माइक्रोसॉफ्ट

माइक्रोसॉफ्ट के शानदार तिमाही नतीजे और क्लाउड एआई बिजनेस में रिकॉर्ड बढ़त
माइक्रोसॉफ्ट के शानदार तिमाही नतीजे, AI और Azure बिजनेस ने दिखाई दमदार बढ़त

राजस्व 18% बढ़कर 90 अरब डॉलर के पार, Azure की मजबूत ग्रोथ से निवेशकों में उत्साह; शेयरों में रिकॉर्ड उछाल   वॉशिंगटन, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का राजस्व 18% बढ़कर 90.01 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि प्रति शेयर आय 4.74 डॉलर रही, जो बाजार के अनुमान से बेहतर है। कंपनी के क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कारोबार ने इस प्रदर्शन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।   Azure और AI बने सबसे बड़े ग्रोथ इंजन   माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि उसका क्लाउड प्लेटफॉर्म Azure लगातार मजबूत गति से बढ़ रहा है। कंपनी के अनुसार, Azure ने 100 अरब डॉलर का वार्षिक कारोबार पार कर लिया, जबकि पूरे Microsoft Cloud का वार्षिक राजस्व 214 अरब डॉलर से अधिक हो गया। कंपनी का कहना है कि AI सेवाओं और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से यह वृद्धि संभव हुई।   AI निवेश का दिखने लगा असर   माइक्रोसॉफ्ट ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों पर बड़े निवेश जारी रखने की बात कही है। कंपनी ने तिमाही के दौरान दुनिया भर में कई नए डेटा सेंटर शुरू किए और कहा कि AI आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का AI पर किया गया बड़ा निवेश अब बेहतर वित्तीय परिणाम देने लगा है।   शेयरों में रिकॉर्ड तेजी   बेहतर नतीजों के बाद माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में जोरदार उछाल आया। कंपनी के शेयर एक दिन में 15% से अधिक चढ़ गए, जिससे उसके बाजार पूंजीकरण  में करीब 450 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। यह किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी एकदिवसीय मार्केट वैल्यू बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है।   आगे भी मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद   कंपनी ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर की मजबूत मांग भविष्य में भी उसके कारोबार को गति देती रहेगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
Business professionals discussing AI-driven workplace changes as companies reduce management layers and redefine leadership roles.
AI के दौर में बदल रही मैनेजर की भूमिका: Microsoft समेत बड़ी कंपनियां क्यों घटा रही हैं मैनेजमेंट लेयर?

