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Massive crowd of devotees visiting Kedarnath Temple during record-breaking Char Dham Yatra season
केदारनाथ यात्रा ने रचा नया इतिहास, 22 दिनों में 5.23 लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन

रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु, धाम में दिख रहा आस्था का सैलाब Kedarnath Temple की यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा शुरू होने के महज 22 दिनों के भीतर 5 लाख 23 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। लगातार बढ़ रही भक्तों की संख्या से पूरे केदारघाटी क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ केदारनाथ धाम पहुंच रही है। बुधवार को अकेले 32,427 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। अब तक कुल 5,23,582 भक्त पवित्र धाम में माथा टेक चुके हैं। यात्रा मार्ग पर बेहतर सुविधाएं प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पैदल मार्ग पर जगह-जगह विश्राम स्थल, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। धाम क्षेत्र में स्वच्छता, आवास और आपातकालीन सेवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। श्रद्धालुओं ने की व्यवस्थाओं की सराहना देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु प्रशासनिक व्यवस्थाओं की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। पंजाब के रोपड़ से आए दिवाकर ने बताया कि दर्शन व्यवस्था बेहद सरल और सुगम रही। वहीं अहमदाबाद से आई श्रद्धालु माही ने कहा कि उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर सुविधाएं मिलीं। पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा लाभ केदारनाथ यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय और पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। यात्रा सीजन के शुरुआती दौर में ही इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना उत्तराखंड पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Kedarnath Temple decorated with flowers as devotees gather during 2026 Char Dham Yatra opening
सऊदी में ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने के लिए US ने अपनाई यूक्रेन की तकनीक

  महंगे सिस्टम के बीच सस्ता और असरदार विकल्प अपनाया United States ने वेस्ट एशिया में बढ़ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अब नया और किफायती तरीका अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने Saudi Arabia के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यूक्रेन की ‘Sky Map’ तकनीक तैनात की है। यह तकनीक पहले Ukraine ने रूस के हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल की थी और अब इसे ईरान समर्थित ड्रोन हमलों के खिलाफ उपयोग किया जा रहा है। क्या है Sky Map और कैसे करता है काम Sky Map एक एडवांस कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म है, जो रडार और सेंसर से मिले डेटा को एक साथ जोड़कर आने वाले ड्रोन और मिसाइल खतरों की पहचान करता है। यह सिस्टम खासतौर पर ड्रोन झुंड (swarm attacks) को ट्रैक करने और उन्हें रोकने में मदद करता है। इसे यूक्रेन में हजारों सेंसर के नेटवर्क के साथ विकसित किया गया था, जिससे यह कम लागत में प्रभावी सुरक्षा देता है। ईरान के ड्रोन हमलों के बाद बढ़ी जरूरत Iran के साथ चल रहे तनाव के बीच सऊदी स्थित अमेरिकी एयरबेस पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी एयरफोर्स के हाई-टेक विमान और रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे मौजूदा रक्षा व्यवस्था की कमजोरियां सामने आई हैं। यूक्रेनी विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग Sky Map के इस्तेमाल के लिए यूक्रेनी सैन्य विशेषज्ञ हाल ही में एयरबेस पहुंचे और अमेरिकी सैनिकों को ट्रेनिंग दी। यह पहली बार है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल की गई तकनीक को सीधे मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र में लागू किया गया है। अन्य तकनीकों पर भी काम जारी अमेरिका सिर्फ Sky Map पर निर्भर नहीं है। वह नए इंटरसेप्टर ड्रोन और सेंसर सिस्टम भी टेस्ट कर रहा है। हालांकि शुरुआती परीक्षणों में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। पेंटागन ने ड्रोन खतरों से निपटने के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है, जिससे सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा सके। रणनीतिक रूप से अहम है प्रिंस सुल्तान एयरबेस Prince Sultan Air Base अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है। यह बेस एडवांस रडार सिस्टम, मिसाइल डिफेंस और हवाई ऑपरेशन के लिए प्रमुख भूमिका निभाता है। हालांकि हालिया हमलों ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन जैसे सस्ते हथियार भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Kedarnath Temple decorated with flowers as devotees gather for opening ceremony in 2026
केदारनाथ धाम के कपाट खुले: 6 महीने बाद शुरू हुई पवित्र यात्रा, पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

