भारतीय क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे दौरे पर शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन मैचों की टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में युवा खिलाड़ियों से सजी टीम ने मेजबान जिम्बाब्वे को हर विभाग में मात दी। इस दौरे पर कई नए चेहरों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी ने दो अर्धशतकों की बदौलत 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार जीता, जबकि मयंक यादव और प्रिंस यादव ने गेंदबाजी से प्रभावित किया। हालांकि, कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जो मिले हुए अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा सके या उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला। ऐसे में भविष्य में उनकी टीम इंडिया में वापसी आसान नहीं दिखाई देती। आइए जानते हैं उन तीन खिलाड़ियों के बारे में जिनके लिए आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 1. प्रभसिमरन सिंह: पूरे दौरे में नहीं मिला एक भी मौका विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह को जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम में दूसरे विकेटकीपर के रूप में शामिल किया गया था। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम में विकेटकीपर के लिए पहले से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। टी20 विश्व कप 2026 के बाद आराम पर रहे संजू सैमसन की वापसी होने पर चयन की दौड़ और मुश्किल हो सकती है। ऐसे में यदि भविष्य में प्रभसिमरन को दोबारा मौका नहीं मिलता, तो यह चयन संतुलन और प्रतिस्पर्धा का परिणाम हो सकता है। 2. अशोक शर्मा: डेब्यू के बावजूद नहीं छोड़ पाए मजबूत छाप आईपीएल 2026 में अपनी तेज गेंदबाजी से पहचान बनाने वाले अशोक शर्मा को जिम्बाब्वे दौरे पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने चार ओवर में 28 रन खर्च किए, लेकिन कोई विकेट हासिल नहीं कर सके। इसके बाद उन्हें दूसरे मैच की प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। तीसरे मैच में प्रिंस यादव के चोटिल होने के कारण उन्हें फिर मौका मिला, जहां उन्होंने चार ओवर में 20 रन देकर एक विकेट लिया। हालांकि भारतीय टीम के तेज गेंदबाजी विकल्पों में मयंक यादव, प्रिंस यादव और अन्य युवा गेंदबाजों की मौजूदगी को देखते हुए भविष्य में उनके लिए नियमित स्थान बनाना आसान नहीं होगा। 3. सूर्यांश शेड्गे: लगातार मौके मिले, लेकिन जगह पक्की नहीं कर पाए ऑलराउंडर सूर्यांश शेड्गे को पिछले कुछ महीनों में आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरे पर टीम इंडिया का हिस्सा बनने का अवसर मिला। हालांकि हर सीरीज में उन्हें सीमित मौके मिले। इंग्लैंड दौरे पर वह बल्ले और गेंद दोनों से प्रभाव नहीं छोड़ सके। जिम्बाब्वे के खिलाफ भी उन्हें सिर्फ एक मुकाबला खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने गेंदबाजी में 15 रन दिए, जबकि बल्लेबाजी का अवसर नहीं मिला। भारतीय टीम में हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे स्थापित ऑलराउंडर उपलब्ध रहने पर सूर्यांश शेड्गे के लिए नियमित जगह बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। टीम इंडिया में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं की लंबी कतार है। हर सीरीज में नए खिलाड़ियों को मौका मिल रहा है और चयनकर्ताओं के सामने विकल्प भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में किसी खिलाड़ी के लिए एक-दो मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करना ही काफी नहीं होता, बल्कि लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करना जरूरी होता है। हालांकि यह केवल मौजूदा प्रदर्शन और टीम संयोजन के आधार पर लगाया जा रहा आकलन है। भविष्य में घरेलू क्रिकेट, आईपीएल या अन्य टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर ये खिलाड़ी फिर से भारतीय टीम में वापसी कर सकते हैं।
