Afghanistan

ICC Men's ODI World Cup 2027 qualification rules highlighting direct qualification through ODI rankings and tournament format.
ICC World Cup 2027 Qualification: 30 सितंबर 2026 की रैंकिंग से तय होगी सीधी एंट्री, जानें पूरा नियम

World Cup 2027 Qualification Scenario: दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले ICC Men's ODI World Cup 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 सितंबर 2026 को जारी होने वाली ICC ODI टीम रैंकिंग ही यह तय करेगी कि कौन-सी टीमें बिना क्वालिफायर खेले सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी और किन टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा। 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस बार ICC ने प्रतियोगिता का प्रारूप भी पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है। 30 सितंबर 2026 की रैंकिंग क्यों है अहम? ICC के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक जारी ODI टीम रैंकिंग ही सीधे क्वालिफिकेशन का आधार होगी। इस तारीख तक खेले जाने वाले सभी वनडे मुकाबले टीमों की रैंकिंग को प्रभावित करेंगे। ऐसे में हर द्विपक्षीय ODI सीरीज और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट का महत्व काफी बढ़ गया है। मेजबान टीमों की स्थिति मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पहले ही सुनिश्चित कर ली है। वहीं तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को स्वतः प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। किन टीमों की सीधी एंट्री की संभावना? मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा ICC ODI रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेंगी। मौजूदा रैंकिंग के आधार पर मजबूत दावेदार हैं: भारत न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान श्रीलंका इंग्लैंड अफगानिस्तान बांग्लादेश यदि अफगानिस्तान और बांग्लादेश 30 सितंबर 2026 तक अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखते हैं, तो उन्हें भी सीधा टिकट मिल सकता है। वेस्टइंडीज के सामने बड़ी चुनौती दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज फिलहाल सीधे क्वालिफिकेशन की दौड़ से बाहर दिखाई दे रही है। यदि टीम आने वाले महीनों में अपनी ODI रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाती, तो उसे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर टूर्नामेंट खेलना होगा। गौरतलब है कि वेस्टइंडीज 2023 ODI World Cup के लिए भी सीधे क्वालिफाई नहीं कर सका था। ऐसे में टीम पर इस बार बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा। 2027 वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट ICC ने इस बार टूर्नामेंट का नया प्रारूप तैयार किया है, जिससे मुकाबले और अधिक रोमांचक होंगे। पहला चरण: सुपर सीरीज सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाई टीमें सुपर सीरीज खेलेंगी। मुकाबले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में होंगे। केवल एक टीम अगले चरण में पहुंचेगी। दो टीमें बाहर हो जाएंगी। दूसरा चरण: ग्रुप स्टेज सुपर सीरीज से आगे बढ़ने वाली टीम सहित कुल 12 टीमें दो ग्रुप में होंगी। प्रत्येक ग्रुप में 6-6 टीमें रहेंगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी। तीसरा चरण: सुपर 7 ग्रुप चरण के बाद टीमें सुपर 7 में खेलेंगी। यहां के प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। अंतिम चरण दो सेमीफाइनल मुकाबले होंगे। विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी। फाइनल में 2027 विश्व कप चैंपियन का फैसला होगा। इन टीमों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर आने वाले महीनों में इन टीमों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी: अफगानिस्तान बांग्लादेश वेस्टइंडीज आयरलैंड स्कॉटलैंड नीदरलैंड्स इन टीमों के लिए हर ODI मुकाबला वर्ल्ड कप की उम्मीदों को मजबूत या कमजोर कर सकता है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Afghan Agriculture Minister Mawlawi Ataullah Omari meets Indian officials during his visit to India, highlighting growing cooperation between the two countries.
भारत दौरे पर अफगान मंत्री ओमारी बोले- 'भारत अपना देश लगता है, हमारा DNA एक है', रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने भारत में मिले स्वागत की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हैं। ओमारी ने कहा, "भारत मुझे अपना देश लगता है, हमारा DNA एक ही है।" उनके इस बयान को दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत एएनआई के अनुसार, मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा कि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने भारत सरकार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें यहां बेहद सम्मान और अपनापन मिला। उनके मुताबिक, यह स्वागत केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की सद्भावना को दर्शाता है। अफगान जनता के लिए उम्मीद का संदेश ओमारी ने कहा कि भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद का संदेश है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद विकास, सहयोग और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध अफगानिस्तान के लिए लाभकारी साबित होंगे। इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कृषि और आधुनिक खेती सिंचाई एवं जल प्रबंधन पशुपालन और डेयरी विकास खाद्य सुरक्षा शिक्षा और क्षमता निर्माण स्वास्थ्य सेवाएं मानवीय सहायता और तकनीकी सहयोग भारत पहले भी अफगान किसानों के प्रशिक्षण, गेहूं और दवाइयों की आपूर्ति तथा कई विकास परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। पुराने रिश्तों को फिर मजबूत करने की कोशिश भारत और अफगानिस्तान के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों की गति धीमी हुई थी, लेकिन भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी और काबुल में अपना तकनीकी मिशन भी दोबारा सक्रिय किया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौलवी अताउल्लाह ओमारी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Fresh Rohu, Katla, Hilsa, Tuna and Sardine fish displayed as healthy protein choices for senior citizens.
60 की उम्र के बाद डाइट में शामिल करें ये 5 हेल्दी मछलियां, बढ़ेगी एनर्जी, मजबूत होंगे दिल, दिमाग और हड्डियां

