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Samsung Galaxy smartphone displaying Samsung Keyboard with smart typing features including translation, cursor control and swipe gestures.
Samsung Keyboard Hacks: सैमसंग यूजर्स के लिए बेहद काम के हैं ये सीक्रेट फीचर्स

अगर आप Samsung Galaxy स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और अभी तक सिर्फ मैसेज टाइप करने के लिए ही डिफॉल्ट Samsung Keyboard का उपयोग कर रहे हैं, तो शायद आप इसके कई शानदार फीचर्स से अनजान हैं। सैमसंग ने अपने कीबोर्ड में ऐसे कई स्मार्ट टूल्स दिए हैं, जो टाइपिंग को तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक बनाते हैं। चाहे लंबा ईमेल लिखना हो, अलग भाषा में चैट करनी हो या बिना ऐप बदले YouTube वीडियो शेयर करना हो, Samsung Keyboard के ये फीचर्स आपके रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। 1. स्पेसबार से करें Cursor Control लंबे मैसेज या ईमेल में किसी शब्द को एडिट करने के लिए बार-बार स्क्रीन पर टैप करना पड़ता है। Samsung Keyboard में यह काम बेहद आसान हो जाता है। बस स्पेसबार को दबाकर रखें और उंगली को दाएं या बाएं स्वाइप करें। इससे कर्सर आसानी से मूव होगा और आप बिल्कुल लैपटॉप के ट्रैकपैड की तरह टेक्स्ट एडिट कर सकेंगे। फायदा तेजी से टेक्स्ट एडिटिंग गलतियों को तुरंत सुधारना लंबी चैट या ईमेल में आसान नेविगेशन 2. इन-बिल्ट Translator से करें रियल-टाइम ट्रांसलेशन अगर आप किसी दूसरी भाषा बोलने वाले व्यक्ति से बातचीत कर रहे हैं, तो अलग से ट्रांसलेशन ऐप खोलने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में मौजूद Translate फीचर आपके लिखे हुए टेक्स्ट को रियल-टाइम में दूसरी भाषा में बदल देता है। कैसे करें इस्तेमाल? कीबोर्ड के ऊपर दिए गए Three Dots (⋮) पर टैप करें। Translate विकल्प चुनें। अपनी पसंद की भाषा सिलेक्ट करें। अब जो भी टाइप करेंगे, वह चुनी गई भाषा में ट्रांसलेट होकर भेजा जा सकेगा। 3. अपनी सुविधा के अनुसार बदलें Keyboard का Size हर व्यक्ति के हाथ और टाइपिंग का तरीका अलग होता है। Samsung Keyboard आपको कीबोर्ड का आकार और लेआउट बदलने की सुविधा भी देता है। आप चाहें तो कीबोर्ड को छोटा, बड़ा या स्क्रीन पर ऊपर-नीचे एडजस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा One-Handed Mode ऑन करके एक हाथ से भी आराम से टाइपिंग की जा सकती है। फायदा बड़े फोन में आसान टाइपिंग एक हाथ से आरामदायक इस्तेमाल बेहतर यूजर एक्सपीरियंस 4. चैट के दौरान सीधे शेयर करें YouTube और Spotify लिंक दोस्तों के साथ बातचीत करते समय अगर कोई वीडियो या गाना शेयर करना हो, तो ऐप बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। Samsung Keyboard के टूलबार में मौजूद YouTube और Spotify आइकन की मदद से आप सीधे कीबोर्ड के अंदर ही कंटेंट सर्च करके चैट में शेयर कर सकते हैं। फायदा ऐप बदलने की जरूरत नहीं तेजी से वीडियो और गाने शेयर करें चैटिंग का अनुभव होगा और आसान 5. Swipe Delete से एक झटके में हटाएं पूरा टेक्स्ट अगर आपने गलती से लंबा वाक्य या पूरा पैराग्राफ टाइप कर दिया है, तो Backspace को बार-बार दबाने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में Swipe Delete फीचर की मदद से आप जेस्चर का इस्तेमाल करके तेजी से टेक्स्ट डिलीट कर सकते हैं। इसके लिए: Settings → Swipe, Touch and Feedback → Cursor Control / Backspace (Delete) विकल्प को सक्रिय करें।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Android smartphone volume buttons demonstrating hidden features like camera controls, music shortcuts, and quick accessibility options.
