शेनझेन, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता OnePlus ने अपने आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन OnePlus 16 का टीजर जारी कर दिया है। टीजर सामने आने के बाद फोन के डिजाइन और कुछ प्रमुख फीचर्स को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OnePlus 16 में हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, नई गेमिंग तकनीक और बड़ी बैटरी जैसे प्रीमियम फीचर्स दिए जा सकते हैं। 165Hz डिस्प्ले और गेमिंग फीचर्स पर रहेगा फोकस टीजर से संकेत मिले हैं कि OnePlus 16 को खासतौर पर परफॉर्मेंस और गेमिंग यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। फोन में 165Hz रिफ्रेश रेट डिस्प्ले मिलने की संभावना है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग एक्सपीरियंस पहले से बेहतर हो सकता है। इसके अलावा कंपनी इसमें नई गेमिंग टेक्नोलॉजी और बेहतर थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम भी दे सकती है। 9,000mAh बैटरी और दमदार प्रोसेसर की चर्चा लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, OnePlus 16 में बड़ी 9,000mAh बैटरी दी जा सकती है। इसके अलावा फोन में अगली पीढ़ी का Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro प्रोसेसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि कंपनी ने अभी तक सभी स्पेसिफिकेशन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैमरा सेटअप में मिल सकते हैं बड़े अपग्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, OnePlus 16 में कैमरा सेक्शन को भी अपग्रेड किया जा सकता है। इसमें 200MP मुख्य कैमरा और बेहतर टेलीफोटो लेंस मिलने की संभावना जताई जा रही है। कंपनी अपने फ्लैगशिप फोन्स में फोटोग्राफी और AI कैमरा फीचर्स पर लगातार काम कर रही है। अक्टूबर के आसपास लॉन्च होने की उम्मीद OnePlus 16 की लॉन्चिंग को लेकर अभी कंपनी ने आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। लेकिन लीक रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह स्मार्टफोन अक्टूबर 2026 के आसपास बाजार में पेश किया जा सकता है। लॉन्च के बाद यह Samsung और अन्य प्रीमियम एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स को टक्कर दे सकता है। फ्लैगशिप सेगमेंट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा OnePlus 16 के टीजर के बाद टेक बाजार में इसकी चर्चा तेज हो गई है। बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और शक्तिशाली प्रोसेसर जैसे फीचर्स के कारण यह फोन प्रीमियम स्मार्टफोन यूजर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। हालांकि कीमत और भारत लॉन्च से जुड़ी जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन बाजार में जल्द दस्तक देने वाले Vivo S2 और OPPO Find X10 को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं। ताजा लीक के मुताबिक, दोनों कंपनियां अपने नए स्मार्टफोन्स में दमदार कैमरा, प्रीमियम डिस्प्ले और लेटेस्ट प्रोसेसर देने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन फोन्स को भारत में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान लॉन्च किया जा सकता है। Vivo S2 में मिल सकते हैं प्रीमियम फीचर्स लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Vivo S2 में कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 7360 प्रोसेसर, 50MP OIS प्राइमरी कैमरा और कंपनी की Aura Light Ring तकनीक देखने को मिल सकती है। फोन में बेहतर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी और AI आधारित कैमरा फीचर्स मिलने की भी उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक स्पेसिफिकेशन की पुष्टि नहीं की है। OPPO Find X10 में 200MP कैमरे पर फोकस दूसरी ओर, OPPO Find X10 सीरीज को लेकर सामने आई लीक में दावा किया गया है कि फोन में 200MP कैमरा