भाजपा

BJP Protest
राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन के जवाब में BJP का देशभर में कांग्रेस दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और विरोध प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देशभर में कांग्रेस के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पार्टी ने सभी राज्यों की इकाइयों को कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।   राहुल गांधी को बनाया मुख्य निशाना   भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। पार्टी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में किया गया प्रदर्शन पूरी तरह राजनीतिक था और जनता को गुमराह करने का प्रयास है। भाजपा ने इसे "प्रायोजित आंदोलन" करार देते हुए कांग्रेस पर युवाओं की भावनाओं के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया।   देशभर में कांग्रेस कार्यालयों का होगा घेराव   भाजपा के अनुसार, राज्य इकाइयों को जिला और प्रदेश स्तर पर कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी कार्यकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करेंगे और कांग्रेस से छात्रों के मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील करेंगे।   राजनीतिक टकराव हुआ तेज   NEET विवाद को लेकर पहले से जारी सियासी घमासान के बीच भाजपा के इस फैसले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
West Bengal Sand Smuggling
बंगाल में अवैध बालू तस्करी पर मंत्री का सख्त एक्शन, 12 से 14 बालू लदे डंपर पकड़कर पुलिस को सौंपे

बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया।   शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।   घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।   अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Koel Mallick
पश्चिम बंगाल : तृणमूल सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।   ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया।   हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं।   भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Bankipur Assembly By-election
बांकीपुर से अभिषेक का टिकट कटने पर छलका पिता का दर्द, बोले- बेटे के खिलाफ रची गई साजिश

पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार 'बंटी' का टिकट कटने के बाद उनके पिता रविंद्र प्रसाद का दर्द सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे के खिलाफ सोची-समझी साजिश रची गई और परिवार का नाम पुराने चारा घोटाला मामले से जोड़कर चुनाव से बाहर करने की कोशिश की गई।   'परिवार और पार्टी की छवि बचाने के लिए लिया फैसला'   रविंद्र प्रसाद ने कहा कि अभिषेक ने परिवार और भाजपा की छवि को नुकसान से बचाने के लिए चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया। उनके मुताबिक, जब परिवार का नाम फिर से चारा घोटाला मामले से जोड़ा जाने लगा तो अभिषेक ने स्वयं नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक लंबे समय से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उन्होंने संगठन के हित को प्राथमिकता दी।   '11 लाख के मामले को 125 करोड़ बताकर बदनाम किया गया'   रविंद्र प्रसाद ने मीडिया रिपोर्टों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मामले में उनका नाम है, उसमें सिर्फ 11 लाख रुपये का आरोप था, लेकिन इसे 125 करोड़ रुपये के घोटाले की तरह पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और वे हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दे चुके हैं। साथ ही उन्होंने गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।   भाजपा ने उतारा नया उम्मीदवार   अभिषेक कुमार के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर उपचुनाव का नया उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अभिषेक ने पारिवारिक कारणों से चुनाव न लड़ने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए नया प्रत्याशी घोषित किया गया। इस घटनाक्रम के बाद बांकीपुर उपचुनाव का राजनीतिक मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

abhishek singh जुलाई 12, 2026 0
Prashant Kishor
विधानसभा उपचुनाव : क्या इस बार भाजपा का गढ़ बांकीपुर में प्रशांत किशोर लगा पाएंगे सेंध?

पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। सब पार्टियों के साथ प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज भी इस चुनाव में नई रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। बता दे पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद इस बार भाजपा के लंबे समय से मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर अपनी किस्मत आजमाने जा रहे है और इसकी तैयारियां घर-घर पदयात्रा से  शुरू कर चुके है।  उनका दावा है कि यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत का प्रयास है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर की चुनावी तस्वीर बदलना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।   पदयात्रा के जरिए जनता तक पहुंचने की रणनीति बता दे चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने वार्ड 29 और 35 में पदयात्रा कर लोगों से सीधे संपर्क साधा। उन्होंने गली-गली और घर-घर जाकर मतदाताओं से मुलाकात की, हाथ जोड़कर अभिवादन किया और स्थानीय समस्याओं को सुना। उनके समर्थकों ने पूरे मार्ग में जन सुराज के पक्ष में नारे लगाए, जबकि प्रशांत किशोर ने अपेक्षाकृत शांत और संवाद आधारित प्रचार शैली अपनाई। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से भी मुलाकात कर व्यक्तिगत संपर्क बनाने का प्रयास किया।   भाजपा का मजबूत वोट बैंक बड़ी चुनौती प्रशांत किशोर का प्रचार अभियान उन इलाकों पर केंद्रित है जहां भाजपा और राजद दोनों के समर्थकों की अच्छी संख्या मानी जाती है। करबिगहिया, चिरैयाटांड़, खासमहल और चांदमारी रोड जैसे क्षेत्रों में भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता है। स्थानीय स्तर पर जलजमाव और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याएं लगातार उठती रही हैं, लेकिन चुनावी मुकाबले में भाजपा का संगठन और उसका स्थायी समर्थन आधार उसे बढ़त दिलाता रहा है। तीन दशक से भाजपा का दबदबा बांकीपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास भी काफी रोचक रहा है। यहां तीन दशकों से भाजपा का दबदबा है। पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा के नाम से जाना जाता था। यहां कायस्थ और वैश्य समुदाय के मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 1967 में इसी क्षेत्र के मतदाताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के.बी. सहाय को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि, 1989 के बाद से कायस्थ मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के साथ जुड़ गया और तब से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ बनी हुई है।   क्या बदल पाएंगे चुनावी समीकरण? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के पारंपरिक वोटरों का भरोसा जीतना है। सोशल मीडिया और जनसभाओं में उनकी लोकप्रियता को अब मतदान में बदलना होगा। कई मतदाताओं के लिए सामाजिक स्थिरता, सुरक्षा और मजबूत संगठन आज भी प्रमुख मुद्दे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर विपक्ष के साझा उम्मीदवार होते तो मुकाबला अधिक रोचक हो सकता था। फिलहाल जन सुराज बदलाव का संदेश लेकर मैदान में है, जबकि भाजपा अपने तीन दशक पुराने संगठनात्मक नेटवर्क और मजबूत जनाधार के भरोसे इस सीट को बचाने की तैयारी में जुटी है। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
MODI Cabinet
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा तेज, नए चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में चल रहे बदलावों के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद केंद्र सरकार में भी बदलाव की संभावना पर मंथन चल रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी भी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।   क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर रहेगा जोर   सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ राज्यों से नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है।   पहले भाजपा संगठन, फिर कैबिनेट विस्तार की संभावना   पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, भाजपा पहले अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर सकती है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार का रास्ता साफ हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।   सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं   अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल यह चर्चा राजनीतिक और मीडिया सूत्रों पर आधारित है और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही लिया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Sonia Gandhi Narendra Modi
गाजा मुद्दे पर केंद्र और विपक्ष में तीखी बयानबाजी, सोनिया गांधी के लेख से सियासी घमासान

नई दिल्ली, एजेंसियां। गाजा में जारी संघर्ष को लेकर भारत की विदेश नीति पर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा केंद्र सरकार की नीति की आलोचना करने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने सरकार पर गाजा संकट को लेकर "चुप्पी" साधने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर "वोट बैंक की राजनीति" करने का आरोप लगाया।   सोनिया गांधी ने उठाए सवाल   सोनिया गांधी ने एक लेख में कहा कि गाजा को लेकर केंद्र सरकार का रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति और नैतिक जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी से भारत की नैतिक और रणनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है।   राहुल गांधी ने भी किया समर्थन   लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को "नैतिक स्पष्टता" के साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार का रुख भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति से अलग दिखाई देता है।   भाजपा का पलटवार   भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की गाजा नीति संतुलित रही है। पार्टी का कहना है कि भारत ने लगातार शांति, मानवीय सहायता और युद्धविराम की आवश्यकता का समर्थन किया है तथा संयुक्त राष्ट्र में भी इसी दिशा में अपना रुख स्पष्ट किया है। भाजपा ने कांग्रेस पर विदेश नीति के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।   विदेश नीति पर बढ़ी राजनीतिक बहस   गाजा संकट को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच जारी बयानबाज़ी से यह मुद्दा घरेलू राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति में कोई बदलाव घोषित नहीं किया है और भारत अब भी क्षेत्र में शांति, मानवीय सहायता तथा संवाद के माध्यम से समाधान की बात दोहरा रहा है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Union Minister George Kurian addresses an event before resigning as Minister of State after his Rajya Sabha term ended.
कौन हैं जॉर्ज कुरियन? केंद्रीय मंत्री पद से दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने मंजूर किया इस्तीफा

  नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर किया गया। राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद छोड़ा पद जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया था। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, संसद सदस्य नहीं रहने की स्थिति में उन्हें केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया। कौन हैं जॉर्ज कुरियन? 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही भाजपा से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीति के अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता (वकील) के रूप में भी कार्य किया है। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान उन्हें केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन राज्य मंत्री बनाया गया था। वह केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे। दोबारा राज्यसभा नहीं भेजे गए जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केरल में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने और बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं लिया गया। रवनीत सिंह बिट्टू भी नहीं बने उम्मीदवार गौरतलब है कि 18 जून को हुए राज्यसभा चुनावों में केंद्र सरकार के दो मंत्रियों- जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसके बाद जॉर्ज कुरियन का मंत्री पद से हटना तय माना जा रहा था। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार में उनके विभागों की जिम्मेदारियों को लेकर नई नियुक्तियों और फेरबदल पर नजरें टिकी हुई हैं।

Deepshikha जून 23, 2026 0
TMC MP Abhishek Banerjee during a political event amid controversy over party spending on chartered flights.
4 साल में अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स पर TMC ने खर्च किए 141 करोड़ रुपये, कुणाल घोष भी नाराज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee की चार्टर्ड फ्लाइट यात्राओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने चार्टर्ड विमानों पर करीब 141 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब चुनावी हार के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चार वर्षों में कितना हुआ खर्च? तृणमूल कांग्रेस की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक चार्टर्ड विमानों पर खर्च का ब्योरा इस प्रकार है: वर्ष खर्च 2022 35 करोड़ रुपये 2023 13 करोड़ रुपये 2024 56 करोड़ रुपये 2025 37 करोड़ रुपये चार वर्षों में कुल खर्च 141 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसे किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल द्वारा हवाई यात्रा पर किया गया असाधारण खर्च माना जा रहा है। बिजनेस क्लास के बजाय प्राइवेट जेट का इस्तेमाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन मार्गों पर बिजनेस क्लास का टिकट 15 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहां भी चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कई यात्राओं में एक बार की उड़ान पर करीब 5 लाख रुपये तक खर्च किए गए। कुणाल घोष ने जताई नाराजगी टीएमसी के वरिष्ठ नेता Kunal Ghosh ने इस मुद्दे पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि चार्टर्ड विमानों पर खर्च किया गया पैसा पार्टी फंड से गया है, तो वह इसका समर्थन नहीं करते। कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के संसाधनों का उपयोग अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। बीजेपी ने साधा निशाना भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी परिवार पर हमला बोला है। भाजपा विधायक Sajal Ghosh ने तंज कसते हुए कहा कि जितनी राशि चार्टर्ड विमानों पर खर्च की गई, उतने पैसों में पार्टी अपना एक नया विमान खरीद सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम कार्यकर्ताओं के पैसे का दुरुपयोग किया गया है और पार्टी नेतृत्व को इसका जवाब देना चाहिए। चुनावी हार के बाद बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच चार्टर्ड फ्लाइट खर्च का यह विवाद अभिषेक बनर्जी के लिए नई चुनौती बन सकता है। पार्टी के भीतर उठते सवाल और विपक्ष के हमलों ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीति का बड़ा विषय बना दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तृणमूल कांग्रेस इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का कारण बनता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Saryu Roy Hemant Soren
झारखंडः हेमंत को सरयू राय के ऑफर पर भड़की कांग्रेस