Volume Key Hacks: सिर्फ आवाज बढ़ाने-घटाने के लिए नहीं हैं फोन के वॉल्यूम बटन, ये 10 कमाल के फीचर्स बदल देंगे आपका एक्सपीरियंस

नई दिल्ली: ज्यादातर स्मार्टफोन यूजर्स वॉल्यूम बटन का इस्तेमाल केवल आवाज कम या ज्यादा करने के लिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एंड्रॉयड स्मार्टफोन के ये छोटे-से बटन कई ऐसे काम भी कर सकते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बना देते हैं। फोटो क्लिक करने से लेकर कैमरा जूम कंट्रोल करने, कॉल को साइलेंट करने, अलार्म स्नूज करने और फोन को फोर्स रीस्टार्ट करने तक, वॉल्यूम बटन कई ऐसे उपयोगी फीचर्स देते हैं जिनका फायदा अधिकांश यूजर्स नहीं उठा पाते। हालांकि इनमें से कुछ फीचर फोन के ब्रांड और एंड्रॉयड वर्जन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। 1. फोटो और वीडियो आसानी से करें शूट कैमरा ऐप खुला होने पर वॉल्यूम बटन शटर बटन की तरह काम करता है। इससे फोटो क्लिक करना आसान हो जाता है, खासकर सेल्फी लेते समय। कई स्मार्टफोन्स, जैसे Samsung Galaxy, में वॉल्यूम बटन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू की जा सकती है। 2. कैमरा जूम करें कंट्रोल Google Pixel, Samsung Galaxy और कुछ अन्य एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन से कैमरा जूम इन और जूम आउट किया जा सकता है। वहीं Open Camera जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए ऑटोफोकस और एक्सपोज़र भी कंट्रोल किए जा सकते हैं। 3. लॉक स्क्रीन से तुरंत कैमरा खोलें कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में डबल प्रेस वॉल्यूम बटन फीचर मिलता है। इसे ऑन करने के बाद लॉक स्क्रीन से ही कैमरा तुरंत खोला जा सकता है। Redmi जैसे कई ब्रांड यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं। 4. इनकमिंग कॉल को तुरंत साइलेंट करें अगर किसी मीटिंग या जरूरी काम के दौरान फोन बजने लगे तो कॉल रिजेक्ट किए बिना सिर्फ वॉल्यूम बटन दबाकर उसकी रिंगटोन को साइलेंट किया जा सकता है। 5. अलार्म को स्नूज करें सुबह अलार्म बजने पर स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकांश एंड्रॉयड फोनों में वॉल्यूम बटन दबाते ही अलार्म स्नूज हो जाता है। 6. पसंदीदा ऐप तुरंत खोलें Accessibility Shortcut की मदद से दोनों वॉल्यूम बटन एक साथ दबाकर अपनी पसंदीदा ऐप, जैसे WhatsApp, UPI ऐप या अन्य जरूरी एप्लिकेशन तुरंत खोली जा सकती है। 7. एक्सेसिबिलिटी फीचर्स तुरंत ऑन करें वॉल्यूम बटन होल्ड करके TalkBack, Magnification और अन्य एक्सेसिबिलिटी फीचर्स बिना सेटिंग्स में जाए सक्रिय किए जा सकते हैं। यह फीचर विशेष रूप से जरूरतमंद यूजर्स के लिए काफी उपयोगी है। 8. फोन हैंग हो जाए तो करें फोर्स रीस्टार्ट यदि फोन पूरी तरह फ्रीज हो जाए, तो कई एंड्रॉयड डिवाइसों में पावर बटन और वॉल्यूम डाउन बटन को लगभग 7 सेकंड तक एक साथ दबाकर फोन को फोर्स रीस्टार्ट किया जा सकता है। 9. Button Mapper ऐप से बटन को बनाएं स्मार्ट अगर आपके फोन में ये सभी फीचर्स मौजूद नहीं हैं, तो Button Mapper जैसे ऐप की मदद से वॉल्यूम बटन को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है। इससे स्क्रीनशॉट लेना, टॉर्च ऑन करना, कैमरा खोलना या दूसरी ऐप लॉन्च करना जैसे कई काम एक बटन से किए जा सकते हैं। 