कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ग्रामीण आवास योजना ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को इस बदलाव की घोषणा की। इसी अवसर पर राज्य सरकार ने योजना के तहत 10,20,379 लाभार्थी परिवारों को दूसरी और अंतिम किस्त भी जारी की। ‘बांग्लार बाड़ी’ अब ‘पश्चिम बंग आवास’ राज्य सरकार की ओर से संचालित ग्रामीण आवास योजना को अब ‘पश्चिम बंग आवास’ (Paschim Banga Awas) के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मंत्रिमंडल ने योजना का नाम बदलने का फैसला किया है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। 10.20 लाख परिवारों को ₹60 हजार की दूसरी किस्त सरकार ने योजना के तहत 10,20,379 लाभार्थियों को दूसरी किस्त के रूप में ₹60,000 प्रति परिवार की राशि जारी की। इसके साथ ही इन लाभार्थियों के लिए योजना की दूसरी और अंतिम किस्त का भुगतान पूरा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, इस चरण में सरकार ने कुल ₹6,000 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है। लाभार्थियों को राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। जांच के बाद पात्र परिवारों को मिली सहायता योजना के लाभार्थियों के चयन में सत्यापन प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। सरकार के अनुसार पात्र परिवारों की जांच के बाद सहायता राशि जारी की गई है। जो पात्र आवेदक अभी इस चरण में शामिल नहीं हो सके हैं, उन्हें सत्यापन पूरा होने के बाद योजना के दायरे में लाने की बात कही गई है। राज्य सरकार की इस आवास योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना पक्का घर बनाने में सहायता देना है। नाम बदलने के पीछे सरकार ने बताया कारण मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने योजना का नाम बदलने के साथ ‘पश्चिम बंग’ नाम के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य के नाम से ‘पश्चिम’ शब्द हटाया नहीं जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को इससे जुड़े इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। इस तरह ‘बांग्लार बाड़ी’ से ‘पश्चिम बंग आवास’ नाम परिवर्तन के साथ राज्य सरकार ने योजना की दूसरी किस्त का वितरण भी पूरा किया है। आने वाले चरण में सत्यापन के बाद शेष पात्र परिवारों को भी योजना का लाभ दिए जाने की उम्मीद है।
कोलकाता, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने पहली बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भाग लेने का ऐलान किया है। राज्य में अभियान के तहत करीब 70 लाख राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए जाएंगे। सरकार की ओर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा और अन्य कार्यक्रम आयोजित करने की भी तैयारी है। पहली बार अभियान में शामिल होगा पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी की घोषणा की गई है। इसके तहत लोगों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना है। 70 लाख तिरंगे बांटने की तैयारी अभियान के तहत राज्यभर में 70 लाख तिरंगे वितरित किए जाने की योजना है। स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी संख्या में लोगों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सरकार की योजना के अनुसार अभियान को केवल ध्वज वितरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। अगस्त में निकलेगी तिरंगा यात्रा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अगस्त में कोलकाता में बड़ी तिरंगा रैली आयोजित किए जाने की भी योजना है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। स्वतंत्रता दिवस से पहले होने वाले इन कार्यक्रमों के जरिए राज्य में राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता दिवस को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ेगा अभियान पश्चिम बंगाल में इस अभियान के जरिए सरकार घर-घर तक तिरंगा पहुंचाने और लोगों को स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़ने की तैयारी में है। 70 लाख झंडों के वितरण के साथ राज्य में पहली बार बड़े स्तर पर ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अब अभियान के तहत तिरंगा वितरण, रैली और अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों पर नजर रहेगी।
कोलकाता, एजेंसियां। NEET (UG) पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, हिंसा या आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया फैसला पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया है। अदालत ने NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए राज्यों को संयम बरतने का निर्देश दिया था। छात्रों को मिली बड़ी राहत सरकार के इस निर्णय से उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जो NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन करने के आधार पर छात्रों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। हिंसा करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई सरकार ने यह भी साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून तोड़ने वाली गतिविधियों में अंतर किया जाएगा। जिन लोगों पर हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य आपराधिक मामलों के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। NEET पेपर लीक बना राष्ट्रीय मुद्दा NEET पेपर लीक विवाद के बाद देश के कई राज्यों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं। छात्र परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने की मांग कर रहे हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले राज्यभर में 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाने का फैसला किया है। यह अभियान 9 अगस्त से शुरू होकर 17 अगस्त तक चलेगा, जिसमें लोगों को अपने घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। राज्यभर में आयोजित होंगे देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए अभियान में भाग लेने की अपील की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन, नगर निकाय और शैक्षणिक संस्थान मिलकर अभियान को सफल बनाने के लिए काम करेंगे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से भी जुड़ा अभियान इस बार तिरंगा अभियान को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से भी जोड़ा गया है। अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम को विशेष महत्व दिया जाएगा। सरकार की योजना के अनुसार डिजिटल और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज के साथ देशभक्ति से जुड़े आयोजनों को बढ़ावा दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी बढ़ेगा अभियान का प्रचार अभियान के दौरान लोगों को तिरंगे के साथ अपनी तस्वीरें साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। 