देहरादून: उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थल Kedarnath Temple और Badrinath Temple में अब गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। यह निर्णय Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) की बजट बैठक में लिया गया। बैठक में समिति के अंतर्गत आने वाले 46 मंदिरों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का 121 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का अनुमानित बजट भी पारित किया गया।
इस वर्ष Char Dham Yatra 19 अप्रैल से शुरू होगी। Yamunotri Temple और Gangotri Temple के कपाट Akshaya Tritiya (19 अप्रैल) को खुलेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। वर्ष 2025 में चारों धामों में कुल मिलाकर लगभग 51 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
बीकेटीसी की बैठक में यात्रा प्रबंधन और मंदिर व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध, यात्रा से पहले व्यवस्थाओं को मजबूत करना और Rishikesh ट्रांजिट कैंप में समिति का शिविर कार्यालय खोलना शामिल है।
इसके अलावा धामों में निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने, बीकेटीसी अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन, रावल की नियुक्ति नियमावली, पूजा-दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों की पदोन्नति और अस्थायी कर्मियों के वेतन अंतर के निस्तारण जैसे प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।
बैठक में Adi Badri Temple को बीकेटीसी में शामिल करने, पूजा सामग्री की खरीद, मर्कंटेश्वर मंदिर के सभा मंडप के पुनर्निर्माण तथा कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने का भी निर्णय लिया गया।
समिति ने श्री बदरीनाथ धाम के लिए 57.47 करोड़ रुपये और श्री केदारनाथ धाम के लिए 63.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। कुल मिलाकर प्रस्तावित आय के मुकाबले 99.45 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित किया गया है। बैठक का संचालन बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने किया, जिन्होंने पिछले निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट और वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।
बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना समिति की प्राथमिकता बताया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विज़न और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशों के तहत केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना पूरी हो चुकी है, जबकि बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
बैठक में यात्रा एवं दर्शन की एसओपी, मंदिर परिसर की मरम्मत, दर्शन पंक्ति की रेलिंग, रंग-रोगन, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और विश्राम गृहों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही ऑनलाइन पूजा व्यवस्था और समिति की वेबसाइट को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच दर्शन व्यवस्था को और सुचारु बनाया जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Ganga Dussehra और Ganga Saptami सनातन धर्म में मां गंगा को समर्पित दो बेहद पवित्र पर्व माने जाते हैं। दोनों ही त्योहारों पर गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व होता है। हालांकि, कई लोग इन दोनों पर्वों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनकी तिथि, पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व पूरी तरह अलग हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्ष प्रदान करने वाली देवी हैं। आइए जानते हैं गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा के बीच क्या अंतर है। तिथि और समय में अंतर दोनों पर्व हिंदू पंचांग के अलग-अलग महीनों में मनाए जाते हैं। Ganga Saptami वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। Ganga Dussehra ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा का महत्व Ganga Saptami को मां गंगा का जन्मोत्सव माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल से प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान विष्णु के चरणों को पवित्र जल से धोकर स्वर्ग में स्थान प्राप्त किया था। वहीं Ganga Dussehra मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पर्व माना जाता है। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं और भगवान शिव ने उनके प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में धारण किया था। गंगा सप्तमी से जुड़ी कथा पौराणिक कथा के अनुसार जब मां गंगा स्वर्ग से प्रवाहित हो रही थीं, तब उनके तेज बहाव से ऋषि जह्नु की कुटिया और पूजा सामग्री बह गई। इससे क्रोधित होकर ऋषि जह्नु ने पूरी गंगा नदी को पी लिया। बाद में देवताओं और राजा भगीरथ की प्रार्थना पर ऋषि जह्नु ने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन अपने कान से गंगा को पुनः बाहर निकाला। इसी कारण इस दिन को मां गंगा का ‘दूसरा जन्म’ भी कहा जाता है। इस घटना के बाद मां गंगा को ‘जाह्नवी’ नाम मिला। गंगा दशहरा की पौराणिक कथा Ganga Dussehra का संबंध राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से जुड़ा है। मान्यता है कि राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए हजारों वर्षों तक तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने मां गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। लेकिन गंगा के तीव्र वेग को संभालना संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और बाद में शांत धारा के रूप में पृथ्वी पर प्रवाहित किया। दोनों पर्वों का धार्मिक महत्व दोनों ही पर्वों पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
20 मई 2026 का दिन भावनाओं, संतुलन और जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनाने का संदेश दे रहा है। आज का मुख्य अंक 2 माना जा रहा है, जो शांति, संवेदनशीलता और रिश्तों में सामंजस्य का प्रतीक है। वहीं दिन की कुल ऊर्जा का अंक 8 है, जो मेहनत, अनुशासन और आर्थिक मजबूती से जुड़ा माना जाता है। आज का दिन उन लोगों के लिए खास रह सकता है जो धैर्य के साथ फैसले लेते हैं और रिश्तों को महत्व देते हैं। आइए जानते हैं सभी मूलांकों का आज का भविष्यफल। मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 तारीख को जन्मे लोग) आज आपको टीम के साथ मिलकर काम करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुशासन बनाए रखने से लाभ मिलेगा। व्यापार और आर्थिक योजनाओं के लिए दिन अनुकूल है। गुस्से पर नियंत्रण रखें और परिवार की भावनाओं को समझने की कोशिश करें। शुभ अंक: 1, 8 शुभ रंग: लाल, भूरा मूलांक 2 (2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे लोग) आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है। करियर में मजबूती मिलेगी और साझेदारी वाले कामों में फायदा हो सकता है। आर्थिक मामलों में अच्छी खबर मिलने के संकेत हैं। भावुकता में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। शुभ अंक: 2, 8 शुभ रंग: सफेद, मलाईदार मूलांक 3 (3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे लोग) आज अनुशासन और समझदारी आपके लिए सफलता की कुंजी बनेगी। कार्यक्षेत्र में फालतू बातों से दूरी बनाए रखें। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। परिवार में शांति बनाए रखने की कोशिश करें। शुभ अंक: 3, 8 शुभ रंग: पीला, भूरा मूलांक 4 (4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे लोग) आज आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। जमीन, प्रॉपर्टी और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। मेहनत का पूरा फल मिलेगा, लेकिन व्यवहार में नरमी बनाए रखें। शुभ अंक: 4, 8 शुभ रंग: हरा, सलेटी मूलांक 5 (5, 14, 23 तारीख को जन्मे लोग) आज जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है। पैसों के लेनदेन में सावधानी रखें। जीवनसाथी या परिवार को समय देने की जरूरत पड़ सकती है। बातचीत में मिठास बनाए रखें। शुभ अंक: 5, 8 शुभ रंग: हल्का नीला, भूरा मूलांक 6 (6, 15, 24 तारीख को जन्मे लोग) करियर और आर्थिक मामलों में दिन सकारात्मक रहेगा। व्यापार बढ़ाने और निवेश करने के लिए समय अच्छा है। शिक्षा, फैशन और सलाहकारी काम से जुड़े