रूस यूक्रेन युद्ध

यूक्रेन में लक्ष्मी मित्तल के आर्सेलरमित्तल स्टील प्लांट पर रूसी हमला
लक्ष्मी मित्तल के यूक्रेन स्थित स्टील प्लांट पर रूसी हमला, दो की मौत; 13 घायल

रूस-यूक्रेन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन में भारतीय अरबपति लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह के स्टील प्लांट पर रूसी हमला हुआ है। हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले के बाद प्लांट का संचालन आंशिक रूप से रोक दिया गया है।   ऊर्जा और ब्लास्ट फर्नेस सुविधाओं को नुकसान     मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने रविवार को यूक्रेन के क्रिवी रिह स्थित स्टील प्लांट को निशाना बनाया। हमले में प्लांट की महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़ी उत्पादन सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते कंपनी को कुछ हिस्सों में कामकाज रोकना पड़ा।   कंपनी के अनुसार, घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान जारी है। दमकलकर्मियों, बचाव दल और मेडिकल टीम को मौके पर तैनात किया गया है।   यूक्रेन की बड़ी औद्योगिक इकाइयों में शामिल है प्लांट     आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह यूक्रेन की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनियों में से एक है। यह प्लांट देश के रणनीतिक आर्थिक और औद्योगिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्रिवी रिह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का गृहनगर भी है।   इससे पहले 2022 में हुए एक मिसाइल हमले में प्लांट की एक रोलिंग मिल को भारी नुकसान पहुंचा था। उस हमले में एक कर्मचारी की मौत हुई थी।   यूक्रेन ने भी रूस पर किया बड़ा ड्रोन हमला     रूस के हमले से पहले यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए थे। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, यह हाल के समय में किए गए सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक था। हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर है।   रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को रोका गया। मॉस्को क्षेत्र में एक निजी मकान पर ड्रोन गिरने से 83 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा पोडोलस्क शहर में एक ड्रोन हमले के बाद ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के गोदाम में आग लगने की भी सूचना मिली। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि राजधानी की ओर बढ़ रहे करीब 600 ड्रोन का पता लगाया गया, जिनमें से बड़ी संख्या को मॉस्को क्षेत्र के ऊपर ही नष्ट कर दिया गया।   युद्ध में लगातार बढ़ रहा औद्योगिक नुकसान     रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ ऊर्जा संयंत्रों, औद्योगिक इकाइयों और कारोबारी संपत्तियों को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है। लक्ष्मी मित्तल के स्टील प्लांट पर ताजा हमला इसी बढ़ते औद्योगिक नुकसान की एक और कड़ी माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
रूस-यूक्रेन युद्ध में लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री पर हमला
रूस-यूक्रेन युद्ध: लक्ष्मी मित्तल की स्टील फैक्ट्री पर मिसाइल हमला, 2 की मौत; उत्पादन प्रभावित

क्रिवी रिह, यूक्रेन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह में भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री को रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों में निशाना बनाया गया। हमले में दो लोगों की मौत और 14 कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। ऊर्जा और ब्लास्ट-फर्नेस संचालन को नुकसान पहुंचने के बाद प्लांट का उत्पादन प्रभावित हुआ है।   यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले के बाद रूस का पलटवार     यह हमला ऐसे समय हुआ जब यूक्रेन ने रूस के खिलाफ बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए थे। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को रोका गया। रूस के मॉस्को क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में ड्रोन पहुंचने की सूचना सामने आई।     मॉस्को क्षेत्र में 83 वर्षीय व्यक्ति की मौत     मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव के मुताबिक, एक निजी मकान पर ड्रोन हमले में 83 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा पोडोल्स्क में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के एक गोदाम में भी आग लग गई।   मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि राजधानी की ओर बढ़ रहे करीब 600 ड्रोन का पता लगाया गया। इनमें से कई ड्रोन को मॉस्को क्षेत्र के ऊपर ही नष्ट कर दिया गया।   रोस्तोव में भी ड्रोन हमले, पांच लोगों की मौत     रूस के रोस्तोव क्षेत्र में भी ड्रोन हमले हुए। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, तीन शहरों को निशाना बनाए गए हमलों में पांच लोगों की मौत हुई। 150 से ज्यादा ड्रोन हमलों के कारण कई घरों और एक रेलवे स्टेशन को नुकसान पहुंचा, जबकि जंगल में भी आग लग गई।     आर्सेलरमित्तल प्लांट के संचालन पर असर     क्रिवी रिह स्थित आर्सेलरमित्तल प्लांट यूक्रेन की प्रमुख स्टील उत्पादन इकाइयों में शामिल है। रूसी हमले में प्लांट की एक साइट को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद कंपनी को कुछ संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। ऊर्जा और ब्लास्ट-फर्नेस से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से उत्पादन पर असर पड़ा है।     यूक्रेन के कई इलाकों में भी नुकसान     रूसी हमलों में यूक्रेन के अन्य हिस्सों में भी जनहानि और नुकसान की खबर है। जापोरिज्जिया में दो, सुमी में एक और डोनेट्स्क में एक व्यक्ति की मौत की जानकारी सामने आई है। कीव में भी कई जगह आग लगी और छह लोग घायल हुए।   रूस और यूक्रेन के बीच जमीनी मोर्चे पर लड़ाई अपेक्षाकृत धीमी होने के बावजूद दोनों देश एक-दूसरे के इलाकों में लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर रहे हैं। इससे युद्ध का असर सैन्य ठिकानों के साथ-साथ औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिक इलाकों तक भी पहुंच रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
रूस के निज़नेकाम्स्क में यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद तेल रिफाइनरी
रूस के भीतर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, तेल रिफाइनरी पर हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत

