नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों की समस्या के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की मेडिकल और रिहैबिलिटेशन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कैफ ने इस बात पर हैरानी जताई कि दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को अपने Centre of Excellence (CoE) के लिए शीर्ष स्तर के मेडिकल और पुनर्वास विशेषज्ञों को जोड़ने में परेशानी क्यों हो रही है। चोटों की बढ़ती समस्या ने बढ़ाई चिंता भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोटें इस समय बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ियों के कारण टीम संयोजन और चयन पर भी असर पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में BCCI की मेडिकल व्यवस्था और खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई है। कैफ ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि जब BCCI के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, तो उसे दुनिया के बेहतरीन मेडिकल और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञों को अपने Centre of Excellence से जोड़ने में दिक्कत क्यों आ रही है। VVS लक्ष्मण ने भी बताई CoE की परेशानी कैफ की चिंता के बीच VVS लक्ष्मण की ओर से भी Centre of Excellence में योग्य स्टाफ की नियुक्ति को लेकर BCCI के सामने मौजूद चुनौतियों की बात सामने आई है। इससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है कि भारतीय खिलाड़ियों को चोट से बचाने और चोट लगने के बाद जल्द एवं सुरक्षित वापसी कराने के लिए मेडिकल ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है। श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले बढ़ी अहमियत भारत इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज की तैयारी कर रहा है। पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस और उपलब्धता टीम प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चोटों के कारण किसी प्रमुख खिलाड़ी की अनुपलब्धता का सीधा असर अंतिम एकादश और टीम के संतुलन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कैफ की टिप्पणी को भारतीय क्रिकेट में चोट प्रबंधन और मेडिकल सपोर्ट सिस्टम को लेकर महत्वपूर्ण सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज VVS लक्ष्मण को भारतीय क्रिकेट टीम का अगला मुख्य चयनकर्ता बनाने पर विचार कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मौजूदा मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का भविष्य अब अनिश्चित नजर आ रहा है। हालांकि, लक्ष्मण की नियुक्ति को लेकर अभी BCCI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अजीत अगरकर का कार्यकाल बढ़ाया गया था रिपोर्ट के अनुसार अजीत अगरकर का मूल कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद BCCI ने उन्हें तीन महीने का विस्तार दिया। अब बोर्ड उनके आगे के कार्यकाल को लेकर विकल्पों पर विचार कर रहा है। अगरकर के कार्यकाल और चयन समिति की भूमिका को लेकर चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर चयनकर्ताओं और BCCI के बीच कथित मतभेद की खबरें सामने आई हैं। लक्ष्मण के नाम पर क्यों हो रहा विचार? VVS लक्ष्मण भारतीय क्रिकेट में लंबे अनुभव वाले पूर्व टेस्ट बल्लेबाज हैं और BCCI के Centre of Excellence से भी जुड़े रहे हैं। हाल के समय में वह टीम इंडिया के साथ कोचिंग और मार्गदर्शन की भूमिका में भी नजर आए हैं। उनका घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव उन्हें चयन समिति की जिम्मेदारी के लिए संभावित उम्मीदवार बनाता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि BCCI अंतिम रूप से उन्हें इस पद के लिए चुनेगा या किसी अन्य नाम पर फैसला करेगा। रोहित शर्मा विवाद के बीच बढ़ी हलचल मुख्य चयनकर्ता के पद को लेकर चर्चा के बीच रोहित शर्मा के वनडे भविष्य का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रोहित को 2027 वनडे विश्व कप की योजनाओं से बाहर करने को लेकर चयनकर्ताओं और BCCI के शीर्ष स्तर के बीच मतभेद सामने आए थे। हालांकि, इस संबंध में BCCI की ओर से लक्ष्मण को नया मुख्य चयनकर्ता बनाए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक टीम के कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने गंभीर की कोचिंग शैली और टीम प्रबंधन के तरीके को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। इसके बाद गंभीर की भूमिका और टीम के प्रदर्शन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोचिंग शैली को लेकर खिलाड़ियों में असंतोष रिपोर्ट के अनुसार कुछ वरिष्ठ खिलाड़ी गंभीर के काम करने के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। टीम के भीतर उनके निर्णय लेने के तरीके, खिलाड़ियों के साथ संवाद और टीम प्रबंधन को लेकर चिंताएं सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, BCCI की ओर से अभी तक गंभीर को हटाने या उनके खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे गंभीर के खिलाफ बोर्ड के आधिकारिक रुख के तौर पर पेश करना जल्दबाजी होगी। श्रीलंका सीरीज से पहले बढ़ा दबाव भारत इस समय श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में कोचिंग स्टाफ और टीम प्रबंधन को लेकर सामने आई यह रिपोर्ट गंभीर के लिए दबाव बढ़ाने वाली मानी जा रही है। टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ अब गंभीर के खिलाड़ियों के साथ तालमेल और रणनीतिक फैसलों पर भी नजर रखी जा रही है। BCCI के रडार पर टीम का प्रदर्शन गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम के प्रदर्शन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, BCCI ने अभी तक उन्हें हटाने का कोई फैसला सार्वजनिक नहीं किया है। अब श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज और आगे के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में टीम का प्रदर्शन गंभीर के लिए अहम होगा। आने वाले मुकाबलों में टीम के नतीजों के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी नजर रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आने वाले महीनों में काफी व्यस्त रहने वाला है। श्रीलंका दौरे के बाद टीम इंडिया अपने घरेलू सत्र में वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों की मेजबानी करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2026-27 के घरेलू सत्र का कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ सितंबर से शुरुआत श्रीलंका दौरे के बाद भारत का अगला तय घरेलू अभियान वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 वनडे और 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों से शुरू होगा। वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में होगा। इसके बाद गुवाहाटी और न्यू चंडीगढ़ में मुकाबले खेले जाएंगे। टी20 सीरीज 6 अक्टूबर से शुरू होगी और इसके मुकाबले लखनऊ, रांची, इंदौर, हैदराबाद और बेंगलुरु में होंगे। श्रीलंका और जिम्बाब्वे से भी होगी भिड़ंत दिसंबर में भारतीय टीम घरेलू मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ 3 वनडे और 3 टी20 मैच खेलेगी। इसके बाद जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन वनडे मुकाबले निर्धारित हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होगी बड़ी टेस्ट सीरीज भारतीय टीम के घरेलू सत्र का सबसे बड़ा आकर्षण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। पहला टेस्ट 21 जनवरी 2027 से नागपुर में शुरू होगा। इसके बाद चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद में मुकाबले खेले जाएंगे। पांचवां टेस्ट 27 फरवरी से 3 मार्च 2027 तक अहमदाबाद में होगा। 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी पर भी नजर लगातार होने वाली वनडे और टी20 सीरीज भारतीय टीम के लिए 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होंगी। खासकर वेस्टइंडीज, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे मुकाबले खिलाड़ियों को टीम संयोजन और रणनीति आजमाने का मौका देंगे।
लंदन, एजेंसियां। भारत के अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपने अंतरराष्ट्रीय संन्यास को लेकर चल रही अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में शानदार 138 रन की पारी खेलने के बाद रोहित ने स्पष्ट कहा कि उनका पूरा ध्यान भारत का प्रतिनिधित्व करने और टीम की सफलता में योगदान देने पर है। "मेरा काम देश के लिए खेलना है" मैच के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से बातचीत में रोहित शर्मा ने कहा कि उनका काम बल्लेबाजी करना और देश के लिए खेलना है। उन्होंने कहा कि बाहरी चर्चाओं से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और उनका फोकस केवल मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने पर है। लॉर्ड्स में खेली यादगार पारी रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ निर्णायक वनडे में 110 गेंदों पर 138 रन की शानदार पारी खेली। यह उनके वनडे करियर का एक यादगार शतक रहा और लंबे समय बाद उन्होंने तीन अंकों का आंकड़ा छुआ। हालांकि उनकी शानदार पारी के बावजूद भारत मैच और सीरीज जीतने से चूक गया। अटकलों पर लगाया विराम पिछले कुछ दिनों से ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि लॉर्ड्स वनडे रोहित शर्मा का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला हो सकता है। लेकिन उनके बयान के बाद इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। कप्तान शुभमन गिल ने भी कहा कि रोहित ने टीम को संन्यास के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। आलोचनाओं पर भी दिया जवाब रोहित शर्मा ने कहा कि क्रिकेट करियर की शुरुआत से ही उनके बारे में चर्चाएं और आलोचनाएं होती रही हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "अगर कोई शोर नहीं होगा, तो मजा भी नहीं आएगा।" उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य केवल भारतीय टीम की सफलता में योगदान देना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के वनडे क्रिकेट से संन्यास की अटकलों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाला तीसरा वनडे रोहित शर्मा का आखिरी मैच नहीं होगा और वह आगे भी भारत की वनडे टीम का हिस्सा बने रहेंगे। 