World Cup 2027 Qualification Scenario: दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले ICC Men's ODI World Cup 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 सितंबर 2026 को जारी होने वाली ICC ODI टीम रैंकिंग ही यह तय करेगी कि कौन-सी टीमें बिना क्वालिफायर खेले सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी और किन टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा। 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस बार ICC ने प्रतियोगिता का प्रारूप भी पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है। 30 सितंबर 2026 की रैंकिंग क्यों है अहम? ICC के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक जारी ODI टीम रैंकिंग ही सीधे क्वालिफिकेशन का आधार होगी। इस तारीख तक खेले जाने वाले सभी वनडे मुकाबले टीमों की रैंकिंग को प्रभावित करेंगे। ऐसे में हर द्विपक्षीय ODI सीरीज और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट का महत्व काफी बढ़ गया है। मेजबान टीमों की स्थिति मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पहले ही सुनिश्चित कर ली है। वहीं तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को स्वतः प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। किन टीमों की सीधी एंट्री की संभावना? मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा ICC ODI रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेंगी। मौजूदा रैंकिंग के आधार पर मजबूत दावेदार हैं: भारत न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान श्रीलंका इंग्लैंड अफगानिस्तान बांग्लादेश यदि अफगानिस्तान और बांग्लादेश 30 सितंबर 2026 तक अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखते हैं, तो उन्हें भी सीधा टिकट मिल सकता है। वेस्टइंडीज के सामने बड़ी चुनौती दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज फिलहाल सीधे क्वालिफिकेशन की दौड़ से बाहर दिखाई दे रही है। यदि टीम आने वाले महीनों में अपनी ODI रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाती, तो उसे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर टूर्नामेंट खेलना होगा। गौरतलब है कि वेस्टइंडीज 2023 ODI World Cup के लिए भी सीधे क्वालिफाई नहीं कर सका था। ऐसे में टीम पर इस बार बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा। 2027 वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट ICC ने इस बार टूर्नामेंट का नया प्रारूप तैयार किया है, जिससे मुकाबले और अधिक रोमांचक होंगे। पहला चरण: सुपर सीरीज सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाई टीमें सुपर सीरीज खेलेंगी। मुकाबले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में होंगे। केवल एक टीम अगले चरण में पहुंचेगी। दो टीमें बाहर हो जाएंगी। दूसरा चरण: ग्रुप स्टेज सुपर सीरीज से आगे बढ़ने वाली टीम सहित कुल 12 टीमें दो ग्रुप में होंगी। प्रत्येक ग्रुप में 6-6 टीमें रहेंगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी। तीसरा चरण: सुपर 7 ग्रुप चरण के बाद टीमें सुपर 7 में खेलेंगी। यहां के प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। अंतिम चरण दो सेमीफाइनल मुकाबले होंगे। विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी। फाइनल में 2027 विश्व कप चैंपियन का फैसला होगा। इन टीमों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर आने वाले महीनों में इन टीमों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी: अफगानिस्तान बांग्लादेश वेस्टइंडीज आयरलैंड स्कॉटलैंड नीदरलैंड्स इन टीमों के लिए हर ODI मुकाबला वर्ल्ड कप की उम्मीदों को मजबूत या कमजोर कर सकता है।
नई दिल्ली: भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का आगाज 23 जुलाई से होने जा रहा है। हरारे में 23, 25 और 26 जुलाई को खेले जाने वाले इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम मैदान पर उतरेगी। हालांकि इस बार क्रिकेट फैंस के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि मैचों की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार या सोनी लिव जैसे लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप पर मुकाबले देखने के लिए दर्शकों को अलग से पैसे खर्च करने होंगे। इस बार क्यों नहीं मिलेगी जियोहॉटस्टार या सोनी लिव पर स्ट्रीमिंग? भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज के डिजिटल प्रसारण अधिकार इस बार किसी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास नहीं हैं। इसलिए जो दर्शक मोबाइल या अन्य डिजिटल डिवाइस पर लाइव मैच देखना चाहते हैं, उन्हें अलग से मैच पास या सब्सक्रिप्शन खरीदना होगा। इसका मतलब है कि इस सीरीज का आनंद लेने के लिए क्रिकेट प्रेमियों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। फैनकोड पर होगी लाइव स्ट्रीमिंग भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज की लाइव स्ट्रीमिंग FanCode पर उपलब्ध रहेगी। दर्शक अपनी जरूरत के अनुसार मैच पास या टूर पास खरीद सकते हैं। पास की संभावित कीमतें: एक मैच का पास: 35 से 50 रुपये विभिन्न मैच पास: 19 से 99 रुपये FanCode मासिक पास: करीब 199 रुपये अगर कोई दर्शक सिर्फ भारत-जिम्बाब्वे सीरीज देखना चाहता है, तो