मॉस्को, एजेंसियां। रूस के भीतर यूक्रेन के एक बड़े ड्रोन हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है। हमला रूस के तातारस्तान गणराज्य के निज़नेकाम्स्क शहर में हुआ, जहां यूक्रेनी ड्रोन ने तेल और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। हमले में एक बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। रूस के अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है।   तानेको तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना     यूक्रेनी सेना ने निज़नेकाम्स्क क्षेत्र में स्थित तानेको तेल रिफाइनरी को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। यह रूस के प्रमुख तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल केंद्रों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार यह प्रतिष्ठान मॉस्को से करीब 800 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।   हमले के बाद रिफाइनरी परिसर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में धुआं उठता दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन हमले का असर शहर के कुछ रिहायशी इलाकों पर भी पड़ा।   13 लोगों की मौत, दर्जनों घायल     रूसी अधिकारियों के अनुसार हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। कई लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या 39 से अधिक बताई गई है, जबकि बाद के स्थानीय अपडेट में इससे ज्यादा लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार मृतकों में मध्य एशियाई देशों के नागरिक भी शामिल हैं। उज्बेकिस्तान ने बताया है कि उसके सात नागरिकों की इस हमले में मौत हुई।     रूस ने शुरू की जांच, तातारस्तान में शोक     हमले के बाद रूसी अधिकारियों ने इसे गंभीर सुरक्षा घटना माना है और जांच शुरू कर दी है। तातारस्तान के अधिकारियों ने मृतकों के सम्मान में शोक दिवस घोषित किया है।   यह हमला रूस के अंदर यूक्रेन की बढ़ती ड्रोन क्षमता को भी दर्शाता है। यूक्रेन लंबे समय से रूस की तेल और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाकर उसकी सैन्य और आर्थिक क्षमता पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। निज़नेकाम्स्क पर हुआ हमला इसी अभियान की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Ukraine Drone Attack
यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, तीन तेल रिफाइनरियों को बनाया निशाना

उफा, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस के अंदर तक बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के अनुसार, उसके लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के बश्कोर्तोस्तान गणराज्य के उफा में स्थित तीन प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया। ये हमले यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर किए गए।   उफा की तीन रिफाइनरियां बनीं निशाना   यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले में Bashneft-UNPZ, Bashneft-Novoil और Bashneft-Ufaneftekhim रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। ये तीनों रिफाइनरियां उफा के बड़े तेल-प्रसंस्करण परिसर का हिस्सा हैं। यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि हमले का उद्देश्य रूस की तेल प्रसंस्करण और ईंधन आपूर्ति क्षमता को प्रभावित करना था।   रिफाइनरी में आग लगने की खबर   हमले के बाद उफा में तेल रिफाइनरी क्षेत्र से धुआं उठने और आग लगने की खबरें सामने आईं। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में भी औद्योगिक क्षेत्र से धुएं का गुबार दिखाई देने की बात कही गई है। हमले से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।   रूस के अंदर तक पहुंचा यूक्रेन का ड्रोन हमला   इस हमले की खास बात इसकी दूरी है। उफा यूक्रेन से करीब 1,600 किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूर स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने से यूक्रेन की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता एक बार फिर चर्चा में आ गई है।   तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर   रूस की तेल रिफाइनरियां देश की ईंधन आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले होने से तेल प्रसंस्करण, ईंधन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, तीनों रिफाइनरियों को हुए वास्तविक नुकसान और उनके संचालन पर पड़े असर की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
यूक्रेन पर रूस का भयावह मिसाइल और ड्रोन हमला, कई शहरों में भारी तबाही
यूक्रेन पर रूस का भयावह मिसाइल हमला, कई शहरों में भारी तबाही; बच्चों समेत कम से कम 10 लोगों की मौत