  शुभ मुहूर्त में खुले बाबा केदार के द्वार उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ केदारनाथ धाम के कपाट आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा 2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया। मंदिर को इस खास मौके पर लगभग 51 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा धाम आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। भक्तों में जबरदस्त उत्साह, गूंजा ‘हर-हर महादेव’ कपाट खुलने के मौके पर करीब 6 से 8 हजार श्रद्धालु धाम में मौजूद रहे। बाबा केदार की डोली के पहुंचते ही पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम से विशेष पूजा-अर्चना की। कपाट खुलने के साथ ही अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। छह महीने बाद फिर शुरू हुई धार्मिक परंपरा गौरतलब है कि पिछले वर्ष 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। करीब छह महीने बाद एक बार फिर धाम में धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं, जिससे चारधाम यात्रा का नया चरण शुरू हो गया है। पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं, बद्रीनाथ की भी तैयारी तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कपाट खुलने पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे आस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने बाबा केदार से सभी यात्रियों की सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना की। वहीं, बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नरसिंह मंदिर से आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गरुड़ डोली बद्रीनाथ के लिए रवाना हो चुकी है। इस साल चारधाम यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह है–अब तक 21 लाख से अधिक श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा के लिए है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Badrinath Temple decorated with flowers during opening of doors for Char Dham Yatra in Uttarakhand
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल से खुलेंगे, नवंबर तक कर सकेंगे भगवान बद्रीविशाल के दर्शन

उत्तराखंड के पवित्र चारधामों में शामिल Badrinath Temple के कपाट इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार हर वर्ष इसी दिन मंदिर के द्वार खोले जाते हैं। इस बार भक्त 23 अप्रैल से 13 नवंबर तक भगवान बद्रीविशाल के दर्शन कर सकेंगे। कपाट खुलने की विशेष परंपरा कपाट खुलने की प्रक्रिया बेहद विधिपूर्वक और परंपराओं के अनुसार होती है। सुबह करीब 4 बजे: मुख्य पुजारी (रावल), धर्माधिकारी और हक-हकूकधारी गर्भगृह के द्वार पर पहुंचते हैं टिहरी राजघराने के प्रतिनिधि और प्रशासन भी मौजूद रहते हैं सबसे पहले कपाट की सील और ताले की जांच होती है इसके बाद मंत्रोच्चार और पूजा के साथ जैसे ही कपाट खुलते हैं, श्रद्धालुओं को भगवान के “निर्वाण दर्शन” होते हैं, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है। ‘घृत कंबल’ और महाभिषेक का महत्व सर्दियों में भगवान को ओढ़ाया गया घृत कंबल (घी में डुबोया ऊनी वस्त्र) कपाट खुलते ही हटाया जाता है। इसके बाद: तिल के तेल से भगवान का महाभिषेक किया जाता है यह पवित्र तेल टिहरी राजघराने की ओर से विशेष विधि से तैयार किया जाता है ‘गाडू घड़ा’ की अनोखी परंपरा टिहरी राजघराने की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से तिल का तेल निकालती हैं, जिसे ‘गाडू घड़ा’ कहा जाता है। यह पवित्र कलश यात्रा: ऋषिकेश → श्रीनगर → जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंचती है। सर्दियों में जब Badrinath Temple के कपाट बंद रहते हैं, तब भगवान की पूजा Narsingh Temple Joshimath में की जाती है। बद्रीनाथ कैसे पहुंचें? हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट Jolly Grant Airport (देहरादून) है, जो लगभग 317 किमी दूर है। यहां से टैक्सी और बस मिल जाती हैं। रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन Rishikesh Railway Station है, जो करीब 297 किमी दूर है। सड़क मार्ग: बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर स्थित है। ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली से बस और टैक्सी की नियमित सुविधा उपलब्ध है। श्रद्धालुओं के लिए खास जानकारी चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विशेष इंतजाम किए जाते हैं।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Delhi–Dehradun Expressway and development visuals
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज, यात्रा समय घटकर ढाई घंटे