Healthy Diet For Senior Citizens: रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। जानें इनके स्वास्थ्य लाभ, अनुमानित कैलोरी, हेल्दी कुकिंग टिप्स और सेवन का सही तरीका। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदलने लगती हैं। 60 वर्ष के बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह में दो से तीन बार सीमित मात्रा में मछली का सेवन बुजुर्गों के लिए लाभदायक हो सकता है। मछली में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन D, विटामिन B12, आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों और इम्यून सिस्टम के बेहतर कार्य में मदद कर सकते हैं। 1. रोहू (Rohu) अनुमानित कैलोरी: लगभग 170 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- रोहू को हल्दी, नमक, अदरक-लहसुन पेस्ट और नींबू के रस के साथ 20 मिनट मेरिनेट करें। इसके बाद नॉन-स्टिक पैन में हल्के सरसों के तेल के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। फायदे :- हाई क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा स्रोत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभदायक पाचन में अपेक्षाकृत हल्की दिल की सेहत को सपोर्ट करती है 2. कतला (Katla) अनुमानित कैलोरी: लगभग 160 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों में मेरिनेट करें। प्याज और टमाटर की हल्की ग्रेवी तैयार कर उसमें मछली को धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। फायदे विटामिन B12 से भरपूर शरीर को ऊर्जा देने में सहायक मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार प्रोटीन का अच्छा स्रोत 3. हिल्सा (Hilsa/इलिश) अनुमानित कैलोरी: लगभग 210 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :-  सरसों के पेस्ट, हल्दी और नमक के साथ मेरिनेट कर 15 मिनट तक स्टीम करें। फायदे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभदायक आंखों और त्वचा की सेहत को सपोर्ट करती है 4. टूना (Tuna) अनुमानित कैलोरी: लगभग 132 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- नींबू, लहसुन, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल लगाकर 8–10 मिनट तक ग्रिल करें। फायदे कम फैट और हाई प्रोटीन हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विटामिन D और B12 का अच्छा स्रोत वजन नियंत्रित रखने में सहायक 5. सार्डिन (Sardine) अनुमानित कैलोरी: लगभग 200 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों के साथ मेरिनेट कर एयर फ्रायर, ग्रिल या स्टीम में पकाएं। फायदे कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है क्या मछली कैंसर से बचाती है? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकती हैं। स्वस्थ आहार का हिस्सा होने के कारण ये कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, कोई भी मछली कैंसर की रोकथाम या इलाज की गारंटी नहीं देती। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुजुर्गों के लिए सबसे हेल्दी कुकिंग स्टाइल स्टीम फिश ग्रिल्ड फिश एयर फ्राइड फिश हल्की ग्रेवी वाली फिश करी कम तेल में पैन-सीयर फिश डीप फ्राई मछली का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। किसके साथ करें सर्व? ब्राउन राइस मल्टीग्रेन रोटी दलिया स्टीम सब्जियां हरी सलाद दाल का सूप नींबू हरी चटनी जरूरी कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी मछली का चयन करें। पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करें। हल्दी और नींबू से मेरिनेट करने पर गंध कम होती है। कम तेल और हल्के मसालों का इस्तेमाल करें। सप्ताह में 2–3 बार 100–150 ग्राम मछली पर्याप्त मानी जाती है (व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार)। यदि फिश एलर्जी, किडनी रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। निष्कर्ष:- रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी भारत में आसानी से मिलने वाली मछलियां बुजुर्गों के लिए प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। इन्हें स्टीम, ग्रिल या कम तेल में पका कर खाने से बेहतर पोषण मिलता है और यह हृदय, हड्डियों, मांसपेशियों तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।  

anmol जुलाई 11, 2026 0
Afghan migrants wait at a Pakistan border crossing as authorities begin a nationwide deportation drive against undocumented foreign nationals.
पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों पर सख्ती, 11 जुलाई से गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन अभियान तेज

