भारतीय रिजर्व बैंक

RBI Swap Facility
RBI की डॉलर स्वैप योजना से विदेशी मुद्रा जुटाव $40 अरब के पार, FCNR(B) जमा का बड़ा योगदान

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा को बड़ी सफलता मिली है। 31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत कुल 40.81 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी मुद्रा जुटाई गई है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इसमें सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (FCNR-B) जमा का रहा है।   FCNR(B) जमा से आए 36.72 अरब डॉलर   RBI की विशेष सुविधा के तहत जुटाई गई विदेशी मुद्रा में FCNR(B) जमा से करीब 36.72 अरब डॉलर आए हैं। यह कुल जुटाव का 90 फीसदी से अधिक है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में बाहरी वाणिज्यिक उधारी और अन्य माध्यमों से भी रकम जुटाई गई है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार और देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए इस विशेष सुविधा को शुरू किया था।   जून में शुरू हुई थी विशेष सुविधा   RBI की यह रियायती स्वैप सुविधा 8 जून 2026 से लागू हुई थी। इसका उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में डॉलर के प्रवाह को बढ़ाना है। जुलाई के अंत तक इस योजना के तहत विदेशी मुद्रा जुटाव 40 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया।   विदेशी मुद्रा भंडार को मिलेगा सहारा   विदेशी मुद्रा का यह मजबूत प्रवाह भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा दे सकता है। इससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश की बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। RBI की इस पहल में बैंकों की मजबूत भागीदारी को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे भी इस सुविधा के जरिए विदेशी मुद्रा प्रवाह पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
RBI Plastic Note
RBI के प्लास्टिक नोटों की तैयारी तेज, ₹10 और ₹20 के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मिली मंजूरी

नए नोटों की दिशा में बड़ा कदम   नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ₹10 और ₹20 के पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों के फील्ड ट्रायल प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कागजी नोटों को फिलहाल पूरी तरह बदलने की कोई योजना नहीं है।   फील्ड ट्रायल के बाद होगा फैसला   वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन पॉलिमर नोटों का परीक्षण अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में किया जाएगा। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो RBI भविष्य में इन नोटों को नियमित रूप से जारी करने पर विचार करेगा। फिलहाल यह केवल परीक्षण चरण का हिस्सा है।   ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित होंगे नोट   पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ, पानी और गंदगी से कम प्रभावित तथा नकली नोटों के मुकाबले अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत कई देशों में पहले से ही इस तरह के नोट चलन में हैं।   कागजी नोट फिलहाल जारी रहेंगे   सरकार ने संसद में साफ किया है कि इस पहल का उद्देश्य अभी केवल पॉलिमर नोटों की उपयोगिता और टिकाऊपन का आकलन करना है। इसलिए मौजूदा कागजी ₹10 और ₹20 के नोट चलन में बने रहेंगे और उन्हें तुरंत बंद नहीं किया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 29, 2026 0
Reserve Bank of India
RBI का बयान— बेहतर लिक्विडिटी से बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ को मिल रहा मजबूत समर्थन

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि बैंकिंग प्रणाली में बेहतर होती लिक्विडिटी (नकदी उपलब्धता) के कारण ऋण वितरण (क्रेडिट ग्रोथ) को मजबूत समर्थन मिल रहा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, पर्याप्त नकदी, मजबूत जमा आधार और बेहतर वित्तीय परिस्थितियों की वजह से बैंक उद्योग, कृषि, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध करा पा रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।   बैंकों की ऋण देने की क्षमता में हुआ सुधार   आरबीआई के अनुसार, हाल के महीनों में बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इससे बैंकों के पास कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है और वे विभिन्न क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रहे हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत लिक्विडिटी आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।   उद्योग और खुदरा ऋण में बनी हुई है तेजी   आरबीआई ने कहा कि उद्योग, आवास, वाहन, व्यक्तिगत ऋण और एमएसएमई सेक्टर में ऋण की मांग बनी हुई है। बेहतर वित्तीय माहौल के कारण बैंक इन क्षेत्रों में लगातार कर्ज उपलब्ध करा रहे हैं। इससे निवेश, उपभोग और उत्पादन गतिविधियों को भी समर्थन मिल रहा है।   जमा में वृद्धि से मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक के मुताबिक, बैंकों में जमा (डिपॉजिट) बढ़ने से भी लिक्विडिटी की स्थिति मजबूत हुई है। पर्याप्त जमा होने से बैंकों को कम लागत पर संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे वे प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण देने में सक्षम हैं।   महंगाई और वित्तीय स्थिरता पर भी रहेगी नजर   आरबीआई ने स्पष्ट किया कि वह लिक्विडिटी बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय स्थिरता पर लगातार नजर रखे हुए है। आवश्यकता पड़ने पर नकदी प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि बैंकिंग प्रणाली संतुलित बनी रहे।   अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहती है और ऋण वितरण की रफ्तार मजबूत रहती है, तो इसका सकारात्मक असर निवेश, रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और देश की आर्थिक वृद्धि पर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि आरबीआई बैंकिंग क्षेत्र में नकदी की स्थिति और क्रेडिट ग्रोथ पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Reserve Bank of India
RBI के विशेष फॉरेक्स उपायों से 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह, रुपये को सहारा देने की कोशिश तेज

