देवघर। भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और संकल्प की मिसाल पेश कर रही हैं धनबाद की 60 वर्षीय रेणु देवी। वह वर्ष 1998 से लगातार हर सावन सोमवार डाक बम बनकर सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचती हैं और बाबा का जलाभिषेक करती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। 28 वर्षों से निभा रही हैं डाक बम का संकल्प रेणु देवी ने वर्ष 1998 में पहली बार सावन के प्रत्येक सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने इस परंपरा को लगातार जारी रखा। उनके लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा आस्था और संकल्प है। रेणु देवी का कहना है कि जब तक बाबा भोलेनाथ की कृपा और बुलावा रहेगा, तब तक वह इसी तरह अपनी यात्रा जारी रखेंगी। लंबी यात्रा में नहीं महसूस होती थकान डाक बम की कठिन यात्रा के बावजूद रेणु देवी के उत्साह में कमी नहीं आती। उनका कहना है कि डाक बम की वेशभूषा धारण करते ही उन्हें एक अलग तरह की ऊर्जा महसूस होती है। यात्रा के दौरान उनके साथ श्रद्धालुओं का जत्था भी रहता है, जो जरूरत के समय उनका सहयोग करता है। ‘बाबा ने भक्त बनाया, यही सबसे बड़ा आशीर्वाद’ जब रेणु देवी से उनकी मनोकामना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ ने उन्हें अपना भक्त बनाया, इससे बड़ा आशीर्वाद उनके लिए कुछ नहीं हो सकता। वह अपने परिवार के सुखी और स्वस्थ होने को ही बाबा का आशीर्वाद मानती हैं। उनकी प्रार्थना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा हर व्यक्ति और हर परिवार पर बनी रहे और सभी लोग सुख, शांति और समृद्धि के साथ जीवन बिताएं। पति भी वर्षों से कर रहे हैं देवघर की यात्रा रेणु देवी की शिवभक्ति में उनके पति भी साथ हैं। उनके पति के अनुसार, वह स्वयं 1986 से देवघर जाकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते आ रहे हैं। दोनों के लिए बाबा बैद्यनाथ की आराधना अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है। 60 वर्ष की उम्र में भी हर सावन सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाली रेणु देवी की आस्था लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
कांवड़ियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन का फैसला, सुगम दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर देवघर/दुमका, एजेंसियां। झारखंड के प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) और बासुकीनाथ धाम (दुमका) में VIP दर्शन व्यवस्था को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना परेशानी के जलार्पण और दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराना है। कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए फैसला श्रावण महीने में देशभर से लाखों की संख्या में शिवभक्त देवघर पहुंचते हैं। कांवर यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए VIP और विशेष दर्शन पर रोक लगाई गई है। आम श्रद्धालुओं के लिए बढ़ाई गई व्यवस्था प्रशासन ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। श्रद्धालुओं की कतार, जलार्पण व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त जवानों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सुरक्षा और यातायात पर विशेष निगरानी श्रावणी मेले को लेकर देवघर और दुमका प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मंदिर क्षेत्र में CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल और सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। VIP व्यवस्था बंद रखने का उद्देश्य अधिकारियों का कहना है कि VIP दर्शन बंद करने से सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिलेगा और लंबी कतारों में खड़े भक्तों को राहत मिलेगी। भीड़ कम होने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही आगे की व्यवस्था पर निर्णय लिया जाएगा।
देवघर। श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और दुमका के बाबा बासुकीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। इसी बीच झारखंड सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूरे श्रावणी मेला 2026 के दौरान दोनों मंदिरों में VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के सुगम और समान रूप से दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रावण मेले के दौरान किसी भी व्यक्ति के लिए विशेष सिफारिश या प्राथमिकता के आधार पर दर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए पहले से लागू अर्घा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था संचालित रहेगी। एसीएस वंदना दादेल ने जारी किया आदेश कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और श्रावण माह में यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु देवघर के साथ दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर भी दर्शन के लिए जाते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए VIP और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। सिफारिश भेजने से भी किया गया मना सरकार ने सभी मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संस्थानों से अपील की है कि बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में VIP दर्शन के लिए किसी भी प्रकार की अनुशंसा या अनुरोध राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन को न भेजें। यह आदेश भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तथा देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजा गया है, ताकि श्रावणी मेले के दौरान VIP सिफारिशों पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जा सके।