'लॉर्ड्स वनडे आखिरी मैच नहीं' हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि इंग्लैंड दौरे के बाद रोहित शर्मा के भविष्य पर फैसला लिया जा सकता है और लॉर्ड्स वनडे उनका आखिरी मुकाबला हो सकता है। इन अटकलों को खारिज करते हुए देवजीत सैकिया ने कहा कि इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोहित भारतीय वनडे टीम की योजनाओं का हिस्सा हैं और जब तक टीम प्रबंधन की योजना में रहेंगे, देश के लिए खेलते रहेंगे। खराब फॉर्म के बीच बढ़ी थी चर्चा इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज में रोहित शर्मा बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे हैं। इसी वजह से उनके भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। हालांकि टीम प्रबंधन और बोर्ड का मानना है कि एक-दो मैचों के प्रदर्शन के आधार पर इतने अनुभवी खिलाड़ी का आकलन नहीं किया जा सकता। 2027 विश्व कप की तैयारियों में रहेंगे शामिल BCCI के बयान से यह भी संकेत मिला है कि रोहित शर्मा अभी भी भारत की 2027 वनडे विश्व कप योजनाओं का हिस्सा हैं। हालांकि चयनकर्ताओं की नजर युवा खिलाड़ियों पर भी है और आने वाले समय में टीम में संतुलन बनाने के लिए रोटेशन नीति अपनाई जा सकती है। तीसरे वनडे पर सबकी नजर अब सभी की निगाहें इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाले तीसरे और निर्णायक वनडे पर होंगी। इस मुकाबले में रोहित शर्मा से बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी, ताकि वह अपने बल्ले से सभी अटकलों का जवाब दे सकें और भारत को सीरीज जिताने में अहम भूमिका निभाएं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारतीय टीम प्रबंधन और चयन समिति अब 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में यह भी कहा गया है कि रोहित शर्मा अब टीम में 'ऑटोमैटिक सिलेक्शन' नहीं रहेंगे और उनके चयन का फैसला प्रदर्शन व भविष्य की योजनाओं के आधार पर होगा। हालांकि, BCCI की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। 2027 विश्व कप को ध्यान में रखकर बन रही रणनीति रिपोर्ट्स के अनुसार, चयनकर्ता आगामी वनडे विश्व कप के लिए युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने की दिशा में विचार कर रहे हैं। इसी वजह से अनुभवी खिलाड़ियों के चयन पर भी प्रदर्शन और फिटनेस के आधार पर फैसला लेने की बात सामने आई है। लॉर्ड्स वनडे को लेकर भी चर्चा तेज कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाला तीसरा वनडे रोहित शर्मा के करियर का आखिरी वनडे मुकाबला हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में न तो रोहित शर्मा और न ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि की है। टीम मैनेजमेंट ने जताया भरोसा इन अटकलों के बीच भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने रोहित शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि दो मैचों में रन नहीं बनने का मतलब यह नहीं कि रोहित जैसे खिलाड़ी पर दबाव है। कोटक ने भरोसा जताया कि रोहित निर्णायक मुकाबले में बड़ी पारी खेल सकते हैं। आधिकारिक घोषणा का इंतजार फिलहाल रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर सामने आई सभी बातें मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों पर आधारित हैं। अंतिम फैसला चयन समिति और BCCI की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे और उसके बाद होने वाले आधिकारिक फैसलों पर टिकी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी जिम्बाब्वे दौरे और 2026 एशियन गेम्स के लिए अनुभवी बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण को भारतीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। टीम इंडिया के नियमित मुख्य कोच गौतम गंभीर इंग्लैंड दौरे के व्यस्त कार्यक्रम के बाद आराम करेंगे, इसलिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख लक्ष्मण यह जिम्मेदारी संभालेंगे। जिम्बाब्वे दौरे से लेकर एशियन गेम्स तक जिम्मेदारी भारत की जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे में खेली जाएगी। इसके बाद लक्ष्मण एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम के साथ रहेंगे। उनके साथ बल्लेबाजी कोच की भूमिका ऋषिकेश कानिटकर और गेंदबाजी कोच की भूमिका सुनील जोशी निभाएंगे। बीसीसीआई ने अपनाया स्प्लिट-कोचिंग मॉडल बीसीसीआई ने व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को देखते हुए एक बार फिर स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाया है। एशियन गेम्स और भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज एक ही समय पर होने के कारण गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ रहेंगे, जबकि वीवीएस लक्ष्मण दूसरी भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे। पहले भी निभा चुके हैं सफल भूमिका यह पहली बार नहीं है जब वीवीएस लक्ष्मण भारतीय टीम के अंतरिम मुख्य कोच बने हैं। इससे पहले भी उन्होंने 2023 एशियन गेम्स और 2024 जिम्बाब्वे दौरे पर युवा भारतीय टीम का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया था। बीसीसीआई को उम्मीद है कि उनके अनुभव का फायदा युवा खिलाड़ियों को मिलेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। 