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए उठाए गए विशेष कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके हालिया फॉरेक्स उपायों के जरिए अब तक 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना है।   विशेष फॉरेक्स योजनाओं से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह   RBI ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय लागू किए थे। इनमें विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं और बैंकों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल रहे, जिनके चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है।   रुपये को मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे रुपये पर दबाव कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है।   वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राहत   विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद RBI के कदमों ने भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा दिया है।   आगे भी स्थिति पर RBI की नजर   RBI ने संकेत दिया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Rajeev Kumar HDFC Bank
HDFC बैंक के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन बने राजीव कुमार, RBI से मिली मंजूरी

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank को नया पार्ट-टाइम चेयरमैन मिल गया है। बैंक ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने राजीव कुमार की पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनका कार्यकाल 15 जुलाई 2026 से अगले तीन वर्षों तक रहेगा।   पूर्व वित्तीय सेवा सचिव रह चुके हैं राजीव कुमार   राजीव कुमार केंद्र सरकार में वित्तीय सेवा सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बैंकिंग, वित्तीय सुधार और प्रशासन में उनके लंबे अनुभव को HDFC Bank के लिए अहम माना जा रहा है।   RBI की मंजूरी के बाद संभाली जिम्मेदारी   HDFC Bank ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि RBI की मंजूरी मिलने के बाद राजीव कुमार ने 15 जुलाई से अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी नियुक्ति बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रणनीतिक नेतृत्व को और मजबूत करेगी।   बैंकिंग सेक्टर की रहेगी नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव कुमार के अनुभव का लाभ HDFC Bank को भविष्य की रणनीतियों, नियामकीय अनुपालन और डिजिटल बैंकिंग विस्तार में मिल सकता है। उनकी नियुक्ति को बैंकिंग सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।   निवेशकों के लिए अहम घटनाक्रम   देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में शीर्ष स्तर पर हुए इस बदलाव पर निवेशकों और बाजार की नजर रहेगी। आने वाले समय में बैंक की कारोबारी रणनीति और विकास योजनाओं पर इसके असर को लेकर भी चर्चा तेज है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
RBI Data Governance Draft
RBI के डेटा गवर्नेंस ड्राफ्ट पर बैंकिंग सेक्टर की नजर, बैंकों में 'डेटा ओनर' और 'डेटा स्टुअर्ड' नियुक्ति का प्रस्ताव