लोगों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। शुभ अंक: 6, 8 शुभ रंग: गुलाबी, भूरा मूलांक 7 (7, 16, 25 तारीख को जन्मे लोग) नई योजनाएं बनाने और रिसर्च से जुड़े कार्यों के लिए दिन अनुकूल है। मन की आवाज पर भरोसा रखें। अकेले समय बिताने की इच्छा हो सकती है, लेकिन अपनों को अपनी भावनाएं जरूर बताएं। शुभ अंक: 7, 8 शुभ रंग: जामुनी, सलेटी मूलांक 8 (8, 17, 26 तारीख को जन्मे लोग) आज का दिन आपके लिए बेहद प्रभावशाली साबित हो सकता है। व्यापार में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। लंबे समय से अटके आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार को समय देना न भूलें। शुभ अंक: 8, 2 शुभ रंग: काला, भूरा मूलांक 9 (9, 18, 27 तारीख को जन्मे लोग) आज अधूरे काम पूरे हो सकते हैं। समाज सेवा और लोगों की मदद से सम्मान बढ़ सकता है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखें और पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश करें। शुभ अंक: 9, 8 शुभ रंग: लाल, सफेद
वैदिक ज्योतिष में “कारकत्व” एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है। सरल शब्दों में समझें तो कारकत्व का अर्थ है किसी ग्रह की जिम्मेदारी या उसका विशेष विभाग। जैसे किसी सरकार में अलग-अलग मंत्रालय होते हैं और हर मंत्री को एक खास विभाग सौंपा जाता है, उसी प्रकार ब्रह्मांड की व्यवस्था में भी प्रत्येक ग्रह को जीवन के कुछ विशेष क्षेत्रों का स्वामी बनाया गया है। जिस विषय, वस्तु या संबंध का अधिकार जिस ग्रह के पास होता है, वह ग्रह उस विषय का “कारक” कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र में सटीक भविष्यवाणी के लिए केवल भाव और भावेश को देखना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उस विषय के कारक ग्रह की स्थिति को समझना भी उतना ही आवश्यक होता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सुख-सुविधा और संपत्ति का चौथा भाव अत्यंत मजबूत हो, लेकिन उस भाव का नैसर्गिक कारक चंद्रमा पीड़ित अवस्था में हो, तो व्यक्ति के पास भौतिक सुख-साधन तो भरपूर होंगे, लेकिन मानसिक शांति और संतोष की कमी बनी रहेगी। यही वजह है कि अनुभवी ज्योतिषी ग्रहों के कारकत्व का विशेष अध्ययन करते हैं। सूर्य का कारकत्व सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, यश, प्रतिष्ठा, शक्ति और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसके अलावा यह पिता, राजनीति, शासन, सरकारी नौकरी, नेतृत्व क्षमता, चिकित्सा विज्ञान, स्वास्थ्य, दाहिने नेत्र और सामाजिक गौरव का भी प्रतिनिधित्व करता है। किसी व्यक्ति के आत्मबल और समाज में सम्मान का आकलन मुख्य रूप से सूर्य की स्थिति देखकर किया जाता है। चंद्रमा का कारकत्व चंद्रमा मन, भावनाओं, संवेदनशीलता और मानसिक स्थिति का कारक है। यह व्यक्ति की सोच, रुझान, प्रसन्नता, नींद, चेहरे की आभा, माता और प्रसिद्धि से जुड़ा होता है। जल तत्व, दूर की यात्राएं तथा मानसिक शांति का भी संबंध चंद्रमा से माना जाता है। यदि चंद्रमा शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित और खुश रहता है। मंगल का कारकत्व मंगल साहस, शक्ति, पराक्रम और संघर्ष का ग्रह माना जाता है। यह भूमि, संपत्ति, सेना, पुलिस, युद्धक क्षमता, इंजीनियरिंग, डॉक्टर, वैज्ञानिक और नेतृत्व क्षमता से जुड़ा होता है। क्रोध, दुर्घटना, चोट, शत्रु और विवादों का विचार भी मंगल से किया जाता है। मजबूत मंगल व्यक्ति को निर्भीक और ऊर्जावान बनाता है। बुध का कारकत्व बुध बुद्धिमत्ता, वाणी, तर्कशक्ति और व्यापार का प्रतिनिधि ग्रह है। शिक्षा, गणित, लेखन, प्रकाशन, ज्योतिष, लेखा-जोखा, संचार, मित्रता और व्यवसायिक कौशल का अध्ययन बुध के माध्यम से किया जाता है। जिन लोगों का बुध मजबूत होता है, वे आमतौर पर अच्छे वक्ता, लेखक और व्यापारी माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र को गहराई से समझने के लिए ग्रहों के कारकत्व का ज्ञान अत्यंत आवश्यक माना गया है। सूर्य, चंद्रमा, मंगल और बुध की तरह बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु भी जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारक होते हैं। इनके विस्तृत प्रभाव और महत्व की चर्चा अगले भाग में की जाएगी।