Adani Group

Gautam Adani and Mukesh Ambani amid rising stock market interest and changing foreign investor strategy in India.
Ambani vs Adani: विदेशी निवेशकों का बदला मूड, अडानी ग्रुप पर बढ़ा भरोसा

भारत के दो बड़े उद्योगपति Gautam Adani और Mukesh Ambani के बीच कारोबारी मुकाबला एक बार फिर चर्चा में है। हाल के महीनों में शेयर बाजार में आई तेजी और विदेशी निवेशकों की बदलती रणनीति ने Adani Group को मजबूत बढ़त दिलाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की दिग्गज निवेश कंपनी Capital Group ने हाल में अडानी ग्रुप की कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि Reliance Industries में अपनी हिस्सेदारी कम की है। अडानी ग्रुप की कंपनियों में बढ़ा निवेश ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Capital Group ने हाल में अडानी ग्रुप की तीन कंपनियों में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। बताया जा रहा है कि: Adani Ports and Special Economic Zone में करीब 2% हिस्सेदारी खरीदी गई Adani Power में 1.5% से 2% तक निवेश बढ़ाया गया Adani Green Energy में भी हिस्सेदारी खरीदी गई 5 मई को अडानी पोर्ट्स में लगभग 74.86 अरब रुपये की हिस्सेदारी खुले बाजार से खरीदी गई थी। रिलायंस में कम हुई होल्डिंग दूसरी ओर Reliance Industries में कैपिटल ग्रुप की हिस्सेदारी लगातार कम होती दिख रही है। मार्च 2026 तक ग्रुप के पास रिलायंस के करीब 142 मिलियन शेयर थे छह साल पहले यह आंकड़ा लगभग 500 मिलियन था मार्च 2017 में यह करीब 755 मिलियन शेयर तक पहुंचा था इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि विदेशी निवेशकों का फोकस धीरे-धीरे अडानी ग्रुप की ओर बढ़ रहा है। शेयर बाजार में किसका प्रदर्शन बेहतर? पिछले एक साल में अडानी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अडानी ग्रुप के शेयरों का प्रदर्शन Adani Power : लगभग 94% की तेजी Adani Green Energy : करीब 35% की बढ़त Adani Ports and Special Economic Zone : लगभग 25% की तेजी वहीं Reliance Industries के शेयर में पिछले एक साल में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में क्या हैं मौजूदा भाव? फिलहाल: Adani Ports and Special Economic Zone का शेयर लगभग 1786 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है Adani Power करीब 220 रुपये पर कारोबार कर रहा है Adani Green Energy में भी तेजी बनी हुई है Reliance Industries का शेयर करीब 1355 रुपये के स्तर पर है क्यों बदल रहा है निवेशकों का नजरिया? विशेषज्ञों का मानना है कि: अडानी ग्रुप ने इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में तेजी से विस्तार किया है विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है ग्रीन एनर्जी और पोर्ट बिजनेस में ग्रुप की मजबूत मौजूदगी निवेशकों को आकर्षित कर रही है वहीं रिलायंस के शेयरों में हालिया सुस्ती और निवेशकों की मुनाफावसूली भी इसकी एक वजह मानी जा रही है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Gautam Adani during a business event amid reports of SEC settlement discussions in the US
गौतम अडानी को अमेरिका से बड़ी राहत? SEC केस सेटलमेंट के लिए 18 मिलियन डॉलर देने पर सहमति की रिपोर्ट

