पूजा का समय बीतने लगा और फूल नहीं पहुंचे, तो कुबेर ने कारण का पता लगाया। उन्हें जब हेम माली की लापरवाही का पता चला तो वे क्रोधित हो गए और उसे श्राप दे दिया कि वह स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर जाएगा, कुष्ठ रोग से पीड़ित होगा और पत्नी के वियोग का दुख सहेगा। श्राप के प्रभाव से हेम माली तत्काल स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा। उसका शरीर रोगग्रस्त हो गया और वह अपनी पत्नी से भी अलग हो गया। वह लंबे समय तक जंगलों में दुख और कष्ट भरा जीवन बिताने लगा। महर्षि मार्कण्डेय ने बताया मुक्ति का मार्ग भटकते-भटकते एक दिन हेम माली महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा और अपनी पूरी व्यथा सुनाई। महर्षि ने उसे सलाह दी कि वह आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करे और भगवान विष्णु की आराधना करे। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे श्राप से मुक्ति मिल जाएगी। व्रत के प्रभाव से मिला नया जीवन हेम माली ने महर्षि के निर्देशानुसार पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। उसने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और रात्रि जागरण भी किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया। उसे अपना दिव्य स्वरूप वापस प्राप्त हुआ और वह पुनः स्वर्ग लौटकर अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगा। क्या संदेश देती है यह कथा? योगिनी एकादशी की कथा यह संदेश देती है कि जीवन में कर्तव्य, अनुशासन और ईश्वर भक्ति का विशेष महत्व है। यदि व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करे, तो उसे अपने कर्मों का प्रायशित करने और जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिल सकता है। धार्मिक सूचना: यह लेख पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है। आस्था और विश्वास व्यक्तिगत विषय हैं।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Devotees pull the grand chariots of Lord Jagannath, Balabhadra and Subhadra during the sacred Rath Yatra in Puri.
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है? जानिए इसकी शुरुआत, धार्मिक मान्यता और महत्व

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और भव्य धार्मिक उत्सवों में से एक है। वर्ष 2026 में यह यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ओडिशा के पुरी पहुंचकर इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल होते हैं। कैसे शुरू हुई जगन्नाथ रथ यात्रा? सुभद्रा की इच्छा से जुड़ी है परंपरा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा ने अपने दोनों भाइयों भगवान कृष्ण और बलभद्र (बलराम) से नगर भ्रमण कराने की इच्छा जताई। अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के लिए दोनों भाइयों ने उन्हें रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया। माना जाता है कि इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। मौसी के घर जाने की परंपरा रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने मुख्य मंदिर से निकलकर गुंडीचा मंदिर पहुंचते हैं, जिसे धार्मिक मान्यताओं में भगवान की मौसी का घर माना जाता है। तीनों देवता यहां कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं। इस दौरान उनका विशेष स्वागत किया जाता है और पारंपरिक ओड़िया व्यंजन 'पोड़ा पीठा' का भोग अर्पित किया जाता है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भगवान पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं। रथ यात्रा का धार्मिक महत्व भगवान जगन्नाथ को 'जगत के नाथ', अर्थात संपूर्ण संसार के स्वामी कहा जाता है। सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन के लिए मंदिर जाना पड़ता है, लेकिन रथ यात्रा के दौरान भगवान स्वयं अपने गर्भगृह से बाहर निकलकर सभी भक्तों को दर्शन देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के रथ को खींचता है या रथ यात्रा के दर्शन करता है, उसे भगवान जगन्नाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यता है कि इस पुण्य कार्य से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आस्था और संस्कृति का महापर्व जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। यह उत्सव भाई-बहन के प्रेम, सेवा, समर्पण और भगवान के प्रति अटूट भक्ति का संदेश देता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Anshula Kapoor Wedding
अंशुला कपूर-रोहन ठक्कर ने लिए सात फेरे, भावुक पलों के बीच नई जिंदगी की शुरुआत