10. जेब से फोन निकाले बिना बदलें गाने कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन की मदद से म्यूजिक ट्रैक बदले जा सकते हैं। जिन फोनों में यह सुविधा नहीं है, वहां Skip Track जैसे फीचर्स या ऐप्स के जरिए वॉल्यूम बटन को म्यूजिक कंट्रोल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें इनमें से सभी फीचर्स हर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। कई सुविधाएं फोन के ब्रांड, मॉडल, एंड्रॉयड वर्जन और सॉफ्टवेयर इंटरफेस पर निर्भर करती हैं। इसलिए अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर उपलब्ध विकल्पों को जरूर जांचें।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Smartphone privacy settings screen showing location permissions for apps on Android and iPhone devices.
क्या ऐप्स ट्रैक कर रहे हैं आपकी लोकेशन? ऐसे करें बंद, बैटरी और प्राइवेसी दोनों रहेंगी सुरक्षित

आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन कई मोबाइल ऐप्स ऐसे भी हैं जो आपकी जानकारी के बिना बैकग्राउंड में लगातार आपकी लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं। इससे न केवल आपकी निजी जानकारी कंपनियों तक पहुंचती है, बल्कि फोन की बैटरी और मोबाइल डेटा की खपत भी बढ़ जाती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सेटिंग्स की मदद से आप अपनी प्राइवेसी पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं। ऐप्स को लोकेशन की जरूरत क्यों पड़ती है? कुछ ऐप्स के लिए लोकेशन एक्सेस वास्तव में जरूरी होती है। उदाहरण के लिए— मैप्स ऐप्स को रास्ता बताने के लिए कैब बुकिंग ऐप्स को पिकअप लोकेशन जानने के लिए मौसम से जुड़े ऐप्स को स्थानीय जानकारी देने के लिए लेकिन कई सोशल मीडिया, शॉपिंग और विज्ञापन आधारित ऐप्स भी आपकी लोकेशन डेटा एकत्र करते हैं। इस जानकारी का उपयोग आपकी पसंद, यात्रा की आदतों और खरीदारी के व्यवहार को समझने के लिए किया जाता है, ताकि आपको टारगेटेड विज्ञापन दिखाए जा सकें। एंड्रॉयड फोन में ऐसे बंद करें लोकेशन ट्रैकिंग अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें— Settings खोलें। Location सेक्शन में जाएं। App Location Permissions पर टैप करें। देखें कौन-कौन से ऐप्स लोकेशन एक्सेस कर रहे हैं। जिन ऐप्स को हमेशा लोकेशन की जरूरत नहीं है, उन्हें "Only While Using the App" पर सेट करें या परमिशन पूरी तरह बंद कर दें। इसके अलावा Privacy Dashboard के जरिए आप यह भी देख सकते हैं कि हाल ही में किन ऐप्स ने आपकी लोकेशन एक्सेस की है। iPhone यूजर्स इन सेटिंग्स पर दें ध्यान iPhone उपयोगकर्ता इन स्टेप्स को अपनाएं— Settings में जाएं। Privacy & Security विकल्प खोलें। Location Services पर टैप करें। ऐप्स की सूची में जाकर देखें किस ऐप को कौन-सी परमिशन मिली हुई है। "Always" की जगह "While Using the App" या "Never" का विकल्प चुनें। Apple एक अतिरिक्त फीचर "Precise Location" भी देता है। इसे बंद करने पर ऐप्स को आपकी सटीक लोकेशन की बजाय केवल अनुमानित क्षेत्र की जानकारी मिलती है। समय-समय पर परमिशन की जांच करना जरूरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नई ऐप इंस्टॉल करने या फोन अपडेट के बाद लोकेशन