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही सियासी हलचल जारी है। जदयू विधायक सरयू राय की ओर से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ये सुझाव दिया गया कि वो कांग्रेस से नाता तोड़ लें। सरयू राय का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बिना भी राज्य में गठबंधन की सरकार आराम से चल सकती है। जेएमएम के 34, राजद के 4, भाकपा-माले के 2 विधायकों को मिलाकर संख्या 40 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा जदयू और जेएलकेएम के एक विधायक के समर्थन से ये आंकड़ा 42 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से लिए पर्याप्त है।   सरयू राय ने क्या अमित शाह से अनुमति ली है? जदयू विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय के इस सुझाव के बाद जेएमएम की ओर से तो कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस की ओर से सरयू राय के सुझाव के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि झारखंड में सरकार बनाने का जो फॉर्मूला सरयू राय दे रहे हैं, क्या उसके लिए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अनुमति ले ली है? झारखंड में बीजेपी का मंसूबा सफल नहीं होगा-कांग्रेस... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और एनडीए नेताओं की सत्तालोलुपता भी साफ देखी जा सकती है, लेकिन वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का जनादेश दिया था और आने वाले समय में भी बीजेपी का नापाक मंसूबा झारखंड में सफल नहीं होगा। सरयू राय को क्या पूरे एनडीए का समर्थन है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि सरयू राय को सबसे पहले जनता को यह बताना चाहिए कि वे किस गठबंधन और किस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिस समर्थन की बात कर रहे हैं, क्या उनके साथ पूरा एनडीए गठबंधन भी इस ओर कदम बढ़ा रहा है, या फिर यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत कल्पना मात्र है? लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि विपक्ष चाहे जितने हथकंडे अपना ले, चुनी हुई सरकार को गिराने की उनकी मंशा कभी कामयाब नहीं होगी। सरयू राय के फॉर्मूला की कोई विश्वसनीयता नहीं... कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजनीति में नए साथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन क्या इंडी गठबंधन के अन्य घटक दल राजद और भाकपा-माले भी इस बात से सहमत हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहा है। लाल किशोर नाथ शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि सरयू राय जो फॉर्मूला पेश कर रहे हैं, उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Youth Congress workers in Varanasi display Rahul Gandhi as Lord Parashuram during his 56th birthday celebrations on the Ganga ghat.
राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने पर विवाद, BJP बोली- यह हिंदू धर्म का अपमान

  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के 56वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किया गया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। वाराणसी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन वाराणसी में गंगा घाट पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस दौरान उनकी एक तस्वीर प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी के एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति दिखाई गई। कार्यकर्ताओं ने तस्वीर पर दूध अर्पित कर जन्मदिन मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। BJP ने जताई कड़ी आपत्ति भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित करना हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हिंदू परंपराओं का लगातार अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय-समय पर हिंदू परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कई अवसरों पर हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संविधान और समानता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था। राजनीतिक बहस तेज राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में विभिन्न दल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Clash between TMC and BJP workers
कोलकाता एयरपोर्ट पर बवाल:TMC-BJP कार्यकर्ताओं में मारपीट

TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज, इनमें ₹440 करोड़ कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान एक महिला बेहोश हो गई। TMC कार्यकर्ता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे थे, जो दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर लौट रहे थे। अभिषेक के एक समर्थक ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग एयरपोर्ट पर आए और TMC कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करने लगे। समर्थक का दावा है कि उनके हाथों में अंडे थे और बाद में उन्होंने हथियार भी निकाले। उन्होंने सवाल उठाया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार अंदर कैसे पहुंचे। 31 मई को भी अभिषेक के साथ मारपीट हुई थी इससे पहले भी 31 मई को पश्चिम बंगाल के सोनारपुर दक्षिण में अभिषेक से मारपीट हुई थी। यहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ित टीएमसी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। TMC के 3 बैंक एकाउंट फ्रीज वहीं, शुक्रवार देर रात TMC के HDFC बैंक के 3 अकाउंट्स 50200059108322, 50200063079047, 50200063079034 को फ्रीज किया गया। इनमें कुल मिलाकर लगभग ₹440 करोड़ जमा हैं।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Samajwadi Party MP Awadhesh Prasad addressing media over BJP claims and demanding transparency on Ram Temple donation issue.
चुनाव से पहले हार के डर से बौखलाई बीजेपी, बेतुकी बातें कर रही है: सपा सांसद अवधेश प्रसाद

  अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का डर अभी से सताने लगा है, इसलिए उसके नेता अनर्गल और बेतुकी बातें कर रहे हैं। 'सपा का कोई सांसद बीजेपी के संपर्क में नहीं' दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी का एक भी सांसद भाजपा में जाने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। 'अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराई बीजेपी' सपा सांसद ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और समाजवादी पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे को देखकर भाजपा घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका से भाजपा के नेता बौखलाहट में बयानबाजी कर रहे हैं। राम मंदिर मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा कथित चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट जनता के सामने लाई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और सरकार को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses NDA leaders at Bharat Mandapam marking 12 years of NDA government and record tenure.
भारत मंडपम में गरजे पीएम मोदी, बोले– कांग्रेस के कुशासन के बाद जनता ने एनडीए पर जताया भरोसा

  नई दिल्ली के भारत मंडपम में बुधवार (10 जून) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बैठक में बीजेपी और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे और प्रधानमंत्री को उनके ऐतिहासिक कार्यकाल के लिए बधाई दी। ‘जनता ने बदलाव के लिए चुना एनडीए’ – पीएम मोदी अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 2014 में जब एनडीए सत्ता में आया था, तब देश की जनता ने बदलाव और स्थिरता की उम्मीद के साथ भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने उस विश्वास को मजबूत करने का काम किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें देश की इतनी लंबी अवधि तक सेवा करने का अवसर मिलेगा, लेकिन जनता के विश्वास ने यह जिम्मेदारी संभव बनाई। कांग्रेस पर साधा निशाना, ‘कुशासन’ का लगाया आरोप प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लंबे समय तक देश ने धीमी विकास दर, भ्रष्टाचार और नीतिगत अस्थिरता का सामना किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार की स्पष्ट नीति और निर्णायक नेतृत्व के कारण देश के विकास को नई गति मिली है और भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। 12 सालों की उपलब्धियां गिनाईं प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि: हवाई अड्डों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है एक्सप्रेसवे और मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है रक्षा निर्यात में वृद्धि हुई है डिजिटल भुगतान और इंटरनेट उपयोग में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना है उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक नए भारत की कहानी है जो बड़े लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल कर रहा है। ‘स्थिरता से मिली विकास को गति’ – पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की जनता ने राजनीतिक स्थिरता को समझते हुए एनडीए को लगातार सेवा का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले अस्थिरता के कारण विकास प्रभावित होता था, लेकिन अब निर्णय तेजी से और प्रभावी ढंग से लागू हो रहे हैं। नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का दावा इसी अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के लगातार सबसे लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का लगातार कार्यकाल 4,399 दिन हो गया है, जबकि नेहरू का कार्यकाल 4,398 दिनों का था। एनडीए बैठक में दिखी बड़ी राजनीतिक मौजूदगी बैठक में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, जे.पी. नड्डा और नितिन गडकरी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के नेता भी मौजूद रहे, जिनमें टीडीपी, जेडीयू, जेडीएस और अपना दल (एस) के प्रतिनिधि शामिल थे। तीसरे कार्यकाल में भी जारी है नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार 2014 में पद संभाला था, इसके बाद 2019 और 2024 में लगातार चुनाव जीतकर उन्होंने तीसरा कार्यकाल शुरू किया। एनडीए नेताओं ने इस अवसर को भारत की राजनीतिक स्थिरता और विकास यात्रा का प्रतीक बताया।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Tejashwi Yadav Samrat Chaudhary
पेंशन भुगतान पर छिड़ी सियासी जंग, तेजस्वी ने सरकार से पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है?