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने बिना वैध वीजा या कानूनी दस्तावेजों के रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। सरकार ने 10 जुलाई तक स्वेच्छा से देश छोड़ने की समय सीमा दी थी। अब 11 जुलाई से ऐसे लोगों की गिरफ्तारी और निर्वासन (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस अभियान का सबसे अधिक असर पाकिस्तान में रह रहे अफगान नागरिकों पर पड़ने की संभावना है। 11 जुलाई से शुरू होगी देशव्यापी कार्रवाई पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने अवैध विदेशी स्वदेश वापसी योजना (Illegal Foreigners Repatriation Plan - IFRP) के तहत सभी प्रांतों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब बिना वैध वीजा या समाप्त हो चुके दस्तावेजों के साथ रह रहे विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया के बाद अफगानिस्तान भेजा जाएगा। रोज लौट रहे हैं करीब 5,000 अफगान नागरिक संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, पिछले चार महीनों में 4 लाख से अधिक अफगान नागरिक पाकिस्तान छोड़कर वापस लौट चुके हैं। एजेंसी के मुताबिक: प्रतिदिन लगभग 5,000 लोग अफगानिस्तान लौट रहे हैं। पाकिस्तान में अभी भी करीब 8 लाख अफगान नागरिक 'प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन (PoR)' कार्ड के साथ रह रहे हैं। लगभग 6 लाख लोगों के पास 'अफगान सिटिजन कार्ड (ACC)' है। 2021 के बाद आए 1 लाख से अधिक अफगान नागरिक भी पाकिस्तान में मौजूद हैं। सभी प्रांतों को रोजाना रिपोर्ट भेजने के निर्देश गृह मंत्रालय ने सभी प्रांतीय सरकारों, इस्लामाबाद प्रशासन, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे: पकड़े गए अवैध प्रवासियों की संख्या, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई, और डिपोर्टेशन की प्रगति की दैनिक रिपोर्ट संघीय सरकार को भेजें। इसके लिए बनाए गए डिटेंशन और होल्डिंग सेंटर भी अलर्ट पर रखे गए हैं। पहले ही दी जा चुकी थी समय सीमा सरकार ने पहले विभिन्न श्रेणियों के अफगान नागरिकों के लिए अलग-अलग समय सीमाएं तय की थीं। मार्च और अप्रैल 2025 में अफगान सिटिजन कार्ड (ACC) धारकों के लिए समय सीमा तय की गई। अगस्त 2025 में प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन (PoR) कार्ड धारकों की मोहलत समाप्त हुई। 2026 में अंतिम चरण के तहत बिना किसी वैध दस्तावेज या एक्सपायर्ड वीजा वाले लोगों को 10 जुलाई 2026 तक देश छोड़ने का अंतिम अवसर दिया गया। सरकार का दावा- सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी कदम पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह अभियान देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने, तस्करी रोकने और आर्थिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा और कानूनी दस्तावेजों के साथ रह रहे विदेशी नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ होगी जो निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान से अपील की है कि सभी अफगान प्रवासियों को सुरक्षा जोखिम मानकर कार्रवाई न की जाए और प्रत्येक मामले का मानवीय दृष्टिकोण से आकलन किया जाए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिए हैं कि निर्धारित योजना के अनुसार डिपोर्टेशन अभियान जारी रहेगा। दशकों पुरानी शरणार्थी आबादी पर भी असर सोवियत-अफगान युद्ध और बाद के संघर्षों के दौरान 1978-79 से लाखों अफगान नागरिक पाकिस्तान पहुंचे थे। इनमें से बड़ी संख्या पिछले कई दशकों से वहीं रह रही है। अब पाकिस्तान का यह अभियान उन लंबे समय से रह रहे अफगान नागरिकों को भी प्रभावित कर रहा है, जिनके दस्तावेज समाप्त हो चुके हैं या जिनके पास वैध कानूनी स्थिति नहीं है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Afghanistan Earthquake
अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 5.5 तीव्रता का भूकंप, लोगों में दहशत

