Italy

US President Donald Trump speaks about Italian Prime Minister Giorgia Meloni during his Türkiye visit, highlighting differences over Iran policy.
ट्रंप ने बदले सुर, तुर्किए में इटली की पीएम मेलोनी की तारीफ भी की और नाराजगी भी जताई

Donald Trump on Giorgia Meloni: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्किए दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर बदले हुए तेवर दिखाए। उन्होंने मेलोनी को "अच्छा इंसान" बताया, लेकिन ईरान से जुड़े मुद्दे पर सहयोग नहीं मिलने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। ट्रंप के इस बयान को दोनों देशों के रिश्तों में आई हालिया तल्खी के बीच अहम माना जा रहा है। ट्रंप बोले- मेलोनी पसंद हैं, लेकिन उन्होंने गलती की तुर्किए की राजधानी अंकारा में ट्रंप ने कहा कि ईरान के मामले में मेलोनी के साथ उनके संबंध कुछ खराब हो गए थे क्योंकि उन्होंने अमेरिका की मदद करने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने कहा, "मैं उन्हें पसंद करता हूं। वह वास्तव में एक अच्छी इंसान हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने इस मामले में गलती की।" हाल के महीनों में बढ़ी थी दोनों नेताओं के बीच दूरी कुछ समय पहले तक जॉर्जिया मेलोनी को ट्रंप का करीबी सहयोगी माना जाता था, लेकिन पिछले महीने दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी के बाद रिश्तों में तनाव आ गया। ट्रंप ने दावा किया था कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई थी। मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत बताया था। इस विवाद के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया था। ईरान मुद्दे पर भी बढ़ा था विवाद ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए थे। जब ट्रंप ने पोप लियो की ईरान संबंधी टिप्पणी की आलोचना की थी, तब मेलोनी ने उनका विरोध किया। बाद में ट्रंप ने आरोप लगाया कि इटली ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी किया था पोस्ट हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जॉर्जिया मेलोनी की एक तस्वीर साझा की थी। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा था, "रोक लगाने वाले आदेश की ज़रूरत है।" हालांकि इटली सरकार ने इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि ट्रंप अक्सर सोशल मीडिया पर उकसाने वाले बयान देते हैं और इटली ने इस पर प्रतिक्रिया न देने का फैसला किया है। पहले भी अमेरिका को नहीं मिली थी इजाजत मार्च में इटली ने सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों को उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इटली का कहना था कि अमेरिका ने इस संबंध में पहले से आवश्यक अनुमति नहीं ली थी। ट्रंप के ताजा बयान के बाद माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में पैदा हुई कूटनीतिक दूरी को कम करने की कोशिश शुरू हो सकती है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Israel Lebanon Peace
इजरायल और लेबनान के बीच अगले सप्ताह रोम में होगी नई शांति वार्ता, सीमा तनाव कम करने पर रहेगा फोकस

रोम, एजेंसियां। इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से अगले सप्ताह इटली की राजधानी रोम में नई शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। यह बैठक 15 और 16 जुलाई को अमेरिकी मध्यस्थता में होगी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सुरक्षा और सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।   सीमा सुरक्षा और संघर्ष विराम पर होगी चर्चा   वार्ता में दोनों पक्ष सीमा पर स्थायी शांति, संघर्ष विराम के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था और विवादित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेंगे। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और रोम में होने वाली बैठक को उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है।   अमेरिका निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका   अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और सीमा पर हिंसा की घटनाओं को कम करना है। इटली सरकार ने भी इस वार्ता की मेजबानी का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।   शांति प्रक्रिया पर टिकी दुनिया की नजर   विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोम वार्ता सकारात्मक रहती है तो इजरायल-लेबनान सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दे अब भी लंबित हैं, इसलिए इस बातचीत को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to comments by US President Donald Trump during a media interaction in Rome.
'अमेरिका के सामने नहीं झुकेंगे', ट्रंप के आरोपों पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, कहा- साझेदारी बराबरी की होती है

  रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इटली और अमेरिका के संबंध बराबरी और साझेदारी पर आधारित हैं, न कि किसी के सामने झुकने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न तो अमेरिका विरोधी है और न ही किसी विदेशी नेता के दबाव में काम करती है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ऐसा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कर रही थीं। मेलोनी ने दिया जवाब एक इटैलियन समाचार संस्थान को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "मैं न पहले किसी के सामने झुकी थी और न आगे झुकूंगी। अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत साझेदारी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ताकत उनकी एकजुटता में है और उन्होंने हमेशा इसी सोच के साथ काम किया है। 'लोकप्रियता विदेश नीति से तय नहीं होती' मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी लोकप्रियता अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने की वजह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर आधारित है कि उनकी सरकार इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा इटली के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहूंगी।" सैन्य समझौतों पर भी दिया बयान इटली की प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इटली के बीच मौजूद सैन्य समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े समझौतों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। ट्रंप को अप्रत्यक्ष संदेश मेलोनी ने बिना नाम लिए ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता को लेकर किसी और को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और बेहतर होगा कि हर नेता अपने काम पर ध्यान दे। अमेरिका दौरा भी टला इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया। सरकार की ओर से दौरा रद्द करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni addresses reporters amid controversy over Italy's role during the Iran conflict.
NATO चीफ के बयान से इटली में सियासी बवाल, PM जॉर्जिया मेलोनी ने दी सफाई; ईरान को भी कराया फोन