उसे कम से कम 100 रुपये या उससे अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं। टीवी पर कहां देखें लाइव मैच? टीवी दर्शकों के लिए अच्छी खबर यह है कि भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का सीधा प्रसारण यूनाइट8 स्पोर्ट्स नेटवर्क के विभिन्न चैनलों पर किया जाएगा। इसी नेटवर्क ने हाल ही में फीफा विश्व कप 2026 का भी सफल लाइव प्रसारण किया था। अब क्रिकेट प्रशंसक टीवी पर बिना किसी अतिरिक्त डिजिटल सब्सक्रिप्शन के मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे। भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का कार्यक्रम पहला टी20: 23 जुलाई, हरारे दूसरा टी20: 25 जुलाई, हरारे तीसरा टी20: 26 जुलाई, हरारे भारतीय टीम (Indian Squad) श्रेयस अय्यर (कप्तान) तिलक वर्मा (उपकप्तान) वैभव सूर्यवंशी अभिषेक शर्मा ईशान किशन (विकेटकीपर) शिवम दुबे सूर्यांश शेडगे रिंकू सिंह प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर) रवि बिश्नोई हर्ष दुबे प्रिंस यादव यश ठाकुर अशोक शर्मा मयंक यादव भारत की युवा टीम इस सीरीज में दमदार प्रदर्शन कर आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी को मजबूत करना चाहेगी। वहीं फैंस की निगाहें युवा सितारों के प्रदर्शन के साथ-साथ इस बात पर भी रहेंगी कि नई टीम जिम्बाब्वे की चुनौती का किस तरह सामना करती है।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में हर दौर में एक ऐसा बल्लेबाज उभरकर सामने आया है जिसने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई। सुनील गावस्कर से शुरू हुई यह विरासत सचिन तेंदुलकर तक पहुंची और फिर विराट कोहली ने अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अब जब विराट कोहली अपने करियर के अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय क्रिकेट का अगला 'किंग' कौन होगा? मौजूदा फॉर्म को देखते हुए इस सवाल का सबसे मजबूत जवाब शुभमन गिल के रूप में सामने आ रहा है। भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रहे शुभमन गिल इन दिनों अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ लय में नजर आ रहे हैं। खासकर वनडे क्रिकेट में उनका बल्ला पिछले सात महीनों से लगातार रन उगल रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में 80 रनों की जिम्मेदार पारी खेलकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के भी सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हैं। सात महीने से वनडे में शानदार फॉर्म शुभमन गिल ने साल 2026 की शुरुआत से ही वनडे क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले दो मैचों में उन्होंने लगातार 56-56 रन बनाए। तीसरे मुकाबले में 18 गेंदों पर 23 रन की तेज पारी खेली। इसके बाद अफगानिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में 84 रन बनाए, जबकि दूसरे मुकाबले में 154 रन की शानदार पारी खेलकर अपने करियर का दूसरा सबसे बड़ा वनडे स्कोर दर्ज किया। इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी उन्होंने 75 गेंदों में 80 रन बनाकर भारत की जीत की मजबूत नींव रखी। उनकी पिछली छह वनडे पारियों में पांच अर्धशतक इस बात का प्रमाण हैं कि फिलहाल उन्हें रोकना किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के लिए आसान नहीं है। इंग्लैंड के खिलाफ खेली मैच जिताऊ पारी बर्मिंघम में खेले गए पहले वनडे में भारत को 259 रन का लक्ष्य मिला था। कप्तान रोहित शर्मा सिर्फ 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। श्रेयस अय्यर (35) और केएल राहुल (1) भी बड़ी पारी नहीं खेल सके। ऐसे मुश्किल समय में शुभमन गिल ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 80 रन बनाए। हालांकि हैमस्ट्रिंग और ग्रॉइन में परेशानी के कारण उन्हें बीच में मैदान छोड़ना पड़ा, लेकिन तब तक वह भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे। बाद में वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल की अहम पारियों ने टीम इंडिया को जीत दिलाई। यदि गिल शुरुआती दबाव को संभालकर यह पारी नहीं खेलते तो मुकाबले का नतीजा भारत के पक्ष में आना मुश्किल हो सकता था। औसत के मामले में विराट कोहली से भी आगे वनडे क्रिकेट में कम से कम 3000 रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शुभमन गिल अब सबसे अधिक बल्लेबाजी औसत वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 65 वनडे मैचों में 3271 रन 60 से अधिक की औसत से बनाए हैं। वहीं विराट कोहली 58.50 की औसत के साथ 14,802 रन बनाकर दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि विराट कोहली के नाम अनुभव, रिकॉर्ड और बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन जैसी कई उपलब्धियां हैं, लेकिन शुरुआती करियर में जिस तरह शुभमन गिल लगातार रन बना रहे हैं, उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सुपरस्टार के रूप में स्थापित कर दिया है। अगर गिल इसी निरंतरता के साथ प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक नया 'किंग' मिल सकता है।