काबुल, एजेंसियां। अफगानिस्तान के हिंदूकुश पर्वतीय क्षेत्र में गुरुवार को 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए, जिससे कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।   कई क्षेत्रों में महसूस किए गए झटके   भूकंप का केंद्र हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला में बताया गया है, जो भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। झटके अफगानिस्तान के अलावा पड़ोसी देशों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   प्रशासन ने शुरू किया स्थिति का आकलन   भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्रों का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, दूरदराज के पहाड़ी इलाकों से जानकारी जुटाई जा रही है ताकि किसी संभावित नुकसान का सही आकलन किया जा सके।   हिंदूकुश क्षेत्र में आते रहते हैं भूकंप   भूवैज्ञानिकों के अनुसार, हिंदूकुश क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता के कारण भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इसी वजह से यहां समय-समय पर मध्यम से तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।   लोगों से सतर्क रहने की अपील   स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। साथ ही संभावित आफ्टरशॉक को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Taliban security personnel in Afghanistan near the Pakistan border amid reports of alleged cross-border strikes targeting ISIS-K hideouts.
अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

  काबुल/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के भीतर मौजूद Islamic State – Khorasan Province के ठिकानों पर ड्रोन और हवाई हमले किए हैं। तालिबान के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों और साजिशों के लिए किया जा रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, हमले पाकिस्तान के बलूचिस्तान और Khyber Pakhtunkhwa के कुछ सीमावर्ती इलाकों में किए गए। तालिबान का दावा- आतंकियों को बनाया निशाना तालिबान सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल ISIS-K के ठिकानों के खिलाफ की गई और इसमें कई आतंकवादी मारे गए। सरकार ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा। अफगान मीडिया TOLOnews ने भी तालिबान के हवाले से बताया कि निशाना बनाए गए ठिकानों का उपयोग अफगानिस्तान के भीतर हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। स्कूल को भी बनाया गया निशाना तालिबान के अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया। उसका दावा है कि इस इमारत का इस्तेमाल ISIS-K के लड़ाके अपने ठिकाने के रूप में कर रहे थे, इसलिए उसे निशाना बनाया गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। तनाव पहले से था बढ़ा यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा से लगे इलाकों में हवाई हमले किए थे। United Nations Assistance Mission in Afghanistan के अनुसार, उन हमलों में कम से कम 28 नागरिकों की मौत और 49 लोग घायल हुए थे। वहीं, तालिबान सरकार के प्रवक्ता Hamdullah Fitrat ने इससे अधिक नुकसान का दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तानी हमलों में 38 नागरिकों की मौत हुई और 163 लोग घायल हुए। उनके अनुसार, मृतकों और घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका अफगानिस्तान द्वारा पाकिस्तान के भीतर की गई इस कथित सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इन हमलों और तालिबान के दावों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Pakistan Attack Afghanistan
पाकिस्तान के हवाई हमलों पर भारत का कड़ा बयान, कहा- अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "आक्रामक कार्रवाई" और अफगानिस्तान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।   विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?   विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने कहा कि आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के नाम पर किसी दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।   अफगानिस्तान ने भी जताया विरोध   अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई हमलों में कम से कम 36 नागरिकों की मौत और 160 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हमलों के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।   बढ़ा क्षेत्रीय तनाव   भारत ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Women protest in Herat as rights concerns grow amid disputed crackdown allegations.
अफगानिस्तान में महिलाओं के प्रदर्शन पर बल प्रयोग के आरोप, UN ने तालिबान की कार्रवाई पर जताई चिंता