सिस्टम, बड़ी बैटरी और फ्लैगशिप-ग्रेड प्रोसेसर मिल सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में Pro Max मॉडल में 200MP कैमरे और नए डिजाइन की भी चर्चा है। कंपनी इसे अपने प्रीमियम स्मार्टफोन पोर्टफोलियो के तहत पेश कर सकती है। दिवाली सीजन में हो सकती है भारत में एंट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, OPPO Find X10 सीरीज और Vivo की नई फ्लैगशिप लाइनअप को भारत में दिवाली 2026 के आसपास लॉन्च किया जा सकता है। कंपनियां त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए अपने नए डिवाइस भारतीय बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। आधिकारिक घोषणा का इंतजार फिलहाल Vivo और OPPO की ओर से इन स्मार्टफोन्स की लॉन्च तारीख और फीचर्स को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सामने आई जानकारियां विभिन्न लीक और टिप्स पर आधारित हैं। आने वाले दिनों में दोनों कंपनियां इन डिवाइस से जुड़ी अधिक जानकारी साझा कर सकती हैं।
Google ने अपने सालाना Made by Google इवेंट की तारीख का ऐलान कर दिया है। कंपनी 12 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले इस इवेंट में नई Pixel 11 Series और Pixel Watch 5 पेश कर सकती है। लॉन्च से पहले सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार स्मार्टफोन सीरीज में स्टोरेज, AI फीचर्स और कीमत तीनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 12 अगस्त को लॉन्च होगी Pixel 11 Series Made by Google इवेंट में कंपनी के इन डिवाइसों से पर्दा उठने की उम्मीद है: Google Pixel 11 Google Pixel 11 Pro Google Pixel 11 Pro XL Google Pixel 11 Pro Fold Google Pixel Watch 5 लीक्स के अनुसार, फोन का डिजाइन पिछले मॉडल से मिलता-जुलता रहेगा, जबकि Pro और Fold मॉडल पहले से अधिक पतले हो सकते हैं। 256GB स्टोरेज बन सकता है नया बेस वेरिएंट रिपोर्ट्स के मुताबिक Google इस बार 128GB बेस स्टोरेज को हटाकर 256GB स्टोरेज से शुरुआत कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यूजर्स को अधिक फोटो, वीडियो, ऐप्स और AI फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त स्टोरेज मिलेगा, जिससे प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में Pixel की प्रतिस्पर्धा और मजबूत हो सकती है। Pixel Glow फीचर क्या है? लीक्स में एक नए Pixel Glow फीचर की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह फोन के पीछे LED आधारित नोटिफिकेशन सिस्टम होगा, जो: कॉल आने पर मैसेज नोटिफिकेशन चार्जिंग स्टेटस अन्य महत्वपूर्ण अलर्ट को अलग-अलग लाइट संकेतों के जरिए दिखा सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी इस फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। AI हार्डवेयर की वजह से बढ़ सकती है कीमत रिपोर्ट्स के अनुसार AI आधारित हार्डवेयर और महंगे कंपोनेंट्स की वजह से Pixel 11 Series की कीमत पिछले मॉडल्स से अधिक हो सकती है। संभावित अंतरराष्ट्रीय कीमतें: Pixel 11: लगभग 899 डॉलर Pixel 11 Pro: लगभग 1,099 डॉलर Pixel 11 Pro XL: लगभग 1,299 डॉलर Pixel 11 Pro Fold: लगभग 1,899 डॉलर हालांकि लॉन्च से पहले इन कीमतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Pixel Watch 5 में भी मिल सकते हैं बड़े बदलाव इसी इवेंट में Pixel Watch 5 के लॉन्च होने की भी उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार: डिजाइन में बड़े बदलाव की संभावना कम है। कंपनी नया Tensor आधारित प्रोसेसर इस्तेमाल कर सकती है। इससे AI फीचर्स और स्मार्ट परफॉर्मेंस बेहतर होने की उम्मीद है। बैटरी और वास्तविक प्रदर्शन की जानकारी लॉन्च के बाद ही सामने आएगी। भारतीय बाजार के लिए क्यों है खास? भारत में Pixel स्मार्टफोन्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। बेहतर कैमरा, क्लीन एंड्रॉयड अनुभव और लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से यह सीरीज प्रीमियम यूजर्स की पसंद बनती जा रही है। यदि 256GB स्टोरेज बेस मॉडल में मिलता है, तो भारतीय ग्राहकों को अधिक वैल्यू मिल सकती है। वहीं संभावित कीमत बढ़ने के बाद Pixel 11 Series की टक्कर Samsung Galaxy S Series, Apple iPhone और OnePlus के फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स से और कड़ी हो सकती है।