मुंबई, एजेंसियां। मुंबई में 6 जुलाई को निर्माता बोनी कपूर की बेटी और अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर ने अपने लॉन्ग-टाइम बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर के साथ शादी के बंधन में बंधकर नई जिंदगी की शुरुआत की। दोनों की शादी मुंबई के ताज होटल में परिवार और करीबी रिश्तेदारों की मौजूदगी में संपन्न हुई। शादी के कई भावुक और खूबसूरत वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।   सास ने गले लगाकर दिया आशीर्वाद, भावुक हुए बोनी कपूर शादी के दौरान सामने आए एक वीडियो में अंशुला और रोहन विवाह संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते नजर आए। इस दौरान रोहन की मां ने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिया और बहू अंशुला पर स्नेह लुटाया। वहीं बेटी की शादी के मौके पर बोनी कपूर भी भावुक दिखाई दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए दोनों को नई जिंदगी की शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।   भाई अर्जुन संग भावुक पल भी बना चर्चा का विषय शादी से पहले आयोजित प्री-वेडिंग समारोह की तस्वीरों में अंशुला कपूर अपने भाई अर्जुन कपूर को गले लगाकर भावुक होती नजर आई थीं। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई और फैंस ने भाई-बहन के रिश्ते की जमकर सराहना की।   डेटिंग ऐप से शुरू हुई थी प्रेम कहानी अंशुला और रोहन की पहली मुलाकात वर्ष 2022 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदली और जुलाई 2025 में रोहन ने न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में घुटनों पर बैठकर अंशुला को प्रपोज किया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में दोनों ने सगाई की थी। 21 जून से शादी की रस्में शुरू हुई थीं, जबकि मेहंदी, चूड़ा और कलीरे की रस्में 5 जुलाई को संपन्न हुईं। अब शादी के साथ दोनों ने अपने रिश्ते को नया मुकाम दे दिया है।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Ganesha with flowers and modaks on Pradyumna Chaturthi.
प्रद्युम्न चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के 108 नामों का जाप, हर विघ्न होगा दूर

Pradyumna Chaturthi 2026: गणपति बप्पा की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए प्रद्युम्न चतुर्थी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने और उनके 108 नामों का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में प्रद्युम्न चतुर्थी 18 जून, गुरुवार को मनाई जा रही है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणपति की आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। क्यों खास है भगवान गणेश के 108 नामों का जाप? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान गणेश के विभिन्न नाम उनके अलग-अलग स्वरूपों और गुणों का प्रतीक हैं। इन नामों का जाप करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। कहा जाता है कि पूजा के दौरान 108 नामों का स्मरण करने से साधक को दोगुना पुण्य फल प्राप्त होता है और गणपति बप्पा की विशेष कृपा बनी रहती है। भगवान गणेश के कुछ प्रमुख 108 नाम सुमुख – सुंदर मुख वाले एकदंत – एक दांत वाले गजकर्णक – हाथी जैसे कान वाले लम्बोदर – बड़े उदर वाले विनायक – सभी गणों के नेता वक्रतुण्ड – टेढ़ी सूंड वाले सिद्धिविनायक – सभी सिद्धियां प्रदान करने वाले हेरम्ब – अपने भक्तों की रक्षा करने वाले महागणपति – महान और शक्तिशाली गणपति मोदकप्रिय – मोदक प्रिय करने वाले मंगलमूर्ति – मंगल प्रदान करने वाले बुद्धिप्रिय – बुद्धि और ज्ञान के दाता विघ्नहर्ता – सभी बाधाओं को दूर करने वाले महाकाय – विशाल स्वरूप वाले सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले भक्तवत्सल – भक्तों पर स्नेह बरसाने वाले अग्रपूज्य – सबसे पहले पूजे जाने वाले पार्वतीसुत – माता पार्वती के पुत्र आनंदमूर्ति – आनंद प्रदान करने वाले सुखकर्ता – सुख देने वाले दुःखनाशक – दुखों का नाश करने वाले चिंतामणि – इच्छाओं को पूर्ण करने वाले ज्ञानमूर्ति – ज्ञान का स्वरूप विघ्नविनाशक – सभी विघ्नों का नाश करने वाले सिद्धिदायक – सफलता और सिद्धि प्रदान करने वाले ऋद्धिपति – समृद्धि के स्वामी विघ्नेश – बाधाओं के देवता गणपति – गणों के अधिपति देवताधिदेव – देवताओं के भी देव इसके अलावा शास्त्रों में भगवान गणेश के कुल 108 नामों का उल्लेख मिलता है, जिनका श्रद्धा और भक्ति के साथ जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। क्या है धार्मिक मान्यता? मान्यता है कि प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित कर उनके नामों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। यह दिन विशेष रूप से नई शुरुआत, व्यापार, शिक्षा और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।  