  रोम: ईरान संघर्ष के दौरान इटली की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और NATO महासचिव मार्क रुटे के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। रुटे के एक बयान के बाद इटली की राजनीति में हलचल मच गई, जिसके बाद मेलोनी सरकार को लगातार सफाई देनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और NATO प्रमुख के बयान से देश की भूमिका को लेकर गलत संदेश गया। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इटली और प्रधानमंत्री मेलोनी की आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में रोम ने अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए विदेश मंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक को सामने उतार दिया। कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब NATO महासचिव मार्क रुटे ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि ईरान संघर्ष के दौरान इटली ने लगभग 500 अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रुटे के इस बयान के बाद इटली में विपक्षी दलों ने मेलोनी सरकार को घेर लिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार लगातार यह दावा करती रही कि इटली युद्ध से दूर रहा, जबकि NATO प्रमुख का बयान कुछ और कहानी बता रहा है। मेलोनी बोलीं- इटली युद्ध का हिस्सा नहीं था फ्रांस-इटली शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इटली ने केवल अमेरिका के साथ पहले से मौजूद द्विपक्षीय समझौतों के तहत तकनीकी और लॉजिस्टिक सहयोग दिया था। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि इटली की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर सीधे हमले करने के लिए किया गया। मेलोनी ने कहा कि अगर इटली वास्तव में युद्ध का हिस्सा होता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इटली के सहयोग को लेकर नाराजगी जाहिर नहीं करते। NATO प्रमुख पर साधा निशाना मेलोनी ने कहा कि मार्क रुटे ने अलग-अलग तरह की सैन्य उड़ानों और तकनीकी सहयोग को एक साथ जोड़कर पेश किया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि संभव है कि NATO प्रमुख आगामी शिखर सम्मेलन से पहले सहयोगी देशों की एकजुटता दिखाना चाहते हों, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। ईरान से सीधे की गई बातचीत विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की। ताजानी ने ईरान को भरोसा दिलाया कि इटली किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था और उसने अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी। इसके साथ ही उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की अपील की ताकि वहां फंसे इटली के व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सके। रक्षा मंत्री ने भी पेश किए आंकड़े इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के दौरान सिगोनेला और एवियानो सैन्य ठिकानों से हुई उड़ानों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इसके आधिकारिक आंकड़े मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक भी किया जा सकता है। NATO ने भी दी सफाई विवाद बढ़ने के बाद NATO की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया। NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने कहा कि मार्क रुटे का बयान केवल तकनीकी और लॉजिस्टिक सुविधाओं के संदर्भ में था। उनका आशय यह बिल्कुल नहीं था कि इटली ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमलों में भाग लिया। ईरान का कड़ा रुख इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि यदि कोई देश किसी तीसरे देश को किसी अन्य राष्ट्र पर हमला करने के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराता है, तो उसे भी आक्रामक कार्रवाई माना जाना चाहिए। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि NATO प्रमुख के बयान में इटली और रोमानिया का नाम स्पष्ट रूप से लिया गया था। ट्रंप लगातार कर रहे हैं इटली की आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से इटली के रुख की लगातार आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय सहयोगियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के अमेरिकी प्रयासों में पर्याप्त सहयोग नहीं दिया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने रनवे और लैंडिंग स्ट्रिप के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिससे अमेरिकी लॉजिस्टिक व्यवस्था प्रभावित हुई। G7 सम्मेलन के बाद और बढ़ी दूरी हालिया G7 शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई। ट्रंप ने दावा किया था कि जॉर्जिया मेलोनी उनके साथ बार-बार तस्वीर खिंचवाना चाहती थीं और इटली में उनकी लोकप्रियता लगातार घट रही है। मेलोनी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता से रिश्तों पर नहीं, बल्कि इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर आधारित है। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों को "पूरी तरह मनगढ़ंत और अनावश्यक" बताया। क्यों अहम है यह विवाद? यह विवाद केवल इटली और NATO के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ईरान संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों के भीतर मौजूद मतभेद भी सामने आए हैं। एक ओर NATO सहयोगी देशों की एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इटली अपनी छवि को युद्ध से दूर रखने और ईरान के साथ राजनयिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Donald Trumph G7
जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे ट्रंप, वैश्विक मुद्दों पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जाएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब ईरान को लेकर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित यूएफसी विश्व चैंपियनशिप मुकाबलों में शामिल होने के बाद सीधे फ्रांस रवाना होंगे। उन्होंने इस आयोजन को अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक बताया। पश्चिम एशिया को लेकर बढ़े हैं मतभेद हाल के दिनों में ट्रंप ने Germany, France और United Kingdom जैसे प्रमुख सहयोगी देशों की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि ये देश पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का पर्याप्त समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शुरुआत में उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रंप कई वैश्विक नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें United States, Canada, France, Germany, Italy, Japan और United Kingdom शामिल हैं। इसके अलावा European Union भी इस समूह का हिस्सा है। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसके फैसले आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Unknown जून 4, 2026 0
Donald Trump speaks amid NATO tensions over Iran, with US troop cuts in Italy and Spain under discussion
ईरान जंग पर सहयोग न मिलने से भड़के ट्रंप: इटली-स्पेन से अमेरिकी फौज हटाने की चेतावनी, NATO में बढ़ी हलचल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अपने ही सहयोगी देशों पर सख्त रुख अपना लिया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इटली और स्पेन में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम कर सकते हैं। इस बयान के बाद नाटो के भीतर हलचल तेज हो गई है। “साथ नहीं देंगे तो क्यों रखें फौज?” ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि अगर सहयोगी देश ईरान मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं देते, तो वहां अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी पर सवाल उठना लाजिमी है। उन्होंने कहा, “शायद मैं ऐसा करूंगा… आखिर क्यों नहीं?” ट्रंप का आरोप है कि: इटली ने ईरान संकट में कोई खास सहयोग नहीं किया स्पेन का रवैया “बहुत खराब” रहा ईरान जंग से बढ़ी दरार यह विवाद तब गहराया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। नाटो के कई सदस्य देश इस युद्ध में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं, जिससे ट्रंप नाराज हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सहयोगी देश खासतौर पर: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करें समुद्री सुरक्षा और तेल सप्लाई बहाल करने में भूमिका निभाएं यूरोप में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ताजा आंकड़ों (31 दिसंबर 2025) के अनुसार: जर्मनी: 36,436 अमेरिकी सैनिक इटली: 12,662 सैनिक स्पेन: 3,814 सैनिक ट्रंप का कहना है कि ये देश अपनी रक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे और अमेरिका पर निर्भर हैं। मेलोनी पर सीधा हमला ट्रंप ने जॉर्जिया मेलोनी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मेलोनी में ईरान मामले पर “साहस की कमी” है। वहीं, स्पेन को लेकर नाराजगी इतनी ज्यादा बताई जा रही है कि कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिका द्वारा उसे नाटो से बाहर करने के विकल्पों पर विचार की बात कही गई है (हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है)। जर्मनी से भी टकराव ट्रंप ने फ्रेडरिक मर्ज पर भी सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जर्मनी को दूसरे देशों के मामलों में टिप्पणी करने के बजाय अपने देश की ऊर्जा और इमिग्रेशन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। जर्मन नेतृत्व ने हालांकि साफ किया है कि: वे अमेरिका के साथ साझेदारी बनाए रखना चाहते हैं लेकिन सैन्य कार्रवाई के तरीके पर उनके अलग विचार हो सकते हैं यूरोप की प्रतिक्रिया जोहान वेडफुल ने कहा कि वे अमेरिकी सैनिकों की संभावित कटौती के लिए तैयार हैं और इस मुद्दे पर नाटो के भीतर चर्चा जारी है। यूरोपीय देशों का रुख फिलहाल संतुलन बनाए रखने का है–वे अमेरिका से दूरी भी नहीं बनाना चाहते और युद्ध में सीधे कूदने से भी बच रहे हैं। वैश्विक असर: तेल और बाजार पर दबाव ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण: वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है कीमतों में तेजी देखी जा रही है ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ी है इसके अलावा स्पेन ने गाजा के लिए जा रहे सहायता जहाजों को रोकने पर इजरायल की आलोचना भी की है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद और बढ़ गए हैं। क्या बदल सकता है NATO समीकरण? यह पूरा घटनाक्रम नाटो के अंदर नई दरारों की ओर इशारा करता है। अगर अमेरिका सच में यूरोप से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करता है, तो: यूरोप को अपनी सुरक्षा रणनीति बदलनी पड़ेगी नाटो की एकजुटता पर असर पड़ सकता है वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव आ सकता है

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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