अडानी ग्रुप के खिलाफ अमेरिकी जांच मामले में बड़ा अपडेट Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani से जुड़े अमेरिकी कानूनी मामले में बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (U.S. Securities and Exchange Commission) अडानी ग्रुप से जुड़े केस को सेटल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी और सागर अडानी इस मामले को निपटाने के लिए कुल 18 मिलियन डॉलर यानी लगभग 172.7 करोड़ रुपये देने पर सहमत हुए हैं। क्या है पूरा मामला? SEC ने नवंबर 2024 में अडानी ग्रुप से जुड़े कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी गई और बाद में अमेरिकी निवेशकों से यह जानकारी छिपाई गई। हालांकि, अडानी ग्रुप लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। समूह का कहना है कि उसके किसी भी अधिकारी पर अमेरिकी Foreign Corrupt Practices Act के तहत औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। कौन कितना देगा? फेडरल कोर्ट में दाखिल प्रस्तावित समझौते के मुताबिक: गौतम अडानी: 6 मिलियन डॉलर सागर अडानी: 12 मिलियन डॉलर यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह अडानी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी राहत मानी जाएगी। क्या अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट भी हटाएगा आरोप? रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि United States Department of Justice भी गौतम अडानी के खिलाफ कुछ धोखाधड़ी संबंधी आरोप वापस लेने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो अडानी ग्रुप की अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में वापसी आसान हो सकती है और कंपनी अपने वैश्विक विस्तार की रणनीति को फिर गति दे सकती है। अडानी ग्रुप का क्या कहना है? Adani Group ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि: समूह या उसकी कंपनियों के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है Adani Green Energy इस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है कंपनी कानूनों और नियामकीय मानकों का पालन करती है कितना बड़ा है अडानी साम्राज्य? अडानी ग्रुप का कारोबार कई प्रमुख सेक्टर्स में फैला हुआ है: पोर्ट्स एयरपोर्ट्स एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक समूह माना जाता है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार: गौतम अडानी की कुल संपत्ति: 109 अरब डॉलर 2026 में नेटवर्थ में बढ़ोतरी: 24.5 अरब डॉलर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति दुनिया के अमीरों की सूची में 17वें स्थान पर

surbhi मई 15, 2026 0
Gautam Adani and Mukesh Ambani
गौतम अडानी बने एशिया के सबसे बड़े रईस, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली: भारत के उद्योग जगत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Gautam Adani ने Mukesh Ambani को पछाड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब हासिल कर लिया है। Bloomberg Billionaires Index के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अडानी की कुल संपत्ति अब 92.6 अरब डॉलर पहुंच गई है। नेटवर्थ में तेज उछाल इस साल गौतम अडानी की संपत्ति में करीब 8.10 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे वे दुनिया के अमीरों की सूची में 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं, मुकेश अंबानी की नेटवर्थ घटकर 90.8 अरब डॉलर रह गई है। इस साल उनकी संपत्ति में 16.9 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वे एशिया में दूसरे और वैश्विक स्तर पर 20वें स्थान पर पहुंच गए हैं। शेयर बाजार का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखने को मिली, जहां सेंसेक्स 123 अंक नीचे बंद हुआ। इसके बावजूद अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी बनी रही, जिससे उनकी संपत्ति में एक दिन में 3.56 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। दूसरी ओर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर लगभग स्थिर रहे, जिससे अंबानी की नेटवर्थ में मामूली 76.7 मिलियन डॉलर की बढ़त हुई। किन दिग्गजों की घटी संपत्ति? इस साल दुनिया के टॉप 20 अमीरों में से कई दिग्गजों की संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है। Bernard Arnault ने सबसे ज्यादा करीब 44 अरब डॉलर गंवाए हैं। इसके अलावा Bill Gates, Warren Buffett, Larry Ellison, Amancio Ortega और Steve Ballmer जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हैं। दुनिया के टॉप 10 अमीर कौन? वैश्विक स्तर पर Elon Musk अब भी पहले स्थान पर काबिज हैं, जिनकी नेटवर्थ 656 अरब डॉलर बताई गई है। टॉप 10 में शामिल अन्य प्रमुख नाम: Larry Page Jeff Bezos Sergey Brin Mark Zuckerberg Michael Dell Jensen Huang Jim Walton क्या संकेत देता है यह बदलाव? गौतम अडानी का एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बनना यह दर्शाता है कि भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में तेजी से बदलाव हो रहा है। शेयर बाजार की चाल, सेक्टरल ग्रोथ और निवेशकों का भरोसा किसी भी कारोबारी की संपत्ति को तेजी से ऊपर या नीचे ले जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0