  काबुल/हेरात: अफगानिस्तान के पश्चिमी शहर हेरात में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग और गोलीबारी के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए तालिबान प्रशासन की आलोचना की है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कम से कम दो लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। रिपोर्टों के मुताबिक, हेरात में तालिबान की नैतिकता पुलिस (Morality Police) द्वारा कथित तौर पर उन महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिन पर निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं करने का आरोप था। इसके बाद महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किए जाने के आरोप सामने आए। UN विशेषज्ञों ने जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक समूह ने जारी बयान में कहा कि महिलाओं को ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन के आधार पर हिरासत में लिए जाने की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महिलाओं को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या भेदभाव से मुक्त रहने के अधिकार का उपयोग करने के कारण दंडित किया गया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। गोलीबारी को लेकर अलग-अलग दावे प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्रोतों ने दावा किया है कि प्रदर्शन को तितर-बितर करने के दौरान सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। कुछ रिपोर्टों में एक बच्चे की मौत का भी दावा किया गया है। तालिबान प्रशासन और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार के हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस कारण घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर बना हुआ है। ड्रेस कोड को लेकर जारी है विवाद अफगानिस्तान में महिलाओं के पहनावे से जुड़े नियम सदाचार के प्रसार और बुराई की रोकथाम मंत्रालय (PVPV) के तहत लागू किए जाते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर शरीर को पूरी तरह ढकने वाले वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है। कई महिलाएं पारंपरिक बुर्के की बजाय अबाया, हिजाब या अन्य ढीले-ढाले परिधानों का उपयोग करती हैं। हाल के महीनों में ड्रेस कोड के पालन को लेकर निगरानी और कार्रवाई बढ़ने की खबरों के बाद महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर हेरात की घटना ने एक बार फिर अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों ने घटना की निष्पक्ष जांच और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल घटना से जुड़े मौतों और घायलों के आंकड़ों तथा सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। स्वतंत्र जांच या आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Afghan civilians inspect damage after alleged Pakistani airstrikes in border provinces amid rising tensions.
पाकिस्तान पर अफगानिस्तान का बड़ा आरोप, हवाई हमलों में 13 लोगों की मौत; सीमा पर फिर बढ़ा तनाव

  अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए। तालिबान प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि इस कार्रवाई में 14 महिलाएं घायल हुई हैं। तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाया हवाई क्षेत्र उल्लंघन का आरोप जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया। तालिबान प्रशासन ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे हमले में प्रभावित लोगों की हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा पार संघर्ष को लेकर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर देखने को मिला है। 2025 के बाद और बिगड़े संबंध विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीमा पार सैन्य गतिविधियों और हवाई हमलों को लेकर स्थिति और अधिक गंभीर हो गई थी। इसके बाद कई सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़पों और विस्थापन की घटनाएं सामने आईं। पाकिस्तान की चिंता क्या है? पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर उसके खिलाफ हमले करते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि तालिबान प्रशासन इन समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। रिश्तों में बढ़ती खाई एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था, लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। सीमा सुरक्षा, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते गए हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो सीमा क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Indian Ambassador addresses the UN Security Council, criticizing Pakistan over terrorism and Afghanistan-related issues.
UNSC में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, कहा- अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत पर जवाबदेही से नहीं बच सकता इस्लामाबाद