surbhi जून 18, 2026 0
Maa Rudra Kali idol at Ranchi’s Bhairav Baba Temple, revered for spiritual and tantric significance
रांची के भैरव बाबा मंदिर में विराजमान मां रुद्र काली: रहस्यमयी शक्ति, तांत्रिक महत्व और अटूट आस्था का केंद्र

भैरव बाबा मंदिर में मां रुद्र काली का अद्भुत स्वरूप आकर्षण का केंद्र झारखंड की राजधानी रांची में स्थित भैरव बाबा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में विराजमान मां रुद्र काली का स्वरूप भक्तों और साधकों के बीच विशेष श्रद्धा और जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। मान्यता है कि मां रुद्र काली देवी शक्ति के उस उग्र रूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भक्तों की रक्षा करने के साथ-साथ नकारात्मक शक्तियों का विनाश भी करती हैं। मां रुद्र काली को महाकाली और भैरवी के संयुक्त रौद्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। तंत्र शास्त्रों में उन्हें शीघ्र फल प्रदान करने वाली और साधकों की रक्षा करने वाली देवी माना गया है। कहां स्थित है भैरव बाबा मंदिर? रांची शहर में ‘रांची वाले भैरव बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर रशियन हॉस्टल कॉलोनी के समीप स्थित है। यह स्थान वर्षों से श्रद्धालुओं और तांत्रिक साधकों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि विशेष अवसरों पर दूर-दराज से भी श्रद्धालु मंदिर आते हैं। मां रुद्र काली का स्वरूप क्यों माना जाता है रहस्यमयी? मंदिर में स्थापित मां रुद्र काली की प्रतिमा को रक्तवर्णा, त्रिनेत्री और नरमुंडों की माला धारण किए हुए स्वरूप में दर्शाया गया है। उनका रूप पहली नजर में उग्र और भयावह प्रतीत होता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी और रक्षक स्वरूप हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है यह मंदिर स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार, भैरव बाबा मंदिर तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां भैरव साधना, काली साधना और रुद्र तंत्र साधना से जुड़े विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। मान्यता है कि मां रुद्र काली की स्थापना ऐसे सिद्ध साधकों द्वारा की गई थी जिन्होंने अघोर और कौल परंपरा की कठिन साधनाओं में सिद्धि प्राप्त की थी। इसी कारण यह स्थान तांत्रिक परंपराओं से जुड़े लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। अमावस्या की रात को होते हैं विशेष अनुष्ठान मंदिर में अमावस्या के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान रुद्र काली पूजन, हवन और तांत्रिक विधियों से जुड़े अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। श्रद्धालु इस दिन मां के दर्शन और पूजा को विशेष फलदायी मानते हैं। मां रुद्र काली की उपासना से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां रुद्र काली की आराधना करने से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति से मुक्ति मिल सकती है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना मां तक अवश्य पहुंचती है और वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। हालांकि तंत्र शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि किसी भी तांत्रिक साधना को योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं करना चाहिए। स्थानीय लोगों की अटूट आस्था रांची और आसपास के क्षेत्रों में मां रुद्र काली को लेकर गहरी आस्था देखने को मिलती है। कई लोग उन्हें भैरव बाबा की दक्षिण दिशा की रक्षक देवी मानते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां का आशीर्वाद जीवन में आने वाली कठिनाइयों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है। मंदिर में की जाने वाली प्रमुख साधनाएं रुद्र काली तंत्र हवन गुप्त रात्रि जप भैरव-काली समाहित साधना तंत्र रक्षा कवच निर्माण कर्म बाधा निवारण अनुष्ठान रांची का भैरव बाबा मंदिर और यहां विराजमान मां रुद्र काली का स्वरूप आज भी रहस्य, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम माना जाता है। यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ तांत्रिक परंपराओं के अध्ययन और साधना के लिए भी विशेष महत्व रखता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Ganesh Puja on Vibhuvan Sankashti Chaturthi with flowers, modak and sacred offerings
3 जून को मनाई जाएगी विभुवन संकष्टी चतुर्थी, पूजा से पहले नोट कर लें पूरी सामग्री और विधि