पटना, एजेंसियां।  बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचने के साथ ही राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए बिहार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।   94 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली पेंशन बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि समय पर पहुंचनी चाहिए।   तेजस्वी ने पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है? कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट के समय किया जाता है। ऐसे में नियमित पेंशन भुगतान के लिए इस फंड का इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है।   तेजस्वी ने दावा किया कि कई विकास योजनाओं का भुगतान लंबित है, ठेकेदारों के बिल अटके हुए हैं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।   भाजपा ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आकस्मिकता निधि से राशि लेना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है। बाद में इस राशि का बजटीय समायोजन कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य लगातार जारी हैं।   राजनीतिक बहस तेज पेंशन भुगतान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय नीति पर केंद्रित हो गई है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहा है, वहीं सरकार और भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।

abhishek singh जून 10, 2026 0
INDIA alliance leaders discuss opposition unity and strategy during a high-level meeting in New Delhi.
INDIA गठबंधन बैठक में दिखी एकजुटता, लेकिन उभरे पुराने मतभेद; 2029 की तैयारी पर भी हुआ मंथन

  नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की महत्वपूर्ण बैठक में एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर मौजूद कुछ पुराने मतभेद भी सामने आए। बैठक में शामिल नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही भविष्य की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी चर्चा की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रभावी मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट रहना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक समाज के आंदोलनों से जुड़ाव बढ़ाने और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कांग्रेस से ‘बड़ा दिल’ दिखाने की अपील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी दल को समर्थन देने के लिए कांग्रेस को उदार रवैया अपनाना चाहिए। अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी चुनावी हार या जीत के आधार पर जल्दबाजी में राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए। 2029 के लिए अभी से तैयारी का सुझाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बैठक में कहा कि विपक्ष को केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक रणनीति बनाने और लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। नियमित समन्वय बैठकों की मांग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर समन्वय विपक्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। CJP अभियान पर भी हुई चर्चा बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभियान का भी उल्लेख हुआ। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अभियान के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि यदि कोई जन-अभियान लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है तो उससे संवाद किया जाना चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस अभियान के अचानक उभार और इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई। DMK ने गठबंधन से दूरी बनाई बैठक से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने स्पष्ट कर दिया कि वह अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सहयोगी दल अब अलग राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, ऐसे में DMK स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगी। उन्होंने भविष्य में किसी व्यापक धर्मनिरपेक्ष और भाजपा-विरोधी मंच की संभावना से इनकार नहीं किया। आम आदमी पार्टी ने भी दोहराई दूरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी पहले ही गठबंधन से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर चुकी है। AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की बजाय अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाना रहा है। उन्होंने कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी संभावित गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया। केरल को लेकर कांग्रेस-वाम दलों में तकरार बैठक में वाम दलों ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद वाम दलों पर सार्वजनिक हमले उचित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि केरल में उठाए गए विषय राज्य कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पुराने विवादों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर जोर बैठक का समापन विपक्षी एकता और समन्वय को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ। नेताओं ने माना कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के बीच विश्वास, संवाद और साझा रणनीति पहले से कहीं अधिक जरूरी है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

  चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं। प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे। नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया। किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
TMC Former MLA
बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे TMC के पूर्व विधायक को NIA ने किया गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां।  एनआईए की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे टीएमसी के पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल के चर्चित भांगड़ बम विस्फोट मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य संदिग्ध और फरार चल रहे पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को दक्षिण 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। चुनाव से पहले बम बनाते समय हुआ था धमाका एनआईए की जांच के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। जब अवैध रूप से क्रूड बम (कच्चा बम) बनाने के दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में बम बनाने वाले एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साजिश रचने और सबूत मिटाने का आरोप शौकत मोल्ला इस पूरे मामले में चौथे आरोपी हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि पूर्व विधायक ही इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने ही अन्य आरोपियों को बम बनाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, विस्फोट होने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए मोल्ला ने आरोपियों को घटनास्थल से सबूत मिटाने और दृश्य के साथ छेड़छाड़ करने का भी आदेश दिया था।

Unknown जून 6, 2026 0
K Annamalai New Party
भाजपा से अलग हुए के. अन्नामलाई ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का किया ऐलान