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने इंग्लिश कप्तान हैरी ब्रूक का विकेट लेकर वनडे क्रिकेट में अपने 150 विकेट पूरे कर लिए। इस मैच में भले ही बुमराह को सिर्फ एक विकेट मिला, लेकिन उनकी सटीक गेंदबाजी ने इंग्लैंड के बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा। उन्होंने अपने 9 ओवर के स्पेल में केवल 31 रन खर्च किए। इस उपलब्धि के साथ बुमराह अब भारत की ओर से सबसे कम गेंदों में 150 वनडे विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज बन गए हैं। सबसे कम गेंदों में 150 वनडे विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज 1. मोहम्मद शमी – 4070 गेंदें भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी इस सूची में पहले स्थान पर हैं। उन्होंने साल 2022 में अपने करियर के 80वें वनडे मैच के दौरान सिर्फ 4070 गेंदों में 150 विकेट पूरे कर इतिहास रच दिया। उनकी लगातार विकेट लेने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे घातक वनडे गेंदबाजों में शामिल करती है। 2. कुलदीप यादव – 4513 गेंदें चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव ने 2023 में 4513 गेंदों में अपने 150 वनडे विकेट पूरे किए। 2017 में डेब्यू करने वाले कुलदीप भारत के लिए वनडे में दो हैट्रिक लेने वाले इकलौते गेंदबाज भी हैं। उनकी विविधता और टर्न ने कई मैचों में भारत को जीत दिलाई है। 3. जसप्रीत बुमराह – 4605 गेंदें जसप्रीत बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने 91वें वनडे मुकाबले में यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 4605 गेंदों में 150 विकेट पूरे किए। चोटों के कारण कुछ समय क्रिकेट से दूर रहने के बावजूद बुमराह ने अपनी घातक गेंदबाजी से लगातार शानदार प्रदर्शन किया और अब इस प्रतिष्ठित सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। 4. अजीत अगरकर – 5027 गेंदें पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और मौजूदा टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर लंबे समय तक इस रिकॉर्ड के मालिक रहे। उन्होंने अपने 97वें वनडे मैच में 5027 गेंदों पर 150 विकेट पूरे किए थे। अपनी तेज गेंदबाजी और निचले क्रम की बल्लेबाजी के लिए भी अगरकर जाने जाते थे। 5. इरफान पठान – 5131 गेंदें पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान इस सूची में पांचवें स्थान पर हैं। उन्होंने 2009 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले गए मुकाबले के दौरान 5131 गेंदों में अपने 150 वनडे विकेट पूरे किए थे। स्विंग गेंदबाजी के दम पर उन्होंने शुरुआती वर्षों में भारत को कई यादगार जीत दिलाईं। सबसे कम गेंदों में 150 वनडे विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज रैंक गेंदबाज गेंदें 1 मोहम्मद शमी 4070 2 कुलदीप यादव 4513 3 जसप्रीत बुमराह 4605 4 अजीत अगरकर 5027 5 इरफान पठान 5131
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है। शास्त्री का मानना है कि इतनी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को लंबे समय तक बेंच पर बैठाकर रखना भारतीय टीम के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि वैभव को आयरलैंड दौरे पर ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिलना चाहिए था, क्योंकि वहां की परिस्थितियां उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पूरी तरह अनुकूल थीं। सोनी स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान शास्त्री ने कहा कि आयरलैंड की धीमी और स्पंजी पिचों पर वैभव सूर्यवंशी विरोधी गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते थे। उनके मुताबिक वहां के छोटे मैदान और बल्लेबाजी के अनुकूल हालात युवा बल्लेबाज को अपनी स्वाभाविक शैली में खेलने का बेहतरीन अवसर देते। 'आयरलैंड में खेलता तो गेंदबाजों पर भारी पड़ता' रवि शास्त्री ने कहा, "उसे आयरलैंड में खेलना चाहिए था। वहां की पिचें धीमी और स्पंजी होती हैं। वह वहां छप्पर फाड़ बल्लेबाजी करता। मैदान भी छोटे हैं। अब इंग्लैंड में उसे मौका मिलेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है।" शास्त्री के इस बयान ने टीम चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए उन्हें सही समय पर अवसर मिलना बेहद जरूरी है। 