देवघर। बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने श्रावणी मेला के दौरान 12 जोड़ी यानी 24 स्पेशल ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है। इन ट्रेनों से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिलेगी। देवघर जाने वाले यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए विशेष ट्रेनों की घोषणा की है। इन ट्रेनों का संचालन प्रमुख रेलवे मार्गों से किया जाएगा, जिससे बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधा मिल सके। रेलवे की ओर से जयनगर-आसनसोल, दानापुर-साहिबगंज समेत कई रूटों पर श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों से सुल्तानगंज, जसीडीह और देवघर जाने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा। भीड़ को देखते हुए बढ़ाई गई ट्रेन सेवाएं सावन महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे हर साल विशेष ट्रेनों का संचालन करता है। इस बार भी रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनों के साथ-साथ प्रमुख स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी की है। स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों के लिए सहायता केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। रांची, भागलपुर और बिहार के यात्रियों को फायदा श्रावणी मेला के दौरान झारखंड और बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। रांची-भागलपुर समेत कई मार्गों पर भी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के यात्रियों को राहत मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन के समय और ठहराव की जानकारी जरूर जांच लें। सुरक्षा व्यवस्था भी रहेगी मजबूत श्रावणी मेला के दौरान रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। रेलवे का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराई जा सके, ताकि वे बिना परेशानी बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच सकें।
देवघर। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अयोध्या की तर्ज पर मंदिर परिसर के आसपास लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में भव्य कॉरिडोर विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाना और मंदिर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत का संरक्षण करना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एनआईटी पटना को बाबा बैद्यनाथ धाम के समग्र विकास की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रस्तावित योजना के पहले चरण में 30 एकड़ क्षेत्र में कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में करीब 40.24 एकड़ क्षेत्र में रणनीतिक विकास कार्य होंगे, जबकि तीसरे चरण में 83.70 एकड़ क्षेत्र में फैले ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर काम किया जाएगा। शिवगंगा, मानसरोवर, सतार पोखरिया और जलसार योजना के तहत शिवगंगा, मानसरोवर, सतार पोखरिया और जलसार जैसे धार्मिक महत्व वाले जल निकायों का संरक्षण किया जाएगा। साथ ही, बाबाधाम को देवघर के चार प्रमुख प्रवेश मार्गों से जोड़ने के लिए अलग-अलग तीर्थयात्री पहुंच मार्ग भी विकसित किए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुगम हो सके। मास्टर प्लान में मंदिर के चारों ओर 750 मीटर क्षेत्र को 'कोर हेरिटेज जोन' बनाने का प्रस्ताव है। इस क्षेत्र में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी और निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। केवल आपातकालीन सेवाओं, मंदिर प्रशासन और अधिकृत इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। इसके बाहर 750 से 1000 मीटर तक 'मैनेजमेंट जोन' विकसित किया जाएगा, जहां मल्टीलेवल पार्किंग, तीर्थयात्री सुविधा केंद्र, सार्वजनिक परिवहन इंटरचेंज और विश्राम स्थल बनाए जाएंगे। इमरजेंसी एक्सेस कॉरिडोर भी बनाया जाएगा इसके अलावा 20 मीटर चौड़ा इमरजेंसी एक्सेस कॉरिडोर भी बनाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किया जा सके। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लागू करने से पहले राज्य सरकार, देवघर जिला प्रशासन, नगर निगम, बाबा बैद्यनाथ मंदिर ट्रस्ट और अन्य संबंधित एजेंसियों की मंजूरी आवश्यक होगी। योजना पूरी होने के बाद बाबाधाम न केवल श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगा, बल्कि देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में भी अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।
देवघर। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए मंदिर प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। अब मंदिर के गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने और उसके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। वहीं, अब केवल श्रावणी मेले तक सीमित रहने वाली बाह्य अर्घा प्रणाली को पूरे वर्ष लागू किया जाएगा, जिससे श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही जलार्पण कर सकेंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पुलिस, जिला प्रशासन, मंदिर प्रबंधन, तीर्थ पुरोहित और पंडा धर्मरक्षिणी सभा के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशासन के अनुसार, स्थायी बाह्य अर्घा व्यवस्था लागू होने से बुजुर्ग, दिव्यांग और अस्वस्थ श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेष पाइपलाइन व्यवस्था के माध्यम से बाहर से अर्पित जल सीधे बाबा बैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग तक पहुंचेगा। भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर प्रशासन का कहना है कि गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध से मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और दर्शन प्रक्रिया अधिक सुचारु होगी। इसके अलावा श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए भीड़ प्रबंधन, शीघ्र दर्शन व्यवस्था, वीआईपी पूजा प्रबंधन, नए फुटओवर ब्रिज, क्लॉक रूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना तैयार की गई है। श्रावणी मेले के लिए ट्रेनों में बढ़ी बुकिंग श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही देवघर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। रांची से जसीडीह और देवघर जाने वाली कई ट्रेनों में लगभग 80 प्रतिशत सीटें बुक हो चुकी हैं और कुछ ट्रेनों में वेटिंग भी शुरू हो गई है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए रांची रेल मंडल ने रांची से भागलपुर के बीच मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय को भेजा है। इसके जुलाई के अंतिम सप्ताह से संचालन शुरू होने की संभावना है।
देवघर। श्रावणी मेले से पहले बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बासुकीनाथ-देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग-114A पर व्यापक तैयारियां तेज कर दी हैं। इस परियोजना के तहत समर्पित कांवड़िया ट्रैक, नए बाईपास और आधुनिक सड़क सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक होगी। 36 किलोमीटर का समर्पित कांवड़िया ट्रैक तैयार श्रावणी मेला 2026 के दौरान सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ मंदिर पहुंचने वाले कांवड़ियों के लिए एनएचएआई 36.044 किलोमीटर लंबा और 3.5 मीटर चौड़ा समर्पित कांवड़िया पथ विकसित कर रहा है। इस विशेष ट्रैक पर केवल पैदल श्रद्धालु चलेंगे, जबकि सामान्य वाहनों का आवागमन अलग मार्ग से होगा। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। इसके साथ ही 45.159 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सड़क परियोजना का निर्माण भी तेज गति से किया जा रहा है। बाईपास, फ्लाईओवर और आधुनिक सुविधाओं पर जोर यात्रा को और सुगम बनाने के लिए परियोजना में लगभग 28.677 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास बासुकीनाथ, सहारा, तालझारी, घोरमारा और देवघर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सर्विस रोड, स्लिप रोड, फ्लाईओवर, रेल ओवरब्रिज (ROB) और अंडरपास जैसी आधुनिक संरचनाएं भी विकसित की जा रही हैं, ताकि स्थानीय और भारी वाहनों का आवागमन बाधित न हो। एनएचएआई ने श्रावणी मेले से पहले पूरे मार्ग को गड्ढामुक्त बनाने, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने, रिफ्लेक्टिव रोड मार्किंग, सुरक्षा बैरियर, संकेतक बोर्ड और साफ-सफाई जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा परियोजना पूरी होने के बाद बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ मंदिर और त्रिकूट पर्वत जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा, वहीं संताल परगना क्षेत्र में पर्यटन, स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। NHAI का मानना है कि यह परियोजना श्रावणी मेले की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
देवघर। सावन महीने की शुरुआत से पहले देवघर के प्रसिद्ध घोरमारा पेड़ा कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के बीच घोरमारा का पेड़ा अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए खास पहचान रखता है। हर वर्ष सावन के दौरान यहां करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, लेकिन पिछले दो वर्षों से सड़क निर्माण कार्य और बढ़ती लागत के कारण व्यापारियों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण से कारोबार पर असर व्यापारियों का कहना है कि दुमका-देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के चलते पिछले वर्ष श्रद्धालुओं के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया था और वैकल्पिक मार्ग से यात्रा कराई गई थी। इससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु घोरमारा से होकर नहीं गुजर सके, जिसके कारण पेड़ा बिक्री में भारी गिरावट आई। इस वर्ष भी सड़क निर्माण कार्य जारी है, जिससे कारोबारियों को आशंका है कि कहीं फिर से वैसी ही व्यवस्था लागू न हो जाए। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किया गया है। बढ़ती लागत से बढ़ी परेशानी पेड़ा कारोबारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि ने उत्पादन लागत बढ़ा दी है। कई दुकानदारों को गैस की कमी के कारण ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। जो सिलेंडर पहले लगभग एक हजार रुपये में मिलता था, उसकी कीमत अब दो हजार से ढाई हजार रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में मौजूदा सरकारी दर पर पेड़ा बेचना उनके लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। सरकारी दर बढ़ाने की मांग घोरमारा पेड़ा संघ के अध्यक्ष अश्वनी मंडल ने प्रशासन से पेड़े के सरकारी मूल्य में कम से कम 50 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की मांग की है। वर्तमान में पेड़े का सरकारी दर 360 से 400 रुपये प्रति किलो निर्धारित है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती लागत को देखते हुए दर में संशोधन आवश्यक है। घोरमारा में करीब 200 से 250 परिवार सीधे तौर पर पेड़ा कारोबार से जुड़े हैं और सावन के दौरान होने वाली कमाई ही उनकी सालभर की आय का प्रमुख स्रोत होती है। ऐसे में कारोबारियों ने प्रशासन से सड़क निर्माण के दौरान विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।