70 से अधिक मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन से किया गया हमला, दर्जनों घायल; पोलैंड ने भी लड़ाकू विमान किए तैनात   कीव, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में बच्चों समेत कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राजधानी कीव, ल्वीव, ड्नीप्रोपेत्रोव्स्क, पोल्टावा और खेरसॉन सहित कई शहरों में भारी नुकसान हुआ है।   70 से ज्यादा मिसाइलें और 280 से अधिक ड्रोन दागे गए   यूक्रेन की वायु सेना के मुताबिक, रूस ने रातभर चले हमले में 70 से अधिक मिसाइलें और लगभग 280 ड्रोन दागे। कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को यूक्रेनी एयर डिफेंस ने मार गिराया, लेकिन कई मिसाइलें रिहायशी इलाकों में गिरीं, जिससे इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई जगहों पर आग लग गई।   कीव और ल्वीव में सबसे ज्यादा तबाही   राजधानी कीव में कई आवासीय इमारतों को नुकसान पहुंचा, जबकि पश्चिमी शहर ल्वीव में भी मिसाइल हमलों से भारी तबाही हुई। राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।   पोलैंड ने लड़ाकू विमान किए तैनात   हमले के दौरान एक रूसी क्रूज़ मिसाइल पोलैंड के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गई, जिसके बाद पोलैंड और नाटो ने सुरक्षा के मद्देनज़र लड़ाकू विमान तैनात कर दिए। इस घटना को लेकर यूरोप में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।   जेलेंस्की ने की एयर डिफेंस सिस्टम की मांग   यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश को तत्काल और अधिक आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है। उन्होंने सहयोगी देशों से पैट्रियट मिसाइल प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति तेज करने की अपील की।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
सेंट पीटर्सबर्ग में वाइल्डबेरीज़ गोदाम में यूक्रेनी ड्रोन हमले के बाद लगी भीषण आग
सेंट पीटर्सबर्ग में यूक्रेनी ड्रोन हमले से बड़े गोदाम में भीषण आग, रूस ने कहा— लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया गया निशाना

मॉस्को/सेंट पीटर्सबर्ग, एजेंसियां। रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के पास यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद एक बड़े गोदाम में भीषण आग लग गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हमला लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) के विशाल वेयरहाउस पर हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया।   ड्रोन हमले के बाद धधका वेयरहाउस   लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि यूक्रेनी ड्रोन के हमले के तुरंत बाद गोदाम में आग भड़क उठी। दमकल की कई टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं। सुरक्षा कारणों से आसपास के इलाके को खाली कराया गया और हवाई सुरक्षा प्रणाली को अलर्ट पर रखा गया।   लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को निशाना बनाने का आरोप   रूसी प्रशासन का आरोप है कि यूक्रेन अब केवल ऊर्जा प्रतिष्ठानों ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क को भी निशाना बना रहा है। वाइल्डबेरीज़ रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में से एक है और उसका वेयरहाउस देशभर में सामान की आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।   यूक्रेन की रणनीति में बदलाव   विश्लेषकों का मानना है कि हाल के सप्ताहों में यूक्रेन ने रूस के भीतर गहराई तक ड्रोन हमले बढ़ाए हैं। इन हमलों का उद्देश्य रूस की आपूर्ति व्यवस्था और युद्ध से जुड़े लॉजिस्टिक्स ढांचे को प्रभावित करना बताया जा रहा है। हालांकि यूक्रेन ने इस विशेष हमले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।   तीसरी बार बना निशाना   रिपोर्टों के अनुसार, यह एक सप्ताह के भीतर वाइल्डबेरीज़ के गोदामों पर तीसरा बड़ा हमला है। लगातार हो रहे हमलों से कंपनी के परिचालन और हजारों छोटे कारोबारियों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।   क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई   हमले के बाद सेंट पीटर्सबर्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कई अन्य यूक्रेनी ड्रोन को भी हवाई रक्षा प्रणाली ने मार गिराया, जबकि घटना की विस्तृत जांच जारी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy during a press event amid a diplomatic dispute with Poland over historical memory and honours.
पोलैंड-यूक्रेन रिश्तों में तनाव: जेलेंस्की ने लौटाया सर्वोच्च सम्मान, UPA विवाद से बढ़ी कड़वाहट