परमिशन की समीक्षा जरूर करनी चाहिए। अगर कोई साधारण गेम, टॉर्च ऐप या शॉपिंग ऐप बार-बार लोकेशन मांग रहा है, तो यह समझना जरूरी है कि उसे वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं। अक्सर यूजर्स जल्दबाजी में सभी परमिशन स्वीकार कर लेते हैं और बाद में उन्हें भूल जाते हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से सेटिंग्स की जांच करना डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सिर्फ प्राइवेसी नहीं, बैटरी भी बचेगी लोकेशन ट्रैकिंग को सीमित करने का फायदा केवल आपकी प्राइवेसी तक सीमित नहीं है। बैकग्राउंड में चलने वाली लोकेशन सर्विसेज कम होंगी। बैटरी की खपत घटेगी। मोबाइल डेटा की बचत होगी। फोन की परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहेगी। अगर आप चाहते हैं कि आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहे और स्मार्टफोन की बैटरी लंबे समय तक चले, तो आज ही अपनी लोकेशन सेटिंग्स की जांच करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Smartphone user checking mobile data usage settings to save daily internet consumption and battery life.
मोबाइल डेटा जल्दी खत्म हो जाता है? इन आसान तरीकों से बचाएं रोज का इंटरनेट

आज के समय में Smartphone और मोबाइल इंटरनेट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन कई यूजर्स की शिकायत रहती है कि उनका रोज का डेटा बहुत जल्दी खत्म हो जाता है, जबकि वे ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करते। असल में स्मार्टफोन में कई ऐसी सेटिंग्स और ऐप्स होती हैं, जो बैकग्राउंड में लगातार इंटरनेट खर्च करती रहती हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान बदलाव करके आप बिना महंगा नया प्लान लिए अपने मोबाइल डेटा की काफी बचत कर सकते हैं। बैकग्राउंड ऐप्स चुपचाप खत्म करती हैं डेटा फोन में कई ऐप्स लगातार इंटरनेट इस्तेमाल करती रहती हैं, चाहे आप उन्हें इस्तेमाल कर रहे हों या नहीं। इसमें सोशल मीडिया ऐप्स, क्लाउड बैकअप, लोकेशन सर्विस और सिंकिंग फीचर्स शामिल हैं। अगर डेटा बचाना चाहते हैं, तो: जरूरत न होने पर मोबाइल डेटा बंद रखें बैकग्राउंड डेटा लिमिट करें रात में सोते समय इंटरनेट ऑफ करने की आदत डालें यह छोटी आदतें रोज के डेटा खर्च को काफी कम कर सकती हैं। Data Saver मोड जरूर करें ऑन Android और iOS दोनों में डेटा बचाने के लिए खास फीचर दिया जाता है। एंड्रॉयड यूजर्स सेटिंग्स में जाकर “Data Saver” मोड ऑन कर सकते हैं। इससे ऐप्स का बैकग्राउंड इंटरनेट इस्तेमाल सीमित हो जाता है और डेटा की बचत होती है। इसके अलावा यह भी जांच लें कि फोन का हॉटस्पॉट गलती से ऑन तो नहीं है। कई बार यही वजह डेटा तेजी से खत्म होने की होती है। WhatsApp और ऐप अपडेट्स पर रखें नजर WhatsApp जैसे ऐप्स फोटो और वीडियो ऑटोमैटिक डाउनलोड करते रहते हैं। इससे काफी डेटा खर्च होता है। WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर: Media Auto Download को सिर्फ Wi-Fi पर सेट करें HD फोटो/वीडियो डाउनलोड सीमित रखें साथ ही Google Google Play Store और Apple App Store में ऑटो अपडेट को भी Wi-Fi तक सीमित करना बेहतर रहता है। Wi-Fi इस्तेमाल करें, लेकिन सावधानी जरूरी जहां भरोसेमंद Wi-Fi उपलब्ध हो, वहां मोबाइल