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी किया है। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों में डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। RBI ने इस मसौदे पर 17 अगस्त 2026 तक हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।   'डेटा ओनर' और 'डेटा स्टुअर्ड' की होगी नियुक्ति   ड्राफ्ट के अनुसार, प्रत्येक डेटा डोमेन के लिए एक डेटा ओनर नियुक्त किया जाएगा, जो उस डेटा की गुणवत्ता, वर्गीकरण और सही उपयोग के लिए जवाबदेह होगा। वहीं डेटा स्टुअर्ड और डेटा कस्टोडियन डेटा के प्रबंधन, एक्सेस कंट्रोल और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।   बोर्ड स्तर पर बनेगी डेटा गवर्नेंस समिति   RBI ने प्रस्ताव दिया है कि सभी विनियमित संस्थाएं बोर्ड स्तर पर डेटा गवर्नेंस कमेटी गठित करें या किसी मौजूदा बोर्ड समिति को इसकी जिम्मेदारी दें। यह समिति डेटा नीति, जोखिम प्रबंधन, गोपनीयता और अनुपालन की निगरानी करेगी।   थर्ड-पार्टी डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम   ड्राफ्ट में कहा गया है कि यदि कोई बैंक या NBFC किसी तीसरे पक्ष के साथ डेटा साझा करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित वित्तीय संस्था की होगी। ग्राहक डेटा केवल निर्धारित उद्देश्य, आवश्यक अनुमति और "Need-to-Know" आधार पर ही साझा किया जा सकेगा।   DPDP कानून के अनुरूप होगा फ्रेमवर्क   RBI ने स्पष्ट किया है कि डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप तैयार करना होगा। साथ ही, डेटा की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और वार्षिक समीक्षा भी अनिवार्य होगी।   17 अगस्त तक मांगे गए सुझाव   RBI ने इस मसौदे पर बैंकों, NBFC, उद्योग संगठनों और आम लोगों से 17 अगस्त 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जो पूरे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में डेटा प्रबंधन के नए मानक तय कर सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
IDBI Bank
IDBI बैंक डील को मिली रफ्तार, 53 हजार करोड़ रुपये के सौदे में फेयरफैक्स सबसे आगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा की निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में सबसे आगे है। यह प्रस्तावित सौदा करीब 53 हजार करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) का बताया जा रहा है।   सरकार और LIC बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी   सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेयरफैक्स ने अपनी बोली बढ़ाकर 81 रुपये प्रति शेयर कर दी है, जिसके बाद वह अन्य दावेदारों से आगे निकल गई है।   अभी मिलनी हैं कई नियामकीय मंजूरियां   हालांकि, यह सौदा अभी अंतिम रूप से पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समेत अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी। IDBI बैंक ने भी स्पष्ट किया है कि उसे अभी तक इस लेनदेन के पूरा होने की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।   पहले अटक गई थी विनिवेश प्रक्रिया   IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी, लेकिन मार्च 2026 में प्राप्त शुरुआती बोलियां सरकार की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी थीं। इसके बाद संशोधित बोलियां आमंत्रित की गईं। नई बोली मिलने के बाद विनिवेश प्रक्रिया ने फिर गति पकड़ ली है और अगले कुछ सप्ताह में इस पर महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।   शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर   डील से जुड़ी खबर सामने आने के बाद IDBI बैंक के शेयरों में तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने इस संभावित रणनीतिक निवेश का सकारात्मक स्वागत किया, जिससे बैंक के शेयरों में करीब 3 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।   भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए होगा बड़ा कदम   यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारतीय बैंकिंग इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी, बैंक की कार्यकुशलता बढ़ेगी और विदेशी निवेशकों का भारतीय बैंकिंग क्षेत्र पर भरोसा और मजबूत होगा।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Nirmala Sitharaman
विदेशी मुद्रा जुटाने पर मंथन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ अहम बैठक

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) और आईडीबीआई बैंक के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना, बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में घोषित रियायती उपायों के प्रभाव का आकलन करना है। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अधिक आकर्षित करना है।   तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगा फोकस बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) खातों में जमा राशि बढ़ाने, सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले विदेशी बॉन्ड तथा भारतीय कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इन तीनों माध्यमों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।   आरबीआई की रियायतों की होगी समीक्षा पिछले महीने आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए कई राहत उपाय लागू किए थे। इनमें 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटाना शामिल है, जिससे बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम करने के लिए बैंकों और सरकारी कंपनियों को रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   विदेशी निवेश में तेजी की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नई रियायतों के बाद 3 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 3 से 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भागीदारी बढ़ने से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि इन उपायों से भविष्य में 40 से 50 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
A cup of black coffee beside coffee beans, highlighting research linking regular coffee consumption with improved liver health.
दिन में 5 कप कॉफी पीना लिवर के लिए फायदेमंद? नए अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

