वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एंड्रयू टेट और ट्रिस्टन टेट के ब्रिटेन प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। व्हाइट हाउस की ओर से यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि ट्रंप प्रशासन दोनों भाइयों को कानूनी राहत दिलाने की कोशिश कर सकता है। व्हाइट हाउस ने अफवाहों पर लगाया विराम व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से जब प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप या उनका प्रशासन टेट ब्रदर्स के प्रत्यर्पण को रोकने के लिए हस्तक्षेप करेगा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— "नहीं।" इसके साथ ही उन्होंने इस विषय पर चल रही तमाम अटकलों को खारिज कर दिया। मार्को रुबियो ने भी बनाई दूरी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि इस मामले में सरकार की फिलहाल कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मामला अमेरिकी अदालतों की कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है और प्रशासन उसका सम्मान करेगा। रुबियो के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि लागू है और उसी के अनुरूप प्रक्रिया चलेगी। क्या हैं टेट ब्रदर्स पर आरोप? ब्रिटेन ने एंड्रयू और ट्रिस्टन टेट पर बलात्कार, यौन तस्करी, मानव तस्करी और महिलाओं के शोषण सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ब्रिटिश अभियोजन पक्ष ने हाल ही में दोनों भाइयों के खिलाफ दर्जनों नए आरोप जोड़े हैं, जिसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें मियामी में हिरासत में लिया। दोनों भाई इन सभी आरोपों से इनकार कर रहे हैं और अपने प्रत्यर्पण का अदालत में विरोध कर रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा अंतिम फैसला अमेरिकी अदालत पहले यह तय करेगी कि प्रत्यर्पण संधि की सभी कानूनी शर्तें पूरी होती हैं या नहीं। यदि अदालत प्रत्यर्पण को मंजूरी देती है, तो अंतिम प्रशासनिक निर्णय अमेरिकी विदेश विभाग के स्तर पर होगा। हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। राजनीतिक चर्चाएं भी तेज टेट ब्रदर्स को ट्रंप समर्थक माना जाता रहा है और अमेरिकी मीडिया में यह चर्चा भी रही कि उन्होंने ट्रंप परिवार के कुछ सदस्यों से संपर्क बनाने की कोशिश की थी। इसी कारण यह मामला कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। हाल ही में कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने संभावित राजनीतिक प्रभाव की जांच की मांग भी उठाई है।
मुंबई/सैन डिएगो, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' के ग्लोबल लॉन्च के लिए अमेरिका के सैन डिएगो कॉमिक-कॉन (SDCC) 2026 पहुंच गए हैं। उनके साथ फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे अभिनेता यश, निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा भी इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कॉमिक-कॉन में होगा फिल्म का पहला ग्लोबल प्रेजेंटेशन 'रामायण' का पहला ग्लोबल प्रेजेंटेशन और एक्सक्लूसिव फुटेज सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में दिखाया जाएगा। इसके बाद फिल्म का ट्रेलर 24 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ किया जाएगा। यह पहली बार है जब किसी भारतीय पौराणिक फिल्म को कॉमिक-कॉन जैसे वैश्विक मंच पर इतने बड़े स्तर पर पेश किया जा रहा है। फैंस में जबरदस्त उत्साह रणबीर कपूर के अमेरिका रवाना होने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। फैंस फिल्म के ग्लोबल लॉन्च को लेकर काफी उत्साहित हैं और सोशल मीडिया पर 'राम आ रहे हैं' जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स और स्टारकास्ट को लेकर भी दर्शकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। भारतीय सिनेमा के लिए अहम मौका फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में 'रामायण' की प्रस्तुति भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। बड़े बजट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक से बनी इस फिल्म से निर्माताओं को दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंच बनाने की उम्मीद है।
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। चाबहार पोर्ट भी बना निशाना ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि पिछले एक सप्ताह में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कंट्रोल टावर को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर टावर की तस्वीर साझा की है। ईरान की चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जमीनी हमला किया गया तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिए जाने की भी खबरें हैं। उधर, कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की भी जानकारी सामने आई है। तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। एहतियात के तौर पर भारत ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती फिलहाल रोक दी है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में अमेरिका महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर रहा है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हालिया हमलों में 40 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चिंताएं और गहरा गई हैं।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जल्द बातचीत की मेज पर नहीं लौटता, तो अमेरिका अगले चरण में ईरान के पावर प्लांट, पुल और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हो जाता। 'समझौता करो, नहीं तो हालात और खराब होंगे' एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अगले हफ्ते हालात उनके लिए और खराब होंगे। हम उनके सभी पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाएंगे, अगर वे बातचीत के लिए नहीं आते।" उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी प्रतिनिधि अभी भी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अब फैसला तेहरान को करना होगा। होर्मुज संकट के बीच बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू की है, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता ट्रंप के इस बयान के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि यदि ऊर्जा ढांचे और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले होते हैं, तो पश्चिम एशिया का संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हस्तक्षेप और विदेशी जहाजों की गतिविधियों के कारण उसने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका का जवाबी हमला, 140 ठिकाने बने निशाना अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीन दिनों तक चले अभियान में करीब 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, तटीय रडार, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और कई सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए की गई। ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई जगह धमाकों की खबरें सामने आईं और क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।
रोम, एजेंसियां। इजरायल और लेबनान के बीच सीमा पर जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से अगले सप्ताह इटली की राजधानी रोम में नई शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। यह बैठक 15 और 16 जुलाई को अमेरिकी मध्यस्थता में होगी, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सुरक्षा और सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सीमा सुरक्षा और संघर्ष विराम पर होगी चर्चा वार्ता में दोनों पक्ष सीमा पर स्थायी शांति, संघर्ष विराम के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था और विवादित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विचार करेंगे। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और रोम में होने वाली बैठक को उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है। अमेरिका निभाएगा मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना और सीमा पर हिंसा की घटनाओं को कम करना है। इटली सरकार ने भी इस वार्ता की मेजबानी का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। शांति प्रक्रिया पर टिकी दुनिया की नजर विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोम वार्ता सकारात्मक रहती है तो इजरायल-लेबनान सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कई संवेदनशील मुद्दे अब भी लंबित हैं, इसलिए इस बातचीत को चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वॉशिंगटन,एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत के दौरान जल्द अमेरिका में मुलाकात करने पर सहमति जताई है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में ईरान, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय सहयोग प्रमुख मुद्दे रहेंगे। ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा रहेगा मुख्य एजेंडा सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देश पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे। अमेरिका-इजरायल संबंधों को मिलेगी नई दिशा हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई थीं, लेकिन ताजा बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। माना जा रहा है कि यह बैठक क्षेत्रीय कूटनीति और भविष्य की संयुक्त रणनीति तय करने में अहम साबित हो सकती है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है। श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है। टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
दुबई, एजेंसियां। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक व्यापारिक जहाज और तेल टैंकर पर ड्रोन एवं प्रोजेक्टाइल हमलों की घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक फिर गहरा गया है। इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद बढ़ी सैन्य गतिविधियां रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जबकि इससे पहले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, वहीं ईरान ने अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। वैश्विक तेल बाजार पर असर की आशंका होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर असर पड़ सकता है। बहरीन और खाड़ी देशों ने बढ़ाई सतर्कता ड्रोन हमलों के बाद बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बहरीन ने अपने क्षेत्र में ड्रोन हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। वहीं समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। युद्धविराम पर भी मंडराया संकट अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम पर भी इस ताजा घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगने की आशंका बढ़ गई है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। इस संभावना का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी कर रहा है। व्यापार समझौते को मिल सकता है अंतिम रूप मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित भारत यात्रा के दौरान इस पर बड़ा ऐलान हो सकता है। भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। जी-7 बैठक के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। इसके बाद व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत में भी तेजी आई है। अभी आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हालांकि, व्हाइट हाउस या भारत सरकार की ओर से ट्रंप की यात्रा की अंतिम तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने केवल इतना कहा है कि यात्रा की तैयारी पर काम चल रहा है और समय तय होने पर औपचारिक घोषणा की जाएगी।
दुनिया के सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली विमानों में शुमार अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रतिष्ठित विमान SAM 29000 (बोइंग VC-25A) अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। करीब 35 वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सेवा करने के बाद इस दिग्गज विमान को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया गया है। जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति इस विमान में सवार होते थे, तब इसका कॉल साइन ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) हो जाता था। तीन दशकों से अधिक समय तक यह विमान अमेरिकी शक्ति, कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपतियों के हवाई सफर में नए युग की शुरुआत SAM 29000 की विदाई के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई सफर में एक नए और अत्याधुनिक दौर की शुरुआत होने जा रही है। इस विमान की जगह अब विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया Boeing 747-8 लेने जा रहा है, जिसे सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं के लिहाज से कहीं अधिक आधुनिक माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नया विमान इसी वर्ष राष्ट्रपति के बेड़े में शामिल होकर अपनी सेवाएं शुरू कर सकता है। 35 वर्षों तक अमेरिकी ताकत का प्रतीक रहा ‘एयर फोर्स वन’ SAM 29000 सिर्फ एक विमान नहीं था, बल्कि अमेरिकी शक्ति और वैश्विक प्रभाव का चलता-फिरता प्रतीक था। इस विमान ने दुनिया की कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों, अंतरराष्ट्रीय संकटों और ऐतिहासिक समझौतों का मूक गवाह बनकर अपनी भूमिका निभाई। यह विमान राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर बन जाता था, जिसमें अत्याधुनिक संचार प्रणाली, सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन संचालन की सुविधाएं मौजूद थीं। कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों का बना हमसफर इस प्रतिष्ठित विमान ने अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों को दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं पर सुरक्षित पहुंचाया। इनमें शामिल हैं: George H. W. Bush Bill Clinton George W. Bush Barack Obama Donald Trump Joe Biden इन राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में यह विमान कई वैश्विक संकटों, शांति वार्ताओं और ऐतिहासिक समझौतों का हिस्सा रहा। अब कौन संभालेगा कमान? SAM 29000 के रिटायर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया नया बोइंग 747-8 विमान उसकी जगह लेगा। अधिकारियों का दावा है कि नया विमान सुरक्षा, संचार, रक्षा प्रणाली और परिचालन क्षमताओं के मामले में अपने पूर्ववर्ती विमान से कई गुना अधिक उन्नत होगा। नए विमान में अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा, मिसाइल-रोधी तकनीक, सुरक्षित संचार नेटवर्क और लंबी दूरी की परिचालन क्षमता जैसी सुविधाएं होंगी। एक युग का अंत करीब साढ़े तीन दशक तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सुरक्षित आसमान की सैर कराने वाला SAM 29000 अब हमेशा के लिए सेवा से बाहर हो गया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया है और तकनीक तथा सुरक्षा के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। ‘एयर फोर्स वन’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह विमान आने वाले वर्षों में अमेरिकी इतिहास और राष्ट्रपतिीय कूटनीति के सबसे प्रतिष्ठित प्रतीकों में गिना जाएगा।
पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर दस्तखत किए। भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5 बजे इसके ऐलान के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया। होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई है। तय कार्यक्रम से पहले ही हुआ समझौता शांति समझौते पर 19 जून को जेनेवा के पास लूसर्न शहर में साइन होने थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में इस पर दस्तखत कर दिए गए।
न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत और प्रभावशाली समझौता होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही ऐसा समझौता हो सकता है जो सैन्य कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी साबित होगा। न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो ईरान के खिलाफ व्यापक बमबारी अभियान चला सकता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार मार्गों पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध की तुलना में हस्ताक्षरित समझौता अधिक स्थायी और मजबूत परिणाम देगा। ‘बमबारी नहीं, समझौता बेहतर विकल्प’ ट्रंप ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है, जिसे वे टालना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक औपचारिक समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है। नाकेबंदी को बताया सबसे प्रभावी हथियार अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। उनके अनुसार, यही दबाव तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहा है। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी कई मामलों में बमबारी से भी अधिक प्रभावशाली साबित हुई है और ईरान अब समझौते के लिए मजबूर होता दिख रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से भी बातचीत कर संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
तेल अवीव, एजेंसियां। अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि ईरान जंग की वजह से दुनिया में ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगेः इस छूट के तहत देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे बाजार में ऑयल सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद मिलेगी। जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता बढ़ गई है। यह है अमेरिकी शर्तः अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह इजाजत सिर्फ उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।