23 जुलाई से शुरू होने वाली इस सीरीज के लिए चार नए खिलाड़ियों हर्ष दुबे, प्रभसिमरन सिंह, यश ठाकुर और अशोक शर्मा को पहली बार टीम में जगह दी गई है। वहीं, रिंकू सिंह और मयंक यादव की टीम में वापसी हुई है। इस दौरे पर श्रेयस अय्यर टीम की कप्तानी करेंगे, जबकि तिलक वर्मा को उपकप्तान बनाया गया है। इन खिलाड़ियों को मिला आराम बीसीसीआई ने इंग्लैंड दौरे को देखते हुए कई प्रमुख खिलाड़ियों को इस सीरीज से आराम दिया है। इनमें अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा, रवि बिश्नोई और संजू सैमसन शामिल हैं। ये खिलाड़ी फिलहाल इंग्लैंड में भारतीय टीम के साथ व्यस्त हैं। घरेलू और आईपीएल प्रदर्शन का मिला इनाम नई टीम में शामिल खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया है। बाएं हाथ के स्पिनर हर्ष दुबे ने हाल के मैचों में प्रभावशाली गेंदबाजी की है, जबकि तेज गेंदबाज यश ठाकुर और अशोक शर्मा ने इंडिया-ए तथा घरेलू टूर्नामेंटों में अपनी छाप छोड़ी। विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के लिए शानदार बल्लेबाजी का पुरस्कार मिला है। 23 जुलाई से होगी सीरीज भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीनों टी20 मुकाबले 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। पिछली बार भारत ने 2024 में जिम्बाब्वे दौरे पर पांच मैचों की टी20 सीरीज 4-1 से अपने नाम की थी। भारतीय टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव और प्रभसिमरन सिंह।
नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए तीन मैचों की टी20 सीरीज हेतु 15 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। चयनकर्ताओं ने युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को टीम में बरकरार रखा है, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज़ संजू सैमसन को टीम से बाहर कर दिया गया है। वहीं, रिंकू सिंह की टीम में वापसी हुई है और प्रभसिमरन सिंह, अशोक शर्मा और यश ठाकुर को पहली बार राष्ट्रीय टीम में मौका मिला है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में उतरेगी टीम इंडिया इंग्लैंड दौरे के बाद अब जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में भी टीम इंडिया की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में रहेगी। चयनकर्ताओं ने एक बार फिर युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया है। 23 जुलाई से शुरू होगी टी20 सीरीज भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज 23 जुलाई से हरारे स्पोर्ट्स क्लब में शुरू होगी। तीनों मुकाबले हरारे में ही खेले जाएंगे। यह सीरीज आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों पर रहेगी नजर इस दौरे में वैभव सूर्यवंशी, प्रभसिमरन सिंह और अन्य युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी। चयन समिति का मानना है कि यह सीरीज भविष्य की भारतीय टी20 टीम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारत की टी20 टीम श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उपकप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा और मयंक यादव।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की महिला चयन समिति ने एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की घोषणा कर दी है। अनुभवी ऑलराउंडर Harmanpreet Kaur को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि Smriti Mandhana को उपकप्तान बनाया गया है। यह प्रतियोगिता सितंबर 2026 में जापान के आइची-नागोया में आयोजित होगी। विश्व कप से बाहर होने के बाद अब एशियन गेम्स पर फोकस हाल ही में महिला टी20 विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक बचाने के इरादे से उतरेगी। भारत ने पिछले एशियन गेम्स (हांगझोउ 2022) में महिला क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीता था और इस बार भी टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलन चयनकर्ताओं ने टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं को भी मौका दिया है। टीम में Shafali Verma, Jemimah Rodrigues, Deepti Sharma, Richa Ghosh, Renuka Singh और Shreyanka Patil जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि श्रीयंका पाटिल की उपलब्धता उनकी फिटनेस पर निर्भर रहेगी। स्वर्ण पदक बचाने की चुनौती एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट टी20 प्रारूप में खेला जाएगा। मेजबान जापान के अलावा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, चीन, मलेशिया और थाईलैंड टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे। भारतीय टीम लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपना दबदबा कायम रखने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारतीय क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान और शानदार उपलब्धियों के लिए दिया गया। राष्ट्रपति भवन में हुआ सम्मान समारोह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। खेल जगत से रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट में उनके उत्कृष्ट योगदान और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करने के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का योगदान रोहित शर्मा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए हैं। वह एकदिवसीय क्रिकेट में 264 रन की विश्व रिकॉर्ड व्यक्तिगत पारी खेलने वाले दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने टी-20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब भी अपने नाम किया, जिससे भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बीसीसीआई ने दी बधाई भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोशल मीडिया पर रोहित शर्मा को पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। बोर्ड ने इसे भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया। समारोह की तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। क्रिकेट जगत ने जताई खुशी रोहित शर्मा को पद्मश्री मिलने के बाद कई पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए इसे भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। करियर में जुड़ा एक और बड़ा सम्मान पद्मश्री सम्मान मिलने के साथ ही रोहित शर्मा के शानदार क्रिकेट करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। मैदान पर अपने रिकॉर्ड, शानदार बल्लेबाजी और सफल कप्तानी से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीतने वाले रोहित शर्मा अब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक के प्राप्तकर्ता भी बन गए हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। इंडियन क्रिकेट टीम को इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी टी20 सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह युवा ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। कैसे लगी चोट? भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अनुसार, नीतीश कुमार रेड्डी को अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के दौरान बाएं पैर की क्वाड्रिसेप्स (जांघ की मांसपेशी) में चोट लगी थी। मेडिकल जांच के बाद उन्हें आराम और रिहैबिलिटेशन की सलाह दी गई है। इसी वजह से वह आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। सूर्यांश शेडगे को पहली बड़ी जिम्मेदारी 23 वर्षीय सूर्यांश शेडगे को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली है। हाल ही में श्रीलंका में आयोजित इंडिया-ए त्रिकोणीय सीरीज में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच मैचों में 147 रन बनाए थे। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टीम में मौका दिया है। टीम इंडिया की तैयारियों पर असर नीतीश कुमार रेड्डी के बाहर होने से भारतीय टीम को एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की कमी महसूस होगी। हालांकि टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि सूर्यांश शेडगे इस अवसर का पूरा फायदा उठाकर अपनी प्रतिभा साबित करेंगे। कब खेली जाएगी सीरीज? भारत पहले आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मुकाबले खेलेगा। इसके बाद टीम इंग्लैंड दौरे पर पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। यह सीरीज आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फैंस की नजरें युवा खिलाड़ी पर क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें अब सूर्यांश शेडगे पर होंगी। यदि उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है और वे अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनकी जगह भारतीय टीम में लंबे समय के लिए पक्की हो सकती है।
नई दिल्ली एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने वैभव सूर्यवंशी को आगामी विदेशी दौरे (आयरलैंड और इंग्लैंड) पर अपने माता-पिता के साथ यात्रा करने की विशेष अनुमति दी है। यह फैसला वैभव की कम उम्र और उनके पहले बड़े इंटरनेशनल दौरे को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बोर्ड का मानना है कि विदेशी माहौल और लंबे दौरे के दौरान परिवार का साथ होने से खिलाड़ी को मानसिक रूप से मदद मिलेगी। वैभव सूर्यवंशी पहली बार भारतीय सीनियर टीम के साथ विदेश दौरे पर शामिल हो रहे हैं। नियमों में छूट आमतौर पर बीसीसीआई के नियमों के अनुसार विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों को परिवार साथ रखने की अनुमति नहीं होती है , या समय-सीमा तय होती है। लेकिन वैभव सूर्यवंशी के मामले में बोर्ड ने नियमों में खास बदलाव किया है और यह बदलाव वैभव की उम्र और मानसिक आराम को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।