डेटा की बजाय Wi-Fi इस्तेमाल करना समझदारी हो सकती है। इससे डेटा की अच्छी बचत होती है। हालांकि साइबर एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सार्वजनिक और असुरक्षित Wi-Fi नेटवर्क इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि इससे डेटा चोरी और डिजिटल फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। छोटी आदतें करेंगी बड़ा फर्क कुछ छोटी चीजें भी डेटा बचाने में काफी मदद कर सकती हैं: वीडियो ऑटो-प्ले बंद रखें जरूरत के वीडियो Wi-Fi पर डाउनलोड करें इस्तेमाल के बाद ब्राउजर टैब बंद करें हाई क्वालिटी स्ट्रीमिंग कम करें क्लाउड बैकअप का समय तय करें विशेषज्ञों का कहना है कि नया महंगा प्लान लेने से पहले फोन की सेटिंग्स जरूर चेक करनी चाहिए। कई बार समाधान आपके स्मार्टफोन में ही छिपा होता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
mobile data issue
कॉल आते ही बंद हो जाता है मोबाइल इंटरनेट? इन आसान सेटिंग्स से तुरंत दूर होगी आपकी परेशानी

नई दिल्ली, एजेंसियां । स्मार्टफोन के इस दौर में जहां हम 5G और 4G जैसी हाई-स्पीड इंटरनेट तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, वहीं कई बार फोन कॉल आते ही डेटा कनेक्शन कट जाने की समस्या सामने आती है। यह स्थिति तब अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है जब उपयोगकर्ता कॉल पर रहते हुए किसी महत्वपूर्ण फाइल को डाउनलोड कर रहा हो या किसी को भेजना चाहता हो। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का मुख्य कारण फोन में 'VoLTE' (Voice over LTE) फीचर का सक्रिय न होना है। अमर उजाला की टेक डेस्क रिपोर्ट के अनुसार, मात्र 3 प्रमुख सेटिंग्स में बदलाव कर इस तकनीकी खराबी को स्थायी रूप से ठीक किया जा सकता है।   कॉल के दौरान डेटा कटने का तकनीकी कारण पुराने मोबाइल नेटवर्क जैसे 2G और 3G में वॉयस कॉल और डेटा का एक साथ चलना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। जब आपके फोन में VoLTE सेटिंग बंद होती है, तो कॉल आते ही डिवाइस का नेटवर्क 4G से सीधे 2G या 3G पर डाउनग्रेड हो जाता है, जिससे इंटरनेट कनेक्शन तुरंत टूट जाता है। आधुनिक तकनीक में वॉयस कॉल को डेटा पैकेट के रूप में भेजा जाता है, जिसके लिए VoLTE का ऑन रहना अनिवार्य है। यदि आपका नेटवर्क मोड 'Auto' पर नहीं है, तो भी फोन कॉल और डेटा के बीच तालमेल नहीं बिठा पाता।   VoLTE सेटिंग्स और नेटवर्क मोड में सुधार इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले स्मार्टफोन की 'Settings' में जाकर 'Mobile Network' या 'SIM Card' विकल्प का चयन करें। यहां अपनी सक्रिय सिम पर क्लिक करने के बाद आपको 'VoLTE' या '4G Calling' का विकल्प दिखाई देगा, जिसे तुरंत चालू (On) कर दें। इसके बाद 'Preferred Network Type' की जांच करें और सुनिश्चित करें कि यह 4G/3G/2G (Auto) या 5G/4G/3G/2G (Auto) मोड पर ही सेट हो। इन बदलावों के बाद कॉल के दौरान भी आपका फोन हाई-स्पीड नेटवर्क पर बना रहेगा।   