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा। भारत ने पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित दुष्प्रचार फैलाने, आतंकवाद के मुद्दे पर झूठा नैरेटिव गढ़ने और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौतों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां सक्रिय आतंकी संगठनों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय भारत विरोधी प्रचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। 'फितना अल हिंदुस्तान' शब्दावली पर भारत की आपत्ति अपने संबोधन में हरीश ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे "फितना अल हिंदुस्तान" शब्द को भ्रामक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस साक्ष्य के अपने देश में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भारत से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। भारत ने कहा कि धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर गलत सूचना फैलाना एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाना है। 'नफरत की फैक्ट्री' चला रहा पाकिस्तान भारत ने पाकिस्तान के प्रचार तंत्र को "नफरत की फैक्ट्री" करार देते हुए कहा कि वहां का सत्ता प्रतिष्ठान लंबे समय से भारत विरोधी माहौल तैयार करता रहा है। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा समस्याओं से हटाकर बाहरी खतरों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव और नागरिक संस्थाओं पर उसके बढ़ते नियंत्रण पर भी सवाल उठाए। अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों को लेकर घेरा भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा की गई सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताकर नागरिकों की मौत को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या, बच्चों का अनाथ होना और आम लोगों का घायल होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह इस्लामी एकजुटता की बात करता है और दूसरी ओर रमजान जैसे पवित्र महीने में भी हवाई हमले करता है। UNAMA रिपोर्ट का हवाला, सैकड़ों नागरिकों की मौत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों का सबसे बड़ा खामियाजा अफगान नागरिकों को भुगतना पड़ा है। सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इन हमलों में 372 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 397 अन्य घायल हुए। भारत ने उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें काबुल स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हमले और भारी जनहानि की बात कही गई थी। आतंकवाद पर भारत का दो टूक संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हरीश ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आईएसआईएल और अल-कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के खिलाफ भी सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। अफगानिस्तान के खिलाफ 'ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म' का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। हरीश ने कहा कि समुद्र तक सीधी पहुंच न रखने वाले अफगानिस्तान के लिए व्यापार और पारगमन मार्गों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र की भावना के विपरीत है। उन्होंने इसे "ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म" करार देते हुए कहा कि किसी भूमिबद्ध देश की भौगोलिक कमजोरियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने गिनाई अफगानिस्तान के लिए अपनी मदद भारत ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के लिए जारी मानवीय सहायता का भी जिक्र किया। भारत ने बताया कि वह अब तक 50 हजार टन से अधिक गेहूं, 420 टन दवाइयां और वैक्सीन अफगानिस्तान को उपलब्ध करा चुका है। हाल के भूकंपों के दौरान भी भारत ने राहत सामग्री भेजी थी। भारत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित अफगान बच्चों के इलाज में भी सहयोग कर रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयासों में शामिल है। हजारों छात्रों को मिली छात्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए भारत ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक लगभग 3,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इनमें करीब 1,000 छात्राएं शामिल हैं। भारत ने भविष्य में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और शिक्षा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सहायता देने की भी प्रतिबद्धता जताई। क्रिकेट कूटनीति का भी किया जिक्र अपने संबोधन के अंत में भारत ने अफगानिस्तान के साथ सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों का उल्लेख किया। हरीश ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अफगान खिलाड़ियों का प्रदर्शन दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति जारी UNSC में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आतंकवाद, दुष्प्रचार और नागरिकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास जारी रखेगा।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Shubhman Gill KL Rahul
भारत-अफगानिस्तान टेस्ट में भारत का पलड़ा भारी, गिल-राहुल की पारियों से मजबूत हुई पकड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में अपनी बल्लेबाजी का कौशल दिखाते हुए पहली पारी में रनों का अम्बार लगा दिया। टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी 127 ओवरों में 8 विकेट खोकर 564 रनों के विशाल स्कोर पर घोषित की। भारत की ओर से कप्तान शुभमन गिल और अनुभवी केएल राहुल ने शानदार शतकीय पारियां खेलीं जिससे भारतीय टीम 564 रनों का विशाल स्कोर खड़ी कर सकी। टॉप भारतीय बल्लेबाजों का कमाल अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में भारत की शुरुआत अच्छी रही। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (24 रन) के जल्दी आउट होने के बाद केएल राहुल और साई सुदर्शन ने टीम इंडिया के पारी को संभाला। राहुल ने बेहद सधे हुए अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 165 गेंदों पर 11 चौकों की मदद से शानदार 100 रन बनाए। वहीं, नंबर तीन पर आए साई सुदर्शन ने उनका बखूबी साथ निभाया और 104 गेंदों में 13 चौकों की मदद से  81 रनों की आक्रामक पारी खेली। इन दोनों के बीच हुई बेहतरीन साझेदारी ने टीम इंडिया के बड़े स्कोर की मजबूत नींव रखी। कप्तान शुभमन गिल का एक और शतक इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने 177 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौके और 1 छक्के की बदौलत 126 रनों की कप्तानी पारी खेली। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी मध्यक्रम में तेजी से रन बटोरे और मात्र 121 गेंदों में 6 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के लगाते हुए 81 रन ठोक दिए। हालांकि, ध्रुव जुरेल (19 रन) बड़ी पारी नहीं खेल पाए लेकिन निचले क्रम में वाशिंगटन सुंदर ने नाबाद 52 रनों का बहुमूल्य योगदान देकर भारत का स्कोर 550 के पार पहुंचाया। अंत में मानव सुथार (28 रन) और मोहम्मद सिराज (22 रन) ने भी छोटे लेकिन उपयोगी कैमियो खेले। मोहम्मद सलीम सैफी बने संकटमोचक  दूसरी तरफ,अफगानिस्तान के गेंदबाजी लाइनअप पर एक नजर डालें तो तेज गेंदबाज मोहम्मद सलीम सैफी अफगानिस्तान टीम के इकलौते संकटमोचक बनकर इस  मैच में उभरे। सैफी ने 27 ओवरों में 140 रन खर्च कर 6 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इनके अलावा जियाउर रहमान शरिफी और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी को 1-1 विकेट मिली।

Unknown जून 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0