रोजाना कॉफी पीने वालों में गंभीर लिवर रोगों का खतरा कम पाया गया अगर आप रोजाना कॉफी पीते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपको तरोताजा ही नहीं रखती, बल्कि आपके लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कॉफी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों के आधार पर हर किसी को अचानक ज्यादा कॉफी पीना शुरू नहीं कर देना चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख लोगों पर किया गया अध्ययन यह शोध मेडिकल जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 3.55 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का 10 वर्षों से अधिक समय तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदत, लिवर की स्कैन रिपोर्ट, रक्त जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद कॉफी के सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आए। 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों को मिला सबसे ज्यादा लाभ अध्ययन के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीते थे, उनमें लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया। शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष: लिवर सिरोसिस का खतरा 32% तक कम लिवर कैंसर का जोखिम 47% तक घटा लिवर संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा 42% कम हालांकि, रोजाना 1 से 2 कप कॉफी पीने वालों में भी कुछ हद तक सकारात्मक प्रभाव देखा गया। कैफीन नहीं, कॉफी के प्राकृतिक तत्व भी हैं असरदार शोध की एक दिलचस्प बात यह रही कि कैफीनयुक्त (Regular) और डिकैफ (Decaffeinated) दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लगभग समान लाभ देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिक भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कैसे पहुंचाती है कॉफी लिवर को फायदा? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाने और लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय में लिवर को होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो सकता है। ज्यादा चीनी मिलाने से घट सकते हैं फायदे शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में अधिक मात्रा में चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर या अत्यधिक प्रोसेस्ड क्रीमर मिलाने से लिवर को मिलने वाले कुछ फायदे कम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कॉफी पीनी हो तो कम या बिना चीनी वाली कॉफी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्या अब सभी लोगों को 5 कप कॉफी पीनी चाहिए? इस अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह शोध केवल कॉफी और बेहतर लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि कॉफी सीधे लिवर रोगों को रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का सेवन, वजन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी लिवर की सेहत को प्रभावित करते हैं। अधिक कॉफी पीने के हो सकते हैं नुकसान हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से सहन करता है। जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं— बेचैनी और घबराहट नींद में बाधा दिल की धड़कन तेज होना पेट संबंधी परेशानियां गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। क्या कहता है यह अध्ययन? यह शोध संकेत देता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी पीना लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, केवल कॉफी के भरोसे स्वस्थ रहने की बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Rajeev Kumar
HDFC Bank के नए चेयरमैन बने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, RBI की मंजूरी का इंतजार

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को पार्ट-टाइम (गैर-कार्यकारी) चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। हालांकि उनका कार्यभार संभालना अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगा।   चार साल के लिए स्वतंत्र निदेशक भी नियुक्त   बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि 30 जून 2026 से राजीव कुमार को चार वर्ष के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त किया गया है। वहीं, चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जो RBI की मंजूरी मिलने की तारीख से प्रभावी होगा।   अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी   यह नियुक्ति पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty के मार्च 2026 में अचानक इस्तीफा देने के बाद हुई है। उनके इस्तीफे के बाद बैंक में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इस दौरान Keki Mistry अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।   बैंकिंग सुधारों का लंबा अनुभव   राजीव कुमार 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी हैं। वे वित्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और बाद में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।   निवेशकों की नजर आगे के फैसलों पर   विश्लेषकों का मानना है कि राजीव कुमार की नियुक्ति से HDFC Bank में नेतृत्व को स्थिरता मिलेगी। अब निवेशकों की नजर RBI की मंजूरी और बैंक के MD एवं CEO Sashidhar Jagdishan के कार्यकाल बढ़ाने के फैसले पर रहेगी।

abhishek singh जून 30, 2026 0
RBI AI Guidelines
RBI ने बैंकों के लिए AI पर सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा, ग्राहकों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

मुंबई, एजेंसियां। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।   AI मॉडल पर होगी सख्त निगरानी   प्रस्तावित नियमों के अनुसार, हर बैंक को AI और ML मॉडल के उपयोग के लिए एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। इस फ्रेमवर्क को बैंक के बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करनी होगी।   ग्राहक से जुड़े फैसलों में जरूरी होगी मानवीय निगरानी   RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि AI किसी ग्राहक से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, जैसे लोन मंजूरी या जोखिम मूल्यांकन, तो उस प्रक्रिया में मानवीय निगरानी भी अनिवार्य होगी। केवल AI के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।   जनरेटिव AI के लिए अतिरिक्त सुरक्षा   ड्राफ्ट में कहा गया है कि ग्राहक से सीधे संवाद करने वाले Generative AI सिस्टम के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। इससे डेटा लीक, गलत जानकारी और साइबर हमलों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।   थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की भी होगी जांच   अगर कोई बैंक किसी बाहरी कंपनी का AI मॉडल इस्तेमाल करता है, तब भी उसकी स्वतंत्र जांच करानी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिस्टम सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से काम कर रहा है।   24 जुलाई तक मांगे गए सुझाव   RBI ने इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर बैंकों, विशेषज्ञों और आम लोगों से 24 जुलाई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Governor The Silent Saviour
मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' को मिला शानदार रिस्पॉन्स, X पर फैंस बोले- देसी धुरंधर