Google Maps आने वाले समय में सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं रहेगा, बल्कि यह आपके लिए खाना ऑर्डर करने में भी मददगार बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Maps के एंड्रॉयड ऐप के नए बैकएंड कोड में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी एक नए AI आधारित फूड ऑर्डरिंग फीचर पर काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 'Ask Maps to Order Food' फीचर के मिले संकेत रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Maps Android ऐप के वर्जन 26.27.00 में "Ask Maps to Order Food" नाम से एक संभावित फीचर के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि यह सुविधा यूजर को सिर्फ आसपास के रेस्टोरेंट दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी पसंद के अनुसार डिश चुनने और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाने में भी मदद करेगी। यह फीचर Google के Agentic AI विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सुझाव नहीं देता बल्कि यूजर के लिए कई जरूरी काम भी पूरा करने में सहायता करता है। कैसे काम कर सकता है नया AI फीचर? फिलहाल Google ने इस फीचर के काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया है। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूजर अपनी पसंद, जैसे किसी खास डिश या खाने की कैटेगरी, AI को बताएगा। इसके बाद सिस्टम आसपास उपलब्ध रेस्टोरेंट्स, उनकी रेटिंग और अन्य जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि AI ऑर्डर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए Google का Gemini AI मॉडल इस्तेमाल होगा या स्मार्टफोन की ऑन-डिवाइस AI तकनीक। ऑर्डर का अंतिम फैसला रहेगा यूजर के पास अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो AI केवल सुझाव देने और ऑर्डर तैयार करने में मदद करेगा। ऑर्डर को अंतिम रूप देने और भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी यूजर के सामने दिखाई जा सकती है। इससे गलत डिश, गलत मात्रा या अनचाहे ऑर्डर जैसी समस्याओं से बचने में आसानी होगी। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा ध्यान AI आधारित इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। बेहतर सुझाव देने के लिए सिस्टम को यूजर की पसंद, पहले किए गए सर्च और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। हालांकि, Google ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जाएगा और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखना दिलचस्प होगा कि AI रेस्टोरेंट्स की सिफारिश पूरी तरह यूजर की पसंद के आधार पर करेगा या प्रमोटेड विकल्प भी शामिल होंगे। Google Maps बन सकता है स्मार्ट AI असिस्टेंट यदि यह फीचर भविष्य में लॉन्च होता है, तो Google Maps केवल नेविगेशन और लोकेशन खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। AI की मदद से यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम, जैसे पसंदीदा खाना ढूंढना, सही रेस्टोरेंट चुनना और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाना, एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए कई नए फीचर्स शुरू कर दिए हैं। इन अपडेट्स का उद्देश्य चैटिंग को आसान बनाना, स्टोरेज मैनेजमेंट बेहतर करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए यूजर एक्सपीरियंस को और स्मार्ट बनाना है। फोटो एडिट करना होगा आसान WhatsApp ने Meta AI