Samsung India के प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन Samsung Galaxy S26 Ultra पर बड़ा प्राइस कट देखने को मिला है। लॉन्च के कुछ समय बाद ही इस हाई-एंड स्मार्टफोन की कीमत में भारी कमी की गई है। बैंक ऑफर्स और इंस्टैंट कैशबैक जोड़ने के बाद इसकी प्रभावी कीमत और भी कम हो रही है। ऐसे में जो यूजर्स लंबे समय से Samsung की Ultra सीरीज खरीदने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह डील काफी आकर्षक मानी जा रही है। लॉन्च कीमत से 9 हजार रुपये तक सस्ता Samsung Galaxy S26 Ultra को भारत में 1,39,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। अब इसका 256GB वेरिएंट Vijay Sales पर 1,30,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। यानी लॉन्च प्राइस की तुलना में सीधे 9 हजार रुपये तक की कटौती देखने को मिल रही है। इसके अलावा चुनिंदा बैंक कार्ड्स पर 4,500 रुपये तक का इंस्टैंट कैशबैक भी दिया जा रहा है। इस ऑफर के बाद इसकी प्रभावी कीमत करीब 1,26,999 रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि अंतिम कीमत बैंक ऑफर, स्टॉक और शहर के हिसाब से अलग हो सकती है। प्रीमियम डिस्प्ले और डिजाइन फोन में 6.9 इंच का Dynamic LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। इससे स्क्रॉलिंग, वीडियो और गेमिंग का एक्सपीरियंस काफी स्मूद हो जाता है। पतले बेजल्स और बड़ी स्क्रीन इसे प्रीमियम लुक देते हैं। कंपनी ने इस बार फोन में प्राइवेसी डिस्प्ले फीचर भी जोड़ा है, जिससे आसपास बैठे लोग स्क्रीन पर मौजूद निजी कंटेंट आसानी से नहीं देख पाते। Snapdragon 8 Elite Gen 5 से दमदार परफॉर्मेंस Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर के साथ आने वाला यह स्मार्टफोन कंपनी के सबसे पावरफुल एंड्रॉयड फोन्स में गिना जा रहा है। फोन 16GB तक रैम सपोर्ट के साथ आता है, जिससे मल्टीटास्किंग, हाई-एंड गेमिंग और AI फीचर्स का अनुभव बेहतर हो जाता है। 200MP कैमरा बना सबसे बड़ा आकर्षण इस फ्लैगशिप फोन का कैमरा सेटअप इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। इसमें 200MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। इसके अलावा 10MP टेलीफोटो और 50MP पेरिस्कोप कैमरा भी मिलता है। लो-लाइट फोटोग्राफी, 8K वीडियो रिकॉर्डिंग और AI कैमरा फीचर्स इसे कंटेंट क्रिएटर्स और मोबाइल फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए खास बनाते हैं। प्राइस कट के बाद Galaxy S26 Ultra एक बार फिर प्रीमियम एंड्रॉयड स्मार्टफोन सेगमेंट में चर्चा का केंद्र बन गया है।
Vivo ने अपने प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन Vivo X300 Ultra की भारत में बिक्री शुरू कर दी है। यह स्मार्टफोन खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है, जो मोबाइल फोटोग्राफी और प्रो-लेवल वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव चाहते हैं। कंपनी का दावा है कि Vivo X300 Ultra DSLR जैसी फोटो क्वालिटी देने में सक्षम है। फोन में डुअल 200MP कैमरा सेटअप, ZEISS लेंस सिस्टम और 105x तक डिजिटल जूम जैसे फीचर्स दिए गए हैं, जो इसे फोटोग्राफी लवर्स के लिए खास बनाते हैं। कीमत और ऑफर्स Vivo X300 Ultra का 16GB RAM और 512GB स्टोरेज वेरिएंट ₹1,59,999 की कीमत पर लॉन्च किया गया है। यह स्मार्टफोन: Eclipse Black Victory Green कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। ऑफर्स की बात करें तो कंपनी SBI और Axis Bank कार्ड के साथ-साथ UPI पेमेंट पर ₹16,000 तक का इंस्टेंट डिस्काउंट दे रही है। इसके अलावा कंपनी ने फोन को एक खास Photographer Kit के साथ भी पेश किया है। इस किट के साथ डिवाइस की कीमत ₹2,09,999 रखी गई है। Photographer Kit वेरिएंट पर: UPI पेमेंट पर ₹21,000 तक SBI कार्ड पर ₹22,000 तक का इंस्टेंट बैंक डिस्काउंट दिया जा रहा है। फोन को Vivo India Official Website, Flipkart, Amazon India और ऑफलाइन स्टोर्स से खरीदा जा सकता है। कैमरा फीचर्स बने सबसे बड़ी ताकत Vivo X300 Ultra में ZEISS Master Lenses कैमरा सिस्टम दिया गया