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi मंगलवार को Delhi–Dehradun Expressway का उद्घाटन करेंगे। 213 किलोमीटर लंबा यह छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर ₹12,000 करोड़ से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। यह परियोजना Delhi, Uttar Pradesh और Uttarakhand से होकर गुजरती है। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय वर्तमान छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रह जाएगा। परियोजना में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज, चार प्रमुख पुल और 12 वे-साइड सुविधाओं का निर्माण शामिल है। साथ ही उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम होगी। प्रधानमंत्री उद्घाटन से पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में वन्यजीव गलियारे का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद वे देहरादून के पास स्थित Jai Maa Daat Kali Temple में पूजा-अर्चना करेंगे और फिर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर जनसभा को संबोधित करेंगे। परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो एशिया के सबसे लंबे वन्यजीव गलियारों में शामिल है। इसके अलावा आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए 200 मीटर लंबे दो अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। सरकार का मानना है कि यह कॉरिडोर क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा। साथ ही दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार और विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
चारधाम यात्रा के दौरान पहाड़ी मार्ग पर चलती बस और टैक्सी
क्या हैं ग्रीन कार्ड ? भारत में कहां पड़ने वाली है इसकी जरूरत ?

देहरादून ,एजेंसियां। अगर आप चार धाम यात्रा 2026 पर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो एक जरूरी बात पहले ही समझ लें ग्रीन कार्ड हर यात्री के लिए नहीं, बल्कि खास तौर पर कमर्शियल यात्री वाहनों के लिए जरूरी होता है। उत्तराखंड सरकार ने यह व्यवस्था यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और ट्रैफिक-फ्रेंडली बनाने के लिए लागू की है। आधिकारिक परिवहन पोर्टल के मुताबिक, ग्रीन कार्ड/ट्रिप कार्ड चारधाम यात्रा के दौरान Commercial Tourist Vehicles के संचालन के लिए ऑनलाइन जारी किया जाता है।   ग्रीन कार्ड क्या है और किसे बनवाना पड़ता है? ग्रीन कार्ड दरअसल एक तरह का अनिवार्य वाहन अनुमति-पत्र है। यह खास तौर पर उन कमर्शियल टैक्सी, बस, ट्रैवलर और अन्य यात्री वाहनों के लिए जरूरी है, जो चारधाम यात्रा मार्ग पर यात्रियों को लेकर चलते हैं। यानी अगर आप अपना निजी वाहन लेकर यात्रा कर रहे हैं, तो सामान्य यात्री पंजीकरण अलग है; लेकिन किराये/व्यावसायिक वाहन चलाने वालों के लिए ग्रीन कार्ड बेहद अहम है।   यह जरूरी क्यों है? ग्रीन कार्ड का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यात्रा मार्ग पर चलने वाले वाहन तकनीकी रूप से फिट, सुरक्षित, और जरूरी दस्तावेजों से लैस हों। उत्तराखंड परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह वाहन की फिटनेस, परमिट, टैक्स, इंश्योरेंस और ड्राइवर लाइसेंस जैसी चीजों की जांच से जुड़ा होता है। इससे खराब या असुरक्षित वाहनों को पहाड़ी रूट पर जाने से रोका जा सकता है।   कैसे बनता है ग्रीन कार्ड? ग्रीन कार्ड बनवाने के लिए वाहन मालिक को उत्तराखंड परिवहन विभाग की आधिकारिक सेवा Greencard/Trip Card Portal पर आवेदन करना होता है। यहां वाहन की जानकारी, दस्तावेज और शुल्क जमा करने के बाद प्रक्रिया पूरी होती है। वहीं, यात्रियों को अपनी Char Dham Yatra Registration अलग से Tourist Care Uttarakhand Portal पर करनी होती है।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 31, 2026 0
Uttarakhand Raj Bhavan oath ceremony as new ministers join Dhami cabinet expansion
उत्तराखंड में धामी मंत्रिमंडल का विस्तार आज: 5 नए चेहरों को मिल सकती जगह

