शेयर बाजार गिरावट

Stock market screen showing Sensex Nifty fall with Indian rupee strengthening against dollar
छठे हफ्ते भी गिरावट में शेयर बाजार, लेकिन रुपये की दमदार वापसी ने संभाला माहौल

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार छठे सप्ताह भी जारी रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार दबाव में रहा। हालांकि, हफ्ते के अंत में रुपये की मजबूती और कुछ सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन ने नुकसान को सीमित करने में मदद की। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट इस सप्ताह BSE Sensex 263.67 अंक यानी 0.35% गिरकर 73,319.55 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 106.5 अंक यानी 0.46% की कमजोरी के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा और निवेशकों में सतर्कता बनी रही। किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी? सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे: Nifty Healthcare और Nifty Pharma में 3% से ज्यादा की गिरावट Nifty Auto, PSU Bank, Private Bank और Consumer Durables में करीब 1% की कमजोरी वहीं, कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा दिया: Nifty IT, Metal और Defence इंडेक्स में 2–3% की बढ़त किन कंपनियों को हुआ फायदा-नुकसान? इस सप्ताह Bharti Airtel में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट Sun Pharmaceutical Industries, NTPC Limited और ICICI Bank में भी गिरावट वहीं दूसरी ओर: Tata Consultancy Services Infosys Limited Bharat Electronics Limited इन कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल BSE Smallcap इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त कुछ शेयरों में 10–20% तक की तेजी देखी गई BSE Midcap इंडेक्स 0.5% गिरा, जिसमें कई फाइनेंशियल और ऑटो स्टॉक्स दबाव में रहे रुपये की ऐतिहासिक वापसी इस हफ्ते भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की। सोमवार को यह पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था लेकिन हफ्ते के अंत तक 171 पैसे मजबूत होकर 93.10 पर बंद हुआ यह पिछले 12 वर्षों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली Foreign Institutional Investors ने सातवें हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी इस दौरान ₹29,425 करोड़ के शेयर बेचे वहीं Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹29,274 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Indian stock market crash with Sensex and Nifty falling sharply as HDFC Bank shares tumble
शेयर बाजार में भारी गिरावट: HDFC Bank में बड़ी टूट, तेल की कीमत और Fed के रुख से बढ़ा दबाव

सुबह खुलते ही बाजार में मचा हड़कंप गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 2.24% टूटकर 23,245 के स्तर पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 2.33% गिरकर 74,906 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। HDFC Bank में भारी गिरावट, बाजार पर पड़ा असर इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह HDFC Bank के शेयर में आई तेज गिरावट रही। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर में करीब 8.6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो दो साल में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि “गवर्नेंस और पारदर्शिता” को लेकर उठे सवालों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर सीधा असर पड़ा। तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। फेडरल रिजर्व के ‘हॉकिश’ रुख का असर फेडरल रिजर्व ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन उसका सख्त (हॉकिश) रुख बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों (जैसे भारत) से कम हो सकता है। सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली- बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में करीब 3% की गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 2% की कमजोरी कुल 16 के 16 सेक्टर लाल निशान में बंद ग्लोबल संकेत भी रहे कमजोर एशियाई बाजारों में भी करीब 2.3% की गिरावट आई, जो अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी का असर है। वैश्विक स्तर पर निवेशक बढ़ती तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से चिंतित हैं। L&T समेत कई शेयर दबाव में मिडिल ईस्ट में कारोबार रखने वाली लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में भी करीब 3.5% की गिरावट आई, क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इसके बिजनेस पर असर पड़ने की आशंका है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सख्ती निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा रही है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Indian stock market graph showing sharp fall in Sensex and Nifty amid global geopolitical tensions.
चार साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट: शेयर बाजार धड़ाम, रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर

  पश्चिम एशिया में तनाव का असर, बाजार में भारी बिकवाली पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने बाजार के माहौल को और नकारात्मक बना दिया। नतीजतन, घरेलू शेयर बाजार ने लगभग चार वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी।   सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट सप्ताह के दौरान BSE सेंसेक्स में 5.51 प्रतिशत यानी 4,354.98 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 भी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। पूरे सप्ताह में केवल मंगलवार को बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी सभी कारोबारी सत्रों में सूचकांक दबाव में रहे।   स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में इस सप्ताह करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इस दौरान Aqylon Nexus, Silver Touch Technologies, SEPC, InfoBeans Technologies, Amber Enterprises India, PG Electroplast, Yasho Industries, Sapphire Foods India, Capacite Infraprojects, Sunteck Realty, Rain Industries, Dynamatic Technologies और Precision Wires India जैसे कई शेयरों में 22 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी रही। Confidence Petroleum, Chemplast Sanmar, Jindal Poly Films, Happiest Minds Technologies, Apollo Pipes, Liberty Shoes और TTK Prestige जैसे शेयरों में 15 से 22 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।   लार्जकैप और मिडकैप कंपनियों पर भी असर BSE लार्जकैप इंडेक्स में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट रही। इस दौरान Polycab India, IDBI Bank, Larsen & Toubro, TVS Motor Company, UltraTech Cement, Mahindra & Mahindra, Eicher Motors, IndusInd Bank, Maruti Suzuki India, Varun Beverages और Tata Motors के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आई। वहीं BSE मिडकैप इंडेक्स भी 4.5 प्रतिशत कमजोर रहा। इस दौरान KEI Industries, Bharat Forge, Ashok Leyland, Schaeffler India, Colgate Palmolive India, Ramco Cements, IDFC First Bank, Godrej Industries और APL Apollo Tubes के शेयरों में 10–15 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई। दूसरी ओर Premier Energies, LT Technology Services, Aurobindo Pharma, Ipca Laboratories, Suzlon Energy और Dixon Technologies जैसे कुछ शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई।   सेक्टरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स इस सप्ताह लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। निफ्टी ऑटो: 10.6% गिरावट निफ्टी PSU बैंक: 7.2% गिरावट निफ्टी डिफेंस: 7% गिरावट निफ्टी प्राइवेट बैंक: 7% गिरावट निफ्टी मेटल: 6% गिरावट   विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार चौथे सप्ताह भी बिकवाली करते रहे। इस दौरान उन्होंने करीब 35,052 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और उन्होंने लगभग 37,739 करोड़ रुपये की खरीदारी की।   रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर हुआ और शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। सप्ताह के अंत में रुपया 92.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो एक सप्ताह पहले 91.74 के स्तर पर था।   आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Stock market screen showing Sensex crash and Nifty fall below 23,600 amid global market pressure
Share Market Crash: सेंसेक्स 950 अंक टूटा, निफ्टी 23,600 के नीचे; इन 6 कारणों से बाजार में हाहाकार

  भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 950 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि Nifty 50 लगभग 300 अंक गिरकर 23,600 के नीचे पहुंच गया। सुबह करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 946 अंक (1.2%) गिरकर 75,918 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 296 अंक टूटकर 23,571 के स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 1.5% तक गिर गए। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में देखने को मिला।   1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। Brent Crude Oil का भाव करीब 9% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं West Texas Intermediate का दाम भी लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे ऑयल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।   2. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। उन्होंने बुधवार को करीब 6,267 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि मार्च महीने में अब तक करीब 39,100 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 4,965 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन इससे बाजार को ज्यादा सहारा नहीं मिल सका।   3. कमज़ोर ग्लोबल संकेत गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी कमज़ोरी रही। Dow Jones Industrial Average करीब 0.61% गिरकर बंद हुआ, जबकि S&P 500 में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे भारतीय बाजार पर भी दबाव बढ़ा।   4. ग्लोबल ट्रेड को लेकर चिंता अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ नई “अनफेयर ट्रेड” जांच शुरू की है। माना जा रहा है कि यह कदम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की टैरिफ नीति को फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में उठाया गया है। इससे वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।   5. रुपये में कमज़ोरी भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 30 पैसे गिरकर 92.34 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ सकती है।   6. इंडिया VIX में उछाल बाजार का ‘डर का पैमाना’ माने जाने वाला India VIX करीब 6% बढ़कर 22.32 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और घबराहट बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Stock market screen showing airline and paint stocks falling after crude oil prices surge above $115
कच्चे तेल का बड़ा झटका: इंडिगो, स्पाइसजेट और एशियन पेंट्स के शेयर 8% तक गिरे, बाजार में बढ़ी घबराहट

  115 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, क्रूड-संवेदनशील कंपनियों पर दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। सोमवार को 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे तेल के दाम के कारण उन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई जो सीधे तौर पर क्रूड ऑयल या उससे जुड़े कच्चे माल पर निर्भर हैं। सबसे ज्यादा असर एयरलाइन, टायर और पेंट कंपनियों पर पड़ा। शुरुआती कारोबार में InterGlobe Aviation (इंडिगो), SpiceJet और Asian Paints के शेयरों में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई।   एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से विमानन कंपनियों के लिए ईंधन लागत काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से एयरलाइन सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली। इंडिगो का शेयर 7% से ज्यादा टूट गया स्पाइसजेट के शेयर में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का हिस्सा काफी बड़ा होता है, इसलिए तेल महंगा होते ही निवेशक इन कंपनियों से दूरी बनाने लगते हैं।   टायर और पेंट कंपनियों पर भी असर कच्चे तेल से बनने वाले रसायनों पर निर्भर कंपनियों में भी दबाव देखा गया। JK Tyre का शेयर करीब 6.5% गिरा Apollo Tyres लगभग 4% नीचे आ गया पेंट सेक्टर में भी बिकवाली रही। Asian Paints में 4% से ज्यादा गिरावट Berger Paints, Kansai Nerolac और Akzo Nobel India के शेयर भी 3–4% तक फिसल गए।   शेयर बाजार में भारी गिरावट सुबह करीब 9:25 बजे तक बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex लगभग 2,401 अंक यानी करीब 3.04% गिरकर 76,517 पर पहुंच गया Nifty 50 करीब 727 अंक टूटकर 23,723 के स्तर पर आ गया NSE पर बाजार की स्थिति भी बेहद कमजोर रही। करीब 2,600 से अधिक शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ लगभग 537 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे।   मध्य पूर्व तनाव से बढ़ा तेल संकट तेल की कीमतों में यह तेज उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद आया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई।   विशेषज्ञों ने बताया बड़ा आर्थिक झटका Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार कच्चे तेल में आई यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।   बाजार में बढ़ी घबराहट इस बीच बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी 20% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो ईंधन और पेट्रोकेमिकल पर निर्भर सेक्टरों के शेयरों में दबाव जारी रह सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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