'बेंच गर्म करने के लिए नहीं है ऐसा खिलाड़ी' पूर्व भारतीय कोच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी को सिर्फ रिजर्व के तौर पर बैठाकर रखना सही रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, "उसे जितनी जल्दी हो सके खिलाइए। उसने आईपीएल में लगभग हर गेंदबाज की धुनाई की है। ऐसा कौन-सा तेज गेंदबाज है जिसे उसने नहीं पीटा? आप उसे सिर्फ बेंच गर्म करने के लिए बैठा रहे हैं।" शास्त्री का मानना है कि ऐसे निडर खिलाड़ी मैच का रुख कुछ ही ओवरों में बदलने की क्षमता रखते हैं और टीम को तेज शुरुआत दिलाकर विपक्ष पर दबाव बना सकते हैं। भारत के लिए बन सकते हैं एक्स-फैक्टर रवि शास्त्री के अनुसार वैभव सूर्यवंशी में वह आत्मविश्वास, निडरता और आक्रामक सोच है जो आधुनिक टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी जरूरत है। उनका मानना है कि शुरुआती ओवरों में तेज रन बनाने की क्षमता टीम के मध्यक्रम का दबाव कम कर सकती है और मैच का पूरा समीकरण बदल सकती है। इसी वजह से उन्होंने टीम मैनेजमेंट से जल्द से जल्द वैभव को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने पर विचार करने की अपील की। सहायक कोच ने भी माना- तैयार हैं वैभव भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने भी स्वीकार किया कि वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा टीम संयोजन के कारण उन्हें अभी इंतजार करना होगा। उनके अनुसार टीम मैनेजमेंट उन खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना चाहता है जिन्होंने हाल के महीनों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। इसलिए फिलहाल किसी खिलाड़ी को बाहर करना आसान फैसला नहीं है। राहुल द्रविड़ भी कर चुके हैं तारीफ वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की सराहना इससे पहले पूर्व भारतीय कप्तान और कोच राहुल द्रविड़ भी कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ काम करते हुए द्रविड़ ने उन्हें "अनूठी प्रतिभा" बताया था और उनके उज्ज्वल भविष्य की भविष्यवाणी की थी। अब सबकी नजर टीम मैनेजमेंट के फैसले पर आईपीएल में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर चुके वैभव सूर्यवंशी को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। रवि शास्त्री के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि क्या भारतीय टीम मैनेजमेंट युवा खिलाड़ियों को जल्दी मौका देने की रणनीति अपनाएगा। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर टिकी है कि वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का अवसर आखिर कब मिलता है और वह अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर किस तरह साबित करते हैं।
चेस्टर-ले-स्ट्रीट, एजेंसियां। भारत के कप्तान श्रेयस अय्यर ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए एक बड़ा मुकाम हासिल किया। अय्यर ने 47 गेंदों में 68 रनों की कप्तानी पारी खेली और इसी दौरान श्रेयस अय्यर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 5,000 रन पूरे कर लिए। उनकी पारी की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 189/7 का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया। कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में दिखाया दम श्रेयस ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और इंग्लैंड के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उन्होंने अपनी पारी में आकर्षक चौके-छक्के लगाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। यह उपलब्धि उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। बारिश से फीका पड़ा जश्न हालांकि श्रेयस की यादगार पारी के बावजूद मैच का नतीजा नहीं निकल सका। लगातार बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू ही नहीं हो सकी और मुकाबला बिना परिणाम (No Result) समाप्त हुआ। अब दोनों टीमें सीरीज के दूसरे टी20 में आमने-सामने होंगी।