भगवान गणेश को समर्पित विभुवन संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष 3 जून 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी को वर्ष भर में आने वाली संकष्टी चतुर्थियों में सबसे दुर्लभ और विशेष माना जाता है, क्योंकि यह केवल तीन वर्ष में एक बार आती है। यह ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव हैं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से संतान सुख, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति की कामना करने वाले भक्त इस व्रत को बड़ी श्रद्धा के साथ करते हैं। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पूजा शुरू करने से पहले सभी सामग्री एकत्र कर लेना शुभ माना जाता है। आवश्यक पूजा सामग्री भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र लाल या पीला वस्त्र दूर्वा घास लाल पुष्प अक्षत (चावल) रोली कुमकुम पीला चंदन धूप अगरबत्ती दीपक कपूर घी कलश गंगाजल पान के पत्ते सुपारी लौंग इलायची कलावा मौसमी फल मिठाई या मोदक तांबे, पीतल या चांदी का लोटा पूजा विधि व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान गणेश को रोली, चंदन का तिलक लगाएं और 21 दूर्वा तथा लाल पुष्प अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर पूजा प्रारंभ करें। गणेश जी को फल, मिठाई, अक्षत, लौंग, इलायची तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें और विभुवन संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें। अंत में कपूर या दीपक से भगवान गणेश की आरती करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। रात्रि में चंद्रमा के दर्शन होने पर लोटे में जल, दूध और चंदन मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं।  

surbhi जून 1, 2026 0
Dark chocolate pieces kept beside a bedside lamp symbolizing better sleep and stress relief at night
रात में डार्क चॉकलेट खाना फायदेमंद? बेहतर नींद और तनाव कम करने में मिल सकती है मदद

सोने से पहले एक छोटा टुकड़ा बन सकता है हेल्दी आदत अगर आपको रात में मीठा खाने की आदत है, तो डार्क चॉकलेट आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने से पहले थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व शरीर में मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो बेहतर नींद और मानसिक शांति से जुड़े होते हैं। मेलाटोनिन और रिलैक्सेशन में कैसे करती है मदद? डार्क चॉकलेट में ट्रिप्टोफैन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण में मदद करता है। मेलाटोनिन वह हार्मोन है जो शरीर की स्लीप साइकिल को नियंत्रित करता है। वहीं सेरोटोनिन मूड को बेहतर बनाने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होता है। यह मिनरल मांसपेशियों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है। ब्लड सर्कुलेशन और मूड पर भी असर विशेषज्ञों के मुताबिक, डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और मानसिक शांति महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग रात में थोड़ी मात्रा में डार्क चॉकलेट खाने के बाद अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं। क्या रात में चॉकलेट खाने से नींद खराब भी हो सकती है? हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है। डार्क चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी मौजूद होती है। ऐसे में जो लोग कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उन्हें रात में इसे खाने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बेचैनी महसूस हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आपको कॉफी या कैफीन वाली चीजों से जल्दी असर होता है, तो रात में बहुत ज्यादा डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। वजन बढ़ने का डर कितना सही? पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना वजन बढ़ाने का बड़ा कारण नहीं बनता। करीब 10 ग्राम डार्क चॉकलेट में लगभग 60 कैलोरी होती है। अगर इसे संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह लो-कैलोरी डाइट में भी शामिल की जा सकती है। डार्क या मिल्क चॉकलेट, कौन बेहतर? डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट आमतौर पर 65-70 प्रतिशत या उससे ज्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट को बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें चीनी कम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। हालांकि इसमें कैफीन की मात्रा मिल्क चॉकलेट से थोड़ी अधिक होती है। अगर आपको कैफीन से दिक्कत नहीं होती, तो डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प मानी जाती है। वहीं कैफीन से संवेदनशील लोग कम मात्रा में मिल्क चॉकलेट चुन सकते हैं।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu with yellow flowers and lamps on Apara Ekadashi 2026
अपरा एकादशी 2026 आज: भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगा अपार पुण्य, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और जरूरी नियम