आधारित नए फोटो एडिटिंग टूल पेश किए हैं। अब यूजर्स फोटो भेजने से पहले उसका बैकग्राउंड बदल सकेंगे, अनचाहे ऑब्जेक्ट हटा सकेंगे और AI की मदद से अलग-अलग स्टाइल भी उसमे लागू कर सकेंगे। iPhone पर एक ही ऐप में चलेंगे दो अकाउंट अब iPhone यूजर्स भी एक ही WhatsApp ऐप में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को अलग-अलग मैनेज करना आसान होगा। यह सुविधा पहले केवल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध थी। चैट ट्रांसफर हुआ और आसान WhatsApp ने चैट ट्रांसफर फीचर को और बेहतर बनाया है। अब Android और iPhone के बीच चैट, फोटो और वीडियो ट्रांसफर करना पहले से ज्यादा आसान होगा, जिससे नया फोन लेने पर डेटा सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा। बड़े मीडिया फाइल्स आसानी से होंगे डिलीट नए अपडेट के बाद यूजर्स किसी चैट के बड़े मीडिया फाइल्स को अलग से खोजकर डिलीट कर सकेंगे। इससे बिना पूरी चैट हटाए फोन की स्टोरेज खाली की जा सकेगी। इमोजी टाइप करते ही मिलेंगे स्टिकर सुझाव अब चैटिंग के दौरान जैसे ही यूजर कोई इमोजी टाइप करेगा, WhatsApp उससे जुड़े स्टिकर अपने आप सुझाएगा। इससे चैटिंग पहले से ज्यादा मजेदार और तेज हो जाएगी। यूजरनेम फीचर की भी तैयारी रिपोर्ट्स के मुताबिक WhatsApp जल्द ही Username फीचर भी लॉन्च कर सकता है। इसके बाद यूजर्स बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर यूजर की प्राइवेसी को और मजबूत करेगा। चरणबद्ध तरीके से मिलेंगे अपडेट WhatsApp ने बताया है कि ये सभी फीचर्स एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेंगे। इन्हें Android और iPhone पर चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जा रहा है। यदि आपके फोन में अभी यह अपडेट नहीं आया है, तो Google Play Store या Apple App Store से WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करें।
Android यूजर्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Google जल्द ही एक नया NFC-आधारित फीचर Tap to Share लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone के AirDrop की तरह काम करेगा। हाल ही में लीक हुई जानकारी में इस फीचर का इंटरफेस और काम करने का तरीका सामने आया है। कैसे काम करेगा Tap to Share? लीक के मुताबिक, इस फीचर के जरिए यूजर्स सिर्फ दो Android स्मार्टफोन को पास लाकर या हल्का ओवरलैप करके डेटा शेयर कर सकेंगे। दोनों फोन अनलॉक होने चाहिए फोन के ऊपरी हिस्से को एक-दूसरे के करीब रखना होगा कनेक्शन बनने पर स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा अगर कनेक्शन नहीं बनता, तो फोन को बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई करने का सुझाव दिया गया है। क्या-क्या शेयर कर पाएंगे? Tap to Share के जरिए यूजर्स कई तरह का डेटा तुरंत शेयर कर सकेंगे: कॉन्टैक्ट्स फोटो और वीडियो लिंक लोकेशन अन्य फाइल्स यह फीचर Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम को और तेज और आसान बना सकता है। AirDrop से कितना अलग? हालांकि यह फीचर AirDrop जैसा है, लेकिन इसमें थोड़ा अलग तरीका अपनाया गया है। Android स्मार्टफोन्स में NFC एंटेना अलग-अलग जगहों पर होता है, इसलिए Google ने “ओवरलैप” करने का तरीका अपनाया है, ताकि कनेक्शन जल्दी बन सके। कब होगा लॉन्च? रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीचर Android 17 के साथ लॉन्च किया जा सकता है। यह पहले से कुछ डिवाइसेस जैसे Pixel और Samsung (One UI 8.5) में टेस्टिंग फेज में देखा गया है। आने वाले समय में Oppo समेत अन्य ब्रांड्स भी इसे अपने डिवाइसेस में शामिल कर सकते हैं। Android यूजर्स के लिए क्या है फायदा? Tap to Share फीचर Android यूजर्स के लिए फाइल शेयरिंग को बेहद आसान और इंस्टेंट बना देगा। बिना इंटरनेट, बिना ऐप–सिर्फ फोन टच करते ही डेटा ट्रांसफर हो सकेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।