  वारसॉ/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड और यूक्रेन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस करने की घोषणा की है। यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी द्वारा सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कहने के बाद उठाया गया। विवाद की जड़ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने एक सैन्य इकाई का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखा। पोलैंड में UPA को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जेलेंस्की बोले- यह सम्मान यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 2023 में मिला ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यह सम्मान पोलैंड को वापस भेजने का फैसला किया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2023 में तत्कालीन पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने सुरक्षा, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए प्रदान किया था। कई यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए सम्मान जेलेंस्की के अलावा यूक्रेन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है। इनमें राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव, पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोडनार और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा शामिल हैं। क्या है UPA और उससे जुड़ा विवाद? यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय एक राष्ट्रवादी संगठन था। यूक्रेन में इसे सोवियत संघ और नाजी जर्मनी के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में देखा जाता है। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वोल्हिनिया और पूर्वी गैलिसिया क्षेत्रों में हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। यही ऐतिहासिक विवाद आज दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन गया है। पोलैंड ने सम्मान वापस लेने का फैसला क्यों किया? पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने कहा कि UPA को सम्मानित करना पोलिश समाज की ऐतिहासिक संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पोलिश नागरिक UPA को ऐसे संगठन के रूप में देखते हैं, जिसने पोलैंड के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराध किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का फैसला इतिहास और स्मृति के सम्मान के लिए है। यूक्रेन ने फैसले को बताया ‘रूस के लिए तोहफा’ यूक्रेन ने पोलैंड के इस कदम की तीखी आलोचना की है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने इसे यूक्रेनी जनता के प्रति गैर-मित्रवत कदम बताया और कहा कि इससे रूस को दोनों देशों के बीच दरार पैदा करने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे एक ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया, जबकि राजदूत वासिल बोडनार ने कहा कि रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए यह फैसला बेहद पीड़ादायक है। समर्थन जारी रखने का भरोसा राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि पोलैंड रूस के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन कम करेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन की पोलैंड की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। फिर भी, इतिहास से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रूस के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड, यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है और लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को शरण भी दे चुका है। अब यह देखना होगा कि दोनों देश इस कूटनीतिक तनाव को कैसे संभालते हैं।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Smoke rises near Moscow after a Ukrainian drone attack targeted an oil refinery and disrupted airport operations.
यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमले से दहला मॉस्को, तेल रिफाइनरी बनी निशाना; रूस ने 555 ड्रोन मार गिराने का दावा किया

  मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग और धुएं के गुबार देखे गए, जबकि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चार वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में से एक माना जा रहा है। रूस का दावा- 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार: लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। अधिकांश ड्रोन को राजधानी तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है। मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे। अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। यह रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ा हमला माना जा रहा है। चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हमले के कारण: कई उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के महीनों में रूस में ड्रोन हमलों के बाद हवाई यातायात प्रभावित होने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जेलेंस्की बोले- रूस के हमलों का यह जायज जवाब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र और रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। जेलेंस्की ने कहा, “यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है। यह रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।” उन्होंने यह भी बताया कि: मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर इस सप्ताह दूसरी बार हमला किया गया। रोस्तोव ओब्लास्ट और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप और मैक्रों से बातचीत के बाद यूक्रेन का बड़ा कदम यह हमला ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता की हैं। जेलेंस्की ने कहा कि: बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही। युद्ध की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जी-7 देशों ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है। जी-7 देशों ने दोहराया समर्थन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश: यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखेंगे। उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगे। आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर स्थित कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के माध्यम से एशियाई देशों के साथ: व्यापार, निवेश, और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। चार साल से अधिक समय से जारी है युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। संघर्ष अब केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी वायु रक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ती जा रही है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Emergency responders inspect damage after fresh Russia-Ukraine border attacks causing civilian casualties.
रूस-यूक्रेन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, दोनों ओर के हमलों में 3 लोगों की मौत