आज मनाई जा रही है अपरा एकादशी आज 13 मई 2026 को अपरा एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह एकादशी भगवान Vishnu को समर्पित मानी जाती है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। पहली बार व्रत रखने वालों के लिए पूजा विधि, नियम और सावधानियों की जानकारी बेहद जरूरी मानी जाती है। अपरा एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त और पारण समय एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: 14 मई 2026, सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक उदयातिथि के अनुसार आज यानी 13 मई को व्रत रखा जा रहा है। इस बार अपरा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये रंग और भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। प्रिय फूल पीले गेंदे के फूल कमल पीले गुलाब प्रिय भोग पीले फल केसरिया भात पीले रंग की मिठाइयां भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु का भोग अधूरा माना जाता है। अपरा एकादशी पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें। पूजा में पीले फूल, पीला चंदन और पीले वस्त्र अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप करें और बाद में विष्णु चालीसा व व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ अपरा एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान चावल खाना माना जाता है वर्जित एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन चावल खाना अशुभ माना गया है। सात्विक भोजन करें घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। व्रत में सेंधा नमक का ही उपयोग करें। तुलसी दल न तोड़ें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल दशमी तिथि को ही तोड़कर रख लेना चाहिए। क्रोध और विवाद से बचें इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का ध्यान करें। किसी की निंदा या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। दिन में न सोएं धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। इस समय को भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ में लगाना शुभ माना गया है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Devotees worship Lord Vishnu during Ekadashi fasting rituals in Jyeshtha month 2026
ज्येष्ठ में बनेगा 4 एकादशी का महासंयोग, जानें कब रखें अपरा से निर्जला तक के व्रत

अधिक मास के कारण इस बार खास है ज्येष्ठ महीना वैदिक पंचांग के अनुसार साल 2026 में अधिक मास पड़ने की वजह से दो ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पुण्यदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग के चलते इस बार भक्तों को एक नहीं बल्कि चार प्रमुख एकादशी व्रत करने का अवसर मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और इसी दौरान अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी के व्रत किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ माह में कब-कब पड़ेगी एकादशी? इस बार ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ मास के दौरान कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। इनमें अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी शामिल हैं। अपरा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई दोपहर 2:52 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई दोपहर 1:29 बजे व्रत पारण समय: सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। पद्मिनी एकादशी 2026: दुर्लभ व्रत का महत्व पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह व्रत अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। तिथि प्रारंभ: 26 मई सुबह 5:10 बजे तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 6:21 बजे पारण समय: सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। परमा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत? परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। तिथि प्रारंभ: 11 जून रात 12:57 बजे तिथि समाप्त: 11 जून रात 10:36 बजे पारण समय: सुबह 5:23 बजे से 8:10 बजे तक धर्म ग्रंथों में परमा एकादशी को मोक्षदायिनी और विशेष पुण्य देने वाली एकादशी बताया गया है। निर्जला एकादशी 2026: साल की सबसे कठिन एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026 को पड़ेगी। इसे सबसे कठिन लेकिन सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है क्योंकि इस व्रत में जल ग्रहण भी नहीं किया जाता। तिथि प्रारंभ: 24 जून शाम 6:12 बजे तिथि समाप्त: 25 जून रात 8:09 बजे पारण समय: 26 जून सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से एकादशी व्रत करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Kedarnath Temple decorated with flowers as devotees gather during 2026 Char Dham Yatra opening
सऊदी में ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए US ने अपनाई यूक्रेन की तकनीक