डुआल सिम और नेटवर्क रीसेट के अन्य विकल्प जो लोग डुआल सिम का उपयोग करते हैं, उनके लिए सेटिंग्स में 'Data during calls' या 'Switch data connection during calls' का विशेष विकल्प होता है। इसे ऑन करने से यदि पहली सिम पर कॉल आती है, तो डिवाइस स्वचालित रूप से दूसरी सिम के इंटरनेट का उपयोग करने लगता है। इसके अतिरिक्त, यदि समस्या फिर भी बनी रहे, तो 'APN' (Access Point Name) सेटिंग्स को 'Reset to Default' करना चाहिए। अंतिम विकल्प के तौर पर 'Network Settings Reset' का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि इससे वाई-फाई और ब्लूटूथ के पुराने कनेक्शन भी हट जाते हैं।   सिम अपग्रेड और सिग्नल स्ट्रेंथ का महत्व कई मामलों में समस्या फोन की सेटिंग्स में नहीं बल्कि पुराने सिम कार्ड में होती है। पुराने सिम कार्ड अक्सर नई VoLTE या 5G तकनीक को पूरी तरह सपोर्ट नहीं करते, ऐसी स्थिति में नजदीकी स्टोर से सिम अपग्रेड कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कमजोर सिग्नल वाले क्षेत्रों में फोन स्वचालित रूप से डेटा के बजाय कॉल को प्राथमिकता देता है, जिससे इंटरनेट बाधित हो सकता है। इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियों को अपनाकर उपयोगकर्ता एक सहज और बिना किसी बाधा के इंटरनेट अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

Unknown अप्रैल 11, 2026 0
Smartphone screen showing green privacy indicator dot near camera and microphone usage.
फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला हरा डॉट क्या बताता है? जानिए आपकी प्राइवेसी से जुड़ा सच

आज के स्मार्टफोन में यूजर की सुरक्षा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कई खास फीचर्स दिए गए हैं। इन्हीं में से एक है स्क्रीन के ऊपर दिखने वाला छोटा सा हरा डॉट, जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका मतलब बेहद महत्वपूर्ण होता है। हरा डॉट क्या संकेत देता है? जब भी आपके फोन की स्क्रीन के ऊपर हरे रंग का डॉट दिखाई देता है, तो इसका मतलब होता है कि आपका कैमरा एक्टिव है। यानी कोई ऐप उस समय आपके कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। यह फीचर Android और iOS दोनों में यूजर की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए दिया गया है, ताकि बिना जानकारी के कैमरा इस्तेमाल न हो सके। माइक्रोफोन के लिए क्या होता है? कुछ स्मार्टफोन्स में माइक्रोफोन के उपयोग के लिए अलग संकेत मिलता है। खासकर iPhone में अगर सिर्फ माइक्रोफोन चालू है, तो ऑरेंज डॉट दिखाई देता है। वहीं हरा डॉट कैमरा या कैमरा+माइक्रोफोन दोनों के एक्टिव होने का संकेत देता है। कब हो जाना चाहिए सावधान? अगर आप कैमरा इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, फिर भी हरा डॉट दिख रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसका मतलब है कि कोई ऐप बैकग्राउंड में आपके कैमरे को एक्सेस कर रहा है। ऐसी स्थिति में तुरंत: हाल ही में इस्तेमाल किए गए ऐप्स चेक करें कैमरा परमिशन देखें संदिग्ध ऐप्स को हटाएं या उनकी एक्सेस बंद करें प्राइवेसी सुरक्षित कैसे रखें? Settings में जाकर Camera और Microphone permissions को कंट्रोल करें केवल भरोसेमंद ऐप्स को ही एक्सेस दें समय-समय पर ऐप परमिशन की समीक्षा करते रहें फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला हरा डॉट एक छोटा संकेत जरूर है, लेकिन यह आपकी डिजिटल सुरक्षा का बड़ा हिस्सा है। इसे नजरअंदाज करना आपकी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0