कभी कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य मैनेजर बनना माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। Microsoft की हालिया छंटनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मैनेजरों की जगह लेने जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। कंपनियां मैनेजरों को खत्म नहीं कर रहीं, बल्कि अनावश्यक मैनेजमेंट लेयर कम करके नेतृत्व की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। Microsoft की छंटनी ने बढ़ाई चर्चा Microsoft ने हालिया जॉब कट्स के दौरान अपनी मैनेजमेंट लेयर को भी कम किया है। कंपनी AI पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और संगठन को अधिक तेज, चुस्त (Agile) और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यही रणनीति Amazon, Meta और Shopify जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां भी अपना रही हैं। इस ट्रेंड को अब कॉर्पोरेट जगत में "Management Diet" कहा जा रहा है, जिसमें संगठन के भीतर गैर-जरूरी मैनेजमेंट स्तरों को हटाकर निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। AI नहीं, संगठनात्मक बदलाव है बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल AI की वजह से नहीं हो रहा है। True Balance के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) गौरव शर्मा का कहना है कि कंपनियां अब यह मूल्यांकन कर रही हैं कि कौन-सी मैनेजमेंट लेयर वास्तव में व्यवसाय को मूल्य दे रही है। यदि किसी स्तर की भूमिका केवल रिपोर्टिंग, समन्वय और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है, तो उसे अधिक प्रभावी तरीके से AI के जरिए संभाला जा सकता है। वहीं HireYou के CHRO अभिजीत घोष के मुताबिक कंपनियां अपने संगठन को अधिक तेज और लचीला बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव कर रही हैं। AI इस बदलाव को आसान बना रहा है क्योंकि अब कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां तकनीक संभाल सकती है। AI किन मैनेजमेंट कार्यों को संभाल रहा है? आज AI कई ऐसे कार्य तेजी से कर रहा है जो पहले मिडिल मैनेजर की जिम्मेदारी माने जाते थे। इनमें शामिल हैं: प्रदर्शन (Performance) की निगरानी प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखना मीटिंग का सारांश तैयार करना कर्मचारियों की शेड्यूलिंग संसाधनों का आवंटन ऑनबोर्डिंग और रिपोर्टिंग अनुपालन (Compliance) की निगरानी इन कार्यों के ऑटोमेट होने से मैनेजरों का समय बच रहा है और संगठन कम मैनेजमेंट लेयर के साथ भी प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं। AI नहीं कर सकता नेतृत्व की जगह विशेषज्ञ मानते हैं कि AI डेटा और प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी नेतृत्व की जगह नहीं ले सकता। कर्मचारियों को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना, टीम का विश्वास जीतना और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना ऐसे काम हैं जिनमें मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि भविष्य में प्रभावी नेतृत्व की अहमियत और बढ़ने वाली है। मैनेजर की भूमिका कैसे बदल रही है? अब भविष्य का मैनेजर केवल टीम की निगरानी करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। नई भूमिका में मैनेजर को इन जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना होगा: कर्मचारियों का विकास और कोचिंग रणनीतिक निर्णय लेना नवाचार को बढ़ावा देना अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना व्यवसायिक समस्याओं का समाधान करना जो मैनेजर केवल अनुमोदन, रिपोर्टिंग और रोजमर्रा की निगरानी तक सीमित रहेंगे, उनके लिए भविष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करियर ग्रोथ का नया मतलब विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में करियर की सफलता केवल मैनेजर बनने से तय नहीं होगी। युवा पेशेवरों को अब इन कौशलों पर ध्यान देना होगा: AI टूल्स की समझ किसी क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता समस्या समाधान क्षमता विभिन्न टीमों के साथ सहयोग लगातार नई तकनीकों को सीखने की आदत व्यवसायिक परिणामों की जिम्मेदारी लेना यानी भविष्य में पदनाम (Designation) से अधिक महत्व कौशल और प्रभाव (Impact) का होगा। क्या भारत में भी दिखेगा यही ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कंपनियां भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी। डिजिटल-फर्स्ट कंपनियां अपेक्षाकृत तेजी से फ्लैट संगठनात्मक ढांचे को अपनाएंगी, जबकि बड़े पारंपरिक संगठनों में यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। हालांकि अंतिम लक्ष्य सभी का लगभग एक जैसा होगा—कम मैनेजमेंट लेयर, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी नेतृत्व। बदलते दौर में नेतृत्व ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों को अच्छे नेताओं की आवश्यकता बनी रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भविष्य में वही मैनेजर सबसे अधिक सफल होंगे जो लोगों को प्रेरित कर सकें, भरोसा कायम रखें, कठिन फैसले लें और लगातार बदलते कारोबारी माहौल में अपनी टीम का सही मार्गदर्शन कर सकें।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Manish Kashyap
E20 पेट्रोल विवाद में घिरे मनीष कश्यप, टोयोटा ने दर्ज कराई FIR; सरकार और कंपनी ने दावों को बताया भ्रामक

पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित यूट्यूबर और जन सुराज नेता मनीष कश्यप एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी नई टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद इंजन में गंभीर खराबी आ गई। इस दावे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद E20 ईंधन को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई।   टोयोटा ने दावों को किया खारिज   टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने वाहन की तकनीकी जांच के बाद कहा कि कार में आई खराबी E20 पेट्रोल की वजह से नहीं, बल्कि ईंधन में पानी/दूषित ईंधन होने के कारण हुई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इनोवा हाइक्रॉस E20 ईंधन के अनुरूप है।   मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज   मामले के बाद टोयोटा ने मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि बिना तकनीकी पुष्टि के किए गए दावों से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।   सरकार ने भी दी सफाई   विवाद बढ़ने पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि E20 पेट्रोल पूरी तरह परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे संबंधित वायरल दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।   सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस   इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल, वाहन सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, मनीष कश्यप अपने दावों पर कायम हैं, जबकि टोयोटा और सरकार दोनों ने उनके आरोपों को तकनीकी जांच के आधार पर खारिज किया है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Microsoft Jobs
टेक इंडस्ट्री में फिर जॉब संकट, Microsoft ने हजारों कर्मचारियों को किया बाहर

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक टेक उद्योग में एक बार फिर बड़ी छंटनी की खबर ने हलचल मचा दी है। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। यह कंपनी की कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1 प्रतिशत है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि यह कदम केवल लागत कम करने के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संगठन को तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।   HR हेड ने बताई छंटनी की वजह माइक्रोसॉफ्ट की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (HR Head) एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक मेमो में कहा कि कंपनी अपने संसाधनों, निवेश और प्रतिभा को उन क्षेत्रों में केंद्रित करना चाहती है, जहां भविष्य में सबसे अधिक विकास की संभावना है। उनके अनुसार, AI, क्लाउड सेवाओं और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जरूरी हो गया था।   AI निवेश के बीच बढ़ा दबाव हाल के महीनों में माइक्रोसॉफ्ट ने AI तकनीक और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। इसी के साथ खर्चों को नियंत्रित करने और संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए कंपनी ने यह कठिन फैसला लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में टेक कंपनियां पारंपरिक भूमिकाओं की जगह AI-केंद्रित नौकरियों पर अधिक ध्यान देंगी।   शेयरों में गिरावट और पहले भी हुई थी कटौती कंपनी के शेयरों में वर्ष 2026 की पहली छमाही में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले कुछ वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Buyout) का प्रस्ताव भी दे चुकी है।   गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है। इस वर्ष अमेजन, मेटा और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी AI निवेश और लागत नियंत्रण की रणनीति के तहत हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं, जिससे वैश्विक टेक सेक्टर में रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Microsoft logo representing the company's announcement of 4,800 job cuts amid rising AI investments and cost optimization efforts.
Microsoft में 4,800 कर्मचारियों की छंटनी, AI पर बढ़ते खर्च के बीच कंपनी ने लिया बड़ा फैसला