  महंगे सिस्टम के बीच सस्ता और असरदार विकल्प अपनाया United States ने वेस्ट एशिया में बढ़ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अब नया और किफायती तरीका अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने Saudi Arabia के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यूक्रेन की ‘Sky Map’ तकनीक तैनात की है। यह तकनीक पहले Ukraine ने रूस के हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल की थी और अब इसे ईरान समर्थित ड्रोन हमलों के खिलाफ उपयोग किया जा रहा है। क्या है Sky Map और कैसे करता है काम Sky Map एक एडवांस कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म है, जो रडार और सेंसर से मिले डेटा को एक साथ जोड़कर आने वाले ड्रोन और मिसाइल खतरों की पहचान करता है। यह सिस्टम खासतौर पर ड्रोन झुंड (swarm attacks) को ट्रैक करने और उन्हें रोकने में मदद करता है। इसे यूक्रेन में हजारों सेंसर के नेटवर्क के साथ विकसित किया गया था, जिससे यह कम लागत में प्रभावी सुरक्षा देता है। ईरान के ड्रोन हमलों के बाद बढ़ी जरूरत Iran के साथ चल रहे तनाव के बीच सऊदी स्थित अमेरिकी एयरबेस पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी एयरफोर्स के हाई-टेक विमान और रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे मौजूदा रक्षा व्यवस्था की कमजोरियां सामने आई हैं। यूक्रेनी विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग Sky Map के इस्तेमाल के लिए यूक्रेनी सैन्य विशेषज्ञ हाल ही में एयरबेस पहुंचे और अमेरिकी सैनिकों को ट्रेनिंग दी। यह पहली बार है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल की गई तकनीक को सीधे मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र में लागू किया गया है। अन्य तकनीकों पर भी काम जारी अमेरिका सिर्फ Sky Map पर निर्भर नहीं है। वह नए इंटरसेप्टर ड्रोन और सेंसर सिस्टम भी टेस्ट कर रहा है। हालांकि शुरुआती परीक्षणों में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। पेंटागन ने ड्रोन खतरों से निपटने के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है, जिससे सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा सके। रणनीतिक रूप से अहम है प्रिंस सुल्तान एयरबेस Prince Sultan Air Base अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है। यह बेस एडवांस रडार सिस्टम, मिसाइल डिफेंस और हवाई ऑपरेशन के लिए प्रमुख भूमिका निभाता है। हालांकि हालिया हमलों ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन जैसे सस्ते हथियार भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Maa Baglamukhi puja with flowers and offerings
बगलामुखी जयंती 2026: कब है, जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में Baglamukhi जयंती का विशेष महत्व है। दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी की जयंती इस साल 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर माता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 08:49 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 07:21 बजे उदयातिथि के अनुसार जयंती: 24 अप्रैल शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 से 05:03 तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 से दोपहर 12:46 तक पूजा विधि सुबह स्नान कर स्वच्छ (संभव हो तो पीले) वस्त्र धारण करें व्रत का संकल्प लें चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां बगलामुखी की तस्वीर/यंत्र स्थापित करें पीले फूल, हल्दी, चंदन, अक्षत और पीले फल अर्पित करें बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा या पीले चावल का भोग लगाएं हल्दी की माला से बीज मंत्र का जाप करें मंत्र: “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय, जिह्वाम् कीलय, बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।” अंत में माता की आरती करें धार्मिक महत्व मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि उनकी पूजा से: शत्रुओं पर विजय मिलती है वाणी और बुद्धि पर नियंत्रण आता है नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं प्रमुख सिद्धपीठ इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, जैसे: Nalkheda Baglamukhi Temple Pitambara Peeth Bankhandi Baglamukhi Temple इन स्थानों पर भक्त बड़ी संख्या में दर्शन और अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Tarpan rituals on Vaishakh Amavasya with traditional Hindu offerings and copper vessel
Vaishakh Amavasya 2026: तर्पण करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, पितरों की कृपा पाने के लिए जानें जरूरी नियम