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आज विराम लगने जा रहा है। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आज 20 मार्च 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। नवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में गुरमीत सिंह नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगे। राजभवन में सुबह 10 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में पांच नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। पांच सीटें थीं खाली, आज भरेंगी उत्तराखंड कैबिनेट में कुल 12 पद होते हैं, जिनमें से फिलहाल केवल 7 मंत्री ही कार्यरत हैं। यानी पांच पद लंबे समय से खाली चल रहे थे। इन रिक्तियों की वजहों में 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास का निधन   2025 में विवाद के बाद प्रेम चंद्र अग्रवाल का इस्तीफा   जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन कारणों से मंत्रिमंडल अधूरा था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। ये हो सकते हैं नए मंत्री सूत्रों के मुताबिक, जिन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें शामिल हैं: मदन कौशिक   प्रदीप बत्रा   भरत चौधरी   राम सिंह खेड़ा   खजान दास   हालांकि, आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही होगी। चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश विशेषज्ञ मानते हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह मंत्रिमंडल विस्तार बेहद अहम है। इससे क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन को भी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पिछले दो वर्षों में कई बार कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं हुईं, लेकिन हर बार यह टलता रहा। ऐसे में आज का दिन राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Devotees visiting Kedarnath and Badrinath temples as BKTC announces new rules for Char Dham Yatra
बदरीनाथ–केदारनाथ में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक, BKTC ने 121 करोड़ से अधिक का बजट किया मंजूर

  देहरादून: उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थल Kedarnath Temple और Badrinath Temple में अब गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। यह निर्णय Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) की बजट बैठक में लिया गया। बैठक में समिति के अंतर्गत आने वाले 46 मंदिरों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का 121 करोड़ 7 लाख रुपये से अधिक का अनुमानित बजट भी पारित किया गया। इस वर्ष Char Dham Yatra 19 अप्रैल से शुरू होगी। Yamunotri Temple और Gangotri Temple के कपाट Akshaya Tritiya (19 अप्रैल) को खुलेंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाएंगे। वर्ष 2025 में चारों धामों में कुल मिलाकर लगभग 51 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले बीकेटीसी की बैठक में यात्रा प्रबंधन और मंदिर व्यवस्थाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध, यात्रा से पहले व्यवस्थाओं को मजबूत करना और Rishikesh ट्रांजिट कैंप में समिति का शिविर कार्यालय खोलना शामिल है। इसके अलावा धामों में निर्धारित दूरी तक मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने, बीकेटीसी अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन, रावल की नियुक्ति नियमावली, पूजा-दर्शन व्यवस्था, कर्मचारियों की पदोन्नति और अस्थायी कर्मियों के वेतन अंतर के निस्तारण जैसे प्रस्तावों पर भी सहमति बनी। बैठक में Adi Badri Temple को बीकेटीसी में शामिल करने, पूजा सामग्री की खरीद, मर्कंटेश्वर मंदिर के सभा मंडप के पुनर्निर्माण तथा कर्मचारियों के वेतन-पेंशन के लिए रिवॉल्विंग फंड बनाने का भी निर्णय लिया गया।   बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए अलग बजट समिति ने श्री बदरीनाथ धाम के लिए 57.47 करोड़ रुपये और श्री केदारनाथ धाम के लिए 63.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। कुल मिलाकर प्रस्तावित आय के मुकाबले 99.45 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित किया गया है। बैठक का संचालन बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने किया, जिन्होंने पिछले निर्णयों की अनुपालन रिपोर्ट और वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया।   सुरक्षित और सुगम दर्शन पर जोर बीकेटीसी अध्यक्ष Hemant Dwivedi की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन उपलब्ध कराना समिति की प्राथमिकता बताया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विज़न और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देशों के तहत केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना पूरी हो चुकी है, जबकि बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य तेजी से जारी है।   इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटलीकरण पर फोकस बैठक में यात्रा एवं दर्शन की एसओपी, मंदिर परिसर की मरम्मत, दर्शन पंक्ति की रेलिंग, रंग-रोगन, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और विश्राम गृहों की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही ऑनलाइन पूजा व्यवस्था और समिति की वेबसाइट को अधिक सुव्यवस्थित बनाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच दर्शन व्यवस्था को और सुचारु बनाया जा सके।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0