चेस्टर-ले-स्ट्रीट, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला लगातार बारिश के कारण रद्द हो गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 189/7 का मजबूत स्कोर बनाया, लेकिन बारिश के चलते इंग्लैंड अपनी पारी का एक भी गेंद नहीं खेल सका। मुकाबला बिना परिणाम (No Result) समाप्त हुआ और सीरीज 0-0 से बराबरी पर है। श्रेयस और अभिषेक ने खेली दमदार पारियां भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने 47 गेंदों में 68 रन, जबकि अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली। अंत में शिवम दुबे ने 21 गेंदों पर नाबाद 42 रन की तेज तर्रार पारी खेलकर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। इंग्लैंड के तरफ से साकिब महमूद ने 3 विकेट लिए। दूसरा मुकाबला मैनचेस्टर में बारिश के कारण दोनों टीमों को एक-एक अंक मिला। अब सीरीज का दूसरा टी20 शनिवार को मैनचेस्टर में खेला जाएगा, जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज में बढ़त बनाने की कोशिश करेंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टी20 टीम में जगह बनाने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अभी अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। आयरलैंड दौरे पर टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें दोनों टी20 मुकाबलों में अंतिम एकादश में मौका नहीं मिला, जबकि भारत को सीरीज में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वैभव के डेब्यू को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। असिस्टेंट कोच रेयान टेन डेसकाटे ने क्या कहा? टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रेयान टेन डेसकाटे ने साफ कहा कि वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन मौजूदा टीम संयोजन और अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी के कारण उन्हें सही अवसर का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके देकर उनका आत्मविश्वास बनाए रखना चाहता है। रेयान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा रेयान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी हाल ही में भारत की सफलता में अहम भूमिका निभा चुके हैं और उनका आईपीएल प्रदर्शन भी शानदार रहा है। ऐसे में टीम प्रबंधन किसी खिलाड़ी को जल्दबाजी में बाहर करने के बजाय उसे लगातार अवसर देना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैभव की प्रतिभा और तैयारी पर किसी तरह का संदेह नहीं है। आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने 237.30 के बेहतरीन स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का पुरस्कार जीता था। उनके आक्रामक खेल ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें भारतीय टी20 टीम में जगह मिली। 1 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैच खेली जाएगी अब भारतीय टीम 1 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। माना जा रहा है कि यदि शीर्ष क्रम के बल्लेबाज उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए, तो वैभव सूर्यवंशी को बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिल सकता है। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब इंग्लैंड दौरे पर टिकी है, जहां यह युवा बल्लेबाज भारतीय जर्सी में पहली बार मैदान पर उतर सकता है।
India vs Ireland T20 Series 2026: भारतीय क्रिकेट टीम को 26 जून से आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेलनी है, लेकिन सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण इस दौरे से बाहर हो गए हैं। अब उनकी जगह पंजाब किंग्स के युवा ऑलराउंडर सूर्यांश शेड्गे को टीम में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। क्वाड्रिसेप्स इंजरी के कारण बाहर हुए नीतीश रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश कुमार रेड्डी क्वाड्रिसेप्स (जांघ की मांसपेशी) की चोट से जूझ रहे हैं। इसी वजह से वह हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में भी नहीं खेल पाए थे। नीतीश को आगामी इंग्लैंड दौरे के लिए वनडे और टी20 टीम में भी चुना गया है, लेकिन उनकी फिटनेस को लेकर अब संशय पैदा हो गया है। टीम इंडिया के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें हार्दिक पांड्या के बैकअप ऑलराउंडर के रूप में देखा जा रहा था। सूर्यांश शेड्गे बन सकते हैं रिप्लेसमेंट नीतीश की अनुपस्थिति में सूर्यांश शेड्गे का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। IPL 2026 में सूर्यांश शेड्गे का प्रदर्शन 8 मैचों में 158 रन स्ट्राइक रेट 175 निचले क्रम में तेज बल्लेबाजी मध्यम गति की गेंदबाजी की क्षमता हाल ही में समाप्त हुई ट्राई नेशन वनडे सीरीज में भी उन्होंने 26, 40 और 72 रन की महत्वपूर्ण पारियां खेलकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। आज रवाना होगी टीम इंडिया भारतीय टीम 23 जून को आयरलैंड के लिए रवाना होने वाली है। खिलाड़ियों को दो अलग-अलग बैचों में भेजा जा रहा है। पहले बैच में शामिल खिलाड़ी अक्षर पटेल संजू सैमसन वैभव सूर्यवंशी अभिषेक शर्मा वहीं दूसरा बैच बुधवार को मुंबई से आयरलैंड के लिए रवाना होगा। आयरलैंड दौरे पर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सूर्यांश शेड्गे को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिलता है या नहीं।