AI निवेश बढ़ा, लागत कम करने के लिए Microsoft का बड़ा कदम दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में कटौती करते हुए करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया है। यह कंपनी के कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1% है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब Microsoft कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ी तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है तथा साथ ही परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने विभिन्न विभागों में दक्षता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह बदलाव कर रही है। AI पर अरबों डॉलर का दांव, लेकिन बढ़ रहा है वित्तीय दबाव पूरे टेक उद्योग में इस समय AI को लेकर निवेश की होड़ मची हुई है। Microsoft के अलावा Amazon और Meta Platforms जैसी कंपनियां भी इस वर्ष हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में बड़ी टेक कंपनियों का AI संबंधी निवेश 700 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकता है। ऐसे में कंपनियों पर यह दबाव भी बढ़ गया है कि वे इन भारी निवेशों से बेहतर वित्तीय परिणाम हासिल करें। शेयरों में गिरावट के बाद बढ़ी चिंता Microsoft के लिए वर्ष 2026 की पहली छमाही आसान नहीं रही। कंपनी के शेयरों में जनवरी से जून के बीच लगभग 23% की गिरावट दर्ज की गई, जो 2022 के बाद उसका सबसे कमजोर पहला छह महीने का प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले भी कंपनी अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेपरेशन पैकेज (Voluntary Buyout) की पेशकश कर चुकी थी, जो उसके अमेरिकी कर्मचारियों का करीब 7% था। Microsoft हर वर्ष जून में अपना वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद नए वित्तीय वर्ष की योजना के तहत कर्मचारियों और खर्चों की समीक्षा भी करती है। Azure की मजबूत मांग, लेकिन डेटा सेंटर का बढ़ता खर्च AI सेवाओं की बढ़ती मांग का सबसे अधिक फायदा Microsoft के Azure क्लाउड प्लेटफॉर्म को मिला है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के AI मॉडल्स का विशेष क्लाउड प्रदाता था, जिससे कंपनी को AI सेवाओं की बढ़ती मांग का लाभ मिला। हालांकि, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाने और उनका विस्तार करने में भारी पूंजी खर्च हो रही है। इससे कंपनी के नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव बढ़ा है। Microsoft ने पहले ही 2026 के लिए लगभग 190 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान जताया था, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक माना गया। Gaming कारोबार भी चुनौतियों से जूझ रहा AI पर बढ़ते खर्च का असर Microsoft के गेमिंग कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे हार्डवेयर निर्माण की लागत में इजाफा हुआ है। इसी कारण कंपनी को अपने Xbox कंसोल की कीमतें भी बढ़ानी पड़ीं, जबकि बाजार में इसकी मांग पहले से ही कमजोर बनी हुई है। हाल ही में Microsoft के गेमिंग डिवीजन की प्रमुख Asha Sharma ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा कि कंपनी के गेमिंग व्यवसाय को "रीसेट" की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस डिवीजन का लाभ मार्जिन घटकर केवल 3% रह गया है, जिसके चलते पुनर्गठन जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में विलय और अधिग्रहण (M&A) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। शर्मा के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने कंटेंट, प्लेटफॉर्म और हार्डवेयर सब्सिडी पर 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया, लेकिन इस दौरान वार्षिक राजस्व में लगभग 50 करोड़ डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। उनका कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
America Jobs
अमेरिका में सुस्त पड़ा जॉब मार्केट, जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं।   ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है।   श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है।   टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Microsoft AI Investment
माइक्रोसॉफ्ट ने 2.5 अरब डॉलर के निवेश के साथ लॉन्च की नई AI कंपनी, कारोबारों को मिलेगी AI अपनाने में मदद

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है।   6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता   माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी।   सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध   माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है।   बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक   माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा।   एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा   विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Microsoft Jobs
नौकरियों पर एआई की मार, माइक्रोसॉफ्ट में फिर छंटनी की तलवार

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लगभग 5,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश और बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। वर्तमान में कंपनी में दुनिया भर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और संभावित छंटनी कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से भी कम होगी।   सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स डिवीजन पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सबसे अधिक प्रभाव सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स (गेमिंग) डिवीजन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से एक्सबॉक्स कारोबार में नई नेतृत्व टीम के आने के बाद संगठनात्मक बदलाव तेज हुए हैं। कंपनी कई पुराने पदों को समाप्त कर टीमों का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि कारोबार को नई रणनीति के अनुरूप ढाला जा सके।   एआई निवेश के लिए घटाए जा रहे परिचालन खर्च विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट पिछले कुछ वर्षों से ओपनएआई के साथ मिलकर एआई डेटा सेंटर, कोपायलट और अन्य जनरेटिव एआई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इन परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए कंपनी अन्य परिचालन लागत में कटौती कर रही है। जिन कार्यों को अब एआई और ऑटोमेशन के जरिए अधिक दक्षता से किया जा सकता है, वहां मानव संसाधन की आवश्यकता कम की जा रही है।   पूरी टेक इंडस्ट्री में बदल रहा रोजगार का स्वरूप माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में मेटा, अमेजन, ओरेकल और लिंक्डइन जैसी कई प्रमुख टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। भविष्य में कंपनियां कम कर्मचारियों और अधिक ऑटोमेशन के साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0