'हर घर तिरंगा' पोर्टल पर फोटो अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सरकार का उद्देश्य है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें और राष्ट्रीय एकता का संदेश मजबूत हो। प्रशासन को दिए गए दिशा-निर्देश पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलों को अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला प्रशासन, कोलकाता नगर निगम, नगरपालिकाओं और पंचायत स्तर के अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। 'हर घर तिरंगा' अभियान के जरिए सरकार लोगों की भागीदारी बढ़ाने और स्वतंत्रता दिवस समारोह को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि 13 जुलाई 2026 से राज्य में दो नए कानून लागू होंगे। इनमें पहला 'पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं समाज विरोधी गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026' और दूसरा 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026' है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों का उद्देश्य संगठित अपराध, गैंग गतिविधियों और हिंसक उपद्रव पर प्रभावी रोक लगाना है। क्या होंगे नए प्रावधान? नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो उसे बिना मुकदमा चले अधिकतम 12 महीने तक निरुद्ध (नजरबंद) किया जा सकेगा। वहीं, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनकी संपत्ति जब्त कर नीलाम भी की जा सकेगी, ताकि हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। सरकार का दावा, विपक्ष ने उठाए सवाल राज्य सरकार का कहना है कि इन कानूनों से संगठित अपराध और हिंसक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव होगी। वहीं विपक्ष ने इन कानूनों के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताते हुए सरकार से इनके प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 13 जुलाई से दोनों कानून पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएंगे।
कोलकाता , एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए राज्य के सभी पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित करने का फैसला किया है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना, उनकी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना और पुलिस तक उनकी आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से होगी शुरुआत गृह विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जिलों के पुलिस थानों में चरणबद्ध तरीके से महिला हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी। प्रत्येक हेल्प डेस्क पर प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी, जो घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, साइबर अपराध और महिलाओं से जुड़े अन्य मामलों में तत्काल सहायता प्रदान करेंगी। 'दुर्गा स्क्वाड' और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को भी मिलेगी मजबूती महिला सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 'दुर्गा स्क्वाड' के विस्तार और आपातकालीन हेल्पलाइन 112 को मजबूत करने का भी निर्णय लिया है। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश सरकार ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि महिलाओं से जुड़ी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए। साथ ही प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। महिला सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से महिलाओं का पुलिस व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को कानूनी सलाह, आवश्यक सहायता और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान बनाया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की 1 करोड़ 10 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3,000-3,000 रुपये की पहली किस्त डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। 1.60 करोड़ आवेदन आए, 27 लाख आवेदन किए गए खारिज मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए कुल 1.60 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से गहन जांच के बाद 27 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में नागरिकता या स्थायी निवास को लेकर संदेह था, उन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत और पश्चिम बंगाल के करदाताओं के पैसे केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए हैं और इन्हें गैर-भारतीयों को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता और पात्रता का पूरा ध्यान रखा गया है। लक्ष्मी भंडार योजना की जगह लेगी नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का स्थान लिया है। पहले लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1,700 रुपये की सहायता मिलती थी। नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे उन्हें घरेलू खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अधिक मदद मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राशन कार्ड सत्यापन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, उनके राशन कार्ड भी रद्द किए जाएंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाला राशन अब उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि 15 जून तक राशन कार्डों की जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इस फैसले का उद्देश्य फर्जी या अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाना बताया जा रहा है। आरसीएमएस डेटाबेस से हटाए जाएंगे नाम खाद्य विभाग के अनुसार, एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके डिजिटल राशन कार्ड (डीआरसी) भी राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम (आरसीएमएस) डेटाबेस से हटा दिए जाएंगे। इसके बाद ऐसे लोगों का राशन कार्ड अमान्य माना जाएगा और वे राशन लेने के पात्र नहीं रहेंगे। कुछ लोगों को मिलेगी राहत हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों के लोगों को राहत भी दी है। जिन व्यक्तियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ संबंधित ट्रिब्यूनल में अपील दायर की है या जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन किया हुआ है, उनके राशन कार्ड फिलहाल रद्द नहीं किए जाएंगे। अपील या आवेदन पर अंतिम निर्णय आने तक उनके कार्ड सक्रिय बने रहेंगे और उन्हें राशन मिलता रहेगा। रोजाना होगी निगरानी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिला स्तर पर निगरानी की व्यवस्था भी की है। जिला खाद्य नियंत्रकों (डीसीएफएस/डीडीआर) को इस अभियान की दैनिक समीक्षा करने और प्रगति रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) तथा विभागीय निदेशालय को भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से राशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी। वहीं, विपक्षी दल इस फैसले के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।