नई दिल्ली: ट्राई नेशन सीरीज के फाइनल में 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली। महज 29 गेंदों में 94 रन की तूफानी पारी खेलकर उन्होंने भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी का असर सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। वायरल हुआ श्रीलंकाई फैन का मजेदार वीडियो मैच के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक श्रीलंकाई प्रशंसक कैमरे के सामने मजाकिया अंदाज में अपनी निराशा जाहिर करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह हिंदी में कहता है, "आ गया, झगड़ा किया, मार दिया, जला दिया।" उसके चेहरे के हाव-भाव देखकर साफ समझा जा सकता है कि वह वैभव की बल्लेबाजी से कितना प्रभावित और निराश है। दिलचस्प बात यह रही कि उस समय वैभव सूर्यवंशी डगआउट में अपने साथियों के साथ बातचीत में व्यस्त थे और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट फैंस इस वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं। वैभव की पारी ने भारत को बनाया चैंपियन फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी की 94 रन की तूफानी पारी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। उनके अलावा तिलक वर्मा ने 67 रन, रुतुराज गायकवाड़ ने 40 रन और अनुकूल रॉय ने 39 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत भारतीय टीम ने 377 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में श्रीलंका की टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी और 311 रन पर सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 66 रन से जीतकर ट्राई नेशन सीरीज अपने नाम कर ली। अब आयरलैंड सीरीज पर नजर वैभव सूर्यवंशी अब आगामी भारत-आयरलैंड टी20 सीरीज में नजर आ सकते हैं। 26 जून से शुरू होने वाली दो मैचों की इस सीरीज में यदि उन्हें डेब्यू का मौका मिलता है, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।
न्यू चंडीगढ़, एजेंसियां। भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम में खेला जा रहा है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर बैटिंग करने का फैसला लिया है। शनिवार को मैच का पहला दिन है और पहले सेशन का खेल जारी है। टीम इंडिया ने पहली पारी में बिना नुकसान के 15 रन बना लिए हैं। यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल क्रीज पर हैं।
दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। International Cricket Council (ICC) विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के अगले चक्र में अहम सुधारों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 से WTC में टीमों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 की जा सकती है, साथ ही वन-ऑफ टेस्ट मैचों को भी प्वाइंट्स सिस्टम में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है। किन टीमों को मिल सकता है मौका? प्रस्ताव के अनुसार, जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान को WTC में शामिल किया जा सकता है। इससे टेस्ट क्रिकेट का दायरा बढ़ेगा और नई टीमों को बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। वन-ऑफ टेस्ट को मिलेगा नया महत्व अब तक WTC में केवल दो या उससे अधिक टेस्ट मैचों की सीरीज को ही शामिल किया जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत एक-बार खेले जाने वाले टेस्ट (One-off Test) को भी WTC पॉइंट्स में जोड़ा जा सकता है। इस बदलाव से बड़े क्रिकेटिंग देश जैसे भारत छोटी टीमों के साथ एकल टेस्ट मैच खेलकर उन्हें अधिक मौके दे सकते हैं। क्यों जरूरी है यह बदलाव? क्रिकेट कैलेंडर में लगातार बढ़ते T20 लीग और व्यस्त शेड्यूल के कारण टेस्ट क्रिकेट को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में ICC का यह कदम टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। फैसला अभी बाकी हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला जय शाह की अध्यक्षता वाले ICC बोर्ड को लेना है। पहले भी दो-स्तरीय टेस्ट सिस्टम (Two-tier structure) का प्रस्ताव खारिज किया जा चुका है, इसलिए इस बार भी सभी पहलुओं पर गहन चर्चा होगी। क्या होगा असर? अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो: टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा टीमों की भागीदारी बढ़ेगी छोटे देशों को बड़े देशों के खिलाफ खेलने का मौका मिलेगा WTC और अधिक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बनेगा
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।