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, खासकर पितरों की शांति और मोक्ष के लिए। वर्ष 2026 में वैशाख अमावस्या आज यानी 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जा रही है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए पितृ कर्म सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। लेकिन कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे तर्पण का पूरा फल नहीं मिल पाता। ऐसे में जरूरी है कि तर्पण करते समय कुछ खास सावधानियों का पालन किया जाए। तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान 1. सही दिशा का चुनाव करें तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। अन्य दिशा में किया गया तर्पण निष्फल हो सकता है। 2. काले तिल का प्रयोग जरूरी तर्पण के जल में काले तिल डालना अनिवार्य माना गया है। बिना तिल के किया गया तर्पण पितरों तक नहीं पहुंचता। ध्यान रखें कि केवल काले तिल का ही उपयोग करें। 3. तांबे के पात्र का उपयोग करें पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे के बर्तन का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है। स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तन से तर्पण करना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। 4. शुभ समय का रखें ध्यान तर्पण का सबसे उपयुक्त समय दोपहर (मध्याह्न) का होता है। सुबह स्नान के बाद मध्याह्न में तर्पण करना शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद तर्पण वर्जित है। 5. संयमित व्यवहार अपनाएं अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें। तर्पण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय पीपल की पूजा करें अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है। पंचबलि भोग लगाएं भोजन बनाने के बाद गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए अन्न का अंश निकालना शुभ माना जाता है। दान का विशेष महत्व इस दिन तिल, गुड़, अनाज और वस्त्र का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इससे वंश वृद्धि, सुख-समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वैशाख अमावस्या का दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर होता है। इस दिन विधि-विधान से तर्पण और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मकता और शांति का संचार होता है। ऐसे में शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन कर आप पितरों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Devotees visiting Kedarnath and Badrinath temples as BKTC announces new rules for Char Dham Yatra
बदरीनाथ–केदारनाथ में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक, BKTC ने 121 करोड़ से अधिक का बजट किया मंजूर

  देहरादून: उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थल Kedarnath Temple और Badrinath Temple में अब गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। यह निर्णय Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) की बजट बैठक में लिया गया। बैठक में समिति के अंतर्गत आने वाले 46 मंदिरों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का 121 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का अनुमानित बजट भी पारित किया गया। इस वर्ष Char Dham Yatra 19 अप्रैल से शुरू होगी। Yamunotri Temple और Gangotri Temple के कपाट Akshaya Tritiya (19 अप्रैल) को खुलेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। वर्ष 2025 में चारों धामों में कुल मिलाकर लगभग 51 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले बीकेटीसी की बैठक में यात्रा प्रबंधन और मंदिर व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध, यात्रा से पहले व्यवस्थाओं को मजबूत करना और Rishikesh ट्रांजिट कैंप में समिति का शिविर कार्यालय खोलना शामिल है। इसके अलावा धामों में निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने, बीकेटीसी अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन, रावल की नियुक्ति नियमावली, पूजा-दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों की पदोन्नति और अस्थायी कर्मियों के वेतन अंतर के निस्तारण जैसे प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बैठक में Adi Badri Temple को बीकेटीसी में शामिल करने, पूजा सामग्री की खरीद, मर्कंटेश्वर मंदिर के सभा मंडप के पुनर्निर्माण तथा कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने का भी निर्णय लिया गया।   बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए अलग बजट समिति ने श्री बदरीनाथ धाम के लिए 57.47 करोड़ रुपये और श्री केदारनाथ धाम के लिए 63.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। कुल मिलाकर प्रस्तावित आय के मुकाबले 99.45 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित किया गया है। बैठक का संचालन बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने किया, जिन्होंने पिछले निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट और वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।   सुरक्षित और सुगम दर्शन पर जोर बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना समिति की प्राथमिकता बताया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विज़न और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशों के तहत केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना पूरी हो चुकी है, जबकि बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से जारी है।   इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटलीकरण पर फोकस बैठक में यात्रा एवं दर्शन की एसओपी, मंदिर परिसर की मरम्मत, दर्शन पंक्ति की रेलिंग, रंग-रोगन, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और विश्राम गृहों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही ऑनलाइन पूजा व्यवस्था और समिति की वेबसाइट को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच दर्शन व्यवस्था को और सुचारु बनाया जा सके।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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