  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। सीमा से सटे क्षेत्रों में दोनों देशों की ओर से हुए ताजा हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में एक पांच वर्षीय बच्चा भी शामिल बताया गया है। दोनों देशों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए हमलों की पुष्टि की है। युद्धकालीन परिस्थितियों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन है। ब्रायंस्क क्षेत्र में यूक्रेनी हमले का दावा रूस के सीमावर्ती क्षेत्र ब्रायंस्क के अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन की ओर से की गई गोलाबारी में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। ब्रायंस्क के कार्यवाहक गवर्नर येगोर कोवलचुक ने बताया कि सीमा के निकट स्थित सूजेमका क्षेत्र को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, हमले से स्थानीय नागरिक प्रभावित हुए और कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। स्टारोडुब में पेट्रोल पंपों पर हमला रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रायंस्क क्षेत्र के स्टारोडुब इलाके में हुए एक अन्य हमले में पेट्रोल पंपों को निशाना बनाया गया। इस घटना में सात लोग घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, एक अलग ड्रोन हमले में पांच वर्षीय बच्चे के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के इलाज की व्यवस्था किए जाने की बात कही है। रूस का पलटवार, यूक्रेन में भी नुकसान दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों ने रूसी ड्रोन हमलों में नागरिक हताहतों की सूचना दी है। यूक्रेन के सुमी क्षेत्र के गवर्नर ओलेह ह्रीहोरोव के अनुसार, रूसी ड्रोन हमले में 44 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है। मायकोलाइव में भी ड्रोन हमले यूक्रेन के दक्षिणी शहर मायकोलाइव में भी ड्रोन हमलों की सूचना मिली है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है तथा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नागरिकों पर बढ़ रहा युद्ध का असर चार वर्षों से अधिक समय से जारी इस संघर्ष का सबसे अधिक असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ रहा है। हाल के हमले इस बात का संकेत हैं कि मोर्चों पर तनाव अभी भी बना हुआ है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती हैं, जबकि नागरिक आबादी लगातार युद्ध की कीमत चुका रही है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Russian President Vladimir Putin discusses Ukraine peace talks and conditions for a possible settlement.
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीद! ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर पुतिन तैयार, यूक्रेन के सामने रखीं शर्तें

  रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शांति समझौते के लिए यूक्रेन को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। ट्रंप के प्रस्ताव पर रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और वह उन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने को तैयार है जिन पर अलास्का के एंकरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा हुई थी। पुतिन ने कहा कि यदि यूक्रेन भी इन प्रस्तावों को स्वीकार करता है तो संघर्ष का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी संभव हो सकता है। उनके अनुसार, रूस बातचीत के रास्ते को बंद नहीं करना चाहता, लेकिन समझौता दोनों पक्षों की सहमति से ही संभव होगा। रूस की प्रमुख शर्तें क्या हैं? रूसी पक्ष के अनुसार संभावित समझौते के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति आवश्यक होगी: यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र पर रूस के नियंत्रण को स्वीकार करना होगा। खेरसोन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में रूसी दावों को मान्यता देनी होगी। यूक्रेन को नाटो सदस्यता की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। सुरक्षा और सीमा संबंधी कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनानी होगी। इन शर्तों पर यूक्रेन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुतिन को एक खुला पत्र लिखकर सीधे संवाद का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए आमने-सामने बातचीत और पूर्ण युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया। जेलेंस्की ने कहा कि स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने पुतिन को व्यक्तिगत बैठक का प्रस्ताव भी दिया है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि उसे यह पत्र प्राप्त हो चुका है। युद्ध के मैदान में रूस का दावा पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना विभिन्न मोर्चों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। उनके अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने हजारों वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है। रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि लुहांस्क क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है, जबकि दोनेत्स्क और ज़ापोरिज्जिया के बड़े हिस्सों पर भी रूसी सेना का नियंत्रण है। यूरोप की भूमिका पर रूस का सवाल पुतिन ने यूरोपीय देशों की मध्यस्थता क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो देश लंबे समय से रूस की रणनीतिक हार की बात करते रहे हैं, उनके लिए निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाना कठिन होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता। शांति वार्ता में क्यों आया ठहराव? रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा, इस्तांबुल और अबू धाबी सहित कई स्थानों पर पहले भी वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। फरवरी 2022 में शुरू हुआ युद्ध अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लाखों लोगों को प्रभावित कर चुका है। ट्रंप के प्रस्ताव, पुतिन की प्रतिक्रिया और जेलेंस्की की नई पहल के बाद एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। क्या जल्द खत्म हो सकता है युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि शांति समझौते की संभावना तभी बढ़ेगी जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी अधिकतम मांगों में लचीलापन दिखाएं। फिलहाल रूस और यूक्रेन के रुख में बड़ा अंतर बना हुआ है, लेकिन हालिया बयानों ने भविष्य में वार्ता की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Explosions light up Kyiv skyline after Russia launches drones and missiles, including a claimed Oreshnik strike.
रूस का कीव पर बड़ा हमला, ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल इस्तेमाल करने का दावा

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया है कि रूस ने राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सरकारी इमारतें, रिहायशी इलाके और स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीसरी बार इस्तेमाल हुई ओरेश्निक मिसाइल जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा इलाके को निशाना बनाने के लिए ओरेश्निक मिसाइल दागी। यूक्रेन का दावा है कि यह चार साल से जारी युद्ध में तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। रूस इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो और जनवरी 2026 में लवीव क्षेत्र में भी ओरेश्निक मिसाइल इस्तेमाल कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल मैक-10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से हमला कर सकती है और गहरे भूमिगत बंकरों को भी तबाह करने में सक्षम है। रूस ने 600 ड्रोन और 90 मिसाइल दागने का दावा यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट या इंटरसेप्ट कर दिया। कई मिसाइलें राजधानी कीव और आसपास के इलाकों तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। स्कूल और रिहायशी इलाके बने निशाना कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख Tymur Tkachenko के अनुसार, राजधानी के कम से कम नौ जिलों में हमलों से नुकसान हुआ है। वहीं कीव के मेयर Vitali Klitschko ने कहा कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया, जहां लोग शरण लिए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात सायरन बजते रहे और शहर के कई हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुआं उठता दिखाई दिया। रूस ने हमले की पुष्टि की रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक रूस की नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। रूसी भाषा में “ओरेश्निक” का मतलब “हेज़लनट का पेड़” होता है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद तेज गति और गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता मानी जाती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइलों को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल होता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump announces temporary Russia-Ukraine ceasefire agreement and prisoner exchange amid ongoing war
रूस-यूक्रेन में 3 दिन का सीजफायर, ट्रंप बोले- मेरे कहने पर बनी सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच तीन दिन के युद्धविराम का ऐलान किया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी पहल और मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, यह युद्धविराम 9, 10 और 11 मई तक लागू रहेगा. इस दौरान दोनों देशों के बीच सभी सैन्य गतिविधियां रोकी जाएंगी और युद्धबंदियों की अदला-बदली भी की जाएगी. ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन का सीजफायर होगा.” उन्होंने कहा कि रूस में यह अवधि “विक्ट्री डे” समारोह के कारण महत्वपूर्ण है, जबकि यूक्रेन भी द्वितीय विश्व युद्ध का अहम हिस्सा रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि युद्धविराम के लिए अनुरोध उन्होंने सीधे किया था और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने इस पर सहमति जताई. 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली सीजफायर के तहत दोनों देशों के बीच 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली भी होगी. ट्रंप ने कहा कि इस दौरान सभी “काइनेटिक एक्टिविटी” यानी सैन्य हमलों और लड़ाई को पूरी तरह रोका जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है. जेलेंस्की ने भी की पुष्टि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस अस्थायी युद्धविराम की पुष्टि की है. उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही बातचीत के तहत रूस ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति दी है. जेलेंस्की ने कहा, “हमें 1,000 के बदले 1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए रूस की मंजूरी मिल गई है.” उन्होंने इसे शांति वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष है और इसे खत्म करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है. उन्होंने लिखा, “हम हर दिन युद्ध खत्म होने के और करीब पहुंच रहे हैं.” हालांकि यह सीजफायर फिलहाल केवल तीन दिनों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे संभावित व्यापक शांति समझौते की शुरुआत के रूप में देख रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 11, 2026 0