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।   2031 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी   एक वीडियो संदेश के माध्यम से अन्नामलाई ने कहा कि उनकी नई राजनीतिक पार्टी वर्ष 2031 में होने वाले Tamil Nadu Legislative Assembly Election 2031 में भाग लेगी। उन्होंने संकेत दिया कि नई पार्टी तमिलनाडु की राजनीति में एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में उभरेगी और राज्य के विकास तथा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देगी।   वैचारिक मतभेद बने अलगाव की वजह   अन्नामलाई ने अपने बयान में कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद चल रहे थे। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी सोच और पार्टी नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था। इसी कारण उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया और स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया।   आईपीएस अधिकारी से राजनीतिक नेता तक का सफर   पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में Bharatiya Janata Party का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें 2021 में तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 2025 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास किया, हालांकि चुनावी स्तर पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।   नई पारी पर टिकी राजनीतिक नजरें   अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका पार्टी से अलग होना और नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी नई पार्टी भविष्य में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बना सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अन्नामलाई अपनी नई पार्टी की आधिकारिक घोषणा कब करते हैं और वह राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Yogi Adityanath with newly sworn-in ministers during Uttar Pradesh cabinet expansion ceremony in Lucknow
योगी मंत्रिमंडल का विस्तार: 6 नए मंत्रियों ने ली शपथ, दो मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का मंत्रिमंडल विस्तार किया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। किन नेताओं को मिली जगह? मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 6 नए नेताओं को शामिल किया गया। इनमें: Manoj Pandey – कैबिनेट मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary – कैबिनेट मंत्री Hansraj Vishwakarma – राज्य मंत्री Kailash Rajput – राज्य मंत्री Krishna Paswan – राज्य मंत्री Surendra Diler – राज्य मंत्री को शपथ दिलाई गई। दो राज्य मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार इसके अलावा: Ajit Singh Pal Somendra Tomar को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश 2027 विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सरकार में पहले 54 मंत्री थे, जो अब बढ़कर 60 हो गए हैं। कौन हैं भूपेंद्र चौधरी? पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिने जाते हैं। वे पहले भी पंचायती राज मंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh तथा भाजपा से जुड़े रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर नेताओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मंत्री Daya Shankar Singh ने कहा कि मंत्रिपरिषद में खाली पदों को भरते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary ने इसे खुशी की बात बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित फैसलों पर अब अमल हो रहा है। वहीं मंत्री Suresh Kumar Khanna ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और डबल इंजन सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। मंत्री Sanjay Nishad ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।  

surbhi मई 11, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a massive rally in Cooch Behar ahead of West Bengal elections.
कूचबिहार में गरजे अभिषेक बनर्जी, बोले– भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ बताया जा रहा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद Abhishek Banerjee ने मंगलवार को कूचबिहार में एक विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को “बांग्लादेशी” कहकर उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ राजनीतिक हमला बल्कि “बंगाली अस्मिता और सम्मान पर चोट” बताया। “हमारी भाषा और पहचान को निशाना बनाया जा रहा” अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और वह भाषा तथा संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बांग्ला बोलने वालों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उन्हें घुसपैठिया तक कहा जा रहा है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की पहचान और सम्मान की रक्षा करना टीएमसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है और पार्टी इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। खान-पान पर ‘पहरा’ का आरोप सभा को संबोधित करते हुए Abhishek Banerjee ने भाजपा पर लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कई भाजपा शासित राज्यों में मछली और मांस की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है, जो सीधे तौर पर बंगाली संस्कृति पर हमला है। “हमारे यहां मछली-भात सिर्फ खाना नहीं, हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है। अगर कोई हमारी थाली तक में दखल देगा, तो बंगाल की जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने कहा। मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासकर राजबंशी और मतुआ समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का “समर्थन” इन समुदायों के लिए सिर्फ दिखावा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे। लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है,” उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप केंद्र की Government of India पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को उसका उचित अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि राज्य की जनता बार-बार तृणमूल कांग्रेस को चुनती है, इसलिए केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। “दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं,” उन्होंने कहा। “4 मई को जनता देगी जवाब” अपने भाषण के अंत में अभिषेक बनर्जी ने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा, “4 मई को नतीजे आएंगे और उस दिन बंगाल की जनता अहंकारी और बंगाल विरोधी ताकतों को सबक सिखाएगी।” कूचबिहार की इस रैली में Abhishek Banerjee ने बंगाली पहचान, संस्कृति, खान-पान और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उनके इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी चुनाव में टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0