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World Cup 2027 Qualification Rules

ICC World Cup 2027 Qualification: 30 सितंबर 2026 की रैंकिंग से तय होगी सीधी एंट्री, जानें पूरा नियम

surbhi जुलाई 22, 2026 0
ICC Men's ODI World Cup 2027 qualification rules highlighting direct qualification through ODI rankings and tournament format.
ICC World Cup 2027 Qualification Rules

World Cup 2027 Qualification Scenario: दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले ICC Men's ODI World Cup 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 सितंबर 2026 को जारी होने वाली ICC ODI टीम रैंकिंग ही यह तय करेगी कि कौन-सी टीमें बिना क्वालिफायर खेले सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी और किन टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा।

4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस बार ICC ने प्रतियोगिता का प्रारूप भी पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।

30 सितंबर 2026 की रैंकिंग क्यों है अहम?

ICC के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक जारी ODI टीम रैंकिंग ही सीधे क्वालिफिकेशन का आधार होगी। इस तारीख तक खेले जाने वाले सभी वनडे मुकाबले टीमों की रैंकिंग को प्रभावित करेंगे। ऐसे में हर द्विपक्षीय ODI सीरीज और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट का महत्व काफी बढ़ गया है।

मेजबान टीमों की स्थिति

मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पहले ही सुनिश्चित कर ली है। वहीं तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को स्वतः प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

किन टीमों की सीधी एंट्री की संभावना?

मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा ICC ODI रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेंगी।

मौजूदा रैंकिंग के आधार पर मजबूत दावेदार हैं:

  • भारत
  • न्यूजीलैंड
  • ऑस्ट्रेलिया
  • पाकिस्तान
  • श्रीलंका
  • इंग्लैंड
  • अफगानिस्तान
  • बांग्लादेश

यदि अफगानिस्तान और बांग्लादेश 30 सितंबर 2026 तक अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखते हैं, तो उन्हें भी सीधा टिकट मिल सकता है।

वेस्टइंडीज के सामने बड़ी चुनौती

दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज फिलहाल सीधे क्वालिफिकेशन की दौड़ से बाहर दिखाई दे रही है। यदि टीम आने वाले महीनों में अपनी ODI रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाती, तो उसे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर टूर्नामेंट खेलना होगा।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज 2023 ODI World Cup के लिए भी सीधे क्वालिफाई नहीं कर सका था। ऐसे में टीम पर इस बार बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।

2027 वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट

ICC ने इस बार टूर्नामेंट का नया प्रारूप तैयार किया है, जिससे मुकाबले और अधिक रोमांचक होंगे।

पहला चरण: सुपर सीरीज

  • सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाई टीमें सुपर सीरीज खेलेंगी।
  • मुकाबले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में होंगे।
  • केवल एक टीम अगले चरण में पहुंचेगी।
  • दो टीमें बाहर हो जाएंगी।

दूसरा चरण: ग्रुप स्टेज

  • सुपर सीरीज से आगे बढ़ने वाली टीम सहित कुल 12 टीमें दो ग्रुप में होंगी।
  • प्रत्येक ग्रुप में 6-6 टीमें रहेंगी।
  • दोनों ग्रुप की शीर्ष टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी।

तीसरा चरण: सुपर 7

  • ग्रुप चरण के बाद टीमें सुपर 7 में खेलेंगी।
  • यहां के प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।

अंतिम चरण

  • दो सेमीफाइनल मुकाबले होंगे।
  • विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी।
  • फाइनल में 2027 विश्व कप चैंपियन का फैसला होगा।

इन टीमों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

आने वाले महीनों में इन टीमों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी:

  • अफगानिस्तान
  • बांग्लादेश
  • वेस्टइंडीज
  • आयरलैंड
  • स्कॉटलैंड
  • नीदरलैंड्स

इन टीमों के लिए हर ODI मुकाबला वर्ल्ड कप की उम्मीदों को मजबूत या कमजोर कर सकता है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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