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इजरायल और लेबनान के बीच अगले सप्ताह रोम में होगी नई शांति वार्ता, सीमा तनाव कम करने पर रहेगा फोकस

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Israel Lebanon Peace
Israel Lebanon Peace Talks

रोम, एजेंसियां। इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से अगले सप्ताह इटली की राजधानी रोम में नई शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। यह बैठक 15 और 16 जुलाई को अमेरिकी मध्यस्थता में होगी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सुरक्षा और सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

 

सीमा सुरक्षा और संघर्ष विराम पर होगी चर्चा

 

वार्ता में दोनों पक्ष सीमा पर स्थायी शांति, संघर्ष विराम के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था और विवादित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेंगे। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और रोम में होने वाली बैठक को उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है।

 

अमेरिका निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका

 

अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और सीमा पर हिंसा की घटनाओं को कम करना है। इटली सरकार ने भी इस वार्ता की मेजबानी का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

 

शांति प्रक्रिया पर टिकी दुनिया की नजर

 

विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोम वार्ता सकारात्मक रहती है तो इजरायल-लेबनान सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दे अब भी लंबित हैं, इसलिए इस बातचीत को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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PM मोदी पहुंचे इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर, बोले- यहां की हवा में संस्कृति की खुशबू; भारत करेगा जीर्णोद्धार में सहयोग

जकार्ता, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस ऐतिहासिक हिंदू मंदिर परिसर का भ्रमण करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि "इंडोनेशिया की हवा में संस्कृति की खुशबू है।" उन्होंने दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत बताते हुए इस विरासत स्थल के संरक्षण में भारत की भागीदारी पर गर्व जताया।   2029 तक पूरा होगा मंदिर का जीर्णोद्धार मंदिर परिसर के दौरे के बाद भारत और इंडोनेशिया ने संयुक्त बयान जारी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो ने वर्ष 2029 से पहले प्रम्बानन मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा करने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह परियोजना तय समय पर पूरी होगी और वे इसके पूर्ण होने पर फिर इंडोनेशिया आकर इस उपलब्धि का जश्न मनाएंगे। भारत इस संरक्षण और पुनरुद्धार परियोजना में तकनीकी और अन्य आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।   भारत-इंडोनेशिया के बीच कई अहम समझौते मंदिर दौरे से पहले दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), ब्रह्मोस मिसाइल, कृषि और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने भारतीय तकनीक पर आधारित अनुकूलित ईवीएम के निर्यात को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी।   इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर 10वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस भव्य मंदिर में भगवान विष्णु और ब्रह्मा के मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण की कथाओं को दर्शाने वाली उत्कृष्ट नक्काशी इसकी विशेष पहचान है। इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के अगले चरण के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना होंगे।

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दमिश्क धमाकों से दहला सीरिया, मैक्रों के होटल के बाहर ब्लास्ट, फ्रांस बोला- राष्ट्रपति सुरक्षित

दमिश्क, एजेंसियां। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ऐतिहासिक सीरिया दौरे के दौरान राजधानी दमिश्क में हुए दो बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धमाके उस समय हुए जब मैक्रों सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ राष्ट्रपति भवन में अहम बैठक कर रहे थे। सीरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, विस्फोटों में कम से कम चार लोग घायल हुए हैं, जबकि किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मैक्रों पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा।   होटल के पास हुए धमाके, जांच जारी रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों दमिश्क के फोर सीजन्स होटल में ठहरे हुए हैं। दोनों धमाके होटल के नजदीक हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि एक विस्फोटक कूड़ेदान में और दूसरा सड़क किनारे खड़ी कार में लगाया गया था। धमाकों के बाद घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता देखा गया और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक वाहन आग की लपटों में घिरा नजर आया। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं।   मैक्रों का दौरा क्यों है अहम? यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के सत्ता संभालने के बाद किसी बड़े यूरोपीय देश के प्रमुख की यह पहली सीरिया यात्रा है। मैक्रों ने सीरिया पर लगे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत दिलाने की पहल में भी अहम भूमिका निभाई है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच पुनर्निर्माण, आर्थिक सहयोग और विदेशी निवेश से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।   विश्लेषकों का मानना है कि धमाकों की घटना नई सीरियाई सरकार के लिए बड़ा सुरक्षा झटका है। वर्षों के गृहयुद्ध से तबाह सीरिया अभी भी अलग-अलग उग्रवादी गुटों की हिंसा से जूझ रहा है। सरकार देश में स्थिरता बहाल करने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय विश्वास हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ताजा धमाकों ने सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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सिंधु जल संधि पर फिर बौखलाया पाकिस्तान, सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत को दी चेतावनी

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने कहा है कि देश को मिलने वाले पानी के "वैध हिस्से" की रक्षा के लिए पाकिस्तान हर आवश्यक कदम उठाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। कोर कमांडर्स सम्मेलन में लिया गया फैसला पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में जल सुरक्षा समेत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि सरकार के निर्देशों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पाकिस्तान अपने हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। एनएससी के पुराने फैसले का दोहराया गया जिक्र बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) के फैसले का भी उल्लेख किया गया। उस बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि यदि उसके हिस्से का पानी रोका गया या उसका प्रवाह बदला गया, तो इसे "युद्ध जैसी कार्रवाई" माना जाएगा। हालांकि, भारत की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय भी शामिल था। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती रही है। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है। अफगानिस्तान को लेकर भी जताई चिंता कोर कमांडर्स सम्मेलन में अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा हुई। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि अफगान तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तान में हमलों के लिए कर रहे हैं और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। क्षेत्रीय तनाव बरकरार विश्लेषकों का मानना है कि सिंधु जल संधि और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव फिलहाल कम होने के संकेत नहीं हैं। दोनों देशों के बयानों से यह स्पष्ट है कि जल, सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में बने रह सकते हैं।  

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