मुंबई, एजेंसियां। मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' सिनेमाघरों में रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित यह राजनीतिक और वित्तीय थ्रिलर भारत के 1990 के दशक के आर्थिक संकट और उससे देश को उबारने में भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर की भूमिका को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।   मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग ने जीता दिल फिल्म में मनोज बाजपेयी के अभिनय की दर्शक खुलकर सराहना कर रहे हैं। एक यूजर ने फिल्म को "देसी धुरंधर" बताते हुए लिखा कि मनोज बाजपेयी ने अपने शानदार प्रदर्शन से किरदार में जान डाल दी है। कई दर्शकों का कहना है कि यह फिल्म इतिहास, नेतृत्व और एक गुमनाम नायक की प्रेरणादायक कहानी को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है। वहीं कुछ लोगों ने निर्देशक चिन्मय डी. मंडलेकर और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की विषय चयन की भी प्रशंसा की है।   मार्केटिंग पर उठे सवाल जहां फिल्म की कहानी और अभिनय को सराहा जा रहा है, वहीं कुछ दर्शकों ने इसकी मार्केटिंग रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि बेहतर प्रचार-प्रसार नहीं होने की वजह से फिल्म को रिलीज से पहले वह चर्चा नहीं मिल सकी, जिसकी वह हकदार थी। हालांकि दर्शकों का मानना है कि मजबूत कंटेंट के दम पर फिल्म अपनी पहचान बनाने में सफल हो सकती है।   कम चर्चित नायक की कहानी पर आधारित है फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटारमनन के जीवन और 1990 के आर्थिक संकट के दौरान उनके नेतृत्व पर आधारित है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ अदा शर्मा, मधु और नौशाद मोहम्मद कुंजू भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है। दर्शकों का मानना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक थ्रिलर नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण और कम चर्चित अध्याय को समझने का अवसर भी है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Sensex Nifty Falls
गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन के अंत तक प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों ने आरबीआई की नीतिगत घोषणाओं का आकलन करते हुए सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स और निफ्टी में आई गिरावट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 सूचकांक 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत फिसलकर 74,243.34 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों सूचकांकों ने बढ़त बनाई थी, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार नीचे आ गया। रेपो रेट यथावत, RBI का रुख रहा तटस्थ आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपना "तटस्थ" रुख कायम रखा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव के बजाय आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। तकनीकी स्तरों पर निफ्टी की नजर विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का दायरा मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। यदि सूचकांक इस स्तर को पार कर स्थिरता बनाए रखता है, तो 23,750 से 23,800 तक की तेजी संभव है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.35 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.06 प्रतिशत कमजोर रहा। दूसरी ओर मीडिया सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में हिंदाल्को, विप्रो और ट्रेंट शामिल रहे। रुपये में शानदार मजबूती शेयर बाजार की सुस्ती के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत प्रदर्शन किया। डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे की तेजी के साथ 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। यह मजबूती आरबीआई द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और फॉरेक्स लिक्विडिटी मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद देखने को मिली। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की पहल आरबीआई ने अनिवासी भारतीयों (NRI) और प्रवासी भारतीय नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी निवेश सीमा बढ़ाने के साथ-साथ फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा भी विस्तारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित होगा और रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।

Unknown जून 5, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार में हरियाली,  सेंसेक्स 74,500 के पार, निफ्टी 23,400 से ऊपर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार आज शुक्रवार को मजबूत शुरुआत की। निवेशकों की खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। हालांकि बाजार की दिशा अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले पर टिकी हुई है, जिसकी घोषणा सुबह 10 बजे होनी है। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत शुरुआत सुबह 9:32 बजे तक सेंसेक्स 197.90 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,557.91 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 51.41 अंक या 0.22 प्रतिशत चढ़कर 23,467.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का 23,400 के ऊपर बने रहना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है। इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स बने बाजार के हीरो शुरुआती कारोबार में आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विशेष रूप से इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स के शेयर लगभग 2-2 प्रतिशत तक उछले। इन बड़े शेयरों की तेजी ने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। निवेशकों की नजर RBI के फैसले पर विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है क्योंकि निवेशक RBI के नीति निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। ब्याज दरों, महंगाई, आर्थिक वृद्धि और तरलता से जुड़े संकेत बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे। यदि RBI की नीति बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहती है तो शेयर बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है। आगे क्या? आज का सबसे बड़ा ट्रिगर RBI की मौद्रिक नीति घोषणा है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक की टिप्पणी से आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। ऐसे में दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

Unknown जून 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0