रोम, एजेंसियां। इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से अगले सप्ताह इटली की राजधानी रोम में नई शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। यह बैठक 15 और 16 जुलाई को अमेरिकी मध्यस्थता में होगी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सुरक्षा और सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सीमा सुरक्षा और संघर्ष विराम पर होगी चर्चा वार्ता में दोनों पक्ष सीमा पर स्थायी शांति, संघर्ष विराम के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था और विवादित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेंगे। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और रोम में होने वाली बैठक को उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है। अमेरिका निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और सीमा पर हिंसा की घटनाओं को कम करना है। इटली सरकार ने भी इस वार्ता की मेजबानी का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। शांति प्रक्रिया पर टिकी दुनिया की नजर विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोम वार्ता सकारात्मक रहती है तो इजरायल-लेबनान सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दे अब भी लंबित हैं, इसलिए इस बातचीत को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच हुई इस बैठक को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन अहम मुद्दों पर बनी सहमति वार्ता में दोनों पक्षों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया, जो पूरे समझौता प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे विषयों पर अलग-अलग कार्य समूह बनाए जाएंगे। तकनीकी स्तर की वार्ता तुरंत शुरू करने पर भी सहमति बनी है, जो पूरे सप्ताह स्विट्जरलैंड में जारी रहेगी। होर्मुज और तेल आपूर्ति पर विशेष चर्चा बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचने के लिए सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहे प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने पर जोर लेबनान में युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखने के लिए ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का निर्णय लिया गया। इस तंत्र में लेबनान के साथ कतर और पाकिस्तान भी समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। हालांकि इस्राइल और हिजबुल्ला इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं। कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़े कदम वार्ता में शामिल सभी पक्षों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 60 दिनों में तय रोडमैप के अनुसार प्रगति होती है, तो परमाणु समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
बेरूत/तेल अवीव: इजराइल और हिजबुल्ला के बीच तनाव एक बार फिर हिंसक टकराव में बदल गया है। इजरायली सेना ने शुक्रवार (19 जून) को दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में हिजबुल्ला के ठिकानों पर रातभर हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्ला ने इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। संघर्ष में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। वहीं, इजराइल ने कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है और हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इजराइल के चार सैनिक भी मारे गए इजराइली सेना के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के दौरान एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत चार सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा एक विस्फोटक ड्रोन हमले में पांच सैनिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। बेका घाटी में भी सैन्य कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के अलावा इजरायली सेना ने पूर्वी बेका घाटी में भी कई ठिकानों पर हमले किए। सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हिजबुल्ला की सैन्य क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को कमजोर करना है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक हिजबुल्ला से उत्पन्न खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना लेबनान में अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। ईरान-अमेरिका वार्ता स्थगित इजराइल-हिजबुल्ला संघर्ष के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका वार्ता को स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना थी। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थ नई तारीख तय करने और वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। मौजूदा हालात ने हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्धविराम समझौते पर संकट हालिया समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। लेकिन जमीनी हालात इस समझौते की भावना के विपरीत दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं थमी, तो पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है। हॉर्मुज जलमार्ग खुलने से राहत इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के बाद हॉर्मुज जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से खुल गया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को राहत मिली है। युद्ध के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हो गई थी। इजराइल-हिजबुल्ला के बीच फिर बढ़ते संघर्ष ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंचा दिया है।
वॉशिंगटन/बेरूत: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित उच्चस्तरीय वार्ता फिलहाल टल गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया है। इस बीच इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है। ताजा घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान शांति पहल और पश्चिम एशिया में युद्धविराम की उम्मीदों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्साय समझौते के बाद भी नहीं रुके इजरायली हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में बुधवार को फ्रांस के वर्साय महल में अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक 14-सूत्रीय समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को रोकना और सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई समाप्त करना था। समझौते के कुछ ही घंटों बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में 16 लोगों के मारे जाने की खबर है। नेतन्याहू ने पीछे हटने से किया इनकार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगी। नेतन्याहू के इस रुख ने युद्धविराम और क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ता टली अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में तकनीकी स्तर की वार्ता प्रस्तावित थी। इस बैठक का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को करना था, लेकिन उन्होंने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया, जिसके बाद यह वार्ता अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई। व्हाइट हाउस ने बताई 'लॉजिस्टिक्स' समस्या व्हाइट हाउस ने जेडी वेंस का दौरा रद्द होने के पीछे व्यवस्थागत और लॉजिस्टिक्स संबंधी कारणों का हवाला दिया है। हिजबुल्लाह समर्थक मीडिया संस्थान अल-मायादीन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने लेबनान पर इजरायल के लगातार हो रहे हमलों के विरोध में अपने प्रतिनिधिमंडल को स्विट्जरलैंड भेजने से इनकार कर दिया है। इजरायल को जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी शांति समझौते के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इस समय दुनिया में केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे नेता हैं जो इजरायल के प्रति सबसे अधिक सहानुभूति रखते हैं। वेंस के बयान को इजरायल के आक्रामक सैन्य रुख पर अमेरिकी असंतोष और युद्ध रोकने के बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है। अधर में लटका 60 दिनों का युद्धविराम बुधवार को हुए समझौते के तहत कम-से-कम 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने पर सहमति बनी थी। लेकिन लेबनान में जारी इजरायली हमलों और स्विट्जरलैंड वार्ता के टलने से पूरा शांति समझौता संकट में पड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं रुकी, तो पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की यह बड़ी कूटनीतिक पहल पूरी तरह विफल हो सकती है। पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा अनिश्चितता का माहौल अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद लेबनान में जारी संघर्ष और इजरायल के सख्त रुख ने क्षेत्र में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकलेगा या पश्चिम एशिया एक बार फिर व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर दस्तखत किए। भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5 बजे इसके ऐलान के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया। होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई है। तय कार्यक्रम से पहले ही हुआ समझौता शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में इस पर दस्तखत कर दिए गए।
वॉशिंगटन: लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजराइली हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने इजराइल और ईरान दोनों को चेतावनी देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयास निर्णायक चरण में हैं और ऐसे समय में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “आज सुबह बेरूत पर हुआ हमला नहीं होना चाहिए था, खासकर ऐसे दिन जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बहुत करीब हैं।” ‘इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार, लेकिन जवाबी हमला बेमतलब था’ ट्रंप ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा और खतरों से बचाव का पूरा अधिकार है, लेकिन जिस घटना के जवाब में यह हमला किया गया, उसमें कोई घायल या हताहत नहीं हुआ था। ऐसे में इस तरह की सैन्य कार्रवाई की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, “इजराइल को अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन इस मामले में की गई जवाबी कार्रवाई बेमतलब थी।” ‘अब आगे कोई हमला नहीं होना चाहिए’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को पीछे हटना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न केवल इजराइल को लेबनान में आगे कोई हमला नहीं करना चाहिए, बल्कि हिज्बुल्ला और अन्य संगठनों को भी इजराइल के खिलाफ किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए। ट्रंप ने लिखा, “हम एक ऐसे समझौते के बेहद करीब हैं, जो लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में शांति ला सकता है। सभी पक्षों को पीछे हटना चाहिए। इजराइल को लेबनान में और हमले नहीं करने चाहिए और हिज्बुल्ला समेत किसी भी अन्य पक्ष को भी इजराइल पर हमला नहीं करना चाहिए।”
व्हाइट हाउस में बातचीत के बाद सीजफायर बढ़ाने की घोषणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष में लागू सीजफायर को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। यह फैसला व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद लिया गया बताया जा रहा है, जिसमें दोनों देशों के राजदूतों की मुलाकात भी शामिल थी। ट्रंप ने कहा कि बातचीत “सकारात्मक और सफल” रही, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में हिज़्बुल्लाह की भूमिका एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। दशकों बाद सीधी बातचीत, लेकिन तनाव अभी भी कायम रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पहली बार है जब इजरायल और लेबनान के बीच दशकों बाद सीधे कूटनीतिक बातचीत हुई है। दोनों देश औपचारिक रूप से लंबे समय से युद्ध की स्थिति में माने जाते रहे हैं। पहले लागू 10 दिनों के अस्थायी सीजफायर की समय सीमा सोमवार को खत्म होनी थी, लेकिन अब इसे तीन हफ्ते और बढ़ा दिया गया है। ट्रंप का बयान: “इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार है” व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि इजरायल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है, खासकर तब जब उस पर हमला हो। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए आगे भी बातचीत जारी रहेगी और अमेरिका इस प्रक्रिया में सहयोग करेगा। लेबनान और इजरायल के बीच शांति की उम्मीद लेबनान और इजरायल के राजनयिकों ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया है। लेबनान के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में प्रगति हो सकती है। लेबनान के नेतृत्व ने संकेत दिया है कि भविष्य की बातचीत में सीमा विवाद, सैनिकों की वापसी और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल होंगे। हिज़्बुल्लाह बना सबसे बड़ी चुनौती हालांकि, इस कूटनीतिक पहल के बीच हिज़्बुल्लाह एक प्रमुख बाधा के रूप में सामने है। संगठन ने अब तक इस बातचीत का हिस्सा बनने से इनकार किया है और किसी भी समझौते को मानने से भी इंकार किया है। इजरायल का कहना है कि जब तक हिज़्बुल्लाह का प्रभाव कम नहीं होता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति मुश्किल है। युद्ध और मानवीय संकट का गंभीर असर इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर लेबनान की जनता पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले युद्ध में हजारों लोगों की मौत हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा, लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है। शांति की दिशा में कदम, लेकिन चुनौतियां बरकरार इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत और सीजफायर विस्तार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, हिज़्बुल्लाह की भूमिका, क्षेत्रीय तनाव और पुराना युद्ध इतिहास इस प्रक्रिया को अभी भी जटिल बनाए हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।