है। इसमें: 50MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा 200MP हाई-रिजोल्यूशन प्राइमरी सेंसर 200MP APO टेलीफोटो सेंसर शामिल हैं। फोन 3.7x ऑप्टिकल जूम और 105x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है, जिससे दूर मौजूद सब्जेक्ट्स की डिटेल भी काफी स्पष्ट दिखाई देती है। इसके अलावा यह स्मार्टफोन एक्सटर्नल ZEISS टेलीफोटो लेंस को भी सपोर्ट करता है, जो 200mm और 400mm फोकल लेंथ के साथ आता है। कंपनी का Photographer Kit कैमरा ग्रिप, एक्स्ट्रा बैटरी और अन्य एक्सेसरी के साथ आता है, जो यूजर्स को लगभग प्रोफेशनल कैमरा जैसा अनुभव देने का दावा करता है। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी शानदार फीचर्स यह स्मार्टफोन वीडियो क्रिएटर्स और मोबाइल फिल्ममेकर्स के लिए भी कई एडवांस्ड फीचर्स लेकर आया है। फोन में: 4K 120fps वीडियो रिकॉर्डिंग Dolby Vision सपोर्ट 10-bit Log वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके साथ कई प्रो-लेवल वीडियो टूल्स भी मिलते हैं, जो बेहतर कंट्रोल और सिनेमैटिक आउटपुट देने में मदद करते हैं। दमदार डिस्प्ले और परफॉर्मेंस Vivo X300 Ultra में 6.82-इंच का 2K ZEISS Master Color डिस्प्ले दिया गया है, जो HDR और हाई ब्राइटनेस सपोर्ट के साथ आता है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें लेटेस्ट Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया गया है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग में स्मूद एक्सपीरियंस देने का दावा करता है। यह डिवाइस Android 16 आधारित OriginOS 6 पर चलता है। फोन में 6600mAh बैटरी दी गई है, जो: 100W फास्ट चार्जिंग 40W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसके अलावा बड़ा कूलिंग सिस्टम लंबे समय तक गेमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान फोन को ओवरहीट होने से बचाने में मदद करता है।
स्मार्टफोन बाजार में एक और बड़ा लॉन्च होने जा रहा है। Vivo V70 FE जल्द ही भारत में दस्तक देने वाला है और लॉन्च से पहले ही इसके फीचर्स ने यूजर्स का ध्यान खींच लिया है। खास बात यह है कि यह फोन मिड-रेंज सेगमेंट में 200MP कैमरा और बड़ी बैटरी जैसे प्रीमियम फीचर्स के साथ आ रहा है। लॉन्च डेट और कहां देखें लाइव Vivo V70 FE भारत में 2 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे लॉन्च होगा। यूजर्स इस लॉन्च इवेंट को कंपनी के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और YouTube चैनल पर लाइव देख सकते हैं। यह स्मार्टफोन Flipkart पर एक्सक्लूसिव तौर पर उपलब्ध होगा। डिजाइन और लुक फोन का डिजाइन काफी प्रीमियम और यूनिक बताया जा रहा है। Oblong (लंबा) कैमरा मॉड्यूल ड्यूल कैमरा रिंग्स और रिंग लाइट फ्लैट एजेस डिजाइन दो कलर ऑप्शन: Northern Light Purple और Moonshine Blue Moonshine Blue वेरिएंट में हल्का ग्लो इफेक्ट भी देखने को मिल सकता है, जो इसे अलग बनाता है। दमदार स्पेसिफिकेशन Vivo V70 FE में कई हाई-एंड फीचर्स दिए जा सकते हैं: डिस्प्ले: 6.83 इंच 1.5K AMOLED 120Hz रिफ्रेश रेट कैमरा: 200MP OIS प्राइमरी कैमरा 8MP अल्ट्रा-वाइड 32MP फ्रंट कैमरा प्रोसेसर: MediaTek Dimensity 7360-Turbo Android 16 आधारित OriginOS 6 बैटरी: 7000mAh बड़ी बैटरी 90W फास्ट चार्जिंग अन्य फीचर्स IP68 और IP69 रेटिंग (वॉटर और डस्ट रेजिस्टेंस) इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर 5G, Wi-Fi, Bluetooth 5.4 IR ब्लास्टर और डुअल सिम सपोर्ट 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट संभावित कीमत इस स्मार्टफोन की कीमत ₹30,000 से ₹40,000 के बीच हो सकती है। यह फोन मार्केट में मौजूद कई बड़े डिवाइसेस को टक्कर देगा, जैसे: Redmi Note 15 Pro+ Realme 16 Pro+ क्या है खास? मिड-रेंज में 200MP कैमरा बड़ी 7000mAh बैटरी प्रीमियम डिजाइन और फीचर्स लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट यह फोन उन यूजर्स के लिए खास हो सकता है जो कम कीमत में